राजस्थान के छबड़ा में 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' और 'ओशो आशीष ध्यान योग केंद्र' के संचालक स्वामी ध्यान गगन और एस. एल. नागर ने 'हरियालो राजस्थान' अभियान के तहत पेड़ लगाने की अपील की है। उनका नारा है: "सत्यमेव जयते की सुगंध फैलाएँ, हरियालो राजस्थान बनाएँ; पेड़-पौधे हम सब लगाएँ, मरुधरा को स्वर्ग बनाएँ!" इसे सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि संस्कृति और अस्तित्व को बचाने का महायज्ञ बताया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा 'एक पेड़ मां के नाम' की अपील का भी उल्लेख करते हुए कहा कि केवल फोटो के लिए नहीं, बल्कि बच्चों की तरह पेड़ों का पालन-पोषण कर धरती माता का कर्ज चुकाया जाए। अपील में कहा गया है कि पेड़-पौधे जीवन का आधार हैं, जो प्राणवायु और मरुभूमि को शीतलता देते हैं। यदि आज ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को केवल बंजर धरती और भयंकर गर्मी ही मिलेगी। पर्यावरण संतुलन, वर्षा की कमी और गर्मी की रोकथाम के लिए घने जंगल और पेड़-पौधे ही एकमात्र उपाय हैं। यह बादलों को आकर्षित करते हैं और भूजल स्तर बढ़ाते हैं। खेजड़ी और रोहिड़ा जैसे राज्य वृक्षों का संरक्षण आवश्यक है, क्योंकि उन्होंने अकाल के समय भी जनजीवन को पाला है। इसके अलावा, हरे-भरे पेड़ मोर और चिंकारा जैसे अनगिनत जीवों का आश्रय भी हैं, जिनके नष्ट होने से उनका अस्तित्व खतरे में है। नागर ने नागरिकों से संवेदनशील बनने और हर विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसके बड़े होने तक उसकी जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया। उन्होंने हरे पेड़ों को काटने से खुद बचने और दूसरों को भी रोकने की बात कही, बिश्नोई समाज के 363 लोगों के बलिदान का स्मरण कराते हुए। सामूहिक भागीदारी के तहत पार्कों, सड़कों के किनारों और खाली जमीनों पर सघन वृक्षारोपण करने की सलाह दी गई है। केंद्र ने यह संदेश भी दिया कि पेड़ काटना अपनी ही साँसों की डोर को काटने जैसा है। अंत में, 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' ने जन-जन तक अपने आह्वान को पहुँचाने और राजस्थान की पावन धरा को फिर से हरा-भरा और खुशहाल बनाने का संकल्प लेने की अपील की।
राजस्थान के छबड़ा में 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' और 'ओशो आशीष ध्यान योग केंद्र' के संचालक स्वामी ध्यान गगन और एस. एल. नागर ने 'हरियालो राजस्थान' अभियान के तहत पेड़ लगाने की अपील की है। उनका नारा है: "सत्यमेव जयते की सुगंध फैलाएँ, हरियालो राजस्थान बनाएँ; पेड़-पौधे हम सब लगाएँ, मरुधरा को स्वर्ग बनाएँ!" इसे सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि संस्कृति और अस्तित्व को बचाने का महायज्ञ बताया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा 'एक पेड़ मां के नाम' की अपील का भी उल्लेख
करते हुए कहा कि केवल फोटो के लिए नहीं, बल्कि बच्चों की तरह पेड़ों का पालन-पोषण कर धरती माता का कर्ज चुकाया जाए। अपील में कहा गया है कि पेड़-पौधे जीवन का आधार हैं, जो प्राणवायु और मरुभूमि को शीतलता देते हैं। यदि आज ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को केवल बंजर धरती और भयंकर गर्मी ही मिलेगी। पर्यावरण संतुलन, वर्षा की कमी और गर्मी की रोकथाम के लिए घने जंगल और पेड़-पौधे ही एकमात्र उपाय हैं। यह बादलों को आकर्षित करते हैं और भूजल
स्तर बढ़ाते हैं। खेजड़ी और रोहिड़ा जैसे राज्य वृक्षों का संरक्षण आवश्यक है, क्योंकि उन्होंने अकाल के समय भी जनजीवन को पाला है। इसके अलावा, हरे-भरे पेड़ मोर और चिंकारा जैसे अनगिनत जीवों का आश्रय भी हैं, जिनके नष्ट होने से उनका अस्तित्व खतरे में है। नागर ने नागरिकों से संवेदनशील बनने और हर विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसके बड़े होने तक उसकी जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया। उन्होंने हरे पेड़ों को काटने से खुद बचने और दूसरों को भी रोकने की
बात कही, बिश्नोई समाज के 363 लोगों के बलिदान का स्मरण कराते हुए। सामूहिक भागीदारी के तहत पार्कों, सड़कों के किनारों और खाली जमीनों पर सघन वृक्षारोपण करने की सलाह दी गई है। केंद्र ने यह संदेश भी दिया कि पेड़ काटना अपनी ही साँसों की डोर को काटने जैसा है। अंत में, 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' ने जन-जन तक अपने आह्वान को पहुँचाने और राजस्थान की पावन धरा को फिर से हरा-भरा और खुशहाल बनाने का संकल्प लेने की अपील की।
- अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र" का नारा। "सत्यमेव जयते की सुगंध फैलाएँ, हरियालो राजस्थान बनाएँ।। "अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र" का नारा: "सत्यमेव जयते की सुगंध फैलाएँ, हरियालो राजस्थान बनाएँ; पेड़-पौधे हम सब लगाएँ,मरुधरा को स्वर्ग बनाएँ!" हरियालो राजस्थान: धरा का शृंगार, हमारा संकल्प। छबड़ा:अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र,अमीरपुर खेड़ी एवं ओशो आशीष ध्यान योग केंद्र,भुवाखेड़ी से संचालक स्वामी ध्यान गगन,एस. एल.नागर की अपील राजस्थान की वीर भूमि न केवल अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जानी जाती है, बल्कि यहाँ के लोगों का प्रकृति के प्रति प्रेम भी सदियों पुराना है।आज के आधुनिक युग में जहाँ कंक्रीट के जंगल बढ़ते जा रहे हैं, वहाँ "हरियालो राजस्थान" केवल एक अभियान नहीं,बल्कि हमारी संस्कृति और अस्तित्व को बचाने का एक महायज्ञ भी है।हमारे प्रधान मंत्री जी और हमारे धर्मप्रिय यशस्वी मुख्यमंत्री जी ने भी एक पेड़ मां के नाम की अपील की है,केवल फोटो के लिए पेड़ नही लगावें उसे बच्चे की तरह पाल-पोश बड़ा कर धरती माता को सोंपे ओर अपना कर्ज चुकावे।भुवाखेड़ी ग्राम स्थित खाटूश्याम बाबा की गोशाला की डूंगरी पर परिवार सहित 21 से 24 जून 2026 के 51 कुण्डीय श्री विष्णु महा यज्ञ में पदार्पण कर अपने साथ एक पेड़ और झाली लेकर आवे ओर अपनी स्मृति अक्षुण बनावे।विधित हो पेड़-पौधे हमारे जीवन का आधार हैं। वे न केवल हमें प्राणवायु (ऑक्सीजन) देते हैं,बल्कि तपती हुई मरुभूमि को शीतलता भी प्रदान करते हैं। यदि हम आज नहीं चेते,तो आने वाली पीढ़ियों को केवल बंजर धरती और भयंकर गर्मी ही विरासत में मिलेगी।हमें पेड़ क्यों लगाने चाहिए और उन्हें क्यों बचाना चाहिए? *पर्यावरण का संतुलन*: राजस्थान में वर्षा की कमी को दूर करने ओर बढ़ती गर्मी की रोकथाम का एकमात्र जरिया घने जंगल और पेड़-पौधे हैं।ये बादलों को आकर्षित करते हैं और भूजल स्तर को बढ़ाते हैं।हमें धूप और गर्मी से बचाते है, *खेजड़ी और रोहिड़ा का संरक्षण*: हमारे राज्य वृक्ष 'खेजड़ी' ने सदियों से अकाल के समय भी यहाँ के जनजीवन को पाला है।ऐसे अमूल्य पेड़ों को कटने से बचाना हमारा परम कर्तव्य है। *जीव-जंतुओं का आश्रय*: हरे-भरे पेड़ हमारे राष्ट्रीय पक्षी मोर और राज्य पशु चिंकारा जैसे अनगिनत जीवों का घर हैं।पेड़ों के नष्ट होने से इनका अस्तित्व भी खतरे में है। *एक संवेदनशील नागरिक के रूप में हमारा कर्तव्य:* "एक पौधा, एक जीवन": अपने जीवन के हर विशेष अवसर (जैसे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ),पुण्यतिथि आदि पर भी कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएँ और केवल लगाएँ ही नहीं, उसके बड़े होने तक उसकी जिम्मेदारी भी लें। *कुल्हाड़ी पर रोक*: हरे पेड़ों को काटने से खुद भी बचें और दूसरों को भी रोकें। याद रखें, बिश्नोई समाज के 363 लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, हमें उसी विरासत को आगे बढ़ाना है। *सामूहिक भागीदारी*: अपने आस-पास के पार्कों,सड़कों के किनारों और खाली जमीनों पर सघन वृक्षारोपण करें। *विशेष संदेश:* पेड़ काटना अपनी ही सांसों की डोर को काटने जैसा है।आइए, 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' के इस आह्वान को जन-जन तक पहुँचाएँ। आज ही संकल्प लें कि हम राजस्थान की इस पावन धरा को फिर से हरा-भरा और खुशहाल बनाएँगे।हम सब का एक ही नारा,पेड़-पौधे लगावें जग सारा, पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ!3
- बारां जिले के छीपाबड़ौद स्थित स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाएगा।4
- झालावाड़ जिले के खानपुर क्षेत्र में कैथूनी पेट्रोल पंप के समीप एक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गहरे गड्ढे में जा गिरी। इस हादसे के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर पुलिस और आपातकालीन सहायता दल घटनास्थल पर पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दुर्घटना में वाहन क्षतिग्रस्त हुआ है। स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्य में सहयोग किया। पुलिस द्वारा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।2
- मध्य प्रदेश के गुना स्थित सामान्य वन मंडल में वर्ष 2020 की विवादित तालाब और चेकडैम स्वीकृतियों का मामला अब सिर्फ निर्माण कार्यों तक सीमित न रहकर वन विभाग की पारदर्शिता, विभागीय जवाबदेही और सूचना के अधिकार (RTI) कानून के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन स्वीकृतियों पर अधिकारियों ने आपत्तियां दर्ज कीं और जिनके खिलाफ शिकायत के बाद विभागीय जांच शुरू होने के संकेत मिले, उन्हीं मामलों में जब RTI के तहत आरोप पत्रों की प्रतियां मांगी गईं तो विभाग ने यह कहकर जवाब देने से इनकार कर दिया कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध उपवनमंडल कार्यालय में कोई विभागीय जांच नहीं चल रही है। इससे यह मामला और भी पेचीदा हो गया है। वर्ष 2020 में कई तालाब और चेकडैम प्रस्तावों पर वन अधिकारियों ने अतिक्रमण, वन भूमि प्रभावित होने और वृक्षों को नुकसान जैसी आपत्तियां उठाई थीं। दस्तावेज़ों के अनुसार, कई प्रस्तावों पर गंभीर टिप्पणियां की गई थीं, लेकिन बाद में उन्हीं कार्यों को मंजूरी मिल गई। कटोरिया आदिवासी बस्ती, मुहालपुर, बीलखेड़ा, हिंगराजखेड़ा, जटाखेड़ा, रघोगढ़ और नागा बाबा पाटई जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रस्ताव बाद में विवाद का केंद्र बने। 16 जून 2023 को इस संबंध में एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप था कि अधिकारियों की आपत्तियों को महत्व नहीं दिया गया। शिकायत में तत्कालीन मानचित्रकार शाखा से जुड़े नवल किशोर सेन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे। इसके बाद विभागीय स्तर पर पत्राचार और जांच संबंधी गतिविधियों के संकेत भी सामने आए थे। वर्ष 2025 के दस्तावेज़ों में जांच प्रक्रिया से जुड़े संकेत दिखाई दिए और विभागीय सूत्रों के अनुसार मामला जांच के लिए आगे बढ़ा, लेकिन उसके बाद न तो रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, न निष्कर्ष सामने आया, न जिम्मेदारी तय हुई और न ही विभाग ने जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की। जब RTI के माध्यम से विभागीय जांच में दाखिल आरोप पत्रों और संबंधित अभिलेखों की प्रतियां मांगी गईं, तो विभाग ने स्पष्ट जानकारी देने के बजाय केवल यह कहा कि विभागीय जांच नहीं चल रही है। इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या मांगी गई सूचना और दिए गए जवाब का विषय अलग-अलग था, यदि आरोप पत्र मौजूद नहीं थे तो स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताया गया, और यदि रिकॉर्ड किसी अन्य कार्यालय में था तो आवेदन स्थानांतरित क्यों नहीं किया गया। अब जनता यह पूछ रही है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ था तो जांच की आवश्यकता क्यों पड़ी, यदि जांच हुई तो उसका परिणाम कहां है, और यदि आरोप पत्रों की मांग की गई थी तो उनका जवाब क्यों नहीं दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि "क्या तालाब स्वीकृति विवाद की पूरी सच्चाई कभी सामने आएगी, या यह मामला भी फाइलों के बोझ तले दबकर रह जाएगा?" यह प्रश्न अब केवल एक प्रकरण का नहीं, बल्कि वन विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी बन चुका है।1
- गुना कलेक्टर श्री किशोर कुमार ने 'स्कूल चले हम अभियान' के द्वितीय चरण के तहत पुरानी छावनी स्थित पीएमश्री शासकीय माध्यमिक विद्यालय का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को खूब बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए अभी से मेहनत शुरू करने के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर ने छात्रों से योग, ध्यान और व्यायाम को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने की सलाह दी, ताकि वे स्वस्थ रहकर अपने परिवार, समाज और देश का भला कर सकें। उन्होंने नई जगहों पर घूमने और दुनिया को समझने के महत्व पर भी जोर दिया, जिससे सोच का दायरा बढ़ता है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। विद्यालय पहुंचने पर कलेक्टर श्री किशोर कुमार का विद्यार्थियों ने स्वागत गीत गाकर अभिनंदन किया। कलेक्टर ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके भविष्य के सपनों पर चर्चा की और उन्हें बताया कि यह उम्र बड़े लक्ष्य तय करने की है। कलेक्टर ने कहा कि यदि विद्यार्थी अभी से अनुशासन, मेहनत और सकारात्मक आदतों को अपनाते हैं, तो वे जीवन में किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।2
- राजस्थान के छबड़ा में 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' और 'ओशो आशीष ध्यान योग केंद्र' के संचालक स्वामी ध्यान गगन और एस. एल. नागर ने 'हरियालो राजस्थान' अभियान के तहत पेड़ लगाने की अपील की है। उनका नारा है: "सत्यमेव जयते की सुगंध फैलाएँ, हरियालो राजस्थान बनाएँ; पेड़-पौधे हम सब लगाएँ, मरुधरा को स्वर्ग बनाएँ!" इसे सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि संस्कृति और अस्तित्व को बचाने का महायज्ञ बताया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा 'एक पेड़ मां के नाम' की अपील का भी उल्लेख करते हुए कहा कि केवल फोटो के लिए नहीं, बल्कि बच्चों की तरह पेड़ों का पालन-पोषण कर धरती माता का कर्ज चुकाया जाए। अपील में कहा गया है कि पेड़-पौधे जीवन का आधार हैं, जो प्राणवायु और मरुभूमि को शीतलता देते हैं। यदि आज ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को केवल बंजर धरती और भयंकर गर्मी ही मिलेगी। पर्यावरण संतुलन, वर्षा की कमी और गर्मी की रोकथाम के लिए घने जंगल और पेड़-पौधे ही एकमात्र उपाय हैं। यह बादलों को आकर्षित करते हैं और भूजल स्तर बढ़ाते हैं। खेजड़ी और रोहिड़ा जैसे राज्य वृक्षों का संरक्षण आवश्यक है, क्योंकि उन्होंने अकाल के समय भी जनजीवन को पाला है। इसके अलावा, हरे-भरे पेड़ मोर और चिंकारा जैसे अनगिनत जीवों का आश्रय भी हैं, जिनके नष्ट होने से उनका अस्तित्व खतरे में है। नागर ने नागरिकों से संवेदनशील बनने और हर विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसके बड़े होने तक उसकी जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया। उन्होंने हरे पेड़ों को काटने से खुद बचने और दूसरों को भी रोकने की बात कही, बिश्नोई समाज के 363 लोगों के बलिदान का स्मरण कराते हुए। सामूहिक भागीदारी के तहत पार्कों, सड़कों के किनारों और खाली जमीनों पर सघन वृक्षारोपण करने की सलाह दी गई है। केंद्र ने यह संदेश भी दिया कि पेड़ काटना अपनी ही साँसों की डोर को काटने जैसा है। अंत में, 'अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र' ने जन-जन तक अपने आह्वान को पहुँचाने और राजस्थान की पावन धरा को फिर से हरा-भरा और खुशहाल बनाने का संकल्प लेने की अपील की।4
- झालावाड़ जिले के खानपुर क्षेत्र में कैथूनी पेट्रोल पंप के पास एक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक गहरे गड्ढे में जा गिरी। इस दुर्घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और मामले की जाँच शुरू की। हादसे में कार क्षतिग्रस्त हो गई है, जबकि स्थानीय लोगों ने राहत कार्य में सक्रिय सहयोग दिया।1