मध्य प्रदेश के गुना स्थित सामान्य वन मंडल में वर्ष 2020 की विवादित तालाब और चेकडैम स्वीकृतियों का मामला अब सिर्फ निर्माण कार्यों तक सीमित न रहकर वन विभाग की पारदर्शिता, विभागीय जवाबदेही और सूचना के अधिकार (RTI) कानून के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन स्वीकृतियों पर अधिकारियों ने आपत्तियां दर्ज कीं और जिनके खिलाफ शिकायत के बाद विभागीय जांच शुरू होने के संकेत मिले, उन्हीं मामलों में जब RTI के तहत आरोप पत्रों की प्रतियां मांगी गईं तो विभाग ने यह कहकर जवाब देने से इनकार कर दिया कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध उपवनमंडल कार्यालय में कोई विभागीय जांच नहीं चल रही है। इससे यह मामला और भी पेचीदा हो गया है। वर्ष 2020 में कई तालाब और चेकडैम प्रस्तावों पर वन अधिकारियों ने अतिक्रमण, वन भूमि प्रभावित होने और वृक्षों को नुकसान जैसी आपत्तियां उठाई थीं। दस्तावेज़ों के अनुसार, कई प्रस्तावों पर गंभीर टिप्पणियां की गई थीं, लेकिन बाद में उन्हीं कार्यों को मंजूरी मिल गई। कटोरिया आदिवासी बस्ती, मुहालपुर, बीलखेड़ा, हिंगराजखेड़ा, जटाखेड़ा, रघोगढ़ और नागा बाबा पाटई जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रस्ताव बाद में विवाद का केंद्र बने। 16 जून 2023 को इस संबंध में एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप था कि अधिकारियों की आपत्तियों को महत्व नहीं दिया गया। शिकायत में तत्कालीन मानचित्रकार शाखा से जुड़े नवल किशोर सेन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे। इसके बाद विभागीय स्तर पर पत्राचार और जांच संबंधी गतिविधियों के संकेत भी सामने आए थे। वर्ष 2025 के दस्तावेज़ों में जांच प्रक्रिया से जुड़े संकेत दिखाई दिए और विभागीय सूत्रों के अनुसार मामला जांच के लिए आगे बढ़ा, लेकिन उसके बाद न तो रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, न निष्कर्ष सामने आया, न जिम्मेदारी तय हुई और न ही विभाग ने जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की। जब RTI के माध्यम से विभागीय जांच में दाखिल आरोप पत्रों और संबंधित अभिलेखों की प्रतियां मांगी गईं, तो विभाग ने स्पष्ट जानकारी देने के बजाय केवल यह कहा कि विभागीय जांच नहीं चल रही है। इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या मांगी गई सूचना और दिए गए जवाब का विषय अलग-अलग था, यदि आरोप पत्र मौजूद नहीं थे तो स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताया गया, और यदि रिकॉर्ड किसी अन्य कार्यालय में था तो आवेदन स्थानांतरित क्यों नहीं किया गया। अब जनता यह पूछ रही है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ था तो जांच की आवश्यकता क्यों पड़ी, यदि जांच हुई तो उसका परिणाम कहां है, और यदि आरोप पत्रों की मांग की गई थी तो उनका जवाब क्यों नहीं दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि "क्या तालाब स्वीकृति विवाद की पूरी सच्चाई कभी सामने आएगी, या यह मामला भी फाइलों के बोझ तले दबकर रह जाएगा?" यह प्रश्न अब केवल एक प्रकरण का नहीं, बल्कि वन विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी बन चुका है।
मध्य प्रदेश के गुना स्थित सामान्य वन मंडल में वर्ष 2020 की विवादित तालाब और चेकडैम स्वीकृतियों का मामला अब सिर्फ निर्माण कार्यों तक सीमित न रहकर वन विभाग की पारदर्शिता, विभागीय जवाबदेही और सूचना के अधिकार (RTI) कानून के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन स्वीकृतियों पर अधिकारियों ने आपत्तियां दर्ज कीं और जिनके खिलाफ शिकायत के बाद विभागीय जांच शुरू होने के संकेत मिले, उन्हीं मामलों में जब RTI के तहत आरोप पत्रों की प्रतियां मांगी गईं तो विभाग ने यह कहकर जवाब देने से इनकार कर दिया कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध उपवनमंडल कार्यालय में कोई विभागीय जांच नहीं चल रही है। इससे यह मामला और भी पेचीदा हो गया है। वर्ष 2020 में कई तालाब और चेकडैम प्रस्तावों पर वन अधिकारियों ने अतिक्रमण, वन भूमि प्रभावित होने और वृक्षों को नुकसान जैसी आपत्तियां उठाई थीं। दस्तावेज़ों के अनुसार, कई प्रस्तावों पर गंभीर टिप्पणियां की गई थीं, लेकिन बाद में उन्हीं कार्यों को मंजूरी मिल गई। कटोरिया आदिवासी बस्ती, मुहालपुर, बीलखेड़ा, हिंगराजखेड़ा, जटाखेड़ा, रघोगढ़ और नागा बाबा पाटई जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रस्ताव बाद में विवाद का केंद्र बने। 16 जून 2023 को इस संबंध में एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप था कि अधिकारियों की आपत्तियों को महत्व नहीं दिया गया। शिकायत में तत्कालीन मानचित्रकार शाखा से जुड़े नवल किशोर सेन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे। इसके बाद विभागीय स्तर पर पत्राचार और जांच संबंधी गतिविधियों के संकेत भी सामने आए थे। वर्ष 2025 के दस्तावेज़ों में जांच प्रक्रिया से जुड़े संकेत दिखाई दिए और विभागीय सूत्रों के अनुसार मामला जांच के लिए आगे बढ़ा, लेकिन उसके बाद न तो रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, न निष्कर्ष सामने आया, न जिम्मेदारी तय हुई और न ही विभाग ने जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की। जब RTI के माध्यम से विभागीय जांच में दाखिल आरोप पत्रों और संबंधित अभिलेखों की प्रतियां मांगी गईं, तो विभाग ने स्पष्ट जानकारी देने के बजाय केवल यह कहा कि विभागीय जांच नहीं चल रही है। इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या मांगी गई सूचना और दिए गए जवाब का विषय अलग-अलग था, यदि आरोप पत्र मौजूद नहीं थे तो स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताया गया, और यदि रिकॉर्ड किसी अन्य कार्यालय में था तो आवेदन स्थानांतरित क्यों नहीं किया गया। अब जनता यह पूछ रही है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ था तो जांच की आवश्यकता क्यों पड़ी, यदि जांच हुई तो उसका परिणाम कहां है, और यदि आरोप पत्रों की मांग की गई थी तो उनका जवाब क्यों नहीं दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि "क्या तालाब स्वीकृति विवाद की पूरी सच्चाई कभी सामने आएगी, या यह मामला भी फाइलों के बोझ तले दबकर रह जाएगा?" यह प्रश्न अब केवल एक प्रकरण का नहीं, बल्कि वन विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी बन चुका है।
- मध्य प्रदेश के गुना स्थित सामान्य वन मंडल में वर्ष 2020 की विवादित तालाब और चेकडैम स्वीकृतियों का मामला अब सिर्फ निर्माण कार्यों तक सीमित न रहकर वन विभाग की पारदर्शिता, विभागीय जवाबदेही और सूचना के अधिकार (RTI) कानून के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन स्वीकृतियों पर अधिकारियों ने आपत्तियां दर्ज कीं और जिनके खिलाफ शिकायत के बाद विभागीय जांच शुरू होने के संकेत मिले, उन्हीं मामलों में जब RTI के तहत आरोप पत्रों की प्रतियां मांगी गईं तो विभाग ने यह कहकर जवाब देने से इनकार कर दिया कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध उपवनमंडल कार्यालय में कोई विभागीय जांच नहीं चल रही है। इससे यह मामला और भी पेचीदा हो गया है। वर्ष 2020 में कई तालाब और चेकडैम प्रस्तावों पर वन अधिकारियों ने अतिक्रमण, वन भूमि प्रभावित होने और वृक्षों को नुकसान जैसी आपत्तियां उठाई थीं। दस्तावेज़ों के अनुसार, कई प्रस्तावों पर गंभीर टिप्पणियां की गई थीं, लेकिन बाद में उन्हीं कार्यों को मंजूरी मिल गई। कटोरिया आदिवासी बस्ती, मुहालपुर, बीलखेड़ा, हिंगराजखेड़ा, जटाखेड़ा, रघोगढ़ और नागा बाबा पाटई जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रस्ताव बाद में विवाद का केंद्र बने। 16 जून 2023 को इस संबंध में एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप था कि अधिकारियों की आपत्तियों को महत्व नहीं दिया गया। शिकायत में तत्कालीन मानचित्रकार शाखा से जुड़े नवल किशोर सेन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे। इसके बाद विभागीय स्तर पर पत्राचार और जांच संबंधी गतिविधियों के संकेत भी सामने आए थे। वर्ष 2025 के दस्तावेज़ों में जांच प्रक्रिया से जुड़े संकेत दिखाई दिए और विभागीय सूत्रों के अनुसार मामला जांच के लिए आगे बढ़ा, लेकिन उसके बाद न तो रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, न निष्कर्ष सामने आया, न जिम्मेदारी तय हुई और न ही विभाग ने जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की। जब RTI के माध्यम से विभागीय जांच में दाखिल आरोप पत्रों और संबंधित अभिलेखों की प्रतियां मांगी गईं, तो विभाग ने स्पष्ट जानकारी देने के बजाय केवल यह कहा कि विभागीय जांच नहीं चल रही है। इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या मांगी गई सूचना और दिए गए जवाब का विषय अलग-अलग था, यदि आरोप पत्र मौजूद नहीं थे तो स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताया गया, और यदि रिकॉर्ड किसी अन्य कार्यालय में था तो आवेदन स्थानांतरित क्यों नहीं किया गया। अब जनता यह पूछ रही है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ था तो जांच की आवश्यकता क्यों पड़ी, यदि जांच हुई तो उसका परिणाम कहां है, और यदि आरोप पत्रों की मांग की गई थी तो उनका जवाब क्यों नहीं दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि "क्या तालाब स्वीकृति विवाद की पूरी सच्चाई कभी सामने आएगी, या यह मामला भी फाइलों के बोझ तले दबकर रह जाएगा?" यह प्रश्न अब केवल एक प्रकरण का नहीं, बल्कि वन विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी बन चुका है।1
- गुना कलेक्टर श्री किशोर कुमार ने 'स्कूल चले हम अभियान' के द्वितीय चरण के तहत पुरानी छावनी स्थित पीएमश्री शासकीय माध्यमिक विद्यालय का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को खूब बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए अभी से मेहनत शुरू करने के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर ने छात्रों से योग, ध्यान और व्यायाम को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने की सलाह दी, ताकि वे स्वस्थ रहकर अपने परिवार, समाज और देश का भला कर सकें। उन्होंने नई जगहों पर घूमने और दुनिया को समझने के महत्व पर भी जोर दिया, जिससे सोच का दायरा बढ़ता है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। विद्यालय पहुंचने पर कलेक्टर श्री किशोर कुमार का विद्यार्थियों ने स्वागत गीत गाकर अभिनंदन किया। कलेक्टर ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके भविष्य के सपनों पर चर्चा की और उन्हें बताया कि यह उम्र बड़े लक्ष्य तय करने की है। कलेक्टर ने कहा कि यदि विद्यार्थी अभी से अनुशासन, मेहनत और सकारात्मक आदतों को अपनाते हैं, तो वे जीवन में किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।2
- चांचौड़ा-बीनागंज क्षेत्र में आज एक बड़ा हादसा टल गया, जहाँ एक चलती मोटरसाइकिल में अचानक भीषण आग लग गई। घटना के समय बाइक पर एक ही परिवार के चार सदस्य, पति-पत्नी और उनके दो बच्चे सवार थे। आग भड़कते ही बाइक चला रहे युवक ने सूझबूझ दिखाते हुए गाड़ी रोक दी, जिससे परिवार ने समय रहते मोटरसाइकिल से कूदकर अपनी जान बचाई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, परिवार कहीं जा रहा था तभी अचानक इंजन के पास से लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरी मोटरसाइकिल धू-धू कर जलने लगी। राहगीरों और स्थानीय लोगों की मदद से जब तक आग पर काबू पाया जाता, तब तक मोटरसाइकिल पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। बीच सड़क पर हुई इस घटना से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है।1
- अशोकनगर शहर के देहात थाना क्षेत्र में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एक युवक 60 फीट ऊंचे बिजली के टॉवर पर चढ़ गया। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और करीब आधे घंटे की समझाइश के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया, जिससे एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। जानकारी के अनुसार, जेल के पीछे रहने वाला रामकृष्ण केवट (35) अपनी पत्नी के साथ घरेलू विवाद के चलते मानसिक तनाव में था। मंगलवार को वह अचानक पास स्थित बिजली के टॉवर पर चढ़ गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, युवक नशे की हालत में भी लग रहा था। युवक को टॉवर पर चढ़ा देखकर आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब युवक बिजली के तारों की ओर बढ़ने लगा। घटना की सूचना मिलते ही देहात थाने के प्रधान आरक्षक देवेंद्र खटीक और आरक्षक दिवेश बैरागी तत्काल मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने धैर्यपूर्वक युवक से बातचीत की और उसे नीचे उतरने के लिए मनाया। सुरक्षा के लिए नीचे लोगों को भी सतर्क रखा गया। करीब आधे घंटे तक चले प्रयासों के बाद युवक पुलिस की बात मानकर सुरक्षित नीचे उतर आया। इसके बाद पुलिस युवक को थाने ले गई, जहाँ उसे समझाया गया और उसके परिजनों को बुलाकर भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए परामर्श दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी मानसिक या पारिवारिक परेशानी में खतरनाक कदम उठाने के बजाय परिवार, मित्रों या संबंधित अधिकारियों से मदद लें।1
- बारां जिले के छीपाबड़ौद स्थित स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाएगा।4
- गुरुवार सुबह 11 बजे मिली जानकारी के अनुसार, जिला कलेक्टर बालमुकुंद असावा ने बीलखेड़ा डांग का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी और मां-बाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया, जहाँ साफ-सफाई, दवा उपलब्धता और पोषाहार वितरण व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद, कलेक्टर असावा ने सहरिया बंगले में ग्रामीणों से संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। ग्रामीणों ने पेयजल, सड़क निर्माण और सरकारी योजनाओं से संबंधित अपनी मांगें रखीं। कलेक्टर ने इन समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कोटरा से कुंडा तक बन रही पीएम जनमन सड़क का भी निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा की तथा समय पर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।1
- बाल बाल बचा परिवार चलती हुई बाइक में लगी आग. घटना इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर हो रही वायरल बाल बाल बचा परिवार चलती हुई बाइक में लगी आग1
- मध्य प्रदेश में रणथंबोर एक्सप्रेस ट्रेन से धुआँ निकलने की घटना सामने आई है। इस घटना के बाद ट्रेन में सवार यात्री घबरा गए और वे तुरंत ट्रेन से नीचे उतर गए। फिलहाल, इस घटना के संबंध में अधिक विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।1