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बाल बाल बचा परिवार चलती हुई बाइक में लगी आग. घटना इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर हो रही वायरल बाल बाल बचा परिवार चलती हुई बाइक में लगी आग
Shivkumar Jogi
बाल बाल बचा परिवार चलती हुई बाइक में लगी आग. घटना इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर हो रही वायरल बाल बाल बचा परिवार चलती हुई बाइक में लगी आग
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- बाल बाल बचा परिवार चलती हुई बाइक में लगी आग. घटना इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर हो रही वायरल बाल बाल बचा परिवार चलती हुई बाइक में लगी आग1
- चांचौड़ा-बीनागंज क्षेत्र में आज एक बड़ा हादसा टल गया, जहाँ एक चलती मोटरसाइकिल में अचानक भीषण आग लग गई। घटना के समय बाइक पर एक ही परिवार के चार सदस्य, पति-पत्नी और उनके दो बच्चे सवार थे। आग भड़कते ही बाइक चला रहे युवक ने सूझबूझ दिखाते हुए गाड़ी रोक दी, जिससे परिवार ने समय रहते मोटरसाइकिल से कूदकर अपनी जान बचाई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, परिवार कहीं जा रहा था तभी अचानक इंजन के पास से लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरी मोटरसाइकिल धू-धू कर जलने लगी। राहगीरों और स्थानीय लोगों की मदद से जब तक आग पर काबू पाया जाता, तब तक मोटरसाइकिल पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। बीच सड़क पर हुई इस घटना से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है।1
- मध्य प्रदेश के मैहर जिले से सामने आए एक कथित वायरल वीडियो में सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर लगाने के बाद हताश एक बुजुर्ग ने कैमरे के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए मार्मिक सवाल उठाया है: "साहब, अब किस अधिकारी के पास जाऊं, कौन मेरी सुनेगा?" बुजुर्ग की इस बेबसी भरी गुहार ने सोशल मीडिया पर तीव्र बहस छेड़ दी है, जिससे सरकारी व्यवस्था की कार्यशैली और उसकी प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वीडियो में बुजुर्ग की आवाज में बेबसी और चेहरे पर निराशा साफ दिखाई देती है, जो दर्शाता है कि वह लंबे समय से अपनी समस्या के समाधान के लिए दर-दर भटक रहा है लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिल पाई है। यह घटना केवल एक व्यक्ति की व्यक्तिगत परेशानी नहीं, बल्कि उन आम नागरिकों की दुर्दशा को उजागर करती है जिन्हें छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। प्रदेश और केंद्र सरकारें लगातार सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित शिकायत निवारण के दावे करती रही हैं, जिसके तहत सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल जैसी व्यवस्थाएं भी संचालित हैं। हालांकि, यदि जमीनी स्तर पर समस्याओं का समय पर समाधान नहीं होता और एक बुजुर्ग को अपनी बात सुनाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ता है, तो इन सभी दावों और व्यवस्थाओं की उपयोगिता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्नचिह्न लगता है। वायरल वीडियो पर सोशल मीडिया में लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जहाँ कई उपयोगकर्ताओं ने बुजुर्ग की पीड़ा को आम जनता की साझा वेदना बताया है और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसे मामले केवल व्यक्तिगत शिकायतें नहीं होते, बल्कि वे शासन-प्रशासन के लिए एक चेतावनी होते हैं कि यदि शिकायतों का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो जनता का सरकारी तंत्र पर भरोसा कमजोर हो सकता है। फिलहाल, वीडियो की सत्यता और बुजुर्ग की समस्या के संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न अवश्य खड़ा कर दिया है कि "जब एक बुजुर्ग नागरिक यह पूछने लगे कि उसकी सुनवाई कौन करेगा, तब आखिर जवाबदेही किसकी बनती है?"1
- अशोकनगर शहर के देहात थाना क्षेत्र में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एक युवक 60 फीट ऊंचे बिजली के टॉवर पर चढ़ गया। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और करीब आधे घंटे की समझाइश के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया, जिससे एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। जानकारी के अनुसार, जेल के पीछे रहने वाला रामकृष्ण केवट (35) अपनी पत्नी के साथ घरेलू विवाद के चलते मानसिक तनाव में था। मंगलवार को वह अचानक पास स्थित बिजली के टॉवर पर चढ़ गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, युवक नशे की हालत में भी लग रहा था। युवक को टॉवर पर चढ़ा देखकर आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब युवक बिजली के तारों की ओर बढ़ने लगा। घटना की सूचना मिलते ही देहात थाने के प्रधान आरक्षक देवेंद्र खटीक और आरक्षक दिवेश बैरागी तत्काल मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने धैर्यपूर्वक युवक से बातचीत की और उसे नीचे उतरने के लिए मनाया। सुरक्षा के लिए नीचे लोगों को भी सतर्क रखा गया। करीब आधे घंटे तक चले प्रयासों के बाद युवक पुलिस की बात मानकर सुरक्षित नीचे उतर आया। इसके बाद पुलिस युवक को थाने ले गई, जहाँ उसे समझाया गया और उसके परिजनों को बुलाकर भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए परामर्श दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी मानसिक या पारिवारिक परेशानी में खतरनाक कदम उठाने के बजाय परिवार, मित्रों या संबंधित अधिकारियों से मदद लें।1
- आज, 17 जून को, पूरे प्रदेश में महाराणा प्रताप जयंती को बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।1
- बारां जिले के छीपाबड़ौद स्थित स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाएगा।4
- बारां के छीपाबड़ौद में क्षेत्रीय विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने अपने आवास पर जनसुनवाई की, जहाँ उन्होंने बड़ी संख्या में पहुँचे आमजन की समस्याओं और माँगों को सुना। विधायक सिंघवी ने प्रत्येक फरियादी की बात धैर्यपूर्वक सुनी और संबंधित विभागों के अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आमजन की समस्याओं का समाधान उनकी प्राथमिकता है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। जनसुनवाई के दौरान जल, बिजली, सड़क, आवास, पेंशन, अतिक्रमण और खाद-बीज सहित विभिन्न विभागों से जुड़े कई मामले सामने आए। विधायक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी शिकायतों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाए और लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ तुरंत मिलना चाहिए। विधायक सिंघवी ने बताया कि जनसुनवाई का मुख्य उद्देश्य जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। उन्होंने घोषणा की कि हर सप्ताह जनसुनवाई आयोजित की जाएगी ताकि आमजन को लगातार राहत प्रदान की जा सके।2
- गुना शहर के इंडस्ट्रियल एरिया में मंगलवार देर रात प्लास्टिक पाइप निर्माण करने वाली हरीश रत्रा की एक फैक्ट्री में भीषण आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और फैक्ट्री परिसर में रखा प्लास्टिक का कच्चा माल, तैयार पाइप तथा अन्य सामग्री उसकी चपेट में आ गई। आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि दूर स्थित विंध्याचल कॉलोनी से भी धुएं के गुबार और ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं। इस अग्निकांड में प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग ₹70 से ₹80 लाख के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, यह इकाई कृषि और सिंचाई कार्यों में उपयोग होने वाले पाइप तैयार करती है, जहाँ बड़ी मात्रा में प्लास्टिक दाने, रॉ मटेरियल और तैयार माल का भंडारण किया जाता था। फैक्ट्री संचालक ने बताया कि मंगलवार रात करीब 8:30 बजे रोजाना की तरह कार्य समाप्त होने के बाद यूनिट बंद कर दी गई थी और उस समय परिसर में कोई असामान्य स्थिति नहीं थी। हालांकि, रात लगभग 11 बजे आसपास के लोगों ने फैक्ट्री से धुआं उठता देखा और तत्काल नगरपालिका तथा प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी। आग की गंभीरता को देखते हुए चार फायर ब्रिगेड वाहनों को मौके पर बुलाया गया। प्लास्टिक सामग्री अधिक होने के कारण आग बार-बार भड़क रही थी, जिससे राहत कार्य में भारी कठिनाई आ रही थी। फायर ब्रिगेड के सामने सबसे बड़ी चुनौती फैक्ट्री की मजबूत पक्की दीवारें थीं, क्योंकि आग अंदर धधक रही थी और बाहर से पानी पहुंचाना आसान नहीं था। स्थिति को देखते हुए, सबसे पहले फैक्ट्री के गेट का ताला तोड़कर टीम अंदर पहुंची। इसके बाद भी आग तक सीधी पहुंच न बन पाने के कारण दीवारों में कई स्थानों पर छेद कर पानी की बौछारें अंदर पहुंचाई गईं। आग बुझाने के लिए लगातार टैंकरों से पानी मंगवाया गया ताकि अभियान बिना रुके चलता रहे। नगरपालिका, फायर ब्रिगेड और अन्य कर्मचारियों ने पूरी रात मोर्चा संभाले रखा। नगरपालिका अध्यक्ष पति अरविंद गुप्ता सहित नगरपालिका का अमला मौके पर मौजूद रहकर राहत कार्य की निगरानी करता रहा। करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तड़के आग पर नियंत्रण पाया जा सका, लेकिन तब तक फैक्ट्री में रखा बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कच्चा माल, तैयार पाइप और अन्य सामग्री जलकर खाक हो चुकी थी। फिलहाल, आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है और नुकसान का अंतिम आकलन भी किया जा रहा है।1