सड़क की बदहाली बनी खतरा | नरसिंहपुर गाडरवारा–करेली से जबलपुर मार्ग पर सफर मुश्किल सड़क की बदहाली बनी खतरा | गाडरवारा–करेली से जबलपुर मार्ग पर सफर मुश्किल गाडरवारा–करेली से जबलपुर जाने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों बेहद खराब हालत में पहुंच चुका है। दादा महाराज से लेकर गोटेगांव तक सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे और उखड़ी हुई परतें साफ देखी जा सकती हैं, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग पर रोजाना सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं, लेकिन सड़क की जर्जर स्थिति के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता जानलेवा साबित हो सकता है। कई जगहों पर सड़क इतनी क्षतिग्रस्त है कि वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है या रास्ता बदलकर निकलना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क की मरम्मत लंबे समय से नहीं हुई है, जिससे स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। ग्रामीणों और राहगीरों ने संबंधित विभाग से जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है। 👉 जिम्मेदारों पर सवाल: क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बावजूद शासन-प्रशासन द्वारा इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई गई है। यदि जल्द सुधार कार्य शुरू नहीं किया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। 👉 प्रशासन से मांग: इस महत्वपूर्ण मार्ग की तत्काल मरम्मत करवाई जाए ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम यात्रा मिल सके।
सड़क की बदहाली बनी खतरा | नरसिंहपुर गाडरवारा–करेली से जबलपुर मार्ग पर सफर मुश्किल सड़क की बदहाली बनी खतरा | गाडरवारा–करेली से जबलपुर मार्ग पर सफर मुश्किल गाडरवारा–करेली से जबलपुर जाने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों बेहद खराब हालत में पहुंच चुका है। दादा महाराज से लेकर गोटेगांव तक सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे और उखड़ी हुई परतें साफ देखी जा सकती हैं, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग पर रोजाना सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं, लेकिन सड़क की जर्जर स्थिति के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता जानलेवा साबित हो सकता है। कई जगहों पर सड़क इतनी क्षतिग्रस्त
है कि वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है या रास्ता बदलकर निकलना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क की मरम्मत लंबे समय से नहीं हुई है, जिससे स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। ग्रामीणों और राहगीरों ने संबंधित विभाग से जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है। 👉 जिम्मेदारों पर सवाल: क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बावजूद शासन-प्रशासन द्वारा इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई गई है। यदि जल्द सुधार कार्य शुरू नहीं किया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। 👉 प्रशासन से मांग: इस महत्वपूर्ण मार्ग की तत्काल मरम्मत करवाई जाए ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम यात्रा मिल सके।
- Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"1
- सतीष विश्वकर्मा करेली करेली में एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना का शिकार होकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। सूचना मिलते ही करेली थाने में पदस्थ आरक्षक सचिन लोधी ने बिना समय गंवाए सक्रियता दिखाई। उन्होंने तुरंत 'डायल 100' सेवा की मदद ली और घायल व्यक्ति को सुरक्षित वाहन में बैठाकर तत्काल उपचार के लिए शासकीय अस्पताल पहुँचाया।1
- Post by कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली1
- ग्राम भड़री में गांव के पास अचानक लगी आग से मचा हडकंप, दमकल एवं ग्रामीणो कि मदद से आग पर पाया गया काबू2
- Post by Shrikant Dubay पत्रकार1
- डॉ. मोना कौरव ने गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र में NTPC राखड़ डंपरों की लापरवाही से हो रही लगातार दुर्घटनाओं को लेकर मृत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, महिला नेतृत्व, युवा कार्यकर्ता एवं मीडिया साथी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस हमेशा सड़क पर उतरकर संघर्ष करने के लिए तैयार है।2
- रेलवे हॉस्पिटल नरसिंहपुर में 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित नरसिंहपुर: भारत सरकार के 'टीबी मुक्त भारत' के संकल्प को साकार करने की दिशा में, आज 29 अप्रैल 2026 को रेलवे हॉस्पिटल नरसिंहपुर में एक विशेष जागरूकता एवं स्क्रीनिंग स्वास्थ्य कैंप का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान रेलवे चिकित्सक डॉ. आर. आर. कुर्रे ने टीबी (तपेदिक) के लक्षण, बचाव, जांच और उसके संपूर्ण इलाज के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. कुर्रे ने जोर देकर कहा कि टीबी एक लाइलाज बीमारी नहीं है, बशर्ते इसका सही समय पर पता चल जाए और इलाज पूरा किया जाए। उन्होंने आगाह किया कि यदि टीबी का सही समय पर उपचार नहीं कराया जाता है, तो यह 'एमडीआर' (MDR-TB) में परिवर्तित हो सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए अधिक घातक है। डॉ. कुर्रे ने उन समूहों के प्रति विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जिन्हें टीबी होने का उच्च जोखिम रहता है। उन्होंने बताया कि कुपोषण से पीड़ित व्यक्ति, एड्स मरीज, कैंसर पीड़ित, धूम्रपान करने वाले और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले व्यक्तियों को टीबी संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि अपने आसपास मौजूद ऐसे उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की विशेष देखभाल अवश्य करें। "टीबी को छिपाएं नहीं, उसे हराएं" जागरूकता शिविर में डॉ. कुर्रे ने एक प्रेरणादायक संदेश देते हुए कहा, "टीबी को क्यों है छुपाना, अगर जीवन को बचाना है।" उन्होंने आमजन से अपील की कि बीमारी को छिपाने के बजाय उसकी शीघ्र पहचान कराएं, पौष्टिक आहार लें और डॉक्टर की सलाह पर कोर्स पूरा करें। जन-भागीदारी बढ़ाना है ताकि 'टीबी मुक्त भारत' के लक्ष्य को समय रहते प्राप्त किया जा सके। कार्यक्रम के माध्यम से सभी को "जन-जन का रखें ध्यान, टीबी मुक्त हो भारत अभियान" के मंत्र को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।1
- Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"1
- Post by कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली1