मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का निधन अंतिम यात्रा में शामिल हुए हज़ारों लोग उदयपुर के पूर्व राजपरिवार से एक दुखद खबर है। मेवाड़ पूर्व राजपरिवार की राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का सोमवार, 14 सितंबर की देर रात लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। वे 83 वर्ष की थीं और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उनके महाप्रयाण की खबर मिलते ही पूरे उदयपुर, मेवाड़ और मारवाड़ अंचल में शोक की लहर दौड़ गई है। देश-विदेश से जुड़े उनके चाहने वाले, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और राजनीतिक हस्तियां लगातार शोक व्यक्त कर रहे हैं। राजमाता अपने मिलनसार स्वभाव, परोपकारी कार्यों और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए हमेशा याद की जाती रहेंगी। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया है, जिसने उदयपुर की सांस्कृतिक पहचान को गहराई से प्रभावित किया था। राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का संबंध देश के प्रतिष्ठित और प्राचीन राजपरिवारों में से रहा है। वे मूल रूप से गुजरात के कच्छ राजपरिवार से ताल्लुक रखती थीं। वे कच्छ के महाराज फतह सिंह की छोटी पुत्री और कच्छ के महाराव की पौत्री थीं। विवाह के पश्चात वे मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार का हिस्सा बनीं। वे स्वर्गीय अरविंद सिंह मेवाड़ की धर्मपत्नी और मेवाड़ के वर्तमान प्रमुख युवा सदस्य, समाजसेवी व शिक्षाविद् डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की माताजी थीं। पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने हमेशा मेवाड़ की परंपराओं और लोक कल्याणकारी संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम किया। परिवार के भीतर और बाहर उनके स्नेहिल और मजबूत नेतृत्व ने हर किसी को प्रभावित किया था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार सुबह उनकी अंतिम यात्रा उदयपुर स्थित ऐतिहासिक राजमहल (शंभू निवास पैलेस, सिटी पैलेस) से रवाना हुई। अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, विभिन्न संगठनों के लोग और गणमान्य व्यक्ति राजमहल पहुंचे। राजमाता का अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान और पारंपरिक शाही गारद के साथ संपन्न हुआ।
मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का निधन अंतिम यात्रा में शामिल हुए हज़ारों लोग उदयपुर के पूर्व राजपरिवार से एक दुखद खबर है। मेवाड़ पूर्व राजपरिवार की राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का सोमवार, 14 सितंबर की देर रात लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। वे 83 वर्ष की थीं और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उनके महाप्रयाण की खबर मिलते ही पूरे उदयपुर, मेवाड़ और मारवाड़ अंचल में शोक की लहर दौड़ गई है। देश-विदेश से जुड़े उनके चाहने वाले, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और राजनीतिक हस्तियां लगातार शोक व्यक्त कर रहे हैं। राजमाता अपने मिलनसार स्वभाव, परोपकारी कार्यों और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए हमेशा याद की जाती रहेंगी। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया है, जिसने उदयपुर की सांस्कृतिक पहचान को गहराई से प्रभावित किया था। राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का संबंध देश के प्रतिष्ठित और प्राचीन राजपरिवारों में से रहा है। वे मूल रूप से गुजरात के कच्छ राजपरिवार से ताल्लुक रखती थीं। वे कच्छ के महाराज फतह सिंह की छोटी पुत्री और कच्छ के महाराव की पौत्री थीं। विवाह के पश्चात वे मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार का हिस्सा बनीं। वे स्वर्गीय अरविंद सिंह मेवाड़ की धर्मपत्नी और मेवाड़ के वर्तमान प्रमुख युवा सदस्य, समाजसेवी व शिक्षाविद् डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की माताजी थीं। पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने हमेशा मेवाड़ की परंपराओं और लोक कल्याणकारी संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम किया। परिवार के भीतर और बाहर उनके स्नेहिल और मजबूत नेतृत्व ने हर किसी को प्रभावित किया था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार सुबह उनकी अंतिम यात्रा उदयपुर स्थित ऐतिहासिक राजमहल (शंभू निवास पैलेस, सिटी पैलेस) से रवाना हुई। अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, विभिन्न संगठनों के लोग और गणमान्य व्यक्ति राजमहल पहुंचे। राजमाता का अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान और पारंपरिक शाही गारद के साथ संपन्न हुआ।
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- मावली में नवनिर्वाचित कांग्रेस पार्षदों ने ली पद और गोपनीयता की शपथ, विधायक पुष्कर लाल डांगी सहित वरिष्ठ नेता रहे मौजूद उदयपुर जिले के मावली नगरपालिका के नवनिर्वाचित कांग्रेस पार्षदों का शपथ ग्रहण समारोह उपखंड कार्यालय में आयोजित किया गया। समारोह में उपखंड अधिकारी मावली ने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर विधायक पुष्कर लाल डांगी विशेष रूप से मौजूद रहे। उनके साथ मावली ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार गोखरू, खेमली ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह राणावत, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह गुर्जर, पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष निरंजन चौधरी तथा मावली के पूर्व सरपंच मोहन लाल जाट उपस्थित रहे।1
- कांकरोली रेलवे स्टेशन राजसमंद जो सभी रेलवे नीचे जो अंडरपास बने हुए हैं उसमें पानी ही पानी भरा हुआ है पानी की निकासी नहीं होने के कारण में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है रिपोर्टर नंदलाल पुरबिया न्यू द्वारकेश न्यूज़ चैनल नांदोली राजसमंद राजस्थान द्वारा जनहित में प्रसारित1
- *खुला आसमान ही श्मशान: मरने के बाद भी सुकून से अंतिम संस्कार नसीब नहीं, आदर्श श्मशान योजना कागजों में* रिपोर्टर प्रकाश सोलंकी पीपलवास *बिलड़ी / ग्राम पंचायत गरदाना (चित्तौड़गढ़)।* ग्रामीण अंचल में विकास के तमाम दावों के बीच जमीनी हकीकत बेहद दर्दनाक है। यहां व्यक्ति को जीते जी तो सुविधाएं नहीं मिलती, मरने के बाद भी सुकून से अंतिम संस्कार तक नसीब नहीं हो रहा है। ताजा मामला ग्राम पंचायत गरदाना के ग्राम *बिलड़ी* का है। यहां आज भी अंतिम संस्कार के लिए कोई व्यवस्थित श्मशान घाट नहीं है। ग्रामीणों को खुले आसमान के नीचे, खेतों के बीच, झाड़ियों में चिता लगाकर दाह संस्कार करना पड़ रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बारिश के मौसम में गीली लकड़ियों से चिता जल ही नहीं रही है और परिजनों को घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है। इस संबंध में *सामाजिक कार्यकर्ता शंकर लाल मेघवाल, बिलड़ी* ने बताया कि राजस्थान सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में *आदर्श श्मशान (मोक्षधाम)* बनाने की योजना शुरू की थी, जिसके लिए लाखों रुपये का बजट भी आता है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह योजना पूरी तरह फेल है। बिलड़ी में आज तक न तो टीन शेड बना, न चारदीवारी और न ही श्मशान तक पहुंचने का रास्ता है। बरसात में तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सामाजिक कार्यकर्ता शंकर लाल मेघवाल ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेकर बिलड़ी गांव में तत्काल सर्वसुविधायुक्त आदर्श मोक्षधाम का निर्माण करवाया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को इस पीड़ादायक स्थिति से न गुजरना पड़े।1
- डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं।और मलेरिया के मच्छर गंदे पानी में। आपके घरों में कुलर फ्रिज गमले पक्षियों के पानी पीने के पात्र पशुओं के पानी पीने की प्याऊ घर के आसपास नालिया पानी की टंकियां पानी के टैंक या घर के आसपास कहीं पर भी पानी का गद्दा भरा हुआ मिले तो साफ सफाई जरूर रखें ताकि डेंगू या मलेरिया जैसे रोग से हमारे परिवार और हमारे पड़ोसी ना हो स्वस्थ रहें सुरक्षित रहे1
- श्री सांवरिया सेठ जी के आज के लाइव श्रृंगार दर्शन 🙏✨ सेठ जी की ओर से आप सभी को क्षमावाणी पर्व ‘खामणा’ की हार्दिक शुभकामनाएं। जय श्री सांवरिया सेठ जी! 🙏 श्री सांवरिया सेठ जी के आज के लाइव श्रृंगार दर्शन 🙏✨ सेठ जी की ओर से आप सभी को क्षमावाणी पर्व ‘खामणा’ की हार्दिक शुभकामनाएं। जय श्री सांवरिया सेठ जी! 🙏1
- चित्तौडगढ: राशमी उपखंड क्षेत्र के अडाना से डिंडोली तक सड़क का ये हालत,दुर्घटनाग्रस्त का बना एरिया।1
- चिकारड़ा में गणपति महोत्सव की धूम, 10 दिनों तक गूंजेगी भक्ति और गरबा की खनक प्रेम नगर के पिपलेश्वर महादेव मंदिर में 7 फीट की गणपति प्रतिमा स्थापित पवन अग्रवाल, चिकारड़ा चिकारड़ा। डूंगला उपखंड क्षेत्र में गणपति महोत्सव को लेकर इस बार खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। क्षेत्र के विभिन्न गांवों और कस्बों में विधि-विधान के साथ भगवान गणपति की स्थापना की गई है। कहीं सार्वजनिक पंडाल सजाए गए हैं तो कहीं ग्रामीणों ने अपने घरों में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की है। दस दिवसीय गणपति महोत्सव के दौरान पूरा क्षेत्र भक्ति और उल्लास के रंग में रंगा नजर आ रहा है। जहां देखो, वहां गणपति बप्पा की प्रतिमाएं क्षेत्र में जगह-जगह गणपति प्रतिमाओं की स्थापना की गई है। सुबह-शाम आरती और पूजा के साथ श्रद्धालु गणपति बप्पा की सेवा में जुटे हुए हैं। रात्रि में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ गरबा और डांडिया आयोजन भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। डांडियों की खनक से गांवों की गलियां देर रात तक गूंज रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गणपति महोत्सव अब धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक उत्सव का भी माध्यम बन गया है। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग उत्साह के साथ आयोजनों में भाग ले रहे हैं। प्रेम नगर में 7 फीट की प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र डूंगला निवासी उदयलाल गायरी ने बताया कि प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी प्रेम नगर स्थित पिपलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में गणपति प्रतिमा स्थापित की गई है। गरबा मंडल की ओर से यहां दस दिनों तक विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस बार मंदिर परिसर में 7 फीट ऊंची गणपति प्रतिमा स्थापित की गई है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण भगवान गणपति के दर्शन एवं आरती में शामिल हो रहे हैं। शाम 8 बजे बाद उमड़ता है भक्तों का सैलाब आयोजक मंडल के अनुसार शाम करीब 8 बजे से कार्यक्रम स्थल पर ग्रामीणों की आवाजाही बढ़ने लगती है। आरती के बाद गरबा एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ग्रामीण उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं में गरबा को लेकर खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। आयोजक मंडल ने बताया कि आयोजन को सफल बनाने में डूंगला क्षेत्र के ग्रामीणों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। ग्रामीणों के सहयोग से इस आयोजन को हर वर्ष और अधिक भव्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थापना से विसर्जन तक भक्ति में डूबा रहेगा क्षेत्र क्षेत्र के कई स्थानों पर ग्रामीणों ने अपनी परंपरा के अनुसार गणपति स्थापना एवं विसर्जन की तैयारियां की हैं। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि वे स्थापना के दिन ही विधि-विधान के साथ गणपति का विसर्जन करेंगे, जबकि सार्वजनिक रूप से स्थापित प्रतिमाओं का दस दिवसीय आयोजन के बाद श्रद्धा और उल्लास के साथ विसर्जन किया जाएगा। गणपति महोत्सव के चलते इन दिनों डूंगला उपखंड क्षेत्र में हर तरफ ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष सुनाई दे रहे हैं। धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक रंग में रंगा यह आयोजन ग्रामीणों के बीच उत्साह, भाईचारे और सामाजिक एकजुटता का संदेश दे रहा है।1