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तीन महीने में ही सड़क की खुली पोल, उखड़ी गिट्टी और गड्ढों ने बढ़ाई मुसीबत घटिया निर्माण का आरोप, ग्रामीणों ने जांच कर ठेकेदार पर कार्रवाई की उठाई मांग ब्यूरो चीफ बाराबंकी। सफदरगंज चौराहे से बदोसराय मार्ग पर चंदवारा गांव को जोड़ने वाली लिंक रोड की हालत ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक करीब तीन महीने पहले बनी डामर सड़क अब जगह-जगह उखड़ने लगी है। सड़क की गिट्टियां बाहर निकल आई हैं और कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी कर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसका नतीजा महज कुछ महीनों में सामने आ गया। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क के गड्ढों के कारण कई बाइक सवार फिसलकर चोटिल हो चुके हैं। बारिश के दौरान हालात और बिगड़ जाते हैं। गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती और हादसे का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क का निर्माण मानक के अनुरूप हुआ होता तो इतनी कम अवधि में उसकी गिट्टी नहीं उखड़ती। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सड़क निर्माण की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और मानकों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सड़क को दोबारा मानक के अनुरूप बनवाने की मांग उठाई है।

19 hrs ago
user_शशिकांत अवस्थी पत्रकार
शशिकांत अवस्थी पत्रकार
सिरौली गौसपुर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
19 hrs ago

तीन महीने में ही सड़क की खुली पोल, उखड़ी गिट्टी और गड्ढों ने बढ़ाई मुसीबत घटिया निर्माण का आरोप, ग्रामीणों ने जांच कर ठेकेदार पर कार्रवाई की उठाई मांग ब्यूरो चीफ बाराबंकी। सफदरगंज चौराहे से बदोसराय मार्ग पर चंदवारा गांव को जोड़ने वाली लिंक रोड की हालत ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक करीब तीन महीने पहले बनी डामर सड़क अब जगह-जगह उखड़ने लगी है। सड़क की गिट्टियां बाहर निकल आई हैं और कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी कर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसका नतीजा महज कुछ महीनों में सामने आ गया। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क के गड्ढों के कारण कई बाइक सवार फिसलकर चोटिल हो चुके हैं। बारिश के दौरान हालात और बिगड़ जाते हैं। गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती और हादसे का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क का निर्माण मानक के अनुरूप हुआ होता तो इतनी कम अवधि में उसकी गिट्टी नहीं उखड़ती। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सड़क निर्माण की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और मानकों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सड़क को दोबारा मानक के अनुरूप बनवाने की मांग उठाई है।

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  • बदोसरांय कोटवाधाम टिकैत नगर मार्ग पर सीतादेवी लाॅ कालेज के सामने ट्रेलर ट्रक पलटा सिरौलीगौसपुर बाराबंकी।। बदोसरांय से कोटवाधाम टिकैत नगर मार्ग पर सीतादेवी लाॅ कालेज के ठीक सामने बडा ट्रक यू पी 42 ए टी 7166ट्रेलर पलट कर पे़डों के सहारे रुका।ड्राइवर क्लीनर को मामूली चोटे आई है। प्रायवेट चिकित्सक के पास उपचार कराया। बताते चलें बदोसरांय से कोटवा धाम टिकैत नगर मार्ग पर नोमानी व्रिक फील्ड के आगे सीतादेवी लाॅ कालेज के ठीक सामने गत दिवस हुई बरसात में बडा दबक हो गया था।तेज रफ्तार में आ रहा ट्रेलर ट्रक पलट कर पे़डों के सहारे रुका ड्राइवर व खलासी को मामूली चोटें आयीं है।
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    बदोसरांय कोटवाधाम टिकैत नगर मार्ग पर सीतादेवी लाॅ कालेज के सामने ट्रेलर ट्रक पलटा
सिरौलीगौसपुर बाराबंकी।। बदोसरांय से कोटवाधाम टिकैत नगर मार्ग पर सीतादेवी लाॅ कालेज के ठीक सामने बडा ट्रक यू पी 42 ए टी 7166ट्रेलर पलट कर पे़डों के सहारे रुका।ड्राइवर क्लीनर को मामूली चोटे आई है। प्रायवेट चिकित्सक के पास उपचार कराया।
बताते चलें बदोसरांय से कोटवा धाम टिकैत नगर मार्ग पर नोमानी व्रिक फील्ड के आगे सीतादेवी लाॅ कालेज के ठीक सामने गत दिवस हुई बरसात में बडा दबक हो गया था।तेज रफ्तार में आ रहा ट्रेलर ट्रक पलट कर पे़डों के सहारे रुका ड्राइवर व खलासी को मामूली चोटें आयीं है।
    user_अजय कुमार रावत
    अजय कुमार रावत
    Local News Reporter सिरौली गौसपुर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • तीन महीने में ही सड़क की खुली पोल, उखड़ी गिट्टी और गड्ढों ने बढ़ाई मुसीबत घटिया निर्माण का आरोप, ग्रामीणों ने जांच कर ठेकेदार पर कार्रवाई की उठाई मांग ब्यूरो चीफ बाराबंकी। सफदरगंज चौराहे से बदोसराय मार्ग पर चंदवारा गांव को जोड़ने वाली लिंक रोड की हालत ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक करीब तीन महीने पहले बनी डामर सड़क अब जगह-जगह उखड़ने लगी है। सड़क की गिट्टियां बाहर निकल आई हैं और कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी कर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसका नतीजा महज कुछ महीनों में सामने आ गया। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क के गड्ढों के कारण कई बाइक सवार फिसलकर चोटिल हो चुके हैं। बारिश के दौरान हालात और बिगड़ जाते हैं। गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती और हादसे का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क का निर्माण मानक के अनुरूप हुआ होता तो इतनी कम अवधि में उसकी गिट्टी नहीं उखड़ती। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सड़क निर्माण की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और मानकों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सड़क को दोबारा मानक के अनुरूप बनवाने की मांग उठाई है।
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    तीन महीने में ही सड़क की खुली पोल, उखड़ी गिट्टी और गड्ढों ने बढ़ाई मुसीबत

घटिया निर्माण का आरोप, ग्रामीणों ने जांच कर ठेकेदार पर कार्रवाई की उठाई मांग

ब्यूरो चीफ

बाराबंकी। सफदरगंज चौराहे से बदोसराय मार्ग पर चंदवारा गांव को जोड़ने वाली लिंक रोड की हालत ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक करीब तीन महीने पहले बनी डामर सड़क अब जगह-जगह उखड़ने लगी है। सड़क की गिट्टियां बाहर निकल आई हैं और कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी कर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसका नतीजा महज कुछ महीनों में सामने आ गया। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क के गड्ढों के कारण कई बाइक सवार फिसलकर चोटिल हो चुके हैं।

बारिश के दौरान हालात और बिगड़ जाते हैं। गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती और हादसे का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क का निर्माण मानक के अनुरूप हुआ होता तो इतनी कम अवधि में उसकी गिट्टी नहीं उखड़ती।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सड़क निर्माण की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और मानकों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सड़क को दोबारा मानक के अनुरूप बनवाने की मांग उठाई है।
    user_शशिकांत अवस्थी पत्रकार
    शशिकांत अवस्थी पत्रकार
    सिरौली गौसपुर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • खतरे के निशान से 71 सेंटीमीटर ऊपर घाघरा बाबा नारायण दास समाधि स्थल पर खतरा बरकार सूरतगंज (बाराबंकी)। खतरे के निशान से सरयू घाघरा नदी 71 सेंटीमीटर ऊपर तेज बहाव के बीच नदी खेतों और आशियानों को निगलने के बाद अब धार्मिक स्थलों और सरकारी भवनों सहित अन्य मकानों को भी बहा ले जाने की जिद में। ऐसे में सोमवार देर रात करीब दस बजे श्री श्री 108 जय बाबा नारायण दास जी महराज मंदिर परिसर के सामने स्थित बाबा गुरु नारायण, महंत उदित नारायण व उनकी पत्नी समेत परिवार के अन्य सदस्यों की समाधियां भी नदी की तेज धारा में समा गईं। तो दूसरी ओर सुंदरनगर, बेलहरी, बलईपुर, बाबापुरवा, ललपुरवा, सकतापुर, कोड़री और सरसंडा समेत दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। कई घरों में पानी घुस चुका है। ग्रामीण लगातार बढ़ते खतरे के बीच अपने घरों और सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। हेतमापुर में कटान का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक अब तक हजारों बीघा कृषि भूमि नदी में समा चुकी है, जबकि करीब 50 घर कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। कई परिवारों ने अपने आशियाने खुद तोड़ना शुरू कर दिया है, ताकि ईंट, दरवाजे, टीन सेट , अनाज, चारपाई और अन्य जरूरी सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सके। ऐसे में आंखों के सामने घर उजड़ते देख ग्रामीणों की बेबसी साफ दिखाई दे रही है। किसी परिवार को अपने मकान के अगले पल नदी में समा जाने का डर है तो कोई बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सुरक्षित स्थान की तलाश में है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी की धार जिस तेजी से जमीन काट रही है, उससे हर घंटे स्थिति बदल रही है। हेतमापुर में सरयू-घाघरा का कटान अब केवल जमीन और मकानों का नुकसान नहीं रह गया है। नदी की तेज धार ने ग्रामीणों की धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी स्मृतियों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। बाबा गुरु नारायण, महंत उदित नारायण और उनकी पत्नी समेत परिवार के सदस्यों की समाधियों का नदी में समा जाना ग्रामीणों के लिए भावनात्मक क्षति है। जिस स्थान पर लोग वर्षों से श्रद्धा के साथ पहुंचते थे, वह अब नदी की तेज धारा में दिखाई नहीं दे रहा है। नदी की धार मंदिर के उत्तर साइट से नीचे नीचे काटते हुए मन्दिर के नींव में में हिलोरें मार रही है ऐसे में कटान यदि इसी गति से जारी रहा तो मंदिर परिसर भी गंभीर खतरे की जद में आ सकता है। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की नजर अब लगातार नदी तेज रफ्तार की धाराओं पर टिकी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर वर्षों से पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं, आज वही स्थान नदी के मुहाने पर खड़ा है। खेत और घर गंवाने के बाद अब लोगों को अपनी धार्मिक विरासत के भी नदी में समा जाने की चिंता सताने लगी है। नदी की तेज धार अब पशु चिकित्सालय के बेहद करीब पहुंच गई है। लगातार कटान जारी रहने से सरकारी भवन के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। यदि भवन प्रभावित होता है तो क्षेत्र के पशुपालकों के सामने पशुओं के उपचार की समस्या खड़ी हो सकती है। सरयू-घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ और कटान का खतरा और गंभीर हो गया है। नदी खतरे के निशान से 71 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी की धार में भी तेजी दिखाई दे रही है। सुंदरनगर, बेलहरी, बाबापुरवा, ललपुरवा, कोड़री, सरसंडा समेत कई गांव पहले से ही बाढ़ की मार झेल रहे हैं। कई स्थानों पर खेत जलमग्न हैं तो आबादी वाले क्षेत्रों में भी पानी पहुंच चुका है। ऐसे में जलस्तर में और वृद्धि ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है। कटान की गंभीर स्थिति को देखते हुए बाढ़ खंड और तहसील प्रशासन की ओर से बचाव कार्य किए जा रहे हैं। नदी के किनारे को सुरक्षित करने और कटान प्रभावित हिस्सों को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि तेज बहाव और लगातार बदलती नदी की धारा के सामने बचाव कार्यों को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित बोले ऐसे में केवल तत्काल बचाव कार्य ही नहीं, बल्कि कटान प्रभावित क्षेत्र के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की भी जरूरत है। कटान प्रभावित गांवों में इस समय सबसे बड़ी चिंता अपने परिवार और जरूरी सामान को सुरक्षित रखने की है। कई परिवार घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ मकान टूटने का संकट नहीं है। घर के साथ खेत, रोजी-रोटी, पशु, वर्षों की मेहनत और पुरानी यादें भी नदी में समा रही हैं। हेतमापुर में प्रशासन के सामने एक साथ दो बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। एक तरफ लगातार बढ़ता जलस्तर बाढ़ का दायरा बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर तेज कटान आबादी, खेतों और महत्वपूर्ण भवनों के लिए खतरा बन गया है।प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने, जरूरी सामान निकालने में मदद देने और संवेदनशील स्थानों पर तत्काल बचाव कार्य। ग्रामीणों की नजर अब नदी के जलस्तर और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि खतरे के निशान से 71 सेंटीमीटर ऊपर बह रही सरयू-घाघरा की धार आखिर कहां जाकर थमेगी और तब तक हेतमापुर में कितना और नुकसान होगा। बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण करने भाजपा जिला अध्यक्ष राम सिंह भुल्लन व भाजपा जिला उपाध्यक्ष शेखर हयारण, भाजपा मंडल अध्यक्ष सुशील कुमार वर्मा, डॉ विमलेश कुमार पहुंचे और बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर उनका हाल चाल जाना।
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    खतरे के निशान से 71 सेंटीमीटर ऊपर घाघरा बाबा नारायण दास समाधि स्थल पर खतरा बरकार
सूरतगंज (बाराबंकी)। खतरे के निशान से सरयू घाघरा नदी 71 सेंटीमीटर ऊपर तेज बहाव के बीच नदी खेतों और आशियानों को निगलने के बाद अब धार्मिक स्थलों और सरकारी भवनों सहित अन्य मकानों को भी बहा ले जाने की जिद में। ऐसे में सोमवार देर रात करीब दस बजे श्री श्री 108 जय बाबा नारायण दास जी महराज मंदिर परिसर के सामने स्थित बाबा गुरु नारायण, महंत उदित नारायण व उनकी पत्नी समेत परिवार के अन्य सदस्यों की समाधियां भी नदी की तेज धारा में समा गईं। तो दूसरी ओर सुंदरनगर, बेलहरी, बलईपुर, बाबापुरवा, ललपुरवा, सकतापुर, कोड़री और सरसंडा समेत दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। कई घरों में पानी घुस चुका है। ग्रामीण लगातार बढ़ते खतरे के बीच अपने घरों और सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। हेतमापुर में कटान का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक अब तक हजारों बीघा कृषि भूमि नदी में समा चुकी है, जबकि करीब 50 घर कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। कई परिवारों ने अपने आशियाने खुद तोड़ना शुरू कर दिया है, ताकि ईंट, दरवाजे, टीन सेट , अनाज, चारपाई और अन्य जरूरी सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सके। ऐसे में आंखों के सामने घर उजड़ते देख ग्रामीणों की बेबसी साफ दिखाई दे रही है। किसी परिवार को अपने मकान के अगले पल नदी में समा जाने का डर है तो कोई बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सुरक्षित स्थान की तलाश में है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी की धार जिस तेजी से जमीन काट रही है, उससे हर घंटे स्थिति बदल रही है। हेतमापुर में सरयू-घाघरा का कटान अब केवल जमीन और मकानों का नुकसान नहीं रह गया है। नदी की तेज धार ने ग्रामीणों की धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी स्मृतियों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। बाबा गुरु नारायण, महंत उदित नारायण और उनकी पत्नी समेत परिवार के सदस्यों की समाधियों का नदी में समा जाना ग्रामीणों के लिए भावनात्मक क्षति है। जिस स्थान पर लोग वर्षों से श्रद्धा के साथ पहुंचते थे, वह अब नदी की तेज धारा में दिखाई नहीं दे रहा है। नदी की धार मंदिर के उत्तर साइट से नीचे नीचे काटते हुए मन्दिर के नींव में में हिलोरें मार रही है ऐसे में कटान यदि इसी गति से जारी रहा तो मंदिर परिसर भी गंभीर खतरे की जद में आ सकता है। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की नजर अब लगातार नदी तेज रफ्तार की धाराओं पर टिकी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर वर्षों से पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं, आज वही स्थान नदी के मुहाने पर खड़ा है। खेत और घर गंवाने के बाद अब लोगों को अपनी धार्मिक विरासत के भी नदी में समा जाने की चिंता सताने लगी है। नदी की तेज धार अब पशु चिकित्सालय के बेहद करीब पहुंच गई है। लगातार कटान जारी रहने से सरकारी भवन के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। यदि भवन प्रभावित होता है तो क्षेत्र के पशुपालकों के सामने पशुओं के उपचार की समस्या खड़ी हो सकती है। सरयू-घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ और कटान का खतरा और गंभीर हो गया है। नदी खतरे के निशान से 71 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी की धार में भी तेजी दिखाई दे रही है। सुंदरनगर, बेलहरी, बाबापुरवा, ललपुरवा, कोड़री, सरसंडा समेत कई गांव पहले से ही बाढ़ की मार झेल रहे हैं। कई स्थानों पर खेत जलमग्न हैं तो आबादी वाले क्षेत्रों में भी पानी पहुंच चुका है। ऐसे में जलस्तर में और वृद्धि ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है। कटान की गंभीर स्थिति को देखते हुए बाढ़ खंड और तहसील प्रशासन की ओर से बचाव कार्य किए जा रहे हैं। नदी के किनारे को सुरक्षित करने और कटान प्रभावित हिस्सों को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि तेज बहाव और लगातार बदलती नदी की धारा के सामने बचाव कार्यों को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित बोले ऐसे में केवल तत्काल बचाव कार्य ही नहीं, बल्कि कटान प्रभावित क्षेत्र के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की भी जरूरत है। कटान प्रभावित गांवों में इस समय सबसे बड़ी चिंता अपने परिवार और जरूरी सामान को सुरक्षित रखने की है। कई परिवार घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं।  ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ मकान टूटने का संकट नहीं है। घर के साथ खेत, रोजी-रोटी, पशु, वर्षों की मेहनत और पुरानी यादें भी नदी में समा रही हैं। हेतमापुर में प्रशासन के सामने एक साथ दो बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। एक तरफ लगातार बढ़ता जलस्तर बाढ़ का दायरा बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर तेज कटान आबादी, खेतों और महत्वपूर्ण भवनों के लिए खतरा बन गया है।प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने, जरूरी सामान निकालने में मदद देने और संवेदनशील स्थानों पर तत्काल बचाव कार्य। ग्रामीणों की नजर अब नदी के जलस्तर और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि खतरे के निशान से 71 सेंटीमीटर ऊपर बह रही सरयू-घाघरा की धार आखिर कहां जाकर थमेगी और तब तक हेतमापुर में कितना और नुकसान होगा।
बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण करने भाजपा जिला अध्यक्ष राम सिंह भुल्लन व भाजपा जिला उपाध्यक्ष शेखर हयारण, भाजपा मंडल अध्यक्ष सुशील कुमार वर्मा, डॉ विमलेश कुमार पहुंचे और बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर उनका हाल चाल जाना।
    user_Mohd zaid
    Mohd zaid
    रामनगर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • 1500 वर्ष पुराना मन्दिर खतरे के निशान पर घाघरा नदी की कटान के बीच मंदिर का हिस्सा नदी में लटका मंदिर को बचाने के प्रयास जारी मन्दिर को कटान से बचाने हेतु ग्रामीण हवन पूजन कर रहे हैं बाबा नारायण दास हेतमापुर धाम से बाराबंकी में प्रसिद्ध है यह मंदिर प्रत्येक वर्ष लगता है विशाल मेला
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    1500 वर्ष पुराना मन्दिर खतरे के निशान पर 

घाघरा नदी की कटान के बीच मंदिर का हिस्सा नदी में लटका 

मंदिर को बचाने के प्रयास जारी 

मन्दिर को कटान से बचाने हेतु ग्रामीण हवन पूजन कर रहे हैं 

बाबा नारायण दास हेतमापुर धाम से बाराबंकी में प्रसिद्ध है यह मंदिर 

प्रत्येक वर्ष लगता है विशाल मेला
    user_VIKAS CHAUHAN
    VIKAS CHAUHAN
    Voice of people नवाबगंज, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • बाराबंकी में दर्दनाक हादसा: अचानक गिरी दीवार, मलबे में दबकर महिला की मौत | 3 बच्चों के सिर से उठा बाराबंकी में दर्दनाक हादसा: अचानक गिरी दीवार, मलबे में दबकर महिला की मौत | 3 बच्चों के सिर से उठा
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    बाराबंकी में दर्दनाक हादसा: अचानक गिरी दीवार, मलबे में दबकर महिला की मौत | 3 बच्चों के सिर से उठा 
बाराबंकी में दर्दनाक हादसा: अचानक गिरी दीवार, मलबे में दबकर महिला की मौत | 3 बच्चों के सिर से उठा
    user_Public News Network24
    Public News Network24
    Newspaper publisher नवाबगंज, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • करनैलगंज की ऐतिहासिक रामलीला यूपी की टॉप फाइव मे शुमार जिसका आज से ध्वजा रोहण कलश पूजन गाजे बाजे के साथ बजा डंका करनैलगंज की ऐतिहासिक रामलीला यूपी की टॉप फाइव मे शुमार जिसका आज से ध्वजा रोहण कलश पूजन गाजे बाजे के साथ बजा डंका करनैलगंजगोण्डा उत्तर प्रदेश की टॉप फाइव रामलीलाओं में शुमार गोंडा जिले के करनैलगंज की ऐतिहासिक रामलीला का भव्य आगाज हो गया है। भूमि पूजन और ध्वजारोहण के साथ एक माह तक चलने वाली रामलीला का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस गाजे-बाजे के साथ निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे नगर को राममय कर दिया। वहीं रामलीला मैदान में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके साथ ही करीब एक महीने तक चलने वाली रामलीला का औपचारिक शुभारंभ हो गया। इस दौरान करनैलगंज क्षेत्र में भगवान श्रीराम के जयकारों की गूंज सुनाई देगी। खास बात यह है कि बनारस के बाद गोंडा के करनैलगंज में रामलीला का एक माह तक मंचन होता है। यहां तीन अलग-अलग स्थानों पर स्थानीय व बाहरी कलाकारों द्वारा रामलीला का मंचन किया जाता है। दशहरा में देश के कई प्रदेशों से बैंड, झांकियां और दिव्य रथ भी बुलाए जाते हैं, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। दशहरा पर्व पर अयोध्या के दीपोत्सव की तर्ज पर भव्य आतिशबाजी का भी आयोजन किया जाता है। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मोहित पांडे के मुताबिक इस बार की रामलीला को और भव्य एवं ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां की गई हैं। दशहरा पर्व पर दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है।
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    करनैलगंज की ऐतिहासिक रामलीला यूपी की टॉप फाइव  मे शुमार   जिसका आज  से ध्वजा रोहण कलश पूजन  गाजे बाजे के साथ बजा डंका 

करनैलगंज की ऐतिहासिक रामलीला यूपी की टॉप फाइव  मे शुमार   जिसका आज  से ध्वजा रोहण कलश पूजन  गाजे बाजे के साथ बजा डंका 
करनैलगंजगोण्डा 
उत्तर प्रदेश की टॉप फाइव रामलीलाओं में शुमार गोंडा जिले के करनैलगंज की ऐतिहासिक रामलीला का भव्य आगाज हो गया है। भूमि पूजन और ध्वजारोहण के साथ एक माह तक चलने वाली रामलीला का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस गाजे-बाजे के साथ निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे नगर को राममय कर दिया। वहीं रामलीला मैदान में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके साथ ही करीब एक महीने तक चलने वाली रामलीला का औपचारिक शुभारंभ हो गया। इस दौरान करनैलगंज क्षेत्र में भगवान श्रीराम के जयकारों की गूंज सुनाई देगी।
खास बात यह है कि बनारस के बाद गोंडा के करनैलगंज में रामलीला का एक माह तक मंचन होता है। यहां तीन अलग-अलग स्थानों पर स्थानीय व बाहरी कलाकारों द्वारा रामलीला का मंचन किया जाता है। दशहरा में देश के कई प्रदेशों से बैंड, झांकियां और दिव्य रथ भी बुलाए जाते हैं, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। दशहरा पर्व पर अयोध्या के दीपोत्सव की तर्ज पर भव्य आतिशबाजी का भी आयोजन किया जाता है। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मोहित पांडे के मुताबिक इस बार की रामलीला को और भव्य एवं ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां की गई हैं। दशहरा पर्व पर दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है।
    user_पत्रकार श्रीनाथ रस्तोगी
    पत्रकार श्रीनाथ रस्तोगी
    Local News Reporter कर्नलगंज, गोंडा, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश में IAS से इस्तीफा देने वाली दिव्या मित्तल ने राजनीति में जाने का किया ऐलान, वीडियो जारी कर कहा- किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जुड़ूंगी, उत्तर प्रदेश से स्वतंत्र रूप से शुरू करूंगी अपनी राजनीतिक यात्रा
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    उत्तर प्रदेश में IAS से इस्तीफा देने वाली दिव्या मित्तल ने राजनीति में जाने का किया ऐलान, वीडियो जारी कर कहा- किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जुड़ूंगी, उत्तर प्रदेश से स्वतंत्र रूप से शुरू करूंगी अपनी राजनीतिक यात्रा
    user_राम जी दीक्षित पत्रकार
    राम जी दीक्षित पत्रकार
    Voice of people नवाबगंज, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • कोई देख रेख नहीं हे सब रुपया अधिकारी खाए गए हम बेघर होई गेन सूरतगंज (बाराबंकी)। सरयू-घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही हेतमापुर क्षेत्र में हालात लगातार भयावह होते जा रहे हैं। नदी की तेज धारा अब सिर्फ खेतों और तटवर्ती इलाकों को ही नहीं निगल रही, बल्कि आबादी और धार्मिक स्थलों तक पहुंच चुकी है। तो उधर सुंदरनगर, बेलहारी, भलाईपुर, बाबापुरवा, ललपुरवा, कोड़री, सरसंडा समेत दर्जनों गांव भीषण बाढ़ के पानी से घिरे नदी के लगातार बदलते रुख से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों के मुताबिक अब तक हजारों बीघा कृषि भूमि नदी में समा चुकी है, जबकि करीब 50 घर भी कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। कई परिवारों के सामने अब सिर छिपाने के लिए सुरक्षित जगह तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है। हालात यह हैं कि कुछ ग्रामीण अपने आशियाने को खुद तोड़कर उसमें रखा सामान निकाल रहे हैं, ताकि नदी की धार में घर और सामान दोनों न बह जाएं। कोई परिवार सामान लेकर बाढ़ राहत केंद्र की ओर जा रहा है तो कोई अपने नाते-रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर है। मंदिर के अस्तित्व पर भी संकट कटान की मार अब बाबा नारायण दास जी महाराज की तपोस्थली मंदिर तक पहुंच चुकी है। नदी की तेज धार मंदिर के बेहद करीब पहुंच गई है और मंदिर कटान के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। धार्मिक स्थल के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। इसी कटान में महंत उदित नारायण और उनकी पत्नी की समाधि भी नदी में समा चुकी है। ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ मिट्टी का कटाव नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक और भावनात्मक विरासत के उजड़ने जैसा है। नदी का रुख अब पशु चिकित्सालय की ओर भी बढ़ रहा है। पशु चिकित्सालय कटान के बेहद करीब पहुंच चुका है। यदि नदी की धार इसी गति से आगे बढ़ती रही तो आने वाले समय में सरकारी भवन भी इसकी चपेट में आ सकता है। इससे ग्रामीणों को पशुओं के इलाज और सरकारी पशु चिकित्सा सेवाओं को लेकर भी चिंता सताने लगी है। लगातार बढ़ते कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड और तहसील प्रशासन की ओर से नदी की धार का रुख मोड़ने और तट को सुरक्षित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कटान वाले स्थानों पर बचाव कार्य कराए जा रहे हैं और नदी की धारा को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न इंतजाम किए जा रहे हैं। हालांकि सरयू-घाघरा की तेज और उफनती धारा के सामने कई बार किए जा रहे इंतजाम भी टिक नहीं पा रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि नदी जिस तेजी से जमीन को काट रही है, उसके मुकाबले बचाव कार्य नाकाफी साबित हो रहे हैं। देखते ही देखते बड़े-बड़े हिस्से नदी में समा जा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान पर तत्काल प्रभावी नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले दिनों में और बड़ी संख्या में घर, खेत और सरकारी भवन इसकी जद में आ सकते हैं। बाढ़ और कटान ने ग्रामीणों की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दी है। जिन घरों के आसपास नदी का पानी और कटान पहुंच चुका है, वहां परिवार दिन-रात अपना सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में लगे हैं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं। ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि नदी का अगला निशाना कौन सा घर या खेत होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। कई परिवारों ने अपने वर्षों पुराने आशियाने को आंखों के सामने टूटते देखा है। घर उजड़ने के बाद अब उनके सामने रहने, खाने और अपने जरूरी सामान को सुरक्षित रखने की चुनौती है। हेतमापुर क्षेत्र में लगातार बिगड़ते हालात के बीच ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन की ओर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कटान को रोकने के लिए युद्धस्तर पर स्थायी और प्रभावी इंतजाम किए जाने की जरूरत है। केवल अस्थायी बचाव कार्यों से नदी के रौद्र रूप को रोक पाना मुश्किल साबित हो रहा है। सरयू-घाघरा की तेज धारा लगातार जमीन को अपने साथ समेटती जा रही है। खेतों के बाद घर, धार्मिक स्थल और सरकारी भवन तक खतरे की जद में पहुंच चुके हैं।
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    कोई देख रेख नहीं हे सब रुपया अधिकारी खाए गए हम बेघर होई गेन 
सूरतगंज (बाराबंकी)। सरयू-घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही हेतमापुर क्षेत्र में हालात लगातार भयावह होते जा रहे हैं। नदी की तेज धारा अब सिर्फ खेतों और तटवर्ती इलाकों को ही नहीं निगल रही, बल्कि आबादी और धार्मिक स्थलों तक पहुंच चुकी है। तो उधर सुंदरनगर, बेलहारी, भलाईपुर, बाबापुरवा, ललपुरवा, कोड़री, सरसंडा समेत दर्जनों गांव भीषण बाढ़ के पानी से घिरे नदी के लगातार बदलते रुख से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों के मुताबिक अब तक हजारों बीघा कृषि भूमि नदी में समा चुकी है, जबकि करीब 50 घर भी कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। कई परिवारों के सामने अब सिर छिपाने के लिए सुरक्षित जगह तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है। हालात यह हैं कि कुछ ग्रामीण अपने आशियाने को खुद तोड़कर उसमें रखा सामान निकाल रहे हैं, ताकि नदी की धार में घर और सामान दोनों न बह जाएं। कोई परिवार सामान लेकर बाढ़ राहत केंद्र की ओर जा रहा है तो कोई अपने नाते-रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर है।
मंदिर के अस्तित्व पर भी संकट
कटान की मार अब बाबा नारायण दास जी महाराज की तपोस्थली मंदिर तक पहुंच चुकी है। नदी की तेज धार मंदिर के बेहद करीब पहुंच गई है और मंदिर कटान के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। धार्मिक स्थल के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। इसी कटान में महंत उदित नारायण और उनकी पत्नी की समाधि भी नदी में समा चुकी है। ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ मिट्टी का कटाव नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक और भावनात्मक विरासत के उजड़ने जैसा है। नदी का रुख अब पशु चिकित्सालय की ओर भी बढ़ रहा है। पशु चिकित्सालय कटान के बेहद करीब पहुंच चुका है। यदि नदी की धार इसी गति से आगे बढ़ती रही तो आने वाले समय में सरकारी भवन भी इसकी चपेट में आ सकता है। इससे ग्रामीणों को पशुओं के इलाज और सरकारी पशु चिकित्सा सेवाओं को लेकर भी चिंता सताने लगी है। लगातार बढ़ते कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड और तहसील प्रशासन की ओर से नदी की धार का रुख मोड़ने और तट को सुरक्षित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कटान वाले स्थानों पर बचाव कार्य कराए जा रहे हैं और नदी की धारा को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न इंतजाम किए जा रहे हैं। हालांकि सरयू-घाघरा की तेज और उफनती धारा के सामने कई बार किए जा रहे इंतजाम भी टिक नहीं पा रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि नदी जिस तेजी से जमीन को काट रही है, उसके मुकाबले बचाव कार्य नाकाफी साबित हो रहे हैं। देखते ही देखते बड़े-बड़े हिस्से नदी में समा जा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान पर तत्काल प्रभावी नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले दिनों में और बड़ी संख्या में घर, खेत और सरकारी भवन इसकी जद में आ सकते हैं। बाढ़ और कटान ने ग्रामीणों की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दी है। जिन घरों के आसपास नदी का पानी और कटान पहुंच चुका है, वहां परिवार दिन-रात अपना सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में लगे हैं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं। ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि नदी का अगला निशाना कौन सा घर या खेत होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। कई परिवारों ने अपने वर्षों पुराने आशियाने को आंखों के सामने टूटते देखा है। घर उजड़ने के बाद अब उनके सामने रहने, खाने और अपने जरूरी सामान को सुरक्षित रखने की चुनौती है। हेतमापुर क्षेत्र में लगातार बिगड़ते हालात के बीच ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन की ओर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कटान को रोकने के लिए युद्धस्तर पर स्थायी और प्रभावी इंतजाम किए जाने की जरूरत है। केवल अस्थायी बचाव कार्यों से नदी के रौद्र रूप को रोक पाना मुश्किल साबित हो रहा है। सरयू-घाघरा की तेज धारा लगातार जमीन को अपने साथ समेटती जा रही है। खेतों के बाद घर, धार्मिक स्थल और सरकारी भवन तक खतरे की जद में पहुंच चुके हैं।
    user_Mohd zaid
    Mohd zaid
    रामनगर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
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