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यह जानकारी सामने आई है कि राजेश बैठा रामपुर से हैं।
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यह जानकारी सामने आई है कि राजेश बैठा रामपुर से हैं।
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- आगरा के वार्ड 39 नामनेर में हुई मूसलाधार बारिश के बाद नगर निगम की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई है। नाला और नालियों की उचित सफाई न होने के कारण नामनेर चौराहे पर भारी जलभराव हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति Tv92News पर मुकेश कुमार की एक खास रिपोर्ट में सामने आई है।1
- सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट में नगर निगम के लोगों पर तीखा हमला बोला गया है। इस पोस्ट में साफ तौर पर यह आरोप लगाया गया है कि नगर निगम वाले लोगों को आम इंसान की कोई फिक्र नहीं है। यह पोस्ट स्पष्ट रूप से आम जनता की अनदेखी के प्रति तीव्र असंतोष व्यक्त करती है और व्यापक ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करती है।1
- यह जानकारी सामने आई है कि राजेश बैठा रामपुर से हैं।1
- आगरा के थाना लोहामंडी पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है, जहाँ उन्होंने एक भाई की हत्या के रहस्य से पर्दा उठाते हुए इसमें शामिल "मिर्ची गैंग" का खुलासा किया है। इस मामले में छोटे भाई ने अपने ही बड़े भाई की हत्या के लिए सुपारी दी थी। पुलिस के खुलासे के अनुसार, यह सुपारी 2 लाख 50 हजार रुपए में "मिर्ची गैंग" को दी गई थी। बताया गया है कि मृतक बड़ा भाई जूते का एक बड़ा व्यापारी था, जिसने अपने छोटे भाई को कारोबार से अलग कर दिया था। कुछ दिन पहले भी इन शातिरों ने व्यापारी की आँखों में मिर्ची डालकर उसे मारने की साजिश रची थी। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने छोटे भाई सहित कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। डीसीपी सिटी अली अब्बास ने एक प्रेस वार्ता के माध्यम से इस पूरी जानकारी को साझा किया।1
- आगरा में ताजमहल के रात्रि दर्शन के दौरान ताज सुरक्षा पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए यलो जोन परिसर में पैदल गश्त की। कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक शिवराज सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम ने पर्यटकों की सुरक्षा, सुविधा और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए यह विशेष अभियान चलाया। इस कदम के साथ, ताज सुरक्षा पुलिस रात्रि दर्शन के लिए पूरी तरह अलर्ट पर है।1
- आगरा के थाना सिकंदरा क्षेत्र में यमुना नदी किनारे, कैलाश मंदिर के पास वृद्ध आश्रम के पीछे स्थित नगला नाथू स्वामी क्षेत्र में कथित अवैध खनन का बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से मिट्टी और बालू निकाली जा रही है। उनका कहना है कि यदि यह खनन वैध अनुमति के बिना हो रहा है, तो यह कानून का उल्लंघन और यमुना नदी तथा पर्यावरण के साथ गंभीर खिलवाड़ है। ग्रामीणों के अनुसार, सामने आए वीडियो में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लगातार खनन सामग्री ढोती दिख रही हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि यदि खनन वैध है तो इसकी अनुमति किसके पास है, और यदि अवैध है तो अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। ग्रामीणों ने बैजनाथ और प्रेमवीर नामक व्यक्तियों की कथित संलिप्तता की आशंका जताई है, हालांकि प्रशासन ने अभी तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नदी किनारे अनियंत्रित खनन से यमुना का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ सकता है, जिससे नदी में गहरे गड्ढे बनने से डूबने और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। इसके साथ ही, नदी के बहाव, भूजल स्तर, कृषि भूमि और आसपास के पर्यावरण पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। भारत में बिना अनुमति नदी, नदी तट और सरकारी भूमि से मिट्टी या बालू निकालना गंभीर अपराध माना जाता है, जिसके लिए खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957, उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत दंड का प्रावधान है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट भी समय-समय पर अवैध खनन रोकने के निर्देश जारी कर चुके हैं, जिसमें वाहनों को जब्त करने, जुर्माना लगाने और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के प्रावधान शामिल हैं। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन, खनन विभाग और पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका मानना है कि यमुना केवल एक नदी नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, पर्यावरण और जीवन का आधार है, और इसके अस्तित्व से खिलवाड़ करने वालों पर कानून का कठोर शिकंजा कसना ही समय की मांग है। यमुना को बचाने के लिए अवैध खनन पर रोक लगाना आवश्यक है, ताकि नदी बचे और पर्यावरण सुरक्षित रहे तथा आने वाली पीढ़ियां भी सुरक्षित रहें।4