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बिजनौर तेज़ रफ्तार अज्ञात वाहन ने मारी बाइक सवार दो लोगो के टक्कर दोनों की मोके पर मौत बिजनौर के झलरा गांव के रहने वाले मृतक हारून व सलमान सड़क हादसा बिजनौर के किरतपुर मे हुआ
HNNK News Sabir
बिजनौर तेज़ रफ्तार अज्ञात वाहन ने मारी बाइक सवार दो लोगो के टक्कर दोनों की मोके पर मौत बिजनौर के झलरा गांव के रहने वाले मृतक हारून व सलमान सड़क हादसा बिजनौर के किरतपुर मे हुआ
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- #दरबारश्रीकैड़ेवालेबाबाजीकादरबार, स्योहारा रोड, धामपुर मौहड़ा श्रीकैड़े वाले बाबा, पूर्व विधायक डॉ इंद्रदेव सिंह जी के द्बारा भंडारा एवं डॉ भूपेन्द्र सिंह चौहान नसीरपुर बनवारी वाले जी ने भी भंडारा कराया, आज रविवार 5 अप्रैल 2026 को1
- Post by वीरेन्द्र अग्रवाल1
- नजीबाबाद रोड पर डीपीएस स्कूल के पास भीषण हादसा दो गाड़ियों की आमने-सामने जोरदार टक्कर। टक्कर के बाद एक गाड़ी में लगी आग मौके पर मची अफरा-तफरी। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग पर पाया काबू। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को निकाला गया घायलों को जिला अस्पताल किया गया रेफर। दो घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही।1
- जनपद के किरतपुर थाना क्षेत्रान्तर्गत ग्राम आलोपुर निवासी एक व्यक्ति की कीटनाशक का सेवन कर लेने से मृत्यु हो जाने पर की जा रही पुलिस कार्यवाही के संबंध में क्षेत्राधिकारी नगर जनपद बिजनौर द्वारा बताया गया।1
- सोशल मीडिया पर जो ये मामला संज्ञान मैं आया है बहुत पीड़ा दायक है. इसने मेरे दिल को झकझोर कर रख दिया. इन लोगों को किसने हक़ दिया किसी के बच्चों को इस तरीके से मारा जाये. इनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाये. अभी और रिमांड पर लिया जाये और विभिन्न धाराओं मैं इनका चालान करना चाहिये और ज़मानत नहीं होनी चाहिये. मदरसों को अपने बाप का राज समझ रखा है. मेरी उच्च अधिकारीयों से निवेदन है की इनकी खातिर दारी और अच्छे से करनी चाहिये. धन्यवाद. भीम वार्ता संवाददाता जिला संगठन मंत्री राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा समिति.1
- प्रशासन के रोकथाम और कार्रवाई के तमाम दावों के बावजूद निषिद्ध क्षेत्र हरिद्वार में धड़ल्ले से शराब की स्मगलिंग हो रही है।आज तड़के रोड़ी बेलवाला क्षेत्र से आबकारी विभाग ने हरियाणा से दारु की ढुलाई कर रही एक कार को पकड़ा।कार के अंदर से 45 से अधिक पेटी रायल स्टैग की बोतलें बरामद हुई। आबकारी विभाग को लगातार सूचना मिल रही थी कि हरिद्वार में हरियाणा से शराब की अवैध आपूर्ति हो रही है। जिसके बाद आज सुबह करीब तीन बजे रोड़ी बेलवाला से एक लाल रंग की लग्जरी कार को संदेह के आधार पर रोका गया।कार एक युवक चला रहा था जबकि उसके साथ एक महिला बैठी थी।कार रोकने पर आबकारी विभाग का संदेह सही निकला और कार में ड्राइवर की पिछली सीट से लेकर बोनट तक ठसाठस शराब भरी हुई मिली।कार के अंदर दो तीन तरह की नेम प्लेट भी बरामद हुई जिससे संदेह है कि धंधा शातिराना ढंग से लंबे समय से किया जा रहा था। पुछताछ में युवक ने बताया कि वह सोनीपत से शराब लेकर आया था। जिसके बाद आबकारी विभाग युवक के स्थानीय संपर्क की पहचान करने में जुटा है। आबकारी विभाग द्वारा हरकी पैड़ी के निकट इतनी मात्रा में शराब के पकड़ने से पुलिस के शराब की तस्करी रोकने के दावों की कलई खुल गई है। (-कुमार दुष्यंत)1
- Post by वीरेन्द्र अग्रवाल1
- ओवरलोड डबल ट्राली ट्रैक्टर पर कार्रवाई, खनन परिवहन पर उठे बड़े सवाल धामपुर धामपुर — रिपोर्ट: पंकज कुमार दक्ष नगर क्षेत्र में मिट्टी खनन एवं उसके परिवहन को लेकर शुक्रवार सायंकाल बड़ी कार्रवाई सामने आई। आरएसएम तिराहा पर वाहन चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस ने मिट्टी से भरी डबल ट्रैक्टर-ट्राली को रोककर जांच की। जांच में ट्रैक्टर चालक वैध ट्रांसपोर्ट परमिशन/रवन्ना प्रस्तुत नहीं कर सका और ट्राली ओवरलोड पाई गई, जिस पर पुलिस ने 10 हजार रुपये का चालान कर दिया। मौके पर चालक ने बताया कि क्षेत्र में कई ट्रैक्टर ट्रालियां एक ही स्थान से मिट्टी उठाकर एक ही स्थान पर डंप कर रही हैं। वहीं जानकारी यह भी मिली कि खुदाई जेसीबी मशीन से की जा रही है और मिट्टी डालने का कार्य भी मशीनों से कराया जा रहा है। ट्रैफिक टीआई दरोगा ने चालक को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ट्रैक्टर ट्राली दोबारा इसी प्रकार ओवरलोड या बिना रवन्ना के चलती मिली तो वाहन को सील करने की कार्रवाई की जाएगी। खनन अनुमति का विवरण (प्राप्त दस्तावेज़ के आधार पर) खनन का प्रकार: मिट्टी स्वीकृत मात्रा: लगभग 100 घन मीटर अनुमति अवधि: 15 दिन प्रारंभ तिथि: 30-03-2026 समाप्ति तिथि: 13-04-2026 स्थान: धामपुर क्षेत्र का निर्धारित गाटा महत्वपूर्ण बात: प्रस्तुत दस्तावेज़ में परिवहन से संबंधित विवरण जैसे MM-11/ ई-रवन्ना या वाहनों का स्पष्ट उल्लेख नहीं पाया गया। फिलहाल यह मामला जांच का विषय बन गया है कि खनन अनुमति की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं। संबंधित विभागों द्वारा आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है।2
- मां गंगा की गोद में समा गए दो दोस्त, हरिद्वार में गंगा स्नान बना मातम, पत्नियों की चीखों से दहल उठा घाट मां गंगा की गोद में समा गए दो दोस्त हरिद्वार में गंगा स्नान बना मातम, पत्नियों की चीखों से दहल उठा घाट असुरक्षित घाट, टूटी सीढ़ियां और देर से पहुंची एंबुलेंस… दो परिवारों के बुझ गए जीवन के दीप स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से धर्मनगरी हरिद्वार में पवित्र गंगा नदी के तट पर सोमवार सुबह ऐसा हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। आस्था और श्रद्धा से गंगा स्नान करने आए दो मित्र गंगा की तेज धारा में समा गए, और देखते ही देखते दो हंसते-खेलते परिवारों के जीवन में ऐसा अंधेरा छा गया, जिसे शायद कभी मिटाया नहीं जा सकेगा। यह दर्दनाक हादसा भूपतवाला ठोकर नंबर‑1 के कच्चे और असुरक्षित घाट पर हुआ, जहां सुरक्षा के नाम पर न सीढ़ियां सही हैं, न जंजीरें और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। दोस्ती निभाने उतरा मित्र… और दोनों ने खो दी जिंदगी मृतकों की पहचान बृजेश कुमार त्रिपाठी (43) पुत्र राजनाथ त्रिपाठी निवासी गाजियाबाद और उनके मित्र सचिन त्यागी (39) पुत्र जगत सिंह त्यागी के रूप में हुई है। दोनों अपने परिवारों के साथ हरिद्वार घूमने आए थे और सप्त सरोवर क्षेत्र के पास ठहरे हुए थे। सुबह श्रद्धा और भक्ति के साथ दोनों गंगा स्नान करने के लिए घाट पर पहुंचे। बताया जाता है कि जब बृजेश त्रिपाठी गंगा में स्नान कर रहे थे, तभी अचानक उनका पैर फिसल गया और वह गहराई में चले गए। अपने मित्र को डूबता देख सचिन त्यागी तुरंत उन्हें बचाने के लिए गंगा में उतर गए। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था… सचिन को तैरना नहीं आता था। कुछ ही क्षणों में दोनों मित्र गंगा की तेज धारा में समा गए। “बृजेश उठो… बबुआ उठो…”—पत्नी की चीखों ने दहला दिया घाट घटना की सूचना मिलते ही जल पुलिस मौके पर पहुंची और गंगा में खोज अभियान शुरू किया। एक जवान ऑक्सीजन सिलेंडर बांधकर गंगा की बर्फ जैसी ठंडी धारा में बार-बार डुबकी लगा रहा था। ठंड के कारण उसके हाथ-पैर कांप रहे थे, लेकिन वह लगातार डूबे लोगों को ढूंढने की कोशिश करता रहा। करीब 20-25 मिनट की मशक्कत के बाद पहला शव गंगा से बाहर निकाला गया। जैसे ही शव किनारे लाया गया, मृतक की पत्नी अपने पति से लिपट गई और फूट-फूट कर रोते हुए चिल्लाने लगी— एक महिला डॉक्टर ने मौके पर ही सीपीआर देकर उसकी सांस वापस लाने की कोशिश की, लेकिन कोई चमत्कार नहीं हुआ। दूसरी पत्नी की पुकार—“प्लीज मेरे पति को भी ढूंढो…” इधर दूसरी महिला अपने पति को ढूंढने के लिए जल पुलिस से हाथ जोड़कर विनती कर रही थी— “भैया… प्लीज उंनको भी जल्दी ढूंढो…” जल पुलिस के जवान फिर गंगा में कूद पड़े। करीब 20-25 मिनट बाद सचिन त्यागी का शव भी गंगा से बाहर निकाला गया। दोनों पत्नियों की चीख-पुकार, रोते-बिलखते बच्चे और गम में डूबा माहौल… घाट पर मौजूद हर व्यक्ति को अंदर तक झकझोर रहा था। “बृजेश… उठो… बबुआ उठो… कोई डॉक्टर बुलाओ… एंबुलेंस बुलाओ…” उसकी चीखें सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। एंबुलेंस की देरी ने बढ़ाया दर्द सबसे बड़ा सवाल उस समय खड़ा हुआ जब सूचना मिलने के बावजूद 108 एंबुलेंस काफी देर तक मौके पर नहीं पहुंची। पहला शव निकलने के लगभग 25 मिनट तक घाट और सड़क पर पड़ा रहा, जबकि परिवार बार-बार चिल्ला रहा था— “एंबुलेंस बुलाओ… जल्दी अस्पताल ले चलो…” लोगों का कहना था कि यदि समय पर एंबुलेंस पहुंच जाती और तुरंत अस्पताल ले जाया जाता, तो शायद जीवन बचाने की थोड़ी उम्मीद बन सकती थी। आखिरकार दोनों शवों को जिला अस्पताल हरिद्वार ले जाया गया। एक और युवक गंगा में लापता इस घटना के बीच यह भी जानकारी मिली कि सनिवार शाम परमार्थ निकेतन घाट के पास भी 26 वर्श क एक युवक गंगा में डूब गया था। युवक की पहचान नवीन पाठक पुत्र भवन पाठक निवासी बागेश्वर के रूप में हुई है। समाचार लिखे जाने तक जल पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी। टूटे घाट, गायब सुरक्षा… हादसों को न्योता स्थानीय लोगों का कहना है कि भूपतवाला और सप्त सरोवर क्षेत्र के कई स्नान घाट बेहद खराब हालत में हैं। सीढ़ियां टूटी हुई हैं लोहे की जंजीरें और एंगल जंग लगकर टूट चुके हैं कई घाटों पर चेतावनी बोर्ड तक नहीं हैं जल पुलिस की स्थायी तैनाती नहीं है लोग मजबूरी में पत्थरों के सहारे गंगा में उतरते हैं और फिसलकर हादसे का शिकार हो जाते हैं।  स्थानीय लोगों की चेतावनी फिर हुई सच स्थानीय निवासी सत्य प्रकाश का कहना है कि कई बार प्रशासनिक बैठकों में घाटों की सुरक्षा व्यवस्था सुधारने और जल पुलिस की तैनाती की मांग उठाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि यदि प्रशासन इन घाटों को सुरक्षित नहीं बना सकता, तो ऐसे घाटों को बंद कर देना चाहिए।  दो परिवारों के बुझ गए घर के दीप इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है— अब उन छोटे-छोटे बच्चों का क्या होगा, जो अपने पिता के लौटने का इंतजार कर रहे थे? उन पत्नियों का क्या होगा, जिनके जीवन का सहारा हमेशा के लिए छिन गया? गंगा किनारे यह दृश्य हर किसी को यही सोचने पर मजबूर कर रहा था कि एक परिवार का मुखिया चला जाए तो उसका घर कैसे चलता होगा… निष्कर्ष हरिद्वार में गंगा स्नान केवल आस्था नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी प्रश्न बन चुका है। यदि प्रशासन समय रहते घाटों की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था और आपात सेवाओं को मजबूत नहीं करता, तो ऐसी दर्दनाक घटनाएं भविष्य में भी दोहराई जाती रहेंगी। मां गंगा के तट पर उमड़ी श्रद्धा की भीड़ को सुरक्षा की भी उतनी ही आवश्यकता है, जितनी आस्था की। ✍️ स्वतंत्र पत्रकार — रामेश्वर गौड़4