मापदंडों पर सवाल: वार्ड 08 , 09 और 10 में अधूरा विद्युत विस्तार, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से गहराया सवाल—आखिर ये खामोशी क्यों? नगर पंचायत द्वारा जारी कार्यादेश के तहत वार्ड क्रमांक 08, 09 और 10 में ट्यूबलर विद्युत पोल एवं तार विस्तार का कार्य स्वीकृत हुआ था, जिसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करना था। लगभग 8.36 लाख रुपये की लागत वाले इस कार्य को लेकर अब जमीनी स्तर पर गंभीर विसंगतियां सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वार्ड 08 , 09 और 10 के कई हिस्सों में अब तक पोल और तार नहीं लगाए गए हैं, जबकि इन्हीं क्षेत्रों में विस्तार की सबसे अधिक आवश्यकता थी। इससे साफ संकेत मिलता है कि कार्य न तो निर्धारित स्थानों पर हुआ और न ही वास्तविक जरूरत के आधार पर प्राथमिकता तय की गई। परिणामस्वरूप, नागरिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। मामले में संबंधित विभाग के अधिकारी का कहना है कि संख्यात्मक रूप से कार्य पूर्ण कर लिया गया है, यहीं से पूरा विवाद खड़ा होता है—यदि कार्य स्थल बदले गए, तो क्या इसके लिए सक्षम स्तर से स्वीकृति ली गई? क्या यह बदलाव प्राक्कलन के अनुरूप था या फिर ठेकेदार की सुविधा के अनुसार निर्णय लिए गए? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कार्य स्वीकृत प्राक्कलन और निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुरूप किया गया, या इनकी अनदेखी कर केवल औपचारिकता निभा दी गई। क्या संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्य का नियमित निरीक्षण और मूल्यांकन किया गया, या पूरी प्रक्रिया ठेकेदार की मंशा पर ही चलती रही? इस पूरे मामले में जनप्रतिनिधियों, विशेषकर वार्ड पार्षदों की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। जब उनके क्षेत्र में कार्य अधूरा है, तो क्या उन्होंने इस पर आपत्ति दर्ज कराई? क्या उन्होंने अधिकारियों से जवाब मांगा? या फिर यह चुप्पी किसी दबाव या समझौते का परिणाम है? नागरिकों के बीच इन सवालों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। स्थिति यह है कि वार्ड 08, 09 और 10 के कई हिस्सों में आज भी अपेक्षित विद्युत विस्तार नहीं हो पाया है और लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इससे यह आशंका भी गहराती है कि कहीं कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर वास्तविकता को नजरअंदाज तो नहीं किया गया। अब यह मुद्दा केवल अधूरे कार्य का नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित से जुड़ा बन चुका है। जनता जानना चाहती है कि आखिर उनके हिस्से का विकास क्यों रोका गया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। निगाहें अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं—चुप्पी या कार्रवाई।
मापदंडों पर सवाल: वार्ड 08 , 09 और 10 में अधूरा विद्युत विस्तार, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से गहराया सवाल—आखिर ये खामोशी क्यों? नगर पंचायत द्वारा जारी कार्यादेश के तहत वार्ड क्रमांक 08, 09 और 10 में ट्यूबलर विद्युत पोल एवं तार विस्तार का कार्य स्वीकृत हुआ था, जिसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करना था। लगभग 8.36 लाख रुपये की लागत वाले इस कार्य को लेकर अब जमीनी स्तर पर गंभीर विसंगतियां सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वार्ड 08 , 09 और 10 के कई हिस्सों में अब तक पोल और तार नहीं लगाए गए हैं, जबकि इन्हीं क्षेत्रों में विस्तार की सबसे अधिक आवश्यकता थी। इससे साफ संकेत मिलता है कि कार्य न तो निर्धारित स्थानों पर हुआ और न ही वास्तविक जरूरत के आधार पर प्राथमिकता तय की गई। परिणामस्वरूप, नागरिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। मामले में संबंधित विभाग के अधिकारी का कहना है कि संख्यात्मक रूप से कार्य पूर्ण कर लिया गया है, यहीं से पूरा विवाद खड़ा होता है—यदि कार्य स्थल बदले गए, तो क्या इसके लिए सक्षम स्तर से स्वीकृति ली गई? क्या यह बदलाव प्राक्कलन के अनुरूप था या फिर ठेकेदार की सुविधा के अनुसार निर्णय लिए गए? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कार्य स्वीकृत प्राक्कलन और निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुरूप किया गया, या इनकी अनदेखी कर केवल औपचारिकता निभा दी गई। क्या संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्य का नियमित निरीक्षण और मूल्यांकन किया गया, या पूरी प्रक्रिया ठेकेदार की मंशा पर ही चलती रही? इस पूरे मामले में जनप्रतिनिधियों, विशेषकर वार्ड पार्षदों की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। जब उनके क्षेत्र में कार्य अधूरा है, तो क्या उन्होंने इस पर आपत्ति दर्ज कराई? क्या उन्होंने अधिकारियों से जवाब मांगा? या फिर यह चुप्पी किसी दबाव या समझौते का परिणाम है? नागरिकों के बीच इन सवालों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। स्थिति यह है कि वार्ड 08, 09 और 10 के कई हिस्सों में आज भी अपेक्षित विद्युत विस्तार नहीं हो पाया है और लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इससे यह आशंका भी गहराती है कि कहीं कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर वास्तविकता को नजरअंदाज तो नहीं किया गया। अब यह मुद्दा केवल अधूरे कार्य का नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित से जुड़ा बन चुका है। जनता जानना चाहती है कि आखिर उनके हिस्से का विकास क्यों रोका गया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। निगाहें अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं—चुप्पी या कार्रवाई।
- धरमजयगढ़ से सटे भवरखोल के पास बीच सड़क पर एक दुर्लभ गिरगिट पाए जाने से इलाके में हलचल मच गई। किसी अनजाने भय के कारण राह से गुजर रहे कुछ ग्रामीण उसे मारने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन समय रहते हस्तक्षेप ने एक अनोखे जीव की जान बचा ली। मौके पर मौजूद धरमजयगढ़ के दो मीडिया कर्मियों ने लोगों को समझाइश दी और गिरगिट को नुकसान न पहुंचाने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि इस दुर्लभ जीव को सुरक्षित रूप से वन विभाग को सौंपा जाए। समझाने के बाद ग्रामीण इस बात पर सहमत हो गए। इसके बाद दोनों पत्रकारों ने सावधानीपूर्वक गिरगिट को पकड़कर वन विभाग के कार्यालय लाया, जहां उसे धरमजयगढ़ परिक्षेत्र के उप वन परिक्षेत्राधिकारी शेख अकरम परवेज को सौंप दिया गया। वन विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए हाथी मित्र दल के जावेद , अजय यादव और शिवा सोनी के सहयोग से गिरगिट को उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया। इस घटना ने यह संदेश दिया कि जागरूकता और संवेदनशीलता से न केवल वन्यजीवों की रक्षा की जा सकती है, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच संतुलन भी बनाए रखा जा सकता है।1
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- कांसाबेल के बेलाघाट जंगल में भीषण आग हजारों पेड़-पौधे जलकर राख प्रकृति को लगी ये आग सिर्फ जंगल नहीं, हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी जला रही है… 🙏 आइए, हम सब मिलकर पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी निभाएं जंगल बचाओ… जीवन बचाओ #Jashpur #Kansabel #ForestFire #SaveNature #BreakingNews Jashpur Times Jashpur District Administration1
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