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जहानाबाद जिले में सिपाही भर्ती परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न होने के तुरंत बाद, उम्मीदवारों के बीच अपने घरों को वापस लौटने की भारी भीड़ देखी गई। परीक्षा खत्म होते ही स्टेशन पर यात्रियों की काफी तादाद में जुटान हो गई, जिससे घर वापसी के लिए एक तरह की होड़ मच गई।
Pawan Kumar
जहानाबाद जिले में सिपाही भर्ती परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न होने के तुरंत बाद, उम्मीदवारों के बीच अपने घरों को वापस लौटने की भारी भीड़ देखी गई। परीक्षा खत्म होते ही स्टेशन पर यात्रियों की काफी तादाद में जुटान हो गई, जिससे घर वापसी के लिए एक तरह की होड़ मच गई।
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- मसौढ़ी में सैकड़ों युवाओं और स्थानीय लोगों ने भरत तिवारी की कथित फर्जी एनकाउंटर में मौत के विरोध में एक विशाल कैंडल मार्च निकाला। अमर शहीद बीपीन सिंह फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित यह मार्च कपूरी चौक से शुरू होकर तारेगना स्टेशन तक पहुंचा। इस दौरान, प्रदर्शनकारियों ने भरत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की। उन्होंने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई। इस कार्यक्रम में रणविजय सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या में युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।1
- हिलसा के इस्लामपुर में, डीएसपी कुमार ऋषि राज ने मुहर्रम पर्व के संबंध में एक सीधा संदेश जारी किया है।1
- सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले पाँच जालसाजों को पुलिस ने गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है। इन जालसाजों के पास से 22 ब्लैंक चेक, विभिन्न मार्कशीट और एडमिट कार्ड बरामद किए गए हैं।1
- कोयला कारोबारी मुन्ना सिंह ने संतोष अग्रवाल की चल-अचल संपत्ति का विस्तृत विवरण जारी किया है। मुन्ना सिंह ने दावा किया है कि संतोष अग्रवाल द्वारा निर्मित सभी मकान और अन्य संपत्तियाँ, उनके लिए गए 4 करोड़ 61 लाख रुपये के कर्ज से ही बनाई गई हैं। यह मामला लगातार आठवें दिन भी जारी रहा, जहाँ मुन्ना सिंह संतोष अग्रवाल का बेसब्री से इंतजार करते रहे।1
- जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने भोजपुर जिले के शाहपुर में कथित पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। परिजनों के घर आयोजित 'श्रद्धांजलि सह महापंचायत' में शामिल हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि प्रशासन इस पूरे मामले को 'मिस-हैंडल' कर रहा है और जब समाज का दबाव बढ़ता है, तो सरकारें छोटे-मोटे अधिकारियों को निलंबित कर खुद को बचाने का प्रयास करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भरत तिवारी के परिवार को सिर्फ मुआवजा या नौकरी नहीं, बल्कि 'असली न्याय' चाहिए। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि केवल थानेदार या डीएसपी पर कार्रवाई से न्याय नहीं होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि पटना में बैठकर उस युवक को मारने का आदेश किसने दिया था, और मांग की कि हत्या की साजिश में शामिल 'मास्टरमाइंड्स' पर कार्रवाई होनी चाहिए, जिनके इशारे पर यह एनकाउंटर हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हालिया बयान को भी 'असंवेदनशील' करार देते हुए कहा कि पुलिसिंग का अर्थ समाज की रक्षा करना है, न कि गोली चलाना। प्रशांत किशोर ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाए: क्या न्यायिक जांच में गृह मंत्री की भूमिका की जांच होगी? क्या पटना से आदेश देने वाले एसटीएफ अधिकारी पर कार्रवाई होगी? और क्या गोली चलाने की अनुमति देने वाले मजिस्ट्रेट को जवाबदेह बनाया जाएगा? प्रशांत किशोर ने भरत भूषण तिवारी को एक 'जननायक' बताया, जिन्होंने जमुनिया गांव के 80 विस्थापित परिवारों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया था, विशेषकर उन्हें बिजली और पानी की सुविधा दिलाने के लिए। उन्होंने कहा कि उनका यह संघर्ष ही शायद उनकी 'गलती' बन गया। प्रशांत किशोर ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं, बल्कि पूरा समाज और जन सुराज उनके साथ खड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह मामला अब केवल एक एनकाउंटर तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और सत्ता की जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर उभर रहा है। प्रशांत किशोर भोजपुर एनकाउंटर पर 'आर-पार के मूड में' हैं, और उन्होंने कहा कि 'रक्षक जब भक्षक बन जाए तो समाज को खड़ा होना ही होगा'।1
- जहानाबाद जिले में बुधवार को सिपाही भर्ती परीक्षा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और सख्त निगरानी के बीच शांतिपूर्ण माहौल में शुरू हुई। इस परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और कदाचारमुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा एवं प्रशासनिक इंतजाम किए हैं। जिले भर में कुल 8 परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा के दौरान सभी केंद्रों के प्रवेश द्वार निर्धारित समय के बाद बंद कर दिए गए और अभ्यर्थियों की सघन जांच की गई। प्रवेश से पहले उनके जूते उतरवाकर तलाशी ली गई तथा पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही उन्हें केंद्र में प्रवेश दिया गया। मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और निजी पेन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, जबकि ओएमआर शीट भरने के लिए आवश्यक पेन परीक्षा केंद्रों पर ही उपलब्ध कराए गए। प्रत्येक अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन किया गया और ई-प्रवेश पत्र तथा फोटो पहचान पत्र का मिलान सुनिश्चित कर ही प्रवेश दिया गया। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर दंडाधिकारी और पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए हैं, साथ ही परीक्षा प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। संचार माध्यमों के दुरुपयोग को रोकने के लिए जैमर भी लगाए गए हैं, और सभी परीक्षा केंद्रों के 500 गज की परिधि में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लागू कर दी गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि फर्जी अभ्यर्थी या किसी अन्य व्यक्ति के स्थान पर परीक्षा देने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी और जेल भेजने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।1
- नालंदा के इस्लामपुर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय बेशवक से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में विद्यालय के प्रधानाध्यापक अजय रजक पर छात्रों और अभिभावकों से ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) तथा अन्य शैक्षणिक कार्यों के नाम पर अवैध रूप से पैसे वसूलने का आरोप लगाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, यह वायरल वीडियो लगभग दस दिन पुराना बताया जा रहा है, जिसमें एक व्यक्ति अपने घर पर बैठकर टीसी से संबंधित कार्य करता दिखाई दे रहा है। इसी दौरान पैसे के लेन-देन को लेकर बातचीत भी रिकॉर्ड हुई है, जिसमें 100, 200 और 500 रुपये तक की राशि का उल्लेख सुनाई देता है। आरोप है कि छात्रों और अभिभावकों से टीसी जारी करने तथा प्रैक्टिकल समेत अन्य शैक्षणिक कार्यों के बदले पैसों की मांग की जा रही थी। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में चर्चा का माहौल गर्म है, और अभिभावकों व स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सरकारी विद्यालयों में भी प्रमाण पत्र और शैक्षणिक कार्यों के लिए पैसे वसूले जाने पर यह शिक्षा के अधिकार और सरकारी व्यवस्था की मूल मंशा के विपरीत है। हालांकि, आरोपों के घेरे में आए प्रधानाध्यापक अजय रजक ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि वायरल वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं, और टीसी या किसी अन्य शैक्षणिक कार्य के नाम पर पैसे लेने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। इस घटना ने शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और यदि आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल, वायरल वीडियो की सत्यता और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और यह मामला अभी जांच के दायरे में है। सभी की निगाहें अब विभागीय जांच पर टिकी हैं, जिससे पूरे मामले का सच सामने आ सके और उचित कार्रवाई हो।1
- सीमेंट की आड़ में शराब का काला कारोबार चलाया जा रहा था, जिसका भंडाफोड़ किया गया है। इस कार्रवाई के दौरान एक ड्राइवर को गिरफ्तार किया गया है, जिसके पास से ₹48 लाख की शराब की खेप बरामद हुई।1