नालंदा के इस्लामपुर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय बेशवक से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में विद्यालय के प्रधानाध्यापक अजय रजक पर छात्रों और अभिभावकों से ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) तथा अन्य शैक्षणिक कार्यों के नाम पर अवैध रूप से पैसे वसूलने का आरोप लगाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, यह वायरल वीडियो लगभग दस दिन पुराना बताया जा रहा है, जिसमें एक व्यक्ति अपने घर पर बैठकर टीसी से संबंधित कार्य करता दिखाई दे रहा है। इसी दौरान पैसे के लेन-देन को लेकर बातचीत भी रिकॉर्ड हुई है, जिसमें 100, 200 और 500 रुपये तक की राशि का उल्लेख सुनाई देता है। आरोप है कि छात्रों और अभिभावकों से टीसी जारी करने तथा प्रैक्टिकल समेत अन्य शैक्षणिक कार्यों के बदले पैसों की मांग की जा रही थी। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में चर्चा का माहौल गर्म है, और अभिभावकों व स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सरकारी विद्यालयों में भी प्रमाण पत्र और शैक्षणिक कार्यों के लिए पैसे वसूले जाने पर यह शिक्षा के अधिकार और सरकारी व्यवस्था की मूल मंशा के विपरीत है। हालांकि, आरोपों के घेरे में आए प्रधानाध्यापक अजय रजक ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि वायरल वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं, और टीसी या किसी अन्य शैक्षणिक कार्य के नाम पर पैसे लेने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। इस घटना ने शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और यदि आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल, वायरल वीडियो की सत्यता और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और यह मामला अभी जांच के दायरे में है। सभी की निगाहें अब विभागीय जांच पर टिकी हैं, जिससे पूरे मामले का सच सामने आ सके और उचित कार्रवाई हो।
नालंदा के इस्लामपुर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय बेशवक से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में विद्यालय के प्रधानाध्यापक अजय रजक पर छात्रों और अभिभावकों से ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) तथा अन्य शैक्षणिक कार्यों के नाम पर अवैध रूप से पैसे वसूलने का आरोप लगाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, यह वायरल वीडियो लगभग दस दिन पुराना बताया जा रहा है, जिसमें एक व्यक्ति अपने घर पर बैठकर टीसी से संबंधित कार्य करता दिखाई दे रहा है। इसी दौरान पैसे के लेन-देन को लेकर बातचीत भी रिकॉर्ड हुई है, जिसमें 100, 200 और 500 रुपये तक की राशि का उल्लेख सुनाई देता है। आरोप है कि छात्रों और अभिभावकों से टीसी जारी करने तथा प्रैक्टिकल समेत अन्य शैक्षणिक कार्यों के बदले पैसों की मांग की जा रही थी। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में चर्चा का माहौल गर्म है, और अभिभावकों व स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सरकारी विद्यालयों में भी प्रमाण पत्र और शैक्षणिक कार्यों के लिए पैसे वसूले जाने पर यह शिक्षा के अधिकार और सरकारी व्यवस्था की मूल मंशा के विपरीत है। हालांकि, आरोपों के घेरे में आए प्रधानाध्यापक अजय रजक ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि वायरल वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं, और टीसी या किसी अन्य शैक्षणिक कार्य के नाम पर पैसे लेने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। इस घटना ने शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और यदि आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल, वायरल वीडियो की सत्यता और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और यह मामला अभी जांच के दायरे में है। सभी की निगाहें अब विभागीय जांच पर टिकी हैं, जिससे पूरे मामले का सच सामने आ सके और उचित कार्रवाई हो।
- जहानाबाद जिले में आगामी मुहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए जहानाबाद पुलिस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में बुधवार को पुलिस केंद्र में एक विशेष दंगा नियंत्रण ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की पुलिस बल की क्षमता का परीक्षण करना और विभिन्न सुरक्षा व्यवस्थाओं का अभ्यास कराना था। इस ड्रिल में पुलिस अधीक्षक कोटा किरण कुमार के नेतृत्व में जवानों ने भीड़ नियंत्रण, त्वरित कार्रवाई, सुरक्षा घेराबंदी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने से संबंधित कई महत्वपूर्ण अभ्यास किए। साथ ही, दंगा नियंत्रण में उपयोग होने वाले आधुनिक उपकरणों और रणनीतियों का भी प्रदर्शन किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस अभ्यास का लक्ष्य आपात स्थितियों में पुलिस की प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत करना, विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वय बढ़ाना और बल को संवेदनशील परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार रखना है। अभ्यास के दौरान जवानों ने अनुशासित तरीके से सुरक्षा उपायों का प्रदर्शन किया। पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों और जवानों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और मुहर्रम के दौरान विशेष सतर्कता बरतने पर जोर दिया। पुलिस प्रशासन ने यह भी बताया कि जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, सामाजिक सौहार्द कायम रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसके साथ ही, लोगों से शांति, भाईचारे और सहयोग की भावना बनाए रखने की अपील की गई है।1
- एक चौंकाने वाली घटना में, एक युवक के साथ स्विमिंग पूल में नहाते समय एक अप्रत्याशित हादसा हो गया। नहाते वक्त अचानक एक सांप उसके अंडरवियर के अंदर घुस गया, जिससे युवक बुरी तरह डर गया। इस घटना के कारण युवक की हालत डर के मारे खराब हो गई।1
- 😭🙏जो भगत सिंह के जैसा दहाड़े और शेर के जैसा जिगरा उसके लिए आप लोग क्या-क्या करना चाहते हैं कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं 😭🙏 #facebookviral #trendingpost #BharatTiwari #facebookpost #highlights #foryouシ 😭🙏जो भगत सिंह के जैसा दहाड़े और शेर के जैसा जिगरा उसके लिए आप लोग क्या-क्या करना चाहते हैं कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं 😭🙏 #facebookviral #trendingpost #BharatTiwari #facebookpost #highlights #foryouシ1
- बिहारशरीफ में एक महाआंदोलन का आयोजन किया गया, जिसमें सिंगर सनी गहलोरी जी और अभिषेक पासवान ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान निसार अहमद भी आंदोलन में मौजूद थे। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।1
- मसौढ़ी में सैकड़ों युवाओं और स्थानीय लोगों ने भरत तिवारी की कथित फर्जी एनकाउंटर में मौत के विरोध में एक विशाल कैंडल मार्च निकाला। अमर शहीद बीपीन सिंह फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित यह मार्च कपूरी चौक से शुरू होकर तारेगना स्टेशन तक पहुंचा। इस दौरान, प्रदर्शनकारियों ने भरत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की। उन्होंने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई। इस कार्यक्रम में रणविजय सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या में युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।1
- नालंदा जिले के राजगीर में हुए दोहरे हत्याकांड पर भाकपा (माले) ने पुजारी, पुलिस और अपराधियों की मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है। दीपनगर थाना क्षेत्र के गंजपर निवासी 20 वर्षीय श्रवण पासवान और 31 वर्षीय पिंटू पासवान को झुनकिया बाबा मंदिर परिसर में कथित चोरी के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला गया था। दोनों मृतक राजमिस्त्री मजदूर का काम करते थे, जिनमें श्रवण पासवान अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। भाकपा (माले) के अनुसार, दोनों युवक अपने अन्य साथियों के साथ मेला घूमने गए थे और शौच के लिए मंदिर के पीछे गए थे। इसी दौरान मंदिर से जुड़े लोगों ने उन्हें चोर बताकर पकड़ा और कथित रूप से उनके हाथ-पैर बांधकर बेरहमी से पिटाई की। आरोप है कि उनकी जाति और पहचान पूछने के बाद उन्हें गंभीर रूप से प्रताड़ित किया गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। पार्टी ने आरोप लगाया कि घटना स्थल के समीप पुलिस कैंप होने के बावजूद समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया। घायल युवकों को बाद में पुलिस के हवाले किया गया, जिन्होंने उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा, जहां बाद में दोनों की मृत्यु हो गई। बुधवार को आरा के सांसद और भाकपा (माले) के केंद्रीय कमेटी सदस्य सुदामा प्रसाद ने गंजपर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। इस दौरान उनके साथ भाकपा (माले) के जिला सचिव श्रीनिवास शर्मा, इंकलाबी नौजवान सभा के जिलाध्यक्ष बिरेस कुमार, जिला कमेटी सदस्य अनिल पटेल, सुनील कुमार, फुटपाथ दुकानदार संघ के नेता किशोर साव और राजेश रविदास सहित कई नेता उपस्थित थे। सांसद सुदामा प्रसाद ने दोषियों को कठोर सजा दिलाने और पीड़ित परिवारों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए आंदोलन तेज करने की बात कही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में दलितों, गरीबों और महिलाओं पर हमले बढ़े हैं और अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। भाकपा (माले) ने सरकार से मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, सभी आरोपियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल, संबंधित थाना प्रभारी को बर्खास्त करने और पीड़ित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही, इस मामले की जांच उच्च न्यायालय के सिटिंग जज से कराने की भी मांग की गई है। भाकपा (माले) ने इस झुनकिया बाबा मंदिर दोहरे हत्याकांड के विरोध में 25 जून को बिहारशरीफ में प्रतिवाद मार्च और सभा आयोजित करने की घोषणा की है।1
- नालंदा के इस्लामपुर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय बेशवक से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में विद्यालय के प्रधानाध्यापक अजय रजक पर छात्रों और अभिभावकों से ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) तथा अन्य शैक्षणिक कार्यों के नाम पर अवैध रूप से पैसे वसूलने का आरोप लगाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, यह वायरल वीडियो लगभग दस दिन पुराना बताया जा रहा है, जिसमें एक व्यक्ति अपने घर पर बैठकर टीसी से संबंधित कार्य करता दिखाई दे रहा है। इसी दौरान पैसे के लेन-देन को लेकर बातचीत भी रिकॉर्ड हुई है, जिसमें 100, 200 और 500 रुपये तक की राशि का उल्लेख सुनाई देता है। आरोप है कि छात्रों और अभिभावकों से टीसी जारी करने तथा प्रैक्टिकल समेत अन्य शैक्षणिक कार्यों के बदले पैसों की मांग की जा रही थी। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में चर्चा का माहौल गर्म है, और अभिभावकों व स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सरकारी विद्यालयों में भी प्रमाण पत्र और शैक्षणिक कार्यों के लिए पैसे वसूले जाने पर यह शिक्षा के अधिकार और सरकारी व्यवस्था की मूल मंशा के विपरीत है। हालांकि, आरोपों के घेरे में आए प्रधानाध्यापक अजय रजक ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि वायरल वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं, और टीसी या किसी अन्य शैक्षणिक कार्य के नाम पर पैसे लेने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। इस घटना ने शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और यदि आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल, वायरल वीडियो की सत्यता और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और यह मामला अभी जांच के दायरे में है। सभी की निगाहें अब विभागीय जांच पर टिकी हैं, जिससे पूरे मामले का सच सामने आ सके और उचित कार्रवाई हो।1
- जहानाबाद जिले में बुधवार को सिपाही भर्ती परीक्षा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और सख्त निगरानी के बीच शांतिपूर्ण माहौल में शुरू हुई। इस परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और कदाचारमुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा एवं प्रशासनिक इंतजाम किए हैं। जिले भर में कुल 8 परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा के दौरान सभी केंद्रों के प्रवेश द्वार निर्धारित समय के बाद बंद कर दिए गए और अभ्यर्थियों की सघन जांच की गई। प्रवेश से पहले उनके जूते उतरवाकर तलाशी ली गई तथा पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही उन्हें केंद्र में प्रवेश दिया गया। मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और निजी पेन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, जबकि ओएमआर शीट भरने के लिए आवश्यक पेन परीक्षा केंद्रों पर ही उपलब्ध कराए गए। प्रत्येक अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन किया गया और ई-प्रवेश पत्र तथा फोटो पहचान पत्र का मिलान सुनिश्चित कर ही प्रवेश दिया गया। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर दंडाधिकारी और पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए हैं, साथ ही परीक्षा प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। संचार माध्यमों के दुरुपयोग को रोकने के लिए जैमर भी लगाए गए हैं, और सभी परीक्षा केंद्रों के 500 गज की परिधि में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लागू कर दी गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि फर्जी अभ्यर्थी या किसी अन्य व्यक्ति के स्थान पर परीक्षा देने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी और जेल भेजने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।1
- लखनऊ के विभूतिखंड क्षेत्र में एक महिला के साथ हुई मारपीट की गंभीर आपराधिक घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। विनीत खंड निवासी प्रियांशी गुप्ता ने आरोप लगाया है कि 25 जनवरी 2026 की रात लगभग 12:10 बजे जलवा क्लब, साइबर हाइट्स के ठीक बाहर कुछ युवतियों ने उन्हें कागज़ात लौटाने के बहाने बुलाया और फिर योजनाबद्ध तरीके से बेरहमी से पीटा। इस दौरान न केवल उन्हें मारा-पीटा गया, बल्कि गाली-गलौज करते हुए उनका एक वीडियो भी बनाया गया, जिसके ज़रिए उन्हें बदनाम करने की धमकी दी गई। पीड़िता के अनुसार, आरोपी युवतियों द्वारा पहले भी चोरी, धमकी और नशे की हालत में हिंसा की कई वारदातें की जा चुकी हैं। जलवा क्लब के बाहर देर रात तक खुलेआम नशेबाज़ी और गांजा पीने के वीडियो भी सामने आए हैं, जो क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाते हैं। प्रियांशी गुप्ता का कहना है कि घटना सीसीटीवी में कैद हुई है और 112 पर सूचना दिए जाने के बावजूद अब तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, जिससे पुलिस की भूमिका और कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल उठ रहे हैं।1