लूट के मामले में कार्रवाई पर रोक की बात का ऑडियो वायरल, कोतवाली टीआई पर उठे गंभीर सवाल पीड़ित पत्रकार से कथित बातचीत में ज्ञापन देने पर नाराजगी जताने का आरोप टीकमगढ़ 19 अगस्त पत्रकार लोकेन्द्र सिंह परमार के साथ हुई कथित मारपीट और लूट के गंभीर मामले में अब कोतवाली थाना प्रभारी रविभूषण पाठक से जुड़ा एक कथित ऑडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल बताए जा रहे इस ऑडियो में थाना प्रभारी और पीड़ित पत्रकार के बीच बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। यह चैनल वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं करता है। बताया जा रहा है कि, वायरल ऑडियो में थाना प्रभारी कथित रूप से पत्रकार लोकेन्द्र सिंह परमार से इस बात को लेकर सवाल कर रहे हैं कि उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन क्यों दिया। बातचीत के दौरान कथित तौर पर यह भी कहा जा रहा है कि “तुमने ज्ञापन दिया है तो ठीक है, अब मैंने कार्रवाई करने पर रोक लगवा दी है।” यदि वायरल ऑडियो में कही जा रही बातें वास्तविक और प्रमाणित पाई जाती हैं, तो यह पूरे मामले की पुलिस कार्रवाई को लेकर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर सकती हैं। गौरतलब है कि लोकेन्द्र सिंह परमार के साथ हुई घटना के संबंध में शहर कोतवाली में एफआईआर क्रमांक 471 दिनांक 03 अगस्त 2026 दर्ज होने की बात सामने आई है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है और दूसरी ओर कथित रूप से राजीनामे के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसी को लेकर पत्रकार संगठन द्वारा पुलिस अधीक्षक के नाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की गई थी। ज्ञापन देने पर ही कार्रवाई रोकने की बात क्यों? वायरल ऑडियो ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा कर दिया है कि यदि किसी पीड़ित को अपनी शिकायत पर पुलिस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष ज्ञापन देने का अधिकार है, तो उस ज्ञापन को कार्रवाई रोकने का आधार क्यों बनाया गया? आखिर ऐसा क्या कारण था कि पीड़ित द्वारा वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष अपनी बात रखने के बाद थाना स्तर पर कार्रवाई रोकने की कथित बात सामने आई? यह मामला अब महज एक एफआईआर और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और पीड़ित को न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यदि ऑडियो की जांच में आवाज और बातचीत की पुष्टि होती है तो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि गंभीर आपराधिक प्रकरण में कार्रवाई रोकने की कथित स्थिति आखिर कैसे बनी। पत्रकार संगठन के ज्ञापन के बाद मामला और गरमाया इस मामले को लेकर जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश (जम्प) ने पुलिस अधीक्षक के नाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों की गिरफ्तारी और पत्रकार की सुरक्षा की मांग की थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीर बताते हुए शहर कोतवाली थाना प्रभारी को आवश्यक निर्देश देने तथा आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी कराने का आश्वासन दिया था। अब इसी घटनाक्रम के बीच थाना प्रभारी से जुड़ा कथित ऑडियो वायरल होने से सवाल उठना स्वाभाविक है कि एक ओर वरिष्ठ अधिकारी मामले को गंभीर बताते हुए कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वायरल ऑडियो में कार्रवाई रोकने की बात क्यों कही जा रही है? अभय मौर्य बोले- ऑडियो की निष्पक्ष जांच हो, दोषी मिले तो कार्रवाई तय हो जम्प संगठन के जिलाध्यक्ष अभय मौर्य ने कहा कि पत्रकार के साथ लूट और मारपीट जैसे गंभीर मामले में यदि पुलिस अधिकारी और पीड़ित के बीच हुई कथित बातचीत का ऑडियो सामने आया है तो इसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि “पीड़ित पत्रकार अपनी शिकायत लेकर वरिष्ठ अधिकारी के पास जाता है, यह उसका अधिकार है। यदि उसे ज्ञापन देने पर कार्रवाई रोकने की बात कही गई है तो यह बेहद गंभीर विषय है। ऑडियो की तकनीकी जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारी पर भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि पत्रकारों को डराने या दबाव में लेने के बजाय पुलिस को निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा देना चाहिए। संगठन इस पूरे मामले पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष दोबारा मामला उठाया जाएगा। अब निगाह वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर वायरल ऑडियो की सत्यता और उसमें मौजूद आवाज की प्रमाणिकता जांच का विषय है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि पुलिस प्रशासन इस कथित ऑडियो को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि ऑडियो फर्जी है तो उसकी सच्चाई सामने लाना भी पुलिस की जिम्मेदारी है और यदि बातचीत वास्तविक पाई जाती है तो गंभीर आपराधिक प्रकरण में कार्रवाई रोकने की कथित बात पर जवाबदेही तय करना भी जरूरी होगा। फिलहाल, एक तरफ लूट के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी का इंतजार और दूसरी तरफ कार्रवाई रोकने की कथित बातचीत वाला वायरल ऑडियो—इन दोनों ने शहर कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
लूट के मामले में कार्रवाई पर रोक की बात का ऑडियो वायरल, कोतवाली टीआई पर उठे गंभीर सवाल पीड़ित पत्रकार से कथित बातचीत में ज्ञापन देने पर नाराजगी जताने का आरोप टीकमगढ़ 19 अगस्त पत्रकार लोकेन्द्र सिंह परमार के साथ हुई कथित मारपीट और लूट के गंभीर मामले में अब कोतवाली थाना प्रभारी रविभूषण पाठक से जुड़ा एक कथित ऑडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल बताए जा रहे इस ऑडियो में थाना प्रभारी और पीड़ित पत्रकार के बीच बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। यह चैनल वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं करता है। बताया जा रहा है कि, वायरल ऑडियो में थाना प्रभारी कथित रूप से पत्रकार लोकेन्द्र सिंह परमार से इस बात को लेकर सवाल कर रहे हैं कि उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन क्यों दिया। बातचीत के दौरान कथित तौर पर यह भी कहा जा रहा है कि “तुमने ज्ञापन दिया है तो ठीक है, अब मैंने कार्रवाई करने पर रोक लगवा दी है।” यदि वायरल ऑडियो में कही जा रही बातें वास्तविक और प्रमाणित पाई जाती हैं, तो यह पूरे मामले की पुलिस कार्रवाई को लेकर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर सकती हैं। गौरतलब है कि लोकेन्द्र सिंह परमार के साथ हुई घटना के संबंध में शहर कोतवाली में एफआईआर क्रमांक 471 दिनांक 03 अगस्त 2026 दर्ज होने की बात सामने आई है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है और दूसरी ओर कथित रूप से राजीनामे के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसी को लेकर पत्रकार संगठन द्वारा पुलिस अधीक्षक के नाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की गई थी। ज्ञापन देने पर ही कार्रवाई रोकने की बात क्यों? वायरल ऑडियो ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा कर दिया है कि यदि किसी पीड़ित को अपनी शिकायत पर पुलिस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष ज्ञापन देने का अधिकार है, तो उस ज्ञापन को कार्रवाई रोकने का आधार क्यों बनाया गया? आखिर ऐसा क्या कारण था कि पीड़ित द्वारा वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष अपनी बात रखने के बाद थाना स्तर पर कार्रवाई रोकने की कथित बात सामने आई? यह मामला अब महज एक एफआईआर और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और पीड़ित को न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यदि ऑडियो की जांच में आवाज और बातचीत की पुष्टि होती है तो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों
को यह भी स्पष्ट करना होगा कि गंभीर आपराधिक प्रकरण में कार्रवाई रोकने की कथित स्थिति आखिर कैसे बनी। पत्रकार संगठन के ज्ञापन के बाद मामला और गरमाया इस मामले को लेकर जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश (जम्प) ने पुलिस अधीक्षक के नाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों की गिरफ्तारी और पत्रकार की सुरक्षा की मांग की थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीर बताते हुए शहर कोतवाली थाना प्रभारी को आवश्यक निर्देश देने तथा आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी कराने का आश्वासन दिया था। अब इसी घटनाक्रम के बीच थाना प्रभारी से जुड़ा कथित ऑडियो वायरल होने से सवाल उठना स्वाभाविक है कि एक ओर वरिष्ठ अधिकारी मामले को गंभीर बताते हुए कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वायरल ऑडियो में कार्रवाई रोकने की बात क्यों कही जा रही है? अभय मौर्य बोले- ऑडियो की निष्पक्ष जांच हो, दोषी मिले तो कार्रवाई तय हो जम्प संगठन के जिलाध्यक्ष अभय मौर्य ने कहा कि पत्रकार के साथ लूट और मारपीट जैसे गंभीर मामले में यदि पुलिस अधिकारी और पीड़ित के बीच हुई कथित बातचीत का ऑडियो सामने आया है तो इसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि “पीड़ित पत्रकार अपनी शिकायत लेकर वरिष्ठ अधिकारी के पास जाता है, यह उसका अधिकार है। यदि उसे ज्ञापन देने पर कार्रवाई रोकने की बात कही गई है तो यह बेहद गंभीर विषय है। ऑडियो की तकनीकी जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारी पर भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि पत्रकारों को डराने या दबाव में लेने के बजाय पुलिस को निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा देना चाहिए। संगठन इस पूरे मामले पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष दोबारा मामला उठाया जाएगा। अब निगाह वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर वायरल ऑडियो की सत्यता और उसमें मौजूद आवाज की प्रमाणिकता जांच का विषय है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि पुलिस प्रशासन इस कथित ऑडियो को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि ऑडियो फर्जी है तो उसकी सच्चाई सामने लाना भी पुलिस की जिम्मेदारी है और यदि बातचीत वास्तविक पाई जाती है तो गंभीर आपराधिक प्रकरण में कार्रवाई रोकने की कथित बात पर जवाबदेही तय करना भी जरूरी होगा। फिलहाल, एक तरफ लूट के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी का इंतजार और दूसरी तरफ कार्रवाई रोकने की कथित बातचीत वाला वायरल ऑडियो—इन दोनों ने शहर कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
- विधायक हरिशंकर खटीक ने मुख्यमंत्री के पिछले टीकमगढ़ दौरे का जिक्र करते हुए बताया कि तब क्षेत्र की 14 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था। उन्होंने यह भी बताया कि जतारा में औद्योगिक हब विकसित करने की पहल की गई है, जिसके लिए लगभग 1000 एकड़ जमीन आवंटित करने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य निवेशकों को आकर्षित कर औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री से खिरिया से नौगांव तक सड़क के चौड़ीकरण की मांग भी की जाएगी। विधायक हरिशंकर खटीक ने मुख्यमंत्री के पिछले टीकमगढ़ दौरे का जिक्र करते हुए बताया कि तब क्षेत्र की 14 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था। उन्होंने यह भी बताया कि जतारा में औद्योगिक हब विकसित करने की पहल की गई है, जिसके लिए लगभग 1000 एकड़ जमीन आवंटित करने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य निवेशकों को आकर्षित कर औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री से खिरिया से नौगांव तक सड़क के चौड़ीकरण की मांग भी की जाएगी।1
- स्थानीय व्यापारियों और निवासियों में इस अव्यवस्था को लेकर गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि: इलाज के नाम पर लोगों की भावनाओं और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बिना पुख्ता सुरक्षा और पार्किंग व्यवस्था के इतने बड़े आयोजन की अनुमति कैसे मिली? स्थानीय व्यापारियों और निवासियों में इस अव्यवस्था को लेकर गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि: इलाज के नाम पर लोगों की भावनाओं और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बिना पुख्ता सुरक्षा और पार्किंग व्यवस्था के इतने बड़े आयोजन की अनुमति कैसे मिली?1
- गायत्री मंदिर में संत गोस्वामी तुलसीदास की जयंती व सवा लाख गायत्री मंत्र का जाप पूर्ण होने पर पूर्ण आहुति यज्ञ का आयोजन दिगौड़ा 19 अगस्त गायत्री शक्ति पीठ मंदिर दिगौड़ा में गायत्री जयंती से सवा लाख गायत्री मंत्र का जाप का आयोजन किया जा रहा था। मंत्र का जाप पूर्ण होने पर एवं रामचरित मानस व हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के अवसर पर आज मंदिर में पूर्ण आहुति गायत्री यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें गायत्री परिवार के सदस्यों ने भाग लिया। गायत्री शक्तिपीठ मंदिर दिगौड़ा में आज बुधवार को महान संत गोस्वामी तुलसीदास की जयंती एंव सवा लाख गायत्री मंत्र का जाप पूर्ण होने पर समस्त गायत्री परिवार के सदस्यों ने पूर्ण आहुति गायत्री यज्ञ का आयोजन किया गया। यह यज्ञ गायत्री परिवार के वरिष्ठ सदस्य के.पी.शर्मा जतारा के द्वारा संपन्न कराया गया। यज्ञ में पुजारी संदीप मिश्रा, गायत्री परिवार दिगौड़ा के अरिमर्दन सिंह परिहार, रमेश कुमार संज्ञा, बिष्णु तिवारी, रवि सोनकिया, भारतेन्द्र सिंह परिहार, लक्ष्मन रजक,मनीष संज्ञा, छन्नू अहिरवार सहित गायत्री परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे।1
- ग्राम पंचायत मवई गांव में जोरदार बारिश हुई नालियां नालियों के ऊपर से जाने लगा पानी क्योंकि सफाई नहीं हुई टोल टैक्स वालों की लापरवाही से नालियों का फटना बस स्टैंड1
- ग्राम पंचायत सतगुआ के शासकीय प्राथमिक शाला ऊगड़ सतगुआ में विल्डिंग क्षतिग्रस्त जिम्मेदार मोन ग्राम पंचायत सतगुआ के शासकीय प्राथमिक शाला ऊगड़ सतगुआ में विल्डिंग क्षतिग्रस्त जिम्मेदार मोन । शासकीय प्राथमिक शाला ऊगड़ सतगुआ में दो कमरे में 200 छात्र बैठने पर मजबूर । शिक्षकों के द्वारा कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को आवेदन दिया गया लेकिन पिछले दो तीन सालों में एक बार इंजीनियर के द्वारा स्टीमेट बनवाकर भिजवाया गया लेकिन आज तक सुधार नही हुआ ।टीकमगढ़ जिले के विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत सतगुआ के शासकीय प्राथमिक शाला ऊगड़ सतगुआ में विल्डिंग की छत पर पानी भरने से जगह जगह से शीलिंग दिखाई दे रही है एक कमरे की छत पूरी तरह से टूट गयी है केवल विध्यालय में दो कमरे शेष है एक कमरे में किताबें रखी हुई है उसी में बच्चों की कक्षाएं लगानी पर मजबूर शिक्षक लगभग 200 बच्चों के नाम दर्ज है बार होती है तो छत गिरने का भय बना रहता है जिससे विध्यालय में बच्चों को बैठने की भी व्यवस्था नहीं है जिस पर विध्यालय के द्वारा कई वार आवेदन दिया गया लेकिन आजतक ना ही जिला शिक्षाधिकारी के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं और जन शिक्षाधिकारी जतारा द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई अब देखना यह है कि प्रदेश के मुखिया शिक्षा व स्वास्थ्य को लेकर आये दिन नयी नयी योजनायें व घोषणाएं करते हैं लेकिन धरातल पर कुछ और ही नजर आ रहा है कलेक्टर महोदय शिक्षा विभाग के लिए कई बड़े बड़े कार्य करते रहते हैं बच्चों के भविष्य के लिए क्या करते हैं या नहीं4
- बुंदेलखंड में पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल के रेट बड़े देखिए खास रिपोर्ट राम सिंह यादव जी के साथ1
- प्राइवेट शिक्षक अभय सिंह की हत्या में पांच नामजद आरोपी गिरफ्तार प्राइवेट शिक्षक अभय सिंह की हत्या में पांच नामजद आरोपी गिरफ्तार ललितपुर। कोतवाली ललितपुर पुलिस ने प्राइवेट शिक्षक अभय सिंह की हत्या के मामले में पांच नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने स्कूल से घर लौट रहे अभय सिंह को रास्ते में रोककर कथित रूप से पैसों की मांग की थी। विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट करते हुए उनके सिर पर पत्थर से हमला कर दिया गया था। गंभीर रूप से घायल अभय सिंह की झांसी मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। मामला कोतवाली ललितपुर क्षेत्र के झरकौन गांव का है। 10 अगस्त 2026 को अभय सिंह के परिजनों की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई थी। आरोप है कि स्कूल से घर लौटते समय अभय सिंह को रास्ते में रोककर आरोपियों ने पैसों की मांग की। पैसे देने से इनकार करने पर आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और सिर पर पत्थर से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर बेहोश हो गए। परिजन उन्हें तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल ललितपुर लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया, जहां उपचार के दौरान अभय सिंह की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने दर्ज मुकदमे में धारा 103(1) बीएनएस की बढ़ोतरी कर हत्या के मामले में कार्रवाई शुरू की। मामले की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी सदर के नेतृत्व में पांच पुलिस टीमों का गठन किया गया। गठित टीमों ने लगातार दबिश एवं तलाश अभियान चलाकर मुकदमे में फरार पांचों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में मोर सिंह, मनोहर सिंह, बृगभान, राहुल तथा आशीष उर्फ छोटू शामिल हैं। पुलिस के अनुसार सभी आरोपी मुकदमे में फरार चल रहे थे। पुलिस ने सभी आरोपियों को नियमानुसार गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।1
- टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायत चंदेरी में सड़क बनी तालाब, नालियां हुईं चोक टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायत चंदेरी में सड़क बनी तालाब, नालियां हुईं चोक बल्देवगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत चंदेरी में बारिश के बाद सड़क पर जलभराव की स्थिति बन गई है। सड़क पर पानी जमा होने से राहगीरों और ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1