तिल्दा नेवरा मे कांग्रेसियों द्वारा विधायक टंक राम वर्मा के कार्यालय का घेराव प्रदेश कांग्रेस कमेटी और जिला कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार तिल्दा शहर में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन शहर ब्लॉक अध्यक्ष अजितेश शर्मा और ग्रामीण ब्लॉक अध्यक्ष बलदाऊ साहू के नेतृत्व में किया गया। बैठक में आगामी 13 तारीख, सोमवार को वर्तमान विधायक के कार्यालय के घेराव को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विभिन्न जनसमस्याओं पर चर्चा करते हुए आंदोलन को सफल बनाने के लिए जिम्मेदारियां भी तय कीं। इस दौरान महासमुंद विधायक विनोद चंद्राकर, रायपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष पप्पू राजेंद्र बंजारे तथा पूर्व सिंधी अकादमी अध्यक्ष राम गिडलानी सहित कई वरिष्ठ नेता और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि जनता की समस्याओं को लेकर यह घेराव किया जाएगा और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
तिल्दा नेवरा मे कांग्रेसियों द्वारा विधायक टंक राम वर्मा के कार्यालय का घेराव प्रदेश कांग्रेस कमेटी और जिला कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार तिल्दा शहर में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन शहर ब्लॉक अध्यक्ष अजितेश शर्मा और ग्रामीण ब्लॉक
अध्यक्ष बलदाऊ साहू के नेतृत्व में किया गया। बैठक में आगामी 13 तारीख, सोमवार को वर्तमान विधायक के कार्यालय के घेराव को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विभिन्न जनसमस्याओं पर चर्चा करते हुए आंदोलन को सफल बनाने के लिए जिम्मेदारियां भी तय कीं। इस दौरान महासमुंद
विधायक विनोद चंद्राकर, रायपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष पप्पू राजेंद्र बंजारे तथा पूर्व सिंधी अकादमी अध्यक्ष राम गिडलानी सहित कई वरिष्ठ नेता और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि जनता की समस्याओं को लेकर यह घेराव किया जाएगा और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
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- प्रेस विज्ञप्ति दिनांक-12/04/2026 दिन रविवार *गोविंदपथ गौ सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ की ओर से गौ माता को 2021 किलो खरबूजा रायपुर के विभिन्न स्थानों पर गौ भोज कराया गया।*, जय गौ माता जय गोपाल गौ माता की सेवा के लिए सदा तत्पर गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ के माध्यम से रायपुर शहर के विभिन्न स्थानों पर घूम रहे गौ माता को इस गर्मी के मौसम पर खरबूजा भोग लगाया गया गौ माता के शरीर पर 33 कोटी देवी देवता विराजमान होते हैं इसीलिए गौ माता को भोग प्रसाद अर्पण करने से सभी देवता तृप्त होते हैं इसीलिए हमारा एक प्रयास कि गौ माता को प्रतिदिन भोज करने का है जिस पर विभिन्न गौ पुत्रों गौ सेवको के माध्यम से यह कार्य हो सका गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान ने सभी गौ भक्तों को निवेदन करते हुए कहा कि 27 अप्रैल को आप सभी अपने तहसील गांव ब्लॉक नगर में जाकर के ज्ञापन सो के ताकि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिखाई जा सके कानून तौर पर क्योंकि वह राष्ट्र माता तो हमारा है ही और रहेगा गौ माता राष्ट्र माता नंदी बाबा राष्ट्रपिता के जयकारा के साथ कार्यक्रम किया गया एवं गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान के विभिन्न पदाधिकारी लोग मौजूद रहे। मुख्य उद्देश्य एवं मांग- प्रदेश के नेता राजनेताओं को सद्बुद्धि प्रदान करें ईश्वर से प्रार्थना किया गया प्रदेश के मुखिया जी ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी बागेश्वर धाम को आश्वासन दिया था कि प्रदेश में गौ माता को राज्य माता की दर्ज दिलाएंगे उसे याद करते हुए प्रदेश के मुखिया को निवेदन किया गया कि आप शीघ्र अति शीघ्र गौ माता को राज्य माता घोषित करें। प्रदेश की जनता इंतजार कर रही है। गौ माता को राष्ट्र माता राज्य माता घोषित किया जाए गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान परिवार श्रीमती अनीता तिवारी सहसंयोजी का पंडित गणेश मिश्रा सदस्य सुरेश बृजवानी सदस्य पंडित संदीप पांडे सदस्य श्रीमती रंजना मिश्रा श्रीरमेश दीवान श्रीअभिषेक दीवान श्रीगौरव मिश्रा आशुतोष गुप्ता श्रीमती रिंकी गुप्ता श्रीराज तिवारी श्रीजितेंद्र मिश्रा श्रीसंदीप शर्मा पत्रकार श्रीसचिन शर्मा कोषाध्यक्ष पंडित श्रीहिमांशु मिश्रा/कृष्ण शास्त्री संस्थापक/प्रदेश4
- मुंगेली जिले के थाना चिल्फी क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक पति ने अपनी पत्नी पर चरित्र शंका करते हुए उस पर डीजल डालकर आग लगा दी। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की और महज 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। मुंगेली पुलिस की इस तेज कार्रवाई से एक गंभीर अपराध में जल्द न्याय की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है। #Mungeli #ChhattisgarhNews #BreakingNews #CrimeNews #PoliceAction #HindiNews #ViralNews #CrimeReport #IndiaNews #NewsUpdate #TrendingNews #MungeliPolice1
- ग्राम धुर्राबांधा में रामनवमी पर्व पर मां महामाया मंदिर में जोहान यदु जी के परिवार वालों ने भोजन परसादी भंडारा का आयोजन किया था l1
- गौ सम्मान आव्हान अभियान मे आप सभी का स्वागत है अभिनंदन है साथी हाथ बढ़ाना अभी नही तो कभी नही याद रखे इतिहास बदलने वाला है1
- बस्तर में आज भी वस्तु विनिमय क्यों — मजबूरी या परंपरा? बस्तर के सुदूर गांवों में आज भी बिना पैसे के सामान खरीदा-बेचा जाता है। इसे वस्तु विनिमय/Barter System कहते हैं — इमली के बदले नमक, चावल के बदले साबुन, महुआ के बदले कपड़ा। ये 10 हज़ार साल पुरानी प्रथा है, पर सवाल ये है: आधुनिक युग में भी बस्तरिया लोग ऐसा करने को मजबूर क्यों हैं? 1. मजबूरी के 5 बड़े कारण •कारण..... कैसे मजबूर करता है,भौगोलिक अलगाव** कई गांव आज भी मुख्य सड़क से 20-30 किमी अंदर हैं। बारिश में 6 महीने संपर्क टूट जाता है। बैंक, ATM, बाजार पहुंच से बाहर **गरीबी और नकद की कमी** दैनिक मजदूरी 200-300 रु। फसल बेचने पर ही साल में 2-3 बार नकद आता है। रोज की जरूरत के लिए पैसे होते ही नही **बैंकिंग सुविधा नहीं** बस्तर के 70% से ज्यादा गांवों में बैंक ब्रांच नहीं। डिजिटल पेमेंट तो दूर, लोगों के पास खाता भी नहीं। UPI किसपर चलाएं **माओवादी समस्या** दशकों से अशांति के कारण विकास रुका। व्यापारी डर से अंदरूनी इलाकों में नहीं जाते। साप्ताहिक हाट ही एकमात्र बाजार है **शिक्षा और जागरूकता** "पैसा संभालना", "बचत", "ब्याज" जैसे कांसेप्ट पहुंचे ही नहीं। पुरखों से जो देखा वही चल रहा है 2. लेकिन ये सिर्फ मजबूरी नहीं, समझदारी भी है..... 1. *मुद्रास्फीति से बचे*: नोट का मूल्य घटता है, पर 1 किलो चावल हमेशा 1 किलो चावल रहेगा। बस्तरिया अर्थव्यवस्था नोट पर निर्भर नहीं। 2. *कर्ज से मुक्ति*: पैसे न होने पर शहर में लोग उधार लेते हैं। बस्तर में सामान-से-सामान बदलने से कोई कर्जदार नहीं बनता। 3. *जंगल आधारित जीवन*: तेंदूपत्ता, महुआ, इमली, लाख — ये जंगल से मुफ्त मिलते हैं। इन्हें बेचकर नमक-तेल ले आना सबसे आसान मॉडल है। 4. *सामुदायिक रिश्ते*: हाट सिर्फ बाजार नहीं, सामाजिक मेलजोल है। वस्तु विनिमय से आपसी विश्वास बना रहता है। *3. आधुनिक युग की टक्कर: क्या बदल रहा है, क्या नहीं बदलना चाहिए* *बदलाव जरूरी है*: - सड़क, स्कूल, अस्पताल पहुंचने चाहिए - MSP पर वनोपज खरीदी हो ताकि शोषण न हो - बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट हर पंचायत में हो *बदलाव जरूरी नहीं है*: वस्तु विनिमय को "पिछड़ापन" कहकर खत्म करना गलत होगा। ये *सतत/सस्टेनेबल इकोनॉमी* का सबसे पुराना मॉडल है। दुनिया आज "Cashless Society" की बात कर रही है, बस्तर तो 10 हज़ार साल से "Cashless" है। निष्कर्ष: बस्तरिया लोग मजबूर भी हैं क्योंकि सरकार की पहुंच नहीं है। पर साथ में उन्होंने अपनी ऐसी व्यवस्था बना ली है जो नोट-छापे बिना भी चलती है। असली जरूरत है — विकास आए, पर उनकी व्यवस्था टूटे नहीं। सड़क के साथ सम्मान भी आए। जय जोहार1
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- नवापारा राजिम। पेट की आग बुझाने की मजबूरी ने एक मासूम बच्ची को कचरे के ढेर में अपना रोजगार तलाशने पर विवश कर दिया है। नगर पालिका परिषद गोबरा नवापारा द्वारा नालियों से निकाले गए कचरे में प्लास्टिक बोतल, पॉलिथीन, झिल्ली और अन्य अपशिष्ट सामग्री बिखरी पड़ी थी। इसी गंदगी और दुर्गंध के बीच वह बच्ची अपने छोटे-छोटे हाथों से प्लास्टिक बॉटल और कबाड़ इकट्ठा करती नजर आई। यह दृश्य न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला है, बल्कि समाज और प्रशासन के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। जहां एक ओर बच्चों के हाथों में किताबें और उज्ज्वल भविष्य होना चाहिए, वहीं दूसरी ओर यह बच्ची अपनी आजीविका के लिए कचरे में मेहनत करने को मजबूर है। ऐसी स्थिति बाल श्रम और गरीबी की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। जरूरत है कि प्रशासन और समाज मिलकर ऐसे बच्चों के लिए शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर जीवन की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि उन्हें इस तरह की परिस्थितियों का सामना न करना पड़े और उनका बचपन सुरक्षित रह सके।1
- छत्तीसगढ़ी भाषा — पहचान, खासियत और आगे क्या होना चाहिए 🇮🇳 1. अभी तक छत्तीसगढ़ी की पहचान और खासियत क्या है? भाषाई पहचान: 1. लिपि: देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। पहले "ओड़िया लिपि" का भी असर था, पर अब हिंदी जैसी देवनागरी ही मान्य है। 2. परिवार: पूर्वी हिंदी की बोली मानी जाती है। अवधी और बघेली की करीबी बहन है। 3. बोलने वाले: 2026 में अनुमानित 2 करोड़+ लोग। छत्तीसगढ़ की 55%+ आबादी की मातृभाषा। 4. राजकीय दर्जा: 2007 में छत्तीसगढ़ राजभाषा अधिनियम के तहत हिंदी के साथ द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिला। सरकारी कामकाज में उपयोग की अनुमति है। सांस्कृतिक खासियत: 1. सरलता और मिठास: "कैसे हस", "का करत हस", "बढ़िया हवय" जैसे वाक्य। "हस", "हवय", "ग" का प्रयोग इसे अलग बनाता है। 2. साहित्य: लोकराम यादव, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, डॉ. विनय कुमार पाठक जैसे साहित्यकार। "मोर संग चलव", "छत्तीसगढ़ी गीत" लोक में बहुत लोकप्रिय। 3. उपबोलियां: लरिया, खल्टाही, सदरी, बिलासपुरी — इलाके के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा बदलाव। 4. लोक कला से जुड़ाव: पंडवानी, भरथरी, राउत नाचा, सुआ गीत सब छत्तीसगढ़ी में ही हैं। भाषा = संस्कृति। संवैधानिक स्थिति: अभी तक 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं है। इसलिए केंद्र सरकार के स्तर पर आधिकारिक भाषा का दर्जा नहीं मिला। 2. जनगणना 2026 में "छत्तीसगढ़ी" लिखवाना क्यों जरूरी है? जनगणना में भाषा का कॉलम सबसे बड़ा सबूत होता है। सरकार उसी आधार पर तय करती है कि: 1. 8वीं अनुसूची में शामिल करना है या नहीं— 1 करोड़ से ज्यादा बोलने वाले होने पर दावा मजबूत होता है। 2. स्कूल में पढ़ाई, नौकरी में आरक्षण, अनुवाद आदि सुविधाएं मिलेंगी या नहीं। 3. भविष्य का बजट — भाषा विकास बोर्ड, अकादमी, साहित्य पुरस्कार के लिए। अगर लोग "हिंदी" लिखवा देंगे तो छत्तीसगढ़ी बोलने वालों की संख्या कम दिखेगी और मान्यता का केस कमजोर होगा। 3. अभी क्या कमी है और क्या होना चाहिए? अभी स्थिति** क्या होना चाहिए** 8वीं अनुसूची में नहीं है संसद में बिल पास करके 8वीं अनुसूची में शामिल हो। भोजपुरी, राजस्थानी के साथ इसकी भी मांग है स्कूलों में पढ़ाई नहीं प्राथमिक स्तर पर छत्तीसगढ़ी मीडियम/विषय के रूप में विकल्प मिले। NCERT जैसी किताबें बनें मानक व्याकरण/शब्दकोश कम छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा मानक व्याकरण, शब्दकोश, कीबोर्ड तैयार हो सरकारी कामकाज में कम उपयोग कलेक्टर कार्यालय, पंचायत के नोटिस, फॉर्म छत्तीसगढ़ी में भी छपें युवाओं में हीनभावना "गंवई भाषा" का टैग हटे। IAS-IPS अफसर छत्तीसगढ़ी में भाषण दें तो गर्व बढ़ेगा आप क्या कर सकते हैं: 1. जनगणना में: मातृभाषा वाले कॉलम में "छत्तीसगढ़ी/Chhattisgarhi" ही लिखवाएं। "हिंदी" बिल्कुल न लिखें। 2. परिवार में: बच्चों से घर में छत्तीसगढ़ी बोलें। भाषा तभी बचेगी। 3. मांग करें: अपने विधायक-सांसद से 8वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए आवाज़ उठाएं। एक लाइन में: छत्तीसगढ़ी सिर्फ बोली नहीं, छत्तीसगढ़ की पहचान, अस्मिता और संस्कृति की रीढ़ है। जनगणना इसे "भाषा" का दर्जा दिलाने का सबसे बड़ा मौका है। जय जोहार, जय छत्तीसगढ़ 🙏1