गोविंद पथ गौसेवा संस्थान के द्वारा गौ माता को 2,021 किलो खरबूजा भोग लगाया गया प्रेस विज्ञप्ति दिनांक-12/04/2026 दिन रविवार *गोविंदपथ गौ सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ की ओर से गौ माता को 2021 किलो खरबूजा रायपुर के विभिन्न स्थानों पर गौ भोज कराया गया।*, जय गौ माता जय गोपाल गौ माता की सेवा के लिए सदा तत्पर गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ के माध्यम से रायपुर शहर के विभिन्न स्थानों पर घूम रहे गौ माता को इस गर्मी के मौसम पर खरबूजा भोग लगाया गया गौ माता के शरीर पर 33 कोटी देवी देवता विराजमान होते हैं इसीलिए गौ माता को भोग प्रसाद अर्पण करने से सभी देवता तृप्त होते हैं इसीलिए हमारा एक प्रयास कि गौ माता को प्रतिदिन भोज करने का है जिस पर विभिन्न गौ पुत्रों गौ सेवको के माध्यम से यह कार्य हो सका गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान ने सभी गौ भक्तों को निवेदन करते हुए कहा कि 27 अप्रैल को आप सभी अपने तहसील गांव ब्लॉक नगर में जाकर के ज्ञापन सो के ताकि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिखाई जा सके कानून तौर पर क्योंकि वह राष्ट्र माता तो हमारा है ही और रहेगा गौ माता राष्ट्र माता नंदी बाबा राष्ट्रपिता के जयकारा के साथ कार्यक्रम किया गया एवं गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान के विभिन्न पदाधिकारी लोग मौजूद रहे। मुख्य उद्देश्य एवं मांग- प्रदेश के नेता राजनेताओं को सद्बुद्धि प्रदान करें ईश्वर से प्रार्थना किया गया प्रदेश के मुखिया जी ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी बागेश्वर धाम को आश्वासन दिया था कि प्रदेश में गौ माता को राज्य माता की दर्ज दिलाएंगे उसे याद करते हुए प्रदेश के मुखिया को निवेदन किया गया कि आप शीघ्र अति शीघ्र गौ माता को राज्य माता घोषित करें। प्रदेश की जनता इंतजार कर रही है। गौ माता को राष्ट्र माता राज्य माता घोषित किया जाए गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान परिवार श्रीमती अनीता तिवारी सहसंयोजी का पंडित गणेश मिश्रा सदस्य सुरेश बृजवानी सदस्य पंडित संदीप पांडे सदस्य श्रीमती रंजना मिश्रा श्रीरमेश दीवान श्रीअभिषेक दीवान श्रीगौरव मिश्रा आशुतोष गुप्ता श्रीमती रिंकी गुप्ता श्रीराज तिवारी श्रीजितेंद्र मिश्रा श्रीसंदीप शर्मा पत्रकार श्रीसचिन शर्मा कोषाध्यक्ष पंडित श्रीहिमांशु मिश्रा/कृष्ण शास्त्री संस्थापक/प्रदेश
गोविंद पथ गौसेवा संस्थान के द्वारा गौ माता को 2,021 किलो खरबूजा भोग लगाया गया प्रेस विज्ञप्ति दिनांक-12/04/2026 दिन रविवार *गोविंदपथ गौ सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ की ओर से गौ माता को 2021 किलो खरबूजा रायपुर के विभिन्न स्थानों पर गौ भोज कराया गया।*, जय गौ माता जय गोपाल गौ माता की सेवा के लिए सदा तत्पर गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ के माध्यम से रायपुर शहर के विभिन्न स्थानों पर घूम रहे गौ माता को इस गर्मी के मौसम पर खरबूजा भोग लगाया गया गौ
माता के शरीर पर 33 कोटी देवी देवता विराजमान होते हैं इसीलिए गौ माता को भोग प्रसाद अर्पण करने से सभी देवता तृप्त होते हैं इसीलिए हमारा एक प्रयास कि गौ माता को प्रतिदिन भोज करने का है जिस पर विभिन्न गौ पुत्रों गौ सेवको के माध्यम से यह कार्य हो सका गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान ने सभी गौ भक्तों को निवेदन करते हुए कहा कि 27 अप्रैल को आप सभी अपने तहसील गांव ब्लॉक नगर में जाकर के ज्ञापन सो के
ताकि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिखाई जा सके कानून तौर पर क्योंकि वह राष्ट्र माता तो हमारा है ही और रहेगा गौ माता राष्ट्र माता नंदी बाबा राष्ट्रपिता के जयकारा के साथ कार्यक्रम किया गया एवं गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान के विभिन्न पदाधिकारी लोग मौजूद रहे। मुख्य उद्देश्य एवं मांग- प्रदेश के नेता राजनेताओं को सद्बुद्धि प्रदान करें ईश्वर से प्रार्थना किया गया प्रदेश के मुखिया जी ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी बागेश्वर धाम को आश्वासन दिया था कि प्रदेश
में गौ माता को राज्य माता की दर्ज दिलाएंगे उसे याद करते हुए प्रदेश के मुखिया को निवेदन किया गया कि आप शीघ्र अति शीघ्र गौ माता को राज्य माता घोषित करें। प्रदेश की जनता इंतजार कर रही है। गौ माता को राष्ट्र माता राज्य माता घोषित किया जाए गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान परिवार श्रीमती अनीता तिवारी सहसंयोजी का पंडित गणेश मिश्रा सदस्य सुरेश बृजवानी सदस्य पंडित संदीप पांडे सदस्य श्रीमती रंजना मिश्रा श्रीरमेश दीवान श्रीअभिषेक दीवान श्रीगौरव मिश्रा आशुतोष गुप्ता श्रीमती रिंकी गुप्ता श्रीराज तिवारी श्रीजितेंद्र मिश्रा श्रीसंदीप शर्मा पत्रकार श्रीसचिन शर्मा कोषाध्यक्ष पंडित श्रीहिमांशु मिश्रा/कृष्ण शास्त्री संस्थापक/प्रदेश
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- प्रेस विज्ञप्ति दिनांक-12/04/2026 दिन रविवार *गोविंदपथ गौ सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ की ओर से गौ माता को 2021 किलो खरबूजा रायपुर के विभिन्न स्थानों पर गौ भोज कराया गया।*, जय गौ माता जय गोपाल गौ माता की सेवा के लिए सदा तत्पर गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ के माध्यम से रायपुर शहर के विभिन्न स्थानों पर घूम रहे गौ माता को इस गर्मी के मौसम पर खरबूजा भोग लगाया गया गौ माता के शरीर पर 33 कोटी देवी देवता विराजमान होते हैं इसीलिए गौ माता को भोग प्रसाद अर्पण करने से सभी देवता तृप्त होते हैं इसीलिए हमारा एक प्रयास कि गौ माता को प्रतिदिन भोज करने का है जिस पर विभिन्न गौ पुत्रों गौ सेवको के माध्यम से यह कार्य हो सका गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान ने सभी गौ भक्तों को निवेदन करते हुए कहा कि 27 अप्रैल को आप सभी अपने तहसील गांव ब्लॉक नगर में जाकर के ज्ञापन सो के ताकि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिखाई जा सके कानून तौर पर क्योंकि वह राष्ट्र माता तो हमारा है ही और रहेगा गौ माता राष्ट्र माता नंदी बाबा राष्ट्रपिता के जयकारा के साथ कार्यक्रम किया गया एवं गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान के विभिन्न पदाधिकारी लोग मौजूद रहे। मुख्य उद्देश्य एवं मांग- प्रदेश के नेता राजनेताओं को सद्बुद्धि प्रदान करें ईश्वर से प्रार्थना किया गया प्रदेश के मुखिया जी ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी बागेश्वर धाम को आश्वासन दिया था कि प्रदेश में गौ माता को राज्य माता की दर्ज दिलाएंगे उसे याद करते हुए प्रदेश के मुखिया को निवेदन किया गया कि आप शीघ्र अति शीघ्र गौ माता को राज्य माता घोषित करें। प्रदेश की जनता इंतजार कर रही है। गौ माता को राष्ट्र माता राज्य माता घोषित किया जाए गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान परिवार श्रीमती अनीता तिवारी सहसंयोजी का पंडित गणेश मिश्रा सदस्य सुरेश बृजवानी सदस्य पंडित संदीप पांडे सदस्य श्रीमती रंजना मिश्रा श्रीरमेश दीवान श्रीअभिषेक दीवान श्रीगौरव मिश्रा आशुतोष गुप्ता श्रीमती रिंकी गुप्ता श्रीराज तिवारी श्रीजितेंद्र मिश्रा श्रीसंदीप शर्मा पत्रकार श्रीसचिन शर्मा कोषाध्यक्ष पंडित श्रीहिमांशु मिश्रा/कृष्ण शास्त्री संस्थापक/प्रदेश4
- छत्तीसगढ़ी भाषा — पहचान, खासियत और आगे क्या होना चाहिए 🇮🇳 1. अभी तक छत्तीसगढ़ी की पहचान और खासियत क्या है? भाषाई पहचान: 1. लिपि: देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। पहले "ओड़िया लिपि" का भी असर था, पर अब हिंदी जैसी देवनागरी ही मान्य है। 2. परिवार: पूर्वी हिंदी की बोली मानी जाती है। अवधी और बघेली की करीबी बहन है। 3. बोलने वाले: 2026 में अनुमानित 2 करोड़+ लोग। छत्तीसगढ़ की 55%+ आबादी की मातृभाषा। 4. राजकीय दर्जा: 2007 में छत्तीसगढ़ राजभाषा अधिनियम के तहत हिंदी के साथ द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिला। सरकारी कामकाज में उपयोग की अनुमति है। सांस्कृतिक खासियत: 1. सरलता और मिठास: "कैसे हस", "का करत हस", "बढ़िया हवय" जैसे वाक्य। "हस", "हवय", "ग" का प्रयोग इसे अलग बनाता है। 2. साहित्य: लोकराम यादव, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, डॉ. विनय कुमार पाठक जैसे साहित्यकार। "मोर संग चलव", "छत्तीसगढ़ी गीत" लोक में बहुत लोकप्रिय। 3. उपबोलियां: लरिया, खल्टाही, सदरी, बिलासपुरी — इलाके के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा बदलाव। 4. लोक कला से जुड़ाव: पंडवानी, भरथरी, राउत नाचा, सुआ गीत सब छत्तीसगढ़ी में ही हैं। भाषा = संस्कृति। संवैधानिक स्थिति: अभी तक 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं है। इसलिए केंद्र सरकार के स्तर पर आधिकारिक भाषा का दर्जा नहीं मिला। 2. जनगणना 2026 में "छत्तीसगढ़ी" लिखवाना क्यों जरूरी है? जनगणना में भाषा का कॉलम सबसे बड़ा सबूत होता है। सरकार उसी आधार पर तय करती है कि: 1. 8वीं अनुसूची में शामिल करना है या नहीं— 1 करोड़ से ज्यादा बोलने वाले होने पर दावा मजबूत होता है। 2. स्कूल में पढ़ाई, नौकरी में आरक्षण, अनुवाद आदि सुविधाएं मिलेंगी या नहीं। 3. भविष्य का बजट — भाषा विकास बोर्ड, अकादमी, साहित्य पुरस्कार के लिए। अगर लोग "हिंदी" लिखवा देंगे तो छत्तीसगढ़ी बोलने वालों की संख्या कम दिखेगी और मान्यता का केस कमजोर होगा। 3. अभी क्या कमी है और क्या होना चाहिए? अभी स्थिति** क्या होना चाहिए** 8वीं अनुसूची में नहीं है संसद में बिल पास करके 8वीं अनुसूची में शामिल हो। भोजपुरी, राजस्थानी के साथ इसकी भी मांग है स्कूलों में पढ़ाई नहीं प्राथमिक स्तर पर छत्तीसगढ़ी मीडियम/विषय के रूप में विकल्प मिले। NCERT जैसी किताबें बनें मानक व्याकरण/शब्दकोश कम छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा मानक व्याकरण, शब्दकोश, कीबोर्ड तैयार हो सरकारी कामकाज में कम उपयोग कलेक्टर कार्यालय, पंचायत के नोटिस, फॉर्म छत्तीसगढ़ी में भी छपें युवाओं में हीनभावना "गंवई भाषा" का टैग हटे। IAS-IPS अफसर छत्तीसगढ़ी में भाषण दें तो गर्व बढ़ेगा आप क्या कर सकते हैं: 1. जनगणना में: मातृभाषा वाले कॉलम में "छत्तीसगढ़ी/Chhattisgarhi" ही लिखवाएं। "हिंदी" बिल्कुल न लिखें। 2. परिवार में: बच्चों से घर में छत्तीसगढ़ी बोलें। भाषा तभी बचेगी। 3. मांग करें: अपने विधायक-सांसद से 8वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए आवाज़ उठाएं। एक लाइन में: छत्तीसगढ़ी सिर्फ बोली नहीं, छत्तीसगढ़ की पहचान, अस्मिता और संस्कृति की रीढ़ है। जनगणना इसे "भाषा" का दर्जा दिलाने का सबसे बड़ा मौका है। जय जोहार, जय छत्तीसगढ़ 🙏1
- आज 11 अप्रैल को तिल्दा नेवरा में भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा, तिल्दा शहर मंडल अध्यक्ष के नेतृत्व में महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर महात्मा ज्योतिबा फुले के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। कार्यक्रम में अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री आदरणीय श्री चंद्रकुमार पाटिल एवं मंडल उपाध्यक्ष मनोज बंजारे द्वारा महात्मा फुले के जीवन और उनके समाज सुधार के कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि महात्मा ज्योतिबा फुले एक महान समाज सुधारक थे, जिनका जन्म 11 अप्रैल 1827 को हुआ था। उन्होंने समाज में समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष लुक राम बघेल, महामंत्री अमितोष धीरज, कामेश्वर भारद्वाज, उपाध्यक्ष मधु कोशले सहित मोर्चा के सदस्य उपस्थित रहे।5
- धमधा में फिर भड़की आग: ट्रांसफॉर्मर की चिंगारी से लाखों का नुकसान, फायर ब्रिगेड न पहुंचने पर ग्रामीणों में आक्रोश लोकेशन - धमधा रिपोर्टर -हेमंत उमरे धमधा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम डीहपारा में एक बार फिर भीषण आगजनी की घटना ने हड़कंप मचा दिया। जानकारी के अनुसार, डॉ. जोहन वर्मा के खेत में लगे ट्रांसफॉर्मर से निकली चिंगारी देखते ही देखते भयंकर आग का रूप ले लिया, जिसने सगोन पेड़ की बॉडी ,ड्रिप पाइप सहित लगभग 5 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति को जलाकर राख कर दिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पास में स्थित स्व.टी एस चांतारे शिक्षक के पैरावट तक पहुंच गईं, जिससे भारी नुकसान हुआ। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के खेतों की पलारी भी इसकी चपेट में आ गई। घटना के दौरान ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए ट्रैक्टर के माध्यम से पानी लाकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग पर काबू पाना आसान नहीं था। हैरानी की बात यह रही कि फायर ब्रिगेड को सूचना देने के बावजूद टीम मौके पर नहीं पहुंची, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। लगातार धमधा क्षेत्र में आगजनी की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय किया जाए, ताकि समय रहते नुकसान को कम किया जा सके।1
- गरियाबंद जिले में 2009 में देवभोग से लगे ग्राम सुपेबेड़ा में गांव की पानी खराब होने और वहां की पानी में फ्लोराइड और आयरन की मात्रा अधिक होने से लोगों में किडनी की बीमारी बढ़ने और मौत होने की गंभीर समस्या आई थी जिसका सार्थक हल आज तक शासन प्रशासन नहीं निकाल पाई है और अब एक बार फिर राजिम से लगे फिंगेश्वर विकासखंड के ग्राम पथर्रि में किडनी की बीमारी से लोगों की मौत हो रही है, जिसका कारण गांव की पानी का खराब होना बताया जा रहा है। अब तक गांव के 8 से 9 लोगों की मौत की खबर सामने आ चुकी है जबकि गांव में ही अभी 7 लोग और किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों और परिजनों की माने तो गांव के लगभग 8 से 10 बोर और हैंडपंपों की जांच की गई है, जिसमें फ्लोराइड और आयरन में मात्रा अधिक पाई गई हैं और इन बोर और नलों के पानी को पीने से मना किया गया है क्योंकि पानी को पीने योग्य नहीं है ऐसा रिपोर्ट में बताया गया है। ग्रामीणों की माने तो जल्द ही यदि इस पर किसी प्रकार की कार्यवाही शासन के द्वारा नहीं की गई तो आगे ग्रामीणों की हालत और भी बिगड़ सकती है, ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से जल्द ही ग्राम में स्वास्थ्य शिविर लगाने और गांव के सभी नलों के पानी की जांच करने की मांग की है। जिससे उन्हें स्वस्थ पेयजल उपलब्ध हो सके और लोगों का स्वास्थ्य सही रहे। अब देखना होगा कि शासन प्रशासन कब इस ओर ध्यान देती है और गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाती है। जल विशेषज्ञ और विज्ञान की बाते माने तो जिस गांव के आसपास पत्थर की मात्रा अधिक होती है वहां पर निकलने वाले पानी में फ्लोराइड और आयरन की मात्रा अत्यधिक होती है, कुछ ऐसा ही मामला ग्राम पथर्रि में भी देखने को मिल रहा है गांव चारों तरफ से पत्थर खदान से घिरा हुआ है और कही ना कही यही कारण हो सकता है कि गांव के पानी में फ्लोराइड और आयरन की मात्रा अधिक हो , हालांकि ये अंदेशा है कि पानी की खराबी गांव में स्थित पत्थर खदान के नाम से हो पूरी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।3
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- नवापारा राजिम। पेट की आग बुझाने की मजबूरी ने एक मासूम बच्ची को कचरे के ढेर में अपना रोजगार तलाशने पर विवश कर दिया है। नगर पालिका परिषद गोबरा नवापारा द्वारा नालियों से निकाले गए कचरे में प्लास्टिक बोतल, पॉलिथीन, झिल्ली और अन्य अपशिष्ट सामग्री बिखरी पड़ी थी। इसी गंदगी और दुर्गंध के बीच वह बच्ची अपने छोटे-छोटे हाथों से प्लास्टिक बॉटल और कबाड़ इकट्ठा करती नजर आई। यह दृश्य न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला है, बल्कि समाज और प्रशासन के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। जहां एक ओर बच्चों के हाथों में किताबें और उज्ज्वल भविष्य होना चाहिए, वहीं दूसरी ओर यह बच्ची अपनी आजीविका के लिए कचरे में मेहनत करने को मजबूर है। ऐसी स्थिति बाल श्रम और गरीबी की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। जरूरत है कि प्रशासन और समाज मिलकर ऐसे बच्चों के लिए शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर जीवन की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि उन्हें इस तरह की परिस्थितियों का सामना न करना पड़े और उनका बचपन सुरक्षित रह सके।1
- 🔥 “डीहपारा में फिर धधकी तबाही! ट्रांसफॉर्मर की चिंगारी से लाखों का नुकसान, फायर ब्रिगेड नदारद — ग्रामीणों में आक्रोश” धमधा थाना क्षेत्र के ग्राम डीहपारा में एक बार फिर भीषण आगजनी की घटना सामने आई, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। डॉ. जोहन वर्मा के खेत में लगे ट्रांसफॉर्मर से निकली चिंगारी ने देखते ही देखते विकराल आग का रूप ले लिया। इस आग में सागौन पेड़ों की बॉडी, ड्रिप पाइप और अन्य कृषि सामग्री सहित लगभग 5 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जलकर राख हो गई। आग की लपटें आसपास के खेतों तक फैल गईं और कई किसानों की पलारी भी इसकी चपेट में आ गई। ग्रामीणों ने ट्रैक्टर से पानी लाकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग पर काबू पाना बेहद मुश्किल साबित हुआ। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि सूचना देने के बावजूद फायर ब्रिगेड मौके पर नहीं पहुंची, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं से किसान भयभीत हैं और प्रशासन से त्वरित व ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।1