सौर बाजार प्रखंड क्षेत्र के तीरी पंचायत अंतर्गत धनछोहा गांव में स्थित +2 उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है, जिससे यहां के छात्र-छात्राओं और शिक्षक-शिक्षिकाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में पीने के शुद्ध पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, क्योंकि छात्रों को तीन मंजिला से नीचे उतरकर एकमात्र हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है, जिससे आयरनयुक्त पानी निकलता है। इसके अतिरिक्त, क्लासरूम में पंखे न होने के कारण भयंकर गर्मी में पढ़ने में काफी दिक्कत होती है। विद्यालय के सभी शौचालय भवनों में पानी की सुविधा उपलब्ध न होने से खासकर बालिका छात्रों और शिक्षिकाओं को अत्यधिक असुविधा होती है। विद्यालय के मुख्य गेट के सामने कचरा जमा रहता है, जिससे लगातार दुर्गंध आती रहती है और सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। इन समस्याओं के बीच, बच्चों के अभिभावक भी कभी विद्यालय नहीं आते, जिससे उन्हें अपने बच्चों की परेशानियों का पता नहीं चल पाता। इस स्थिति को देखते हुए यह सवाल उठता है कि यदि सरकार विद्यालय प्रबंधन के लिए राशि देती है, तो उसका खर्च किस मद में किया जाता है, और यदि नहीं, तो छात्र-छात्राओं को कब तक इन समस्याओं से निजात मिलेगी ताकि उन्हें स्वच्छ वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि शिक्षा विभाग के अधिकारी समय-समय पर जांच करते, तो संभवतः ऐसी समस्याएं उत्पन्न ही नहीं होतीं। सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को घर से दूर न जाने देने की पहल सराहनीय है, लेकिन शिक्षा ग्रहण व्यवस्था में सुधार लाना भी अत्यंत आवश्यक है।
सौर बाजार प्रखंड क्षेत्र के तीरी पंचायत अंतर्गत धनछोहा गांव में स्थित +2 उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है, जिससे यहां के छात्र-छात्राओं और शिक्षक-शिक्षिकाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में पीने के शुद्ध पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, क्योंकि छात्रों को तीन मंजिला से नीचे उतरकर एकमात्र हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है, जिससे आयरनयुक्त पानी निकलता है। इसके अतिरिक्त, क्लासरूम में पंखे न होने के कारण भयंकर गर्मी में पढ़ने में काफी दिक्कत होती है। विद्यालय के सभी शौचालय भवनों में पानी की सुविधा उपलब्ध न होने से खासकर बालिका छात्रों और शिक्षिकाओं को अत्यधिक असुविधा होती है। विद्यालय के मुख्य गेट के सामने कचरा जमा रहता है, जिससे लगातार दुर्गंध आती रहती है और सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। इन समस्याओं के बीच, बच्चों के अभिभावक भी कभी विद्यालय नहीं आते, जिससे उन्हें अपने बच्चों की परेशानियों का पता नहीं चल पाता। इस स्थिति को देखते हुए यह सवाल उठता है कि यदि सरकार विद्यालय प्रबंधन के लिए राशि देती है, तो उसका खर्च किस मद में किया जाता है, और यदि नहीं, तो छात्र-छात्राओं को कब तक इन समस्याओं से निजात मिलेगी ताकि उन्हें स्वच्छ वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि शिक्षा विभाग के अधिकारी समय-समय पर जांच करते, तो संभवतः ऐसी समस्याएं उत्पन्न ही नहीं होतीं। सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को घर से दूर न जाने देने की पहल सराहनीय है, लेकिन शिक्षा ग्रहण व्यवस्था में सुधार लाना भी अत्यंत आवश्यक है।
- बिहार के मधेपुरा जिले से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहाँ दो नाबालिग चचेरे भाई-बहन तीन दिन पहले रहस्यमय तरीके से लापता हो गए हैं। भर्राही थाना क्षेत्र के मलिया वार्ड-8 से हुई इस घटना के बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे परिजनों ने उनके अपहरण की आशंका जताते हुए पुलिस से जल्द बरामदगी की गुहार लगाई है। पुलिस अब इस मामले की हर पहलू से जाँच कर रही है। लापता होने वालों में 16 वर्षीय जुली कुमारी और उसका 10 वर्षीय चचेरा भाई अमृत राज शामिल हैं। जुली के पिता नीतीश शर्मा के अनुसार, दोनों बच्चे 1 जुलाई की सुबह करीब पाँच बजे भर्राही स्थित परिधि कोचिंग सेंटर जाने के लिए घर से निकले थे। जब सुबह दस बजे तक वे घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने कोचिंग सेंटर से संपर्क किया, जहाँ पता चला कि दोनों बच्चे उस दिन कोचिंग पहुँचे ही नहीं थे। इसके बाद, परिजनों ने रिश्तेदारों, परिचितों और आस-पास के इलाकों में बच्चों की काफी तलाश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका। तीन दिनों तक लगातार खोजबीन के बाद, जुली के पिता ने भर्राही थाना में लिखित आवेदन देकर अज्ञात व्यक्ति द्वारा अपहरण की आशंका जताई और पुलिस प्रशासन से बच्चों की सुरक्षित बरामदगी की माँग की। भर्राही थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार ने बताया कि तीन जुलाई को आवेदन प्राप्त होने के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस तकनीकी और स्थानीय स्तर पर जाँच कर रही है, साथ ही आसपास के क्षेत्रों से भी जानकारी जुटाई जा रही है और बच्चों की तलाश के लिए आवश्यक कार्रवाई जारी है। दो मासूम बच्चों के अचानक लापता होने से पूरे इलाके में चिंता और बेचैनी का माहौल है। परिजनों की निगाहें अब पूरी तरह से पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं। फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर दोनों बच्चे कहाँ हैं और उनके साथ क्या हुआ है, जिसका जवाब तलाशना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।4
- सहरसा जिला के सोनबरसा प्रखंड क्षेत्र स्थित बसनही थाना अंतर्गत गोंद्रराम गांव में शुक्रवार को जमीनी विवाद को लेकर हुई मारपीट की घटना सामने आई है, जिसमें करीब आठ लोग घायल हो गए। सूचना मिलते ही बसनही थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पीड़िता त्रिफुली देवी ने बसनही थाना में एक लिखित आवेदन प्रस्तुत कर गांव के निवासी प्रेमलाल शर्मा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने कुछ लोगों को बुलाकर उनके साथ मारपीट कराई। पीड़िता ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। पीड़िता के बताए अनुसार, घटना के दौरान उपस्थित ग्रामीणों ने पांच-छह लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस अब शिकायत के आधार पर पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।1
- सहरसा जिले के जोड़ी पुर्नावास क्षेत्र में अभी तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ है।1
- सहरसा के विधायक आईपी गुप्ता को साइकिल की सवारी करते हुए देखा गया है।1
- मधेपुरा के कुमारखंड प्रखंड क्षेत्र में रामनगर बाजार चौक पर शनिवार सुबह आक्रोशित लोगों ने ट्रांसफार्मर बदलने की मांग को लेकर करीब तीन घंटे तक सड़क जाम कर आवागमन बाधित कर दिया। रामनगर महेश पंचायत के वार्ड 14 और परमानंदपुर सरदार टोला के लगभग पांच सौ घरों में बीते पंद्रह दिनों से बिजली आपूर्ति ठप थी, जिससे भीषण गर्मी और उमस के कारण लोगों का जीना मुश्किल हो गया था और वे रतजगा कर रात बिताने को मजबूर थे। वार्ड 14 रामनगर महेश से इमली गाछी चौक तक जाने वाली लाइन इसी खराब ट्रांसफार्मर से जुड़ी है। सुबह 6 बजे से शुरू हुए इस जाम में धनेश्वर मेहता, विनोद दास, रामचंद्र दास, डब्लू दास, परमेश्वरी दास, शिवम् दास, टीरन दास, उगन दास, बेचन दास, उमेश मेहता, विद्यानंद सरदार, मुन्ना सरदार, ताराचंद सरदार, अशोक सरदार, सुनील कुमार मेहता और सिकेंद्र मुखिया सहित कई आक्रोशित ग्रामीण शामिल थे। उन्होंने बिजली विभाग की लापरवाही के खिलाफ जमकर बवाल काटा और कहा कि एक पखवाड़े से बिना बिजली के रात बिताने को मजबूर होने के बावजूद विभाग का कोई ध्यान नहीं है। इसी दौरान युवा जदयू प्रदेश महासचिव श्वेत कमल उर्फ बौआ यादव उधर से गुजर रहे थे और जाम स्थल पर पहुँचकर उन्होंने ग्रामीणों से बात की। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि उनके वार्ड में लगा ट्रांसफार्मर पंद्रह दिन से खराब है। इस पर युवा जदयू नेता ने तत्काल बिजली विभाग के एसडीओ तारानंद यादव से बात कर समस्या से अवगत कराया। एसडीओ ने उन्हें आश्वासन दिया कि एक से दो दिन में ट्रांसफार्मर बदल दिया जाएगा। उधर, मामले की सूचना मिलने पर खुर्दा फीडर के जेई शंभू कुमार ने बताया कि नए ट्रांसफार्मर के लिए सूचना दे दी गई है और शाम तक ट्रांसफार्मर मिल जाएगा, जिसे आते ही तत्काल बदल दिया जाएगा। इन आश्वासनों के बाद लोगों ने सड़क जाम समाप्त कर दिया।1
- यह पोस्ट लोगों को हौसला बनाए रखने और लगातार मेहनत करते रहने का संदेश देती है। इसमें कहा गया है कि अगर आप चलते रहेंगे, तो वक्त ज़रूर बदलेगा।2
- बेगूसराय जिले के बलिया में डीएसपी ने 'सोनू मोनू गिरफ्तारी मामले' को लेकर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने घटनाक्रम से जुड़ी विस्तृत जानकारी मीडिया के साथ साझा की।1
- सौर बाजार प्रखंड क्षेत्र के तीरी पंचायत अंतर्गत धनछोहा गांव में स्थित +2 उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है, जिससे यहां के छात्र-छात्राओं और शिक्षक-शिक्षिकाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में पीने के शुद्ध पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, क्योंकि छात्रों को तीन मंजिला से नीचे उतरकर एकमात्र हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है, जिससे आयरनयुक्त पानी निकलता है। इसके अतिरिक्त, क्लासरूम में पंखे न होने के कारण भयंकर गर्मी में पढ़ने में काफी दिक्कत होती है। विद्यालय के सभी शौचालय भवनों में पानी की सुविधा उपलब्ध न होने से खासकर बालिका छात्रों और शिक्षिकाओं को अत्यधिक असुविधा होती है। विद्यालय के मुख्य गेट के सामने कचरा जमा रहता है, जिससे लगातार दुर्गंध आती रहती है और सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। इन समस्याओं के बीच, बच्चों के अभिभावक भी कभी विद्यालय नहीं आते, जिससे उन्हें अपने बच्चों की परेशानियों का पता नहीं चल पाता। इस स्थिति को देखते हुए यह सवाल उठता है कि यदि सरकार विद्यालय प्रबंधन के लिए राशि देती है, तो उसका खर्च किस मद में किया जाता है, और यदि नहीं, तो छात्र-छात्राओं को कब तक इन समस्याओं से निजात मिलेगी ताकि उन्हें स्वच्छ वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि शिक्षा विभाग के अधिकारी समय-समय पर जांच करते, तो संभवतः ऐसी समस्याएं उत्पन्न ही नहीं होतीं। सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को घर से दूर न जाने देने की पहल सराहनीय है, लेकिन शिक्षा ग्रहण व्यवस्था में सुधार लाना भी अत्यंत आवश्यक है।1