राजस्थान वन विभाग द्वारा सवाई माधोपुर में आयोजित दो दिवसीय सीएसआर कॉन्क्लेव का पहला दिन अत्यंत सफल और सार्थक रहा। इस कॉन्क्लेव में विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों, गैर-सरकारी संगठनों और वन एवं वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक विकास हेतु कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया। कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में, माननीय वन एवं पर्यावरण मंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज, उद्योग जगत और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से ही अधिक प्रभावी बन सकता है। उन्होंने राज्य में जैव विविधता संरक्षण, हरित विकास और सतत आजीविका संवर्धन के लिए CSR के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव के पहले दिन के बाद, माननीय वन मंत्री ने रणथम्भौर टाइगर रिजर्व का भी दौरा किया, जहाँ उन्हें रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 8 बाघों के दर्शन हुए, जिनमें वयस्क बाघ, बाघिनें और शावक शामिल थे। बाघों का यह सफल दिखना रणथम्भौर में वन्यजीव संरक्षण और आवास प्रबंधन की प्रभावशीलता को दर्शाता है। भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने माननीय मंत्री को रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में चल रहे संरक्षण कार्यों, वन्यजीव निगरानी, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न पहलों की जानकारी दी। मंत्री ने संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए अधिकारियों और फील्ड स्टाफ के प्रयासों की प्रशंसा की। कॉन्क्लेव के पहले दिन विभिन्न संस्थाओं द्वारा वन एवं वन्यजीव संरक्षण, जल संरक्षण, हरित अवसंरचना, इको-टूरिज्म विकास, कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता से जुड़े कई प्रस्तावों पर सकारात्मक चर्चा हुई। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कॉन्क्लेव राज्य में संरक्षण और विकास के क्षेत्र में CSR निवेश को एक नई दिशा प्रदान करेगा। द्वितीय दिवस पर तकनीकी सत्रों, विषयगत प्रस्तुतियों और संभावित CSR साझेदारियों पर विस्तृत चर्चा आयोजित की जाएगी।
राजस्थान वन विभाग द्वारा सवाई माधोपुर में आयोजित दो दिवसीय सीएसआर कॉन्क्लेव का पहला दिन अत्यंत सफल और सार्थक रहा। इस कॉन्क्लेव में विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों, गैर-सरकारी संगठनों और वन एवं वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक विकास हेतु कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया। कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में, माननीय वन एवं पर्यावरण मंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज, उद्योग जगत और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से ही अधिक प्रभावी बन सकता है। उन्होंने राज्य में जैव विविधता संरक्षण, हरित विकास और सतत आजीविका संवर्धन के लिए CSR के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव के पहले दिन के बाद, माननीय वन मंत्री ने रणथम्भौर टाइगर रिजर्व का भी दौरा किया, जहाँ उन्हें रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 8 बाघों के दर्शन हुए, जिनमें वयस्क बाघ, बाघिनें और शावक शामिल थे। बाघों का यह सफल दिखना रणथम्भौर में वन्यजीव संरक्षण और आवास प्रबंधन की प्रभावशीलता को दर्शाता है। भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने माननीय मंत्री को रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में चल रहे संरक्षण कार्यों, वन्यजीव निगरानी, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न पहलों की जानकारी दी। मंत्री ने संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए अधिकारियों और फील्ड स्टाफ के प्रयासों की प्रशंसा की। कॉन्क्लेव के पहले दिन विभिन्न संस्थाओं द्वारा वन एवं वन्यजीव संरक्षण, जल संरक्षण, हरित अवसंरचना, इको-टूरिज्म विकास, कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता से जुड़े कई प्रस्तावों पर सकारात्मक चर्चा हुई। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कॉन्क्लेव राज्य में संरक्षण और विकास के क्षेत्र में CSR निवेश को एक नई दिशा प्रदान करेगा। द्वितीय दिवस पर तकनीकी सत्रों, विषयगत प्रस्तुतियों और संभावित CSR साझेदारियों पर विस्तृत चर्चा आयोजित की जाएगी।
- सारसोप क्षेत्र के समुद्रपुरा गांव में बजरंग बली मंदिर निर्माण कार्य का विधिवत शुभारंभ धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। इस अवसर पर गांव के श्रद्धालुओं और गणमान्य लोगों की उपस्थिति में भूमि पूजन एवं हवन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसके प्रति ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि बजरंग बली मंदिर के निर्माण से गांव में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण को बढ़ावा मिलेगा तथा यह लोगों की आस्था को एक नया केंद्र प्रदान करेगा। ग्रामीणों ने इस मंदिर के निर्माण में तन, मन और धन से सहयोग करने का संकल्प लिया। मंदिर निर्माण समिति के सदस्यों ने बताया कि मंदिर का निर्माण जनसहयोग से किया जाएगा और इसे एक भव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा। समारोह के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान के जयकारे लगाए और क्षेत्र की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम का अंत प्रसाद वितरण के साथ हुआ।4
- राजस्थान सरकार ने प्रदेश की समृद्ध कला, संस्कृति और युवाओं की कल्पनाशक्ति को नई उड़ान देने के उद्देश्य से 'DREAM' पहल का शुभारंभ किया है। यह पहल आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के 'ऑरेंज इकोनॉमी' के विजन को साकार करती है, जो रचनात्मकता और नवाचार की शक्ति पर केंद्रित है। सरकार इस दिशा में संकल्पित है कि राज्य के हुनर, हस्तशिल्प, सिनेमा, संगीत और डिजिटल क्रिएशन को आर्थिक प्रगति का मुख्य आधार बनाया जाए।1
- राजस्थान के ककोड क्षेत्र में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब भगवान के घर भी सुरक्षित नहीं रहे। बीती देर रात चोरों ने प्रसिद्ध ककोड पलसे बालाजी मंदिर को अपना निशाना बनाते हुए वहाँ रखा भारी-भरकम दानपात्र चुरा लिया और फरार हो गए। इस घटना से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, क्योंकि पिछले एक साल से क्षेत्र में लगातार चोरियां हो रही हैं और उनका संयम अब जवाब दे रहा है। यह कोई पहली घटना नहीं है; ककोड और आसपास के इलाकों में पिछले एक साल में एक दर्जन से ज्यादा चोरियां हो चुकी हैं, जिनमें पुलिस एक भी मामले का खुलासा करने में नाकाम रही है। इससे पहले चोर देवनारायण मंदिर से तांबे का कलश, तेजाजी मंदिर से पीतल का घंटा, तांबे का कलश और पीतल के बर्तन चुरा चुके हैं। वैद्यनाथ धाम और बरड के बालाजी स्थान पर भी चोरों ने हाथ साफ कर पुलिस को खुली चुनौती दी थी। क्षेत्र में बढ़ते अपराधों की सबसे बड़ी वजह ककोड पुलिस चौकी का स्टाफ विहीन होना है। यह चौकी वर्तमान में केवल एक हेड कांस्टेबल और एक सिपाही के भरोसे चल रही है, जिसमें भी हेड कांस्टेबल सप्ताह में तीन दिन बनेठा थाने पर रहते हैं, जिससे अधिकांश समय चौकी पर ताला लगा रहता है। सूत्रों के मुताबिक, अपराधियों का खौफ इस कदर है कि पुलिस अधीक्षक द्वारा यहाँ लगाए गए कार्मिक भी ज्वाइन करने से कतरा रहे हैं। बताया गया है कि यहाँ ट्रांसफर किए गए एक एएसआई (ASI) ने तो डर के मारे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए प्रार्थना पत्र तक दे दिया है। पुलिसकर्मियों के इस डर के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि करीब एक माह पूर्व ककोड चौकी क्षेत्र में अकेले गश्त कर रहे एक पुलिसकर्मी को शिकारियों ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था, जिसके बाद से सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। लगातार हो रही चोरियों और पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता से ग्रामवासियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि जब 'खाकी ही सुरक्षित नहीं है' और पुलिसकर्मी यहां आने से डर रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है। ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ककोड चौकी में पर्याप्त स्टाफ तैनात नहीं किया गया और इन चोरियों का खुलासा नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।1
- भोजपुर में भरत तिवारी की कथित पुलिस एनकाउंटर में हुई मौत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, श्योपुर जिले में लोगों ने एक कैंडल मार्च निकाला और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान, उपस्थित लोगों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए एनकाउंटर को कथित रूप से फर्जी बताया और न्याय की गुहार लगाई। इस कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में युवाओं और समाज के अन्य लोगों ने भाग लिया। हाथों में मोमबत्तियां लिए लोगों ने शांतिपूर्वक मार्च निकाला और भरत तिवारी को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित जनसमूह ने भरत तिवारी के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और घटना की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही सच्चाई का उजागर होना आवश्यक है, जिससे आमजन का न्यायपालिका पर विश्वास कायम रह सके। कैंडल मार्च के दौरान, लोगों ने शांति बनाए रखते हुए न्याय की मांग से जुड़े नारे भी लगाए, और आयोजकों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील की। आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में एनकाउंटर की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराना, घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक करना, दोषी पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करना, और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना शामिल है।3
- प्रयागराज गांव के निवासियों को जलभराव की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है। इस स्थिति से तंग आकर, ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है और इस समस्या के समाधान के लिए मदद की अपील की है।1
- रणथंभौर दुर्ग मार्ग पर एक बाघ ने डेरा डाल रखा है, जिससे राहगीरों के बीच हलचल है। बाघ RBT 2511 मिश्र दर्रा और अटल सागर के बीच सड़क पर बैठा हुआ देखा गया है।1
- जयपुर में नई ट्रेनों का शुभारंभ किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप रेल विकास को नई रफ्तार मिली है। यह कदम क्षेत्र में रेलवे के विकास को बढ़ावा देने वाला बताया जा रहा है।1
- एक महिला को बदनाम करने में लगे व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की जा रही है।1
- एक संदेश में माता-पिता की घोर लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाया गया है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इन अभिभावकों को शायद यह भी पता नहीं होगा कि उनका बच्चा कहाँ है, जो बच्चों के प्रति उनकी गंभीर अनदेखी और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को उजागर करता है।1