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प्रयागराज गांव के निवासियों को जलभराव की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है। इस स्थिति से तंग आकर, ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है और इस समस्या के समाधान के लिए मदद की अपील की है।

1 hr ago
user_Etv9 national news
Etv9 national news
News Anchor नैनवा, बूंदी, राजस्थान•
1 hr ago

प्रयागराज गांव के निवासियों को जलभराव की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है। इस स्थिति से तंग आकर, ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है और इस समस्या के समाधान के लिए मदद की अपील की है।

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  • प्रयागराज गांव के निवासियों को जलभराव की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है। इस स्थिति से तंग आकर, ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है और इस समस्या के समाधान के लिए मदद की अपील की है।
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    प्रयागराज गांव के निवासियों को जलभराव की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है। इस स्थिति से तंग आकर, ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है और इस समस्या के समाधान के लिए मदद की अपील की है।
    user_Etv9 national news
    Etv9 national news
    News Anchor नैनवा, बूंदी, राजस्थान•
    1 hr ago
  • दूनी थाना क्षेत्र के टोकरावास गांव में एक युवक पर मारपीट का मामला सामने आया है, जिसमें युवक सुल्तान सिंह हाड़ा गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया गया है कि 3-4 बदमाशों ने सुल्तान सिंह हाड़ा पर हमला किया। हमलावरों ने युवक को बांधकर लाठी, डंडों और पत्थरों से बुरी तरह पीटा। इस हमले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मारपीट की इस घटना के पीछे शराब नहीं पिलाने की बात सामने आ रही है। पीड़ित सुल्तान सिंह हाड़ा ने दूनी थाने में इस मामले में नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई है। हालांकि, Shru News वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता।
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    दूनी थाना क्षेत्र के टोकरावास गांव में एक युवक पर मारपीट का मामला सामने आया है, जिसमें युवक सुल्तान सिंह हाड़ा गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया गया है कि 3-4 बदमाशों ने सुल्तान सिंह हाड़ा पर हमला किया।

हमलावरों ने युवक को बांधकर लाठी, डंडों और पत्थरों से बुरी तरह पीटा। इस हमले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मारपीट की इस घटना के पीछे शराब नहीं पिलाने की बात सामने आ रही है।

पीड़ित सुल्तान सिंह हाड़ा ने दूनी थाने में इस मामले में नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई है। हालांकि, Shru News वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता।
    user_आपणी दूनी@आवाज आपकी , हिम्मत स
    आपणी दूनी@आवाज आपकी , हिम्मत स
    Reporter दूनी, टोंक, राजस्थान•
    1 hr ago
  • राजस्थान के ककोड क्षेत्र में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब भगवान के घर भी सुरक्षित नहीं रहे। बीती देर रात चोरों ने प्रसिद्ध ककोड पलसे बालाजी मंदिर को अपना निशाना बनाते हुए वहाँ रखा भारी-भरकम दानपात्र चुरा लिया और फरार हो गए। इस घटना से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, क्योंकि पिछले एक साल से क्षेत्र में लगातार चोरियां हो रही हैं और उनका संयम अब जवाब दे रहा है। यह कोई पहली घटना नहीं है; ककोड और आसपास के इलाकों में पिछले एक साल में एक दर्जन से ज्यादा चोरियां हो चुकी हैं, जिनमें पुलिस एक भी मामले का खुलासा करने में नाकाम रही है। इससे पहले चोर देवनारायण मंदिर से तांबे का कलश, तेजाजी मंदिर से पीतल का घंटा, तांबे का कलश और पीतल के बर्तन चुरा चुके हैं। वैद्यनाथ धाम और बरड के बालाजी स्थान पर भी चोरों ने हाथ साफ कर पुलिस को खुली चुनौती दी थी। क्षेत्र में बढ़ते अपराधों की सबसे बड़ी वजह ककोड पुलिस चौकी का स्टाफ विहीन होना है। यह चौकी वर्तमान में केवल एक हेड कांस्टेबल और एक सिपाही के भरोसे चल रही है, जिसमें भी हेड कांस्टेबल सप्ताह में तीन दिन बनेठा थाने पर रहते हैं, जिससे अधिकांश समय चौकी पर ताला लगा रहता है। सूत्रों के मुताबिक, अपराधियों का खौफ इस कदर है कि पुलिस अधीक्षक द्वारा यहाँ लगाए गए कार्मिक भी ज्वाइन करने से कतरा रहे हैं। बताया गया है कि यहाँ ट्रांसफर किए गए एक एएसआई (ASI) ने तो डर के मारे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए प्रार्थना पत्र तक दे दिया है। पुलिसकर्मियों के इस डर के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि करीब एक माह पूर्व ककोड चौकी क्षेत्र में अकेले गश्त कर रहे एक पुलिसकर्मी को शिकारियों ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था, जिसके बाद से सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। लगातार हो रही चोरियों और पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता से ग्रामवासियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि जब 'खाकी ही सुरक्षित नहीं है' और पुलिसकर्मी यहां आने से डर रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है। ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ककोड चौकी में पर्याप्त स्टाफ तैनात नहीं किया गया और इन चोरियों का खुलासा नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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    राजस्थान के ककोड क्षेत्र में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब भगवान के घर भी सुरक्षित नहीं रहे। बीती देर रात चोरों ने प्रसिद्ध ककोड पलसे बालाजी मंदिर को अपना निशाना बनाते हुए वहाँ रखा भारी-भरकम दानपात्र चुरा लिया और फरार हो गए। इस घटना से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, क्योंकि पिछले एक साल से क्षेत्र में लगातार चोरियां हो रही हैं और उनका संयम अब जवाब दे रहा है।

यह कोई पहली घटना नहीं है; ककोड और आसपास के इलाकों में पिछले एक साल में एक दर्जन से ज्यादा चोरियां हो चुकी हैं, जिनमें पुलिस एक भी मामले का खुलासा करने में नाकाम रही है। इससे पहले चोर देवनारायण मंदिर से तांबे का कलश, तेजाजी मंदिर से पीतल का घंटा, तांबे का कलश और पीतल के बर्तन चुरा चुके हैं। वैद्यनाथ धाम और बरड के बालाजी स्थान पर भी चोरों ने हाथ साफ कर पुलिस को खुली चुनौती दी थी।

क्षेत्र में बढ़ते अपराधों की सबसे बड़ी वजह ककोड पुलिस चौकी का स्टाफ विहीन होना है। यह चौकी वर्तमान में केवल एक हेड कांस्टेबल और एक सिपाही के भरोसे चल रही है, जिसमें भी हेड कांस्टेबल सप्ताह में तीन दिन बनेठा थाने पर रहते हैं, जिससे अधिकांश समय चौकी पर ताला लगा रहता है। सूत्रों के मुताबिक, अपराधियों का खौफ इस कदर है कि पुलिस अधीक्षक द्वारा यहाँ लगाए गए कार्मिक भी ज्वाइन करने से कतरा रहे हैं। बताया गया है कि यहाँ ट्रांसफर किए गए एक एएसआई (ASI) ने तो डर के मारे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए प्रार्थना पत्र तक दे दिया है। पुलिसकर्मियों के इस डर के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि करीब एक माह पूर्व ककोड चौकी क्षेत्र में अकेले गश्त कर रहे एक पुलिसकर्मी को शिकारियों ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था, जिसके बाद से सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है।

लगातार हो रही चोरियों और पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता से ग्रामवासियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि जब 'खाकी ही सुरक्षित नहीं है' और पुलिसकर्मी यहां आने से डर रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है। ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ककोड चौकी में पर्याप्त स्टाफ तैनात नहीं किया गया और इन चोरियों का खुलासा नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
    user_Anand Sharma
    Anand Sharma
    उनियारा, टोंक, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • राजस्थान वन विभाग द्वारा सवाई माधोपुर में आयोजित दो दिवसीय सीएसआर कॉन्क्लेव का पहला दिन अत्यंत सफल और सार्थक रहा। इस कॉन्क्लेव में विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों, गैर-सरकारी संगठनों और वन एवं वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक विकास हेतु कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया। कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में, माननीय वन एवं पर्यावरण मंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज, उद्योग जगत और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से ही अधिक प्रभावी बन सकता है। उन्होंने राज्य में जैव विविधता संरक्षण, हरित विकास और सतत आजीविका संवर्धन के लिए CSR के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव के पहले दिन के बाद, माननीय वन मंत्री ने रणथम्भौर टाइगर रिजर्व का भी दौरा किया, जहाँ उन्हें रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 8 बाघों के दर्शन हुए, जिनमें वयस्क बाघ, बाघिनें और शावक शामिल थे। बाघों का यह सफल दिखना रणथम्भौर में वन्यजीव संरक्षण और आवास प्रबंधन की प्रभावशीलता को दर्शाता है। भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने माननीय मंत्री को रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में चल रहे संरक्षण कार्यों, वन्यजीव निगरानी, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न पहलों की जानकारी दी। मंत्री ने संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए अधिकारियों और फील्ड स्टाफ के प्रयासों की प्रशंसा की। कॉन्क्लेव के पहले दिन विभिन्न संस्थाओं द्वारा वन एवं वन्यजीव संरक्षण, जल संरक्षण, हरित अवसंरचना, इको-टूरिज्म विकास, कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता से जुड़े कई प्रस्तावों पर सकारात्मक चर्चा हुई। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कॉन्क्लेव राज्य में संरक्षण और विकास के क्षेत्र में CSR निवेश को एक नई दिशा प्रदान करेगा। द्वितीय दिवस पर तकनीकी सत्रों, विषयगत प्रस्तुतियों और संभावित CSR साझेदारियों पर विस्तृत चर्चा आयोजित की जाएगी।
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    राजस्थान वन विभाग द्वारा सवाई माधोपुर में आयोजित दो दिवसीय सीएसआर कॉन्क्लेव का पहला दिन अत्यंत सफल और सार्थक रहा। इस कॉन्क्लेव में विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों, गैर-सरकारी संगठनों और वन एवं वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक विकास हेतु कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया।

कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में, माननीय वन एवं पर्यावरण मंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि वन एवं वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज, उद्योग जगत और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से ही अधिक प्रभावी बन सकता है। उन्होंने राज्य में जैव विविधता संरक्षण, हरित विकास और सतत आजीविका संवर्धन के लिए CSR के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव के पहले दिन के बाद, माननीय वन मंत्री ने रणथम्भौर टाइगर रिजर्व का भी दौरा किया, जहाँ उन्हें रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 8 बाघों के दर्शन हुए, जिनमें वयस्क बाघ, बाघिनें और शावक शामिल थे। बाघों का यह सफल दिखना रणथम्भौर में वन्यजीव संरक्षण और आवास प्रबंधन की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने माननीय मंत्री को रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में चल रहे संरक्षण कार्यों, वन्यजीव निगरानी, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न पहलों की जानकारी दी। मंत्री ने संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए अधिकारियों और फील्ड स्टाफ के प्रयासों की प्रशंसा की। कॉन्क्लेव के पहले दिन विभिन्न संस्थाओं द्वारा वन एवं वन्यजीव संरक्षण, जल संरक्षण, हरित अवसंरचना, इको-टूरिज्म विकास, कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता से जुड़े कई प्रस्तावों पर सकारात्मक चर्चा हुई। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कॉन्क्लेव राज्य में संरक्षण और विकास के क्षेत्र में CSR निवेश को एक नई दिशा प्रदान करेगा। द्वितीय दिवस पर तकनीकी सत्रों, विषयगत प्रस्तुतियों और संभावित CSR साझेदारियों पर विस्तृत चर्चा आयोजित की जाएगी।
    user_नरेन्द्र शर्मा
    नरेन्द्र शर्मा
    Local News Reporter सवाई माधोपुर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    45 min ago
  • सवाई माधोपुर जिले के सारसोप गांव स्थित ऐतिहासिक किले पर विराजमान मां चामुंडा माता का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर अपनी दिव्यता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए यहां पहुंचते हैं। विशेष अवसरों, नवरात्रों और अन्य धार्मिक आयोजनों पर तो दूर-दूर से भक्तगण मां के दरबार में शीश नवाने आते हैं। मंदिर परिसर से आसपास का मनमोहक दृश्य भी दिखाई देता है, जो भक्तों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करता है। ग्रामीणों की प्रबल मान्यता है कि मां चामुंडा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं, जिससे यहां का आध्यात्मिक वातावरण सदैव जीवंत बना रहता है। जय माता रानी।
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    सवाई माधोपुर जिले के सारसोप गांव स्थित ऐतिहासिक किले पर विराजमान मां चामुंडा माता का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर अपनी दिव्यता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।

प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए यहां पहुंचते हैं। विशेष अवसरों, नवरात्रों और अन्य धार्मिक आयोजनों पर तो दूर-दूर से भक्तगण मां के दरबार में शीश नवाने आते हैं। मंदिर परिसर से आसपास का मनमोहक दृश्य भी दिखाई देता है, जो भक्तों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करता है।

ग्रामीणों की प्रबल मान्यता है कि मां चामुंडा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं, जिससे यहां का आध्यात्मिक वातावरण सदैव जीवंत बना रहता है। जय माता रानी।
    user_Ravi  Dainik bhaskar
    Ravi Dainik bhaskar
    Photographer चौथ का बरवाड़ा, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर बनास नदी बॉर्डर पर बजरी परिवहन व्यवस्था ठप हो गई है, जिससे इसरदा-सोलापुर और बनेठा क्षेत्र में बजरी ढुलाई रुक गई है। आरोप है कि रवन्ना (ई-परमिट) और रॉयल्टी होने के बावजूद वाहनों को रोका गया है। इस कारण दर्जनों वाहन कई घंटों से नदी क्षेत्र में खड़े हैं, जहां उन्हें न तो आगे जाने की अनुमति मिल रही है और न ही वापस लौटने का रास्ता है। इस स्थिति के चलते वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, विशेषकर खाने-पीने की व्यवस्था न होने के कारण वे अत्यधिक परेशान हैं। यह विवाद स्थानीय विरोध और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच फँसे वाहनों के कारण उत्पन्न हुआ है। वाहन चालकों ने प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की है, साथ ही यह सवाल भी उठाया है कि वैध परिवहन को क्यों रोका जा रहा है। बनास नदी में फँसे इन दर्जनों बजरी वाहनों के चालकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
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    राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर बनास नदी बॉर्डर पर बजरी परिवहन व्यवस्था ठप हो गई है, जिससे इसरदा-सोलापुर और बनेठा क्षेत्र में बजरी ढुलाई रुक गई है। आरोप है कि रवन्ना (ई-परमिट) और रॉयल्टी होने के बावजूद वाहनों को रोका गया है। इस कारण दर्जनों वाहन कई घंटों से नदी क्षेत्र में खड़े हैं, जहां उन्हें न तो आगे जाने की अनुमति मिल रही है और न ही वापस लौटने का रास्ता है।

इस स्थिति के चलते वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, विशेषकर खाने-पीने की व्यवस्था न होने के कारण वे अत्यधिक परेशान हैं। यह विवाद स्थानीय विरोध और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच फँसे वाहनों के कारण उत्पन्न हुआ है।

वाहन चालकों ने प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की है, साथ ही यह सवाल भी उठाया है कि वैध परिवहन को क्यों रोका जा रहा है। बनास नदी में फँसे इन दर्जनों बजरी वाहनों के चालकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
    user_Irfan Rajasthan patrika
    Irfan Rajasthan patrika
    Local News Reporter चौथ का बरवाड़ा, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • सवाई माधोपुर में मानटाउन थाना पुलिस ने पिछले एक वर्ष से फरार चल रहे एक स्थायी वारंटी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेी के निर्देशन और थानाधिकारी सुनील कुमार के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई के तहत, करौली जिले के सपोटरा थाना क्षेत्र के बूकना गांव निवासी हैमराज पुत्र रामस्वरूप को गिरफ्तार किया गया। आरोपी हैमराज चोरी के एक प्रकरण में न्यायालय से जारी स्थायी वारंट के बाद से फरार चल रहा था। पुलिस टीम ने उसे दस्तयाब कर गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया। इस कार्रवाई में हेड कांस्टेबल भक्तवत्सल, कांस्टेबल दीपक और कांस्टेबल भरत की विशेष भूमिका रही। पुलिस की इस कार्रवाई को फरार आरोपियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
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    सवाई माधोपुर में मानटाउन थाना पुलिस ने पिछले एक वर्ष से फरार चल रहे एक स्थायी वारंटी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेी के निर्देशन और थानाधिकारी सुनील कुमार के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई के तहत, करौली जिले के सपोटरा थाना क्षेत्र के बूकना गांव निवासी हैमराज पुत्र रामस्वरूप को गिरफ्तार किया गया। आरोपी हैमराज चोरी के एक प्रकरण में न्यायालय से जारी स्थायी वारंट के बाद से फरार चल रहा था। पुलिस टीम ने उसे दस्तयाब कर गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया। इस कार्रवाई में हेड कांस्टेबल भक्तवत्सल, कांस्टेबल दीपक और कांस्टेबल भरत की विशेष भूमिका रही। पुलिस की इस कार्रवाई को फरार आरोपियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
    user_Rakesh Agarwal
    Rakesh Agarwal
    पत्रकारिता Sawai Madhopur, Rajasthan•
    7 hrs ago
  • जयपुर में नई ट्रेनों का शुभारंभ किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप रेल विकास को नई रफ्तार मिली है। यह कदम क्षेत्र में रेलवे के विकास को बढ़ावा देने वाला बताया जा रहा है।
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    जयपुर में नई ट्रेनों का शुभारंभ किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप रेल विकास को नई रफ्तार मिली है। यह कदम क्षेत्र में रेलवे के विकास को बढ़ावा देने वाला बताया जा रहा है।
    user_Etv9 national news
    Etv9 national news
    News Anchor नैनवा, बूंदी, राजस्थान•
    2 hrs ago
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