बिहार में वर्तमान मुख्यमंत्री के बारे में पता ही नहीं कि वे कहां तक पढ़े हैं?:प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती राकेश उर्फ सम्राट चौधरी को 1999 में मंत्री पद से बर्खास्त किसी सरकार, पार्टी ने नहीं किया, ये राजभवन से निकला आदेश था: राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव पटना। जन सुराज पार्टी कार्यालय में शनिवार को बिहार के नए सीएम सम्राट चौधरी को लेकर महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता की गई। इस दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि जिस व्यक्ति के नाम पर चुनाव लड़ा गया, जिस व्यक्ति के लिए कहा गया "25 से 30 फिर से नीतीश" उस व्यक्ति को 6 महीने में बिहार से बाहर कर दिया। बिहार में आधे से ज्यादा जिलों में सरकारी कर्मियों को पैसे नहीं दिए जा रहे, इससे समझ सकते हैं कि कोष की क्या हालत है? जो व्यक्ति अभी मुख्यमंत्री चुना गया, वो बिहार के लिए बहुत बड़ी विडंबना है। ज्ञान की धरती बिहार में आज मुख्यमंत्री वो व्यक्ति है जिसके बारे में पता नहीं कि वे कहां तक पढ़े हैं? नेता प्रतिपक्ष 9वीं तक पढ़े हैं। जिस व्यक्ति को अभी मुख्यमंत्री बनाया है, वो गृहमंत्री थे। गृहमंत्री रहते हुए बिहार में हर रोज दुष्कर्म, हत्या, व अन्य आपराधिक घटनाएं होती रही हैं। प्रशासन शून्य हो गया है। नीट छात्रा मामले में बोले प्रदेश अध्यक्ष, नया सीएम बनते ही आरोपित को बेल नीट छात्रा मामले में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा नए मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद आरोपित को बेल मिल गई है। ऐसी सरकार से बिहार की जनता और क्या उम्मीद करे? सिवाय धोखा के। बिहार के लोगों का भविष्य अगले 5 साल गहरे अंधकार में चला गया। एक दिन पहले मुजफ्फरपुर-किशनगंज में दुष्कर्म की खबर आई है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव ने कई पुख्ता जानकारी देते हुए कहा कि 16 नवंबर 1999 ये वर्तमान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का जन्मतिथि भी है। उस वक्त तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान जी ने आदेश जारी किया, जिसमें तत्कालीन मंत्री बनाए गए राकेश कुमार, वर्तमान में सीएम सम्राट चौधरी को बर्खास्त करने का आदेश पारित किया था। एक और आदेश दिया, राकेश कुमार पर जालसाजी, धोखेबाजी करने के लिए एफआईआर करने का भी निर्देश दिया था। मंत्री पद से बर्खास्त सरकार, किसी पार्टी ने नहीं किया, ये राजभवन से निकला आदेश था। दूसरा, उनपर एफआईआर दर्ज इसलिए किया क्योंकि उन्होंने अपनी उम्र, अपना नाम गलत बताया। इस आधार पर वे मंत्री पद से हटाए गए। जो मैंने कहा वो राजभवन का दस्तावेज है कि राकेश (सम्राट चौधरी) ने अपनी उम्र, नाम, जन्मतिथि में धोखेबाजी की: कुमार सौरव पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव ने कहा एक जांच कमिटी बनी, तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त बसु साहब ने रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया उस समय राकेश कुमार (सम्राट चौधरी) जांच में सहयोग नहीं किया, ये साबित नहीं कर सके कि दस्तावेज में जो उम्र बताई है वो सही है या नहीं। आज भी ये रिपोर्ट ठंडे बस्ते में है। उस रिपोर्ट में कहा गया इन्होंने स्कूल छोड़ने की उम्र 31 वर्ष, मतदाता सूची में 24 वर्ष, 1995 में कोर्ट में दाखिल एफिडेविट में 16 वर्ष है। कोर्ट के एफिडेविट को सही मानें तो इस हिसाब से 16 नवंबर 1999 को राकेश कुमार (सम्राट चौधरी) की उम्र 20 वर्ष होनी चाहिए थी। राजभवन की मानें तो उम्र 24 साल थी। ये लोक-लाज का विषय है, जनता ने जनादेश बना दिया है, आप जिसे चाहे उसे मुख्यमंत्री बना दे। प्रशांत किशोर लगातार ये सवाल कर रहे हैं, ये प्रश्न बिहार की सरकार, सम्राट चौधरी, बीजेपी यूनिट से नहीं है, ये सवाल नरेंद्र मोदी- अमित शाह से है। क्या ये आरोप हमने लगाए हैं? जो मैंने कहा वो राजभवन का दस्तावेज है कि उन्होंने अपनी उम्र, नाम, जन्मतिथि में धोखेबाजी की है। बता दें कि इस प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव, प्रवक्ता पद्मा ओझा, प्रवक्ता तारीक चंपारणी, रेखा गुप्ता जी मौजूद थीं।
बिहार में वर्तमान मुख्यमंत्री के बारे में पता ही नहीं कि वे कहां तक पढ़े हैं?:प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती राकेश उर्फ सम्राट चौधरी को 1999 में मंत्री पद से बर्खास्त किसी सरकार, पार्टी ने नहीं किया, ये राजभवन से निकला आदेश था: राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव पटना। जन सुराज पार्टी कार्यालय में शनिवार को बिहार के नए सीएम सम्राट चौधरी को लेकर महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता की गई। इस दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि जिस व्यक्ति के नाम पर चुनाव लड़ा गया, जिस व्यक्ति के लिए कहा गया "25 से 30 फिर से नीतीश" उस व्यक्ति को 6 महीने में बिहार से बाहर कर दिया। बिहार में आधे से ज्यादा जिलों में सरकारी कर्मियों को पैसे नहीं दिए जा रहे, इससे समझ सकते हैं कि कोष की क्या हालत है? जो व्यक्ति अभी मुख्यमंत्री चुना गया, वो बिहार के लिए बहुत बड़ी विडंबना है। ज्ञान की धरती बिहार में आज मुख्यमंत्री वो व्यक्ति है जिसके बारे में पता नहीं कि वे कहां तक पढ़े हैं? नेता प्रतिपक्ष 9वीं तक पढ़े हैं। जिस व्यक्ति को अभी मुख्यमंत्री बनाया है, वो गृहमंत्री थे। गृहमंत्री रहते हुए बिहार में हर रोज दुष्कर्म, हत्या, व अन्य आपराधिक घटनाएं होती रही हैं। प्रशासन शून्य हो गया है। नीट छात्रा मामले में बोले प्रदेश
अध्यक्ष, नया सीएम बनते ही आरोपित को बेल नीट छात्रा मामले में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा नए मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद आरोपित को बेल मिल गई है। ऐसी सरकार से बिहार की जनता और क्या उम्मीद करे? सिवाय धोखा के। बिहार के लोगों का भविष्य अगले 5 साल गहरे अंधकार में चला गया। एक दिन पहले मुजफ्फरपुर-किशनगंज में दुष्कर्म की खबर आई है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव ने कई पुख्ता जानकारी देते हुए कहा कि 16 नवंबर 1999 ये वर्तमान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का जन्मतिथि भी है। उस वक्त तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान जी ने आदेश जारी किया, जिसमें तत्कालीन मंत्री बनाए गए राकेश कुमार, वर्तमान में सीएम सम्राट चौधरी को बर्खास्त करने का आदेश पारित किया था। एक और आदेश दिया, राकेश कुमार पर जालसाजी, धोखेबाजी करने के लिए एफआईआर करने का भी निर्देश दिया था। मंत्री पद से बर्खास्त सरकार, किसी पार्टी ने नहीं किया, ये राजभवन से निकला आदेश था। दूसरा, उनपर एफआईआर दर्ज इसलिए किया क्योंकि उन्होंने अपनी उम्र, अपना नाम गलत बताया। इस आधार पर वे मंत्री पद से हटाए गए। जो मैंने कहा वो राजभवन का दस्तावेज है कि राकेश (सम्राट चौधरी) ने अपनी उम्र, नाम, जन्मतिथि में धोखेबाजी की: कुमार सौरव पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव ने कहा एक
जांच कमिटी बनी, तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त बसु साहब ने रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया उस समय राकेश कुमार (सम्राट चौधरी) जांच में सहयोग नहीं किया, ये साबित नहीं कर सके कि दस्तावेज में जो उम्र बताई है वो सही है या नहीं। आज भी ये रिपोर्ट ठंडे बस्ते में है। उस रिपोर्ट में कहा गया इन्होंने स्कूल छोड़ने की उम्र 31 वर्ष, मतदाता सूची में 24 वर्ष, 1995 में कोर्ट में दाखिल एफिडेविट में 16 वर्ष है। कोर्ट के एफिडेविट को सही मानें तो इस हिसाब से 16 नवंबर 1999 को राकेश कुमार (सम्राट चौधरी) की उम्र 20 वर्ष होनी चाहिए थी। राजभवन की मानें तो उम्र 24 साल थी। ये लोक-लाज का विषय है, जनता ने जनादेश बना दिया है, आप जिसे चाहे उसे मुख्यमंत्री बना दे। प्रशांत किशोर लगातार ये सवाल कर रहे हैं, ये प्रश्न बिहार की सरकार, सम्राट चौधरी, बीजेपी यूनिट से नहीं है, ये सवाल नरेंद्र मोदी- अमित शाह से है। क्या ये आरोप हमने लगाए हैं? जो मैंने कहा वो राजभवन का दस्तावेज है कि उन्होंने अपनी उम्र, नाम, जन्मतिथि में धोखेबाजी की है। बता दें कि इस प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव, प्रवक्ता पद्मा ओझा, प्रवक्ता तारीक चंपारणी, रेखा गुप्ता जी मौजूद थीं।
- राकेश उर्फ सम्राट चौधरी को 1999 में मंत्री पद से बर्खास्त किसी सरकार, पार्टी ने नहीं किया, ये राजभवन से निकला आदेश था: राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव पटना। जन सुराज पार्टी कार्यालय में शनिवार को बिहार के नए सीएम सम्राट चौधरी को लेकर महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता की गई। इस दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि जिस व्यक्ति के नाम पर चुनाव लड़ा गया, जिस व्यक्ति के लिए कहा गया "25 से 30 फिर से नीतीश" उस व्यक्ति को 6 महीने में बिहार से बाहर कर दिया। बिहार में आधे से ज्यादा जिलों में सरकारी कर्मियों को पैसे नहीं दिए जा रहे, इससे समझ सकते हैं कि कोष की क्या हालत है? जो व्यक्ति अभी मुख्यमंत्री चुना गया, वो बिहार के लिए बहुत बड़ी विडंबना है। ज्ञान की धरती बिहार में आज मुख्यमंत्री वो व्यक्ति है जिसके बारे में पता नहीं कि वे कहां तक पढ़े हैं? नेता प्रतिपक्ष 9वीं तक पढ़े हैं। जिस व्यक्ति को अभी मुख्यमंत्री बनाया है, वो गृहमंत्री थे। गृहमंत्री रहते हुए बिहार में हर रोज दुष्कर्म, हत्या, व अन्य आपराधिक घटनाएं होती रही हैं। प्रशासन शून्य हो गया है। नीट छात्रा मामले में बोले प्रदेश अध्यक्ष, नया सीएम बनते ही आरोपित को बेल नीट छात्रा मामले में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा नए मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद आरोपित को बेल मिल गई है। ऐसी सरकार से बिहार की जनता और क्या उम्मीद करे? सिवाय धोखा के। बिहार के लोगों का भविष्य अगले 5 साल गहरे अंधकार में चला गया। एक दिन पहले मुजफ्फरपुर-किशनगंज में दुष्कर्म की खबर आई है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव ने कई पुख्ता जानकारी देते हुए कहा कि 16 नवंबर 1999 ये वर्तमान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का जन्मतिथि भी है। उस वक्त तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान जी ने आदेश जारी किया, जिसमें तत्कालीन मंत्री बनाए गए राकेश कुमार, वर्तमान में सीएम सम्राट चौधरी को बर्खास्त करने का आदेश पारित किया था। एक और आदेश दिया, राकेश कुमार पर जालसाजी, धोखेबाजी करने के लिए एफआईआर करने का भी निर्देश दिया था। मंत्री पद से बर्खास्त सरकार, किसी पार्टी ने नहीं किया, ये राजभवन से निकला आदेश था। दूसरा, उनपर एफआईआर दर्ज इसलिए किया क्योंकि उन्होंने अपनी उम्र, अपना नाम गलत बताया। इस आधार पर वे मंत्री पद से हटाए गए। जो मैंने कहा वो राजभवन का दस्तावेज है कि राकेश (सम्राट चौधरी) ने अपनी उम्र, नाम, जन्मतिथि में धोखेबाजी की: कुमार सौरव पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव ने कहा एक जांच कमिटी बनी, तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त बसु साहब ने रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया उस समय राकेश कुमार (सम्राट चौधरी) जांच में सहयोग नहीं किया, ये साबित नहीं कर सके कि दस्तावेज में जो उम्र बताई है वो सही है या नहीं। आज भी ये रिपोर्ट ठंडे बस्ते में है। उस रिपोर्ट में कहा गया इन्होंने स्कूल छोड़ने की उम्र 31 वर्ष, मतदाता सूची में 24 वर्ष, 1995 में कोर्ट में दाखिल एफिडेविट में 16 वर्ष है। कोर्ट के एफिडेविट को सही मानें तो इस हिसाब से 16 नवंबर 1999 को राकेश कुमार (सम्राट चौधरी) की उम्र 20 वर्ष होनी चाहिए थी। राजभवन की मानें तो उम्र 24 साल थी। ये लोक-लाज का विषय है, जनता ने जनादेश बना दिया है, आप जिसे चाहे उसे मुख्यमंत्री बना दे। प्रशांत किशोर लगातार ये सवाल कर रहे हैं, ये प्रश्न बिहार की सरकार, सम्राट चौधरी, बीजेपी यूनिट से नहीं है, ये सवाल नरेंद्र मोदी- अमित शाह से है। क्या ये आरोप हमने लगाए हैं? जो मैंने कहा वो राजभवन का दस्तावेज है कि उन्होंने अपनी उम्र, नाम, जन्मतिथि में धोखेबाजी की है। बता दें कि इस प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव, प्रवक्ता पद्मा ओझा, प्रवक्ता तारीक चंपारणी, रेखा गुप्ता जी मौजूद थीं।3
- मैं हूं किशन बिहारी पहली बार ब्लॉक बनाया हूं किशन गाड़ी को सपोर्ट करिए हद से भी ज्यादा शेयर करिए वीडियो1
- निशांत कुमार की ‘सद्भाव यात्रा’ की शुरुआत, हाजीपुर में भव्य स्वागत; क्या सियासत में एंट्री की तैयारी? बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने रविवार को अपनी ‘सद्भाव यात्रा’ की शुरुआत की। यात्रा के पहले दिन हाजीपुर में उनका भव्य स्वागत किया गया, जहां कार्यकर्ताओं ने जेसीबी के जरिए फूलों की वर्षा कर उनका अभिनंदन किया। बड़ी संख्या में मौजूद रहे जदयू कार्यकर्ता इस दौरान बड़ी संख्या में जदयू कार्यकर्ता और स्थानीय नेता मौजूद रहे। निशांत कुमार ने गाड़ी से उतरकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और कार्यकर्ताओं से बातचीत भी की। स्वागत के दौरान शंखनाद और बिगुल बजाकर माहौल को उत्साहपूर्ण बनाया गया। पश्चिम चंपारण महत्वपूर्ण बताया जा रहा है कि यात्रा की शुरुआत पश्चिम चंपारण से की गई है, जो महात्मा गांधी की कर्मभूमि मानी जाती है। यह क्षेत्र नीतीश कुमार के लिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। पहले दिन निशांत कुमार बेतिया और आसपास के इलाकों में कार्यक्रमों में शामिल होंगे, जबकि 4 मई को वाल्मीकिनगर में जंगल सफारी का कार्यक्रम प्रस्तावित है।1
- पूर्णिया में अपराधियों के हौसले बुलंद, दिनदहाड़े युवक को मारी गोली, हालत गंभीर!1
- महिषी विधानसभा क्षेत्र के विकास और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय विधायक गौतम कृष्णा इन दिनों बेहद सख्त तेवर में नजर आ रहे हैं। कोसी बांध के भीतर स्थित नौला में निर्माणाधीन पुल का औचक निरीक्षण कर विधायक जी ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता के पैसे की बंदरबांट और विकास कार्यों में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान विधायक गौतम कृष्णा ने पाया कि पुल निर्माण में निम्न स्तर की निर्माण सामग्री का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा था। विधायक ने न केवल काम को रुकवाया, बल्कि प्रयुक्त हो रही सामग्रियों की बारीकी से जांच भी की। उन्होंने मौके पर मौजूद अभियंताओं और संवेदकों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि: "कोसी क्षेत्र की जनता ने बड़ी मुश्किलों से विकास की राह देखी है। पुल का निर्माण उनके जीवन और सुरक्षा से जुड़ा है, इसमें घटिया सामग्री का उपयोग एक बड़ा अपराध है। सिर्फ डांट-फटकार तक सीमित न रहकर, विधायक जी ने तुरंत इस मामले को उच्चाधिकारियों के समक्ष रखा है। उन्होंने दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही हेतु मामले को अग्रेषित कर दिया है, ताकि भविष्य में पुल की मजबूती सुनिश्चित हो सके और सरकारी संसाधनों का सही उपयोग हो। विधायक की इस तत्परता ने नौला सहित पूरे महिषी विधानसभा क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना हैँ गौतम कृष्णा जी खुद जमीन पर उतरकर मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उनके इस कदम से ठेकेदारों और लापरवाह अधिकारियों में हड़कंप है। अब लोगों को भरोसा है कि कोसी की लहरों के बीच बनने वाला यह पुल दशकों तक अडिग रहेगा। विधायक गौतम कृष्णा का यह प्रयास दर्शाता है कि वे केवल शिलान्यास करने वाले नेता नहीं, बल्कि निर्माण की अंतिम ईंट तक नजर रखने वाले एक सच्चे जनसेवक हैं। उनके इस "कड़क अंदाज" ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि महिषी का विकास अब 'मजबूत नींव' पर होगा।1
- हर व्यक्ति को समान अवसर मिले - यही है डॉ. शिवाजी कुमार का संकल्प; दिव्यांग, वृद्ध, विधवा सशक्तिकरण के लिए जमीन पर उतरकर कर रहे काम"*1
- मधेपुरा में न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में रविवार को ऐतिहासिक पहल हुई। मधेपुरा और उदाकिशुनगंज में नवनिर्मित 10-10 कोर्ट भवन जी+5 तथा दो-दो ई-सेवा केंद्रों का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर के मुख्य न्यायाधीश ने फीता काटकर भवनों का लोकार्पण किया। उनके साथ निरीक्षी न्यायाधीश समेत कई न्यायाधीश मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं , महानिबंधक तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सहित कई न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। उद्घाटन से पहले मुख्य न्यायाधीश ने में पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की। सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा और पूरे कार्यक्रम के दौरान कड़े इंतजाम किए गए। नवनिर्मित कोर्ट भवनों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे न्यायिक कार्यों में तेजी आएगी और अधिवक्ताओं व वादकारियों को बेहतर वातावरण मिलेगा। वहीं ई-सेवा केंद्र शुरू होने से केस की जानकारी, दस्तावेज एवं अन्य ऑनलाइन सेवाएं अब आसानी से मिल सकेंगी। इस मौके पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय तक पहुंच केवल मुकदमा दाखिल करने से नहीं होती, बल्कि तब होती है जब हर नागरिक यह समझ सके कि उसके मुकदमे में क्या हो रहा है और आगे उसे क्या करना है। उन्होंने कहा कि ई-सेवा केंद्र इसी समझ को आसान और सुलभ बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। नवनिर्मित कोर्ट भवनों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे न्यायिक कार्यों में तेजी आएगी और अधिवक्ताओं व वादकारियों को बेहतर वातावरण मिलेगा। वहीं ई-सेवा केंद्र शुरू होने से केस की जानकारी, दस्तावेज एवं अन्य ऑनलाइन सेवाएं अब आसानी से मिल सकेंगी। इस पहल से लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी और आम लोगों को समय पर व पारदर्शी न्याय मिलने का रास्ता और मजबूत होगा।4
- नौहट्टा: जनसुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर की दूरगामी सोच और संगठन विस्तार की कड़ी में नौहट्टा प्रखंड के कद्दावर नेता और पंचायत समिति प्रमुख शमीम अख्तर उर्फ पप्पू को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जनसुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने संयोजक प्रशांत किशोर की सहमति से शमीम अख्तर को अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। विकास पुरुष की छवि और जनसेवा का मिला सम्मान नौहट्टा प्रमुख के रूप में शमीम अख्तर की छवि हमेशा से एक विकासपरक और जमीन से जुड़े नेता की रही है। उनके कुशल नेतृत्व और जनता के प्रति समर्पण को देखते हुए संगठन ने उन्हें प्रदेश स्तर पर यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। यह नियुक्ति न केवल उनके राजनीतिक कद को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में भी भारी उत्साह भर दिया है। इस खबर के आते ही नौहट्टा समेत पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों और समर्थकों का कहना है कि शमीम अख्तर उर्फ पप्पू ने हमेशा समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने का काम किया है। उनके प्रदेश उपाध्यक्ष बनने से सीमांचल और कोसी क्षेत्र में जनसुराज की जड़ें और मजबूत होंगी। एक नई ऊर्जा के साथ बढ़ेंगे आगे अपनी नियुक्ति पर आभार व्यक्त करते हुए प्रमुख शमीम अख्तर ने कहा कि वे प्रशांत किशोर के विजन 'बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और रोजगार' को घर-घर तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके हक की आवाज बुलंद करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।1