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भीलवाड़ा के एमजी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत होने के मामले को लेकर एक जांच समिति का गठन किया गया है। यह समिति अस्पताल में हुई प्रसूता मौतों के मामले की जांच करेगी।
Dev karan Mali
भीलवाड़ा के एमजी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत होने के मामले को लेकर एक जांच समिति का गठन किया गया है। यह समिति अस्पताल में हुई प्रसूता मौतों के मामले की जांच करेगी।
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- भीलवाड़ा के एमजी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत होने के मामले को लेकर एक जांच समिति का गठन किया गया है। यह समिति अस्पताल में हुई प्रसूता मौतों के मामले की जांच करेगी।1
- राजस्थान के भीलवाड़ा का सबसे बड़ा महात्मा गांधी अस्पताल इस समय प्रसूताओं की लगातार मौतों को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। इस अस्पताल में पिछले महज एक सप्ताह के भीतर ही 5 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इन मौतों के बीच, अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर (ओटी) की सैम्पलिंग रिपोर्ट में खतरनाक बैक्टीरिया पॉजिटिव पाया गया है, जिससे पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। ओटी में खतरनाक बैक्टीरिया मिलने के बाद अब अस्पताल प्रशासन की संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था और साफ-सफाई पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। यह गंभीर आशंका जताई जा रही है कि विभाग द्वारा स्टरलाइजेशन और डिसइंफेक्शन में बरती गई लापरवाही ही इन प्रसूताओं के लिए जानलेवा साबित हुई है। फिलहाल, प्रसूताओं की हुई मौतों और ओटी में मिले बैक्टीरिया के बीच सीधे संबंध की जांच की जा रही है।1
- भीलवाड़ा के शाहपुरा में प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चलानिया भैरुनाथ मार्ग की सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। शाहपुरा से चलानिया तक के रास्ते में जगह-जगह बड़े-बड़े खड्डे हो गए हैं और सड़क की साइडें भी खराब हो चुकी हैं। इस वजह से यहां दूर-दराज से दर्शन और पेशी के लिए आने वाले यात्रियों को, विशेषकर शनिवार और रविवार को, भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां आने-जाने के लिए पर्याप्त परिवहन साधनों की भी भारी कमी है। शनिवार की रात और रविवार की सुबह केवल गिने-चुने ऑटो रिक्शा ही चलते हैं। सवारी मिलने पर ये ऑटो चालक रास्ते में आने वाले एक-दो गांवों का किराया भी चलानिया के हिसाब से ही वसूलते हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों ने इस क्षतिग्रस्त सड़क को जल्द से जल्द ठीक करने की मांग की है। चलानिया भैरुनाथ के पास सड़क के किनारों पर पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण वाहनों को मोड़ने और साइड लेने में बेहद दिक्कत होती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस समस्या पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।4
- राजस्थान में सरकारी रिकॉर्ड से 'दलित' शब्द को हटाने के आदेश पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस सरकारी फैसले को लेकर राज्य में लगातार यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर इस आदेश पर इतना बवाल क्यों मचा हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस कार्रवाई की भी बात सामने आ रही है, जिसने इस विवाद को और अधिक हवा दे दी है।1
- चित्तौड़गढ़ के ग्राम नाल में खेत की रखवाली कर रहे किसान के पास 12 फीट लंबा अजगर पहुंच गया, जिसके बाद वन विभाग ने अजगर का सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसे बस्सी अभयारण्य में छोड़ दिया।1
- चित्तौड़गढ़ जिले की डूंगला तहसील के तहत आने वाली बढ़वाई पंचायत के चकतिया बावजी गांव में 24 फीट का स्वीकृत रास्ता बंद कर दिया गया है। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है और उनकी आवाज को पूरी तरह से अनसुना किया जा रहा है।2
- चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी उपखंड क्षेत्र के पावली गांव में रहने वाले एक किसान किशनलाल बैरवा खेती की जुताई का कार्य आसान करने के लिए एक नया यंत्र लेकर आए हैं। इस नए औजार का नाम 'किसान किंग' है। इस यंत्र के आने से अब किसानों के लिए खेतों की जुताई का काम बेहद आसान हो जाएगा।1
- भीलवाड़ा के शाहपुरा में स्थित पीएम श्री वीर माता माणिक कंवर राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) और 21वीं सदी के कौशल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 'जीवन जीने हेतु कौशल' विषय पर 'मेरा परिचय' एवं व्यक्तित्व परीक्षण गतिविधि का सफल आयोजन किया गया। इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं में स्व-जागरूकता विकसित करना और उन्हें अपनी क्षमताओं व रुचियों को पहचानने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्राचार्य रीता धोबी के प्रेरणादायक उद्बोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने छात्राओं को अपनी खूबियों को पहचानकर जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल करने का मंत्र दिया। इस गतिविधि के दौरान छात्राओं को वर्कशीट प्रदान की गई, जिसमें उन्होंने अपने अनुशासन, रचनात्मकता, खेलकूद, चित्रकला, गायन और नेतृत्व जैसे सकारात्मक गुणों का उल्लेख किया। इसके बाद छात्राओं को दो-दो के समूहों में विभाजित कर एक-दूसरे के व्यक्तित्व को समझने और उनके व्यवहार का अवलोकन करने का अवसर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान कक्षा 12 की पलक कोली ने अपने व्यक्तित्व कौशल का बेहतरीन वर्णन किया, वहीं कक्षा 8 की भूमिका कोली ने भी अपना परिचय देकर अपने गुणों व रुचियों की जानकारी दी। शिक्षकों ने भी छात्राओं की विशिष्ट खूबियों को पहचानकर 'आप समय की पाबंद हैं' और 'आप विनम्र व्यवहार करती हैं' जैसी सकारात्मक टिप्पणियों से उनका हौसला बढ़ाया। इस गतिविधि के माध्यम से छात्राओं में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, प्रभावी संवाद, सहयोग, आत्मसम्मान और सामाजिक व नैतिक मूल्यों का विकास स्पष्ट रूप से देखने को मिला। छात्राओं ने बताया कि दूसरों से अपनी खूबियों की सराहना सुनकर उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम प्रभारी तबस्सुम ने छात्राओं की इस सक्रिय सहभागिता की सराहना की और भविष्य में भी ऐसी जीवनोपयोगी गतिविधियों को नियमित रूप से आयोजित करने का संकल्प लिया।3