प्रयागराज के कोरांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सुहास के पास महुवाव रत्योरा रोड के किनारे, सुबह लगभग 06:00 बजे स्थानीय लोगों ने एक अज्ञात व्यक्ति का शव देखा। इसकी सूचना तुरंत कोरांव थाने को दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से शव की पहचान कराई। मृतक की पहचान सुरेश कुमार धरिकार, पुत्र श्याम धरिकार, उम्र लगभग 50 वर्ष के रूप में हुई। वह कोरांव थाना अंतर्गत ग्राम टुड़िया का मूल निवासी था और वर्तमान में थाना खीरी अंतर्गत ग्राम चपरो में रहता था। मृतक के परिजनों को सूचना मिलते ही वे रोते-बिलखते घटनास्थल पर पहुंचे और हत्या का आरोप लगाया। मौके पर थाना अध्यक्ष कोरांव और एसीपी मेजा मौजूद रहे, जिन्होंने शव को कब्जे में लेकर जांच-पड़ताल शुरू कर दी। मिली जानकारी के अनुसार, सुरेश कुमार धरिकार का ग्राम सुहास निवासी लालजी धरिकार के बेटे की बहू के साथ प्रेम संबंध था। पुलिस प्रशासन फिलहाल मामले की गहन जांच में जुटा है।
प्रयागराज के कोरांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सुहास के पास महुवाव रत्योरा रोड के किनारे, सुबह लगभग 06:00 बजे स्थानीय लोगों ने एक अज्ञात व्यक्ति का शव देखा। इसकी सूचना तुरंत कोरांव थाने को दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से शव की पहचान कराई। मृतक की पहचान सुरेश कुमार धरिकार, पुत्र श्याम धरिकार, उम्र लगभग 50 वर्ष के रूप में हुई। वह कोरांव थाना अंतर्गत ग्राम टुड़िया का मूल निवासी था और
वर्तमान में थाना खीरी अंतर्गत ग्राम चपरो में रहता था। मृतक के परिजनों को सूचना मिलते ही वे रोते-बिलखते घटनास्थल पर पहुंचे और हत्या का आरोप लगाया। मौके पर थाना अध्यक्ष कोरांव और एसीपी मेजा मौजूद रहे, जिन्होंने शव को कब्जे में लेकर जांच-पड़ताल शुरू कर दी। मिली जानकारी के अनुसार, सुरेश कुमार धरिकार का ग्राम सुहास निवासी लालजी धरिकार के बेटे की बहू के साथ प्रेम संबंध था। पुलिस प्रशासन फिलहाल मामले की गहन जांच में जुटा है।
- गाज़ीपुर में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने शिक्षा संस्थानों की निष्पक्षता और शिक्षकीय मर्यादा पर गंभीर बहस छेड़ दी है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति, जिन्हें सोशल मीडिया पोस्टों में एमएएच इंटर कॉलेज, गाज़ीपुर के प्रधानाचार्य मोहम्मद खालिद उमर बताया जा रहा है, छात्रों के बीच एक ग्राम प्रधान प्रत्याशी के समर्थन में अपील करते दिखाई दे रहे हैं। हमारा चैनल इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता, लेकिन सोशल मीडिया दावों के अनुसार यह कार्यक्रम उसिया गांव के एक विद्यालय का बताया जा रहा है, जहाँ एमएएच इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य बतौर अतिथि मौजूद थे। वीडियो में कथित तौर पर छात्रों से कहा जा रहा है कि वे अपने माता-पिता से एक विशेष उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने की अपील करें। यदि वीडियो में किए जा रहे दावे सही हैं, तो यह मामला शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता, शिक्षकीय आचरण और लोकतांत्रिक मर्यादा से जुड़ा एक गंभीर प्रश्न बन जाता है। विद्यालय बच्चों को ज्ञान, विवेक, संवैधानिक मूल्यों और स्वतंत्र सोच की शिक्षा देने का स्थान होता है। ऐसे में यदि किसी शैक्षणिक मंच से चुनावी संदेश दिया जाए या बच्चों को किसी प्रत्याशी के समर्थन का माध्यम बनाया जाए, तो यह शिक्षा के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े करता है। इस पूरे प्रकरण का संवेदनशील पक्ष यह है कि बच्चे स्वयं मतदाता नहीं होते; उन्हें राजनीतिक संदेशों का वाहक बनाने की कोशिश नैतिकता और शिक्षकीय जिम्मेदारी दोनों कसौटियों पर सवालों के घेरे में आती है, क्योंकि समाज अपने बच्चों को जागरूक नागरिक बनाने के लिए विद्यालय भेजता है, न कि किसी चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाने के लिए। वायरल वीडियो को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है और इसी के साथ कई अहम सवाल उठ रहे हैं, जैसे कि क्या स्कूलों और शैक्षणिक आयोजनों को राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह मुक्त नहीं रखा जाना चाहिए, और क्या बच्चों के सामने किसी प्रत्याशी के पक्ष में अपील करना शिक्षकीय मर्यादा के अनुरूप माना जा सकता है। यदि वीडियो के दावे सही हैं, तो यह भी सवाल उठता है कि क्या संबंधित प्रशासनिक और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं करानी चाहिए। शिक्षक और प्रधानाचार्य समाज में केवल प्रशासक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे हर परिस्थिति में निष्पक्षता, गरिमा और संवैधानिक मूल्यों का पालन करें। शिक्षा का मंच जितना पवित्र और राजनीति से मुक्त रहेगा, लोकतंत्र की जड़ें उतनी ही मजबूत होंगी।1
- प्रयागराज के वकीलों ने पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद और हज़रत आयशा सिद्दीका के संबंध में सोशल मीडिया पर प्रसारित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया है। सोमवार को अधिवक्ता मो. मोहम्मद हन्जला फारूकी के नेतृत्व में वकीलों ने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित एक ज्ञापन डीएम प्रयागराज को सौंपा। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर प्रसारित एक कथित वीडियो/पॉडकास्ट में की गई टिप्पणियां धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली हैं, जिससे देशभर के करोड़ों मुसलमानों की भावनाएं आहत हुई हैं।1
- प्रयागराज की नन्ही बेटी अन्नी यादव ने यमुना नदी पार कर जिले का मान बढ़ाया है। नैनी क्षेत्र के खरकौनी गांव की 8 वर्षीय अन्नी यादव ने यह शानदार उपलब्धि हासिल की है, जिससे उन्होंने एक नया इतिहास रच दिया है। उनकी इस सफलता में उनकी माता सोनम यादव, पिता रंजीत यादव और कोच मोनू निषाद का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अपनी नन्ही उम्र में यह बड़ा कारनामा कर अन्नी यादव आज पूरे प्रयागराज और प्रदेश के बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।4
- प्रयागराज में हर साल मोहर्रम की 8 तारीख को अटाला स्थित रोशन बाग से मेहंदी का जुलूस निकलकर अपने तय रास्ते से अटाला इमामबाड़े तक जाता है। हालांकि, इस बार यह मेहंदी नहीं उठाई जा रही है, जिस कारण स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ताजियादार अल्ताफ अहमद से बातचीत के बाद उन्होंने इस बार व्यक्तिगत कारणों से मेहंदी न उठाने की बात कही है। इस फैसले को लेकर स्थानीय लोगों में जबरदस्त नाराजगी है और वे मेहंदी उठाने की मांग कर रहे हैं।4
- प्रयागराज में हर साल मोहर्रम की 8 तारीख को अटाला स्थित रोशन बाग से मेहंदी उठाई जाती है, जो अपने तय रास्ते से होते हुए अटाला इमामबाड़े तक जाती है। हालांकि, इस वर्ष यह परंपरा टूट रही है क्योंकि मेहंदी नहीं उठाई जा रही है। ताजियादार अल्ताफ अहमद से बातचीत में उन्होंने व्यक्तिगत कारणों के चलते मेहंदी न उठाने की बात कही है। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है और वे मेहंदी उठाने की मांग कर रहे हैं।1
- कौशांबी जिले में पुलिस मुठभेड़ के दौरान ₹25 हजार का इनामी बदमाश गुड्डू उर्फ साहिल गिरफ्तार कर लिया गया है, जो भैंस चोरी की घटनाओं में वांछित था। जवाबी फायरिंग में बदमाश के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोपी के कब्जे से तमंचा, कारतूस और नकदी भी बरामद हुई है। यह बदमाश मंझनपुर थाना क्षेत्र के बंधवा रजबर और भेलखा गांव से 29 और 30 अप्रैल की रात को चार भैंसों और एक बच्चे की चोरी के मामले में वांछित था। इस मामले में दर्ज मुकदमों की जांच के तहत पुलिस पहले ही छह अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी, जबकि गुड्डू उर्फ साहिल फरार चल रहा था और उस पर ₹25 हजार का इनाम घोषित था। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गुड्डू उर्फ साहिल एदिलपुर नहर के पास अपने साथियों का इंतजार कर रहा है और किसी वारदात की फिराक में है। पुलिस टीम द्वारा घेराबंदी किए जाने पर आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी। आत्मरक्षा में की गई पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बदमाश के पैर में गोली लगी और उसे पकड़ लिया गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान गुड्डू उर्फ साहिल पुत्र तूफान अहमद, निवासी रहीमपुर मौलानी, थाना करारी के रूप में हुई है। उसके कब्जे से एक 315 बोर का तमंचा, एक खोखा कारतूस, एक जिंदा कारतूस और ₹3310 नकद बरामद हुए हैं। पूछताछ के दौरान, आरोपी ने अपने साथियों के साथ बंधवा रजबर और भेलखा गांव से भैंसें चोरी करने की बात कबूल की। पुलिस के अनुसार, चोरी की गई भैंसों को उन्नाव के स्लॉटर हाउस में ₹30 हजार में बेचा गया था और यह रकम आपस में बांट ली गई थी। सीओ मंझनपुर शिवांक सिंह ने इस कार्रवाई की जानकारी दी है। पुलिस मामले में आगे की विधिक कार्रवाई कर रही है।1
- सपा सांसद अफजाल अंसारी ने राम मंदिर में चंदा चोरी की जांच पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह से एक 'नाटक' करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की है कि इस बेईमानी से जुड़े मामले की जांच का काम चारों शंकराचार्यों को सौंप दिया जाना चाहिए। अफजाल अंसारी ने अपनी इस मांग के समर्थन में कहा कि सनातन धर्म के लिए 4 पीठों की स्थापना करके 4 शंकराचार्य बैठाए गए थे।1
- प्रयागराज में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा के निर्देश पर सिविल लाइंस इलाके में स्थित चार शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई इन दुकानों के सामने भीड़ जुटने और खुले में शराब पीने से यातायात बाधित होने की शिकायतों के बाद की गई है। दरअसल, तीन दिन पहले संगम सभागार में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने शहर के प्रमुख चौराहों और शराब दुकानों के बाहर लगने वाली भीड़ पर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ऐसी किसी भी दुकान का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए, जहाँ भीड़ इकट्ठा होती है या खुले में शराब पीने की शिकायतें सामने आती हैं।1
- लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड में 14 लोगों की जान चली गई, जिससे यह गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इस त्रासदी का जिम्मेदार कौन है। आजकल पूरे देश में लाइब्रेरी खोलने का एक नया चलन तेजी से बढ़ रहा है, जहाँ बच्चे स्कूल, कॉलेज और घरों की बजाय पढ़ाई के नाम पर अधिक समय बिता रहे हैं। ये लाइब्रेरी हर गली-मोहल्ले में खुल गई हैं, लेकिन सुरक्षा के दृष्टिकोण से इनमें कोई सुविधा नहीं है। खासकर, अधिकतर लाइब्रेरी तो जमीन के अंदर बने तहखानों में संचालित हो रही हैं, जहाँ किसी भी घटना की स्थिति में बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इस गंभीर स्थिति के लिए सरकार और प्रशासन पर सीधा आरोप लगाया गया है कि वे इन लाइब्रेरियों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। मोटी मलाई चाटकर आसानी से मान्यता प्रदान कर दी जाती है और उसके बाद दोबारा यह जाँचने की ज़हमत भी नहीं उठाई जाती कि वहाँ क्या सुविधाएँ हैं और क्या नहीं। ज़्यादातर लाइब्रेरियों में फायर सेफ्टी की सुविधा तो है ही नहीं; नाम मात्र की सुविधा के साथ रातोंरात लाइब्रेरी संचालित की जा रही हैं। हालांकि, यह केवल सरकार और प्रशासन की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उन अभिभावकों को भी अपने बच्चों पर नज़र रखनी चाहिए जो इन लाइब्रेरियों में घंटों बिताने या पढ़ाई करने जाते हैं। उन्हें यह देखना चाहिए कि उनके बच्चे वहाँ क्या कर रहे हैं और वहाँ क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं, खासकर जब लाइब्रेरी के अंदर से ज़्यादा भीड़ बाहर फोन पर दिखती है। सरकार और प्रशासन से विनम्र निवेदन किया गया है कि ऐसी लाइब्रेरियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए और उन्हें बंद करवाया जाए, जहाँ सुविधा के नाम पर सिर्फ़ ठेंगा है।1