गौतम बुद्ध नगर ग्रेटर नोएडा दादरी गाँव नईबस्ती मे मंदिर पर पुरानी परम्परागत सांस्कृतिक चली आरी है जी निश्चित रूप से, गौतम बुद्ध नगर के दादरी क्षेत्र की इस शानदार परंपरा को हिंदी में इस प्रकार समझा जा सकता है: नई बस्ती (दादरी) की ऐतिहासिक परंपरा गौतम बुद्ध नगर के नई बस्ती गाँव में एकादशी के दिन पूर्वजों की परंपरा को जिस तरह नगाड़ों के साथ निभाया जा रहा है, वह हमारी सांस्कृतिक विरासत की गहराई को दर्शाता है। यह परंपरा कितनी "बड़ी" है? इस परंपरा की महानता को आप इन बिंदुओं से समझ सकते हैं: * पीढ़ियों का जुड़ाव: यह परंपरा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि आपके पुरखों (Ancestors) की दी हुई धरोहर है। ऐसी परंपराएं आमतौर पर 100 से 200 साल पुरानी होती हैं, जो दादा-परदादा के समय से चली आ रही हैं। * जोगी और लोक गायन: 'जोगी' परंपरा का संबंध आध्यात्मिक भक्ति से होता है। एकादशी पर नगाड़े बजाकर देवताओं का आह्वान करना और पुराने भजनों को गाना गाँव की नकारात्मकता को दूर करने और खुशहाली लाने का प्रतीक माना जाता है। * सामुदायिक एकता: आज के आधुनिक युग में, जहाँ लोग फोन में व्यस्त हैं, आपके गाँव के लोगों का मंदिर पर इकट्ठा होकर नगाड़े बजाना यह दिखाता है कि गाँव की एकता कितनी मजबूत है। यह परंपरा आज के समय में बहुत "बड़ी" और दुर्लभ है। > एक विशेष बात: दादरी और इसके आसपास के इलाकों में नगाड़ा बजाना केवल संगीत नहीं, बल्कि "वीरता और भक्ति" का संगम है। एकादशी जैसे पवित्र दिन पर इसे बजाना गाँव के लिए सौभाग्य की बात मानी जाती है। > क्या आप चाहते हैं कि मैं आपके गाँव की इस परंपरा पर एक सुंदर कविता या संदेश लिखूँ, जिसे आप अपने गाँव के लोगों के साथ साझा कर सकें?
गौतम बुद्ध नगर ग्रेटर नोएडा दादरी गाँव नईबस्ती मे मंदिर पर पुरानी परम्परागत सांस्कृतिक चली आरी है जी निश्चित रूप से, गौतम बुद्ध नगर के दादरी क्षेत्र की इस शानदार परंपरा को हिंदी में इस प्रकार समझा जा सकता है: नई बस्ती (दादरी) की ऐतिहासिक परंपरा गौतम बुद्ध नगर के नई बस्ती गाँव में एकादशी के दिन पूर्वजों की परंपरा को जिस तरह नगाड़ों के साथ निभाया जा रहा है, वह हमारी सांस्कृतिक विरासत की गहराई को दर्शाता है। यह परंपरा कितनी "बड़ी" है? इस परंपरा की महानता को आप इन बिंदुओं से समझ सकते हैं: * पीढ़ियों का जुड़ाव: यह परंपरा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि आपके पुरखों (Ancestors) की दी हुई धरोहर है। ऐसी परंपराएं आमतौर पर 100 से 200 साल पुरानी होती हैं, जो दादा-परदादा के समय से चली आ रही हैं। * जोगी और लोक गायन: 'जोगी' परंपरा का संबंध आध्यात्मिक भक्ति से होता है। एकादशी पर नगाड़े बजाकर देवताओं का आह्वान करना और पुराने भजनों को गाना गाँव की नकारात्मकता को दूर करने और खुशहाली लाने का प्रतीक माना जाता है। * सामुदायिक एकता: आज के आधुनिक युग में, जहाँ लोग फोन में व्यस्त हैं, आपके गाँव के लोगों का मंदिर पर इकट्ठा होकर नगाड़े बजाना यह दिखाता है कि गाँव की एकता कितनी मजबूत है। यह परंपरा आज के समय में बहुत "बड़ी" और दुर्लभ है। > एक विशेष बात: दादरी और इसके आसपास के इलाकों में नगाड़ा बजाना केवल संगीत नहीं, बल्कि "वीरता और भक्ति" का संगम है। एकादशी जैसे पवित्र दिन पर इसे बजाना गाँव के लिए सौभाग्य की बात मानी जाती है। > क्या आप चाहते हैं कि मैं आपके गाँव की इस परंपरा पर एक सुंदर कविता या संदेश लिखूँ, जिसे आप अपने गाँव के लोगों के साथ साझा कर सकें?
- निश्चित रूप से, गौतम बुद्ध नगर के दादरी क्षेत्र की इस शानदार परंपरा को हिंदी में इस प्रकार समझा जा सकता है: नई बस्ती (दादरी) की ऐतिहासिक परंपरा गौतम बुद्ध नगर के नई बस्ती गाँव में एकादशी के दिन पूर्वजों की परंपरा को जिस तरह नगाड़ों के साथ निभाया जा रहा है, वह हमारी सांस्कृतिक विरासत की गहराई को दर्शाता है। यह परंपरा कितनी "बड़ी" है? इस परंपरा की महानता को आप इन बिंदुओं से समझ सकते हैं: * पीढ़ियों का जुड़ाव: यह परंपरा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि आपके पुरखों (Ancestors) की दी हुई धरोहर है। ऐसी परंपराएं आमतौर पर 100 से 200 साल पुरानी होती हैं, जो दादा-परदादा के समय से चली आ रही हैं। * जोगी और लोक गायन: 'जोगी' परंपरा का संबंध आध्यात्मिक भक्ति से होता है। एकादशी पर नगाड़े बजाकर देवताओं का आह्वान करना और पुराने भजनों को गाना गाँव की नकारात्मकता को दूर करने और खुशहाली लाने का प्रतीक माना जाता है। * सामुदायिक एकता: आज के आधुनिक युग में, जहाँ लोग फोन में व्यस्त हैं, आपके गाँव के लोगों का मंदिर पर इकट्ठा होकर नगाड़े बजाना यह दिखाता है कि गाँव की एकता कितनी मजबूत है। यह परंपरा आज के समय में बहुत "बड़ी" और दुर्लभ है। > एक विशेष बात: दादरी और इसके आसपास के इलाकों में नगाड़ा बजाना केवल संगीत नहीं, बल्कि "वीरता और भक्ति" का संगम है। एकादशी जैसे पवित्र दिन पर इसे बजाना गाँव के लिए सौभाग्य की बात मानी जाती है। > क्या आप चाहते हैं कि मैं आपके गाँव की इस परंपरा पर एक सुंदर कविता या संदेश लिखूँ, जिसे आप अपने गाँव के लोगों के साथ साझा कर सकें?1
- Post by Shivam1
- Post by Sonu Kanaujiya1
- Post by पत्रकार धीरेंद्र त्रिपाठी1
- Post by Vikrant Chaudhary1
- Post by Praveen Kumar1
- मोदी और नेतन्याहू ने जेरूसलम में याद वाशेम - द वर्ल्ड होलोकॉस्ट रिमेंबरेंस सेंटर का दौरा किया, नेतन्याहू बोले आप डगमगाए नहीं। आप पीछे नहीं हटे। आप इज़राइल के साथ खड़े रहे, फ़ाइल में नाम आने के बाद इस्तीफा दे रहे हैं लेकिन भारत में नहीं - प्रियंका, बंगाल में भाजपा की सरकार बनने वाली है,एक-एक घुसपैठिया बाहर होगा बोले शाह, मैंने स्वास्थ्य के कारण इस्तीफा नहीं दिया - पूर्व राष्ट्रपति, भाई-बहन के रिश्ते में नोक-झोंक तो चलती रहती है बताया राहुल गांधी ने.... देखिए राजपथ न्यूज़ पर..1
- *🌹 19 वाँ , स्थापना दिवस 🌹* 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻 *28 फरवरी 2026 को* ब्राह्मण स्वाभिमान जागृति , सुरक्षा एवं आन्दोलन - का प्रतीक बन चुका , *अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ( रा )* का ऐतिहासिक कार्यक्रम *19 वाँ स्थापना दिवस सम्मान समारोह* ब्राह्मण स्वाभिमान के प्रतीक बन चुके - *यू पी रत्न पं० राजेन्द्र नाथ त्रिपाठी जी* राष्ट्रीय अध्यक्ष *आखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ( रा )* के कुशल निर्देशन में , लखनऊ के सबसे बड़े *आडिटोरियम्* ( सभागार / रंगभवन ) *इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान* में सम्पन्न होना सुनिश्चित हुआ है । यह *आडिटोरियम ( सभागार ) / इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान* - - *गोमती नगर , कठौता चौराहा रोड , विभूति खण्ड* के पास स्थित है । जिसमें भाग लेने / हिस्सा लेने हेतु *प्रदेश व देश के कोने - कोने से भारी संख्या में ( लगभग , पचास हजार / 50 , 000 ) , ब्राह्मण बन्धुओं का आगमन हो रहा है ,* जिसका कालान्तर में दूरगामी परिणाम भारतवर्ष के समस्त ब्राह्मण बन्धुओं के लिए सुखद व क्रान्तिकारी परिणाम देने वाला होगा । *🌺 जय सियाराम ।🌺* *🚩 जय भगवान परशुराम ।🚩* आपका अपना : - 🙏🏻🙏🏻 *अधिवक्ता आचार्य बी सी भिखारी चरवाहा* प्रदेश प्रवक्ता व पूर्वांचल अध्यक्ष *अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ( रा )* उत्तर प्रदेश , लखनऊ , उत्तर प्रदेश । Mob - *99 36 89 16 71* 🙏🏻🙏🏻🚩🚩🙏🏻🙏🏻1