भगवान की आस और अटूट विश्वास के साथ दूसरे जिलों से लंबी यात्रा तय कर मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अक्सर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उज्जैन — भगवान की आस और अटूट विश्वास के साथ दूसरे जिलों से लंबी यात्रा तय कर मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अक्सर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है जहाँ दूर-दराज से दर्शन करने पहुंचे एक आम भक्त को मंदिर परिसर के भीतर तैनात निजी या सरकारी सुरक्षा गार्डों (Security Guards) द्वारा अजीबोगरीब और असमंजस में डालने वाले निर्देश दिए गए। इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर इन सुरक्षाकर्मियों को ऐसे निर्देश कौन देता है? क्या मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन या नियमों के पालन के संबंध में कोई 'मैसेंजर' (संदेश वाहक) दिशा-निर्देश जारी करता है, या इसके पीछे सीधे तौर पर मंदिर प्रबंधन समिति (Temple Management Committee) की कार्यप्रणाली जिम्मेदार है? मुख्य बिंदु (Key Highlights): भक्तों की आस्था को ठेस: दूर-दराज से अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालु जब मंदिर के अंदर पहुंचते हैं, तो उन्हें सुरक्षाकर्मियों के मनमाने रवैये और परस्पर विरोधी निर्देशों का सामना करना पड़ता है। अधिकारों की अस्पष्टता: गार्डों द्वारा यह तय करना कि कौन कैसे दर्शन करेगा, किस लाइन में लगेगा और क्या नियम मानेगा, व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। मैसेंजर या समिति? क्या मंदिर समिति अपनी जिम्मेदारी से बच रही है और मौखिक आदेशों के सहारे व्यवस्था चलाई जा रही है? व्यवस्था पर गंभीर सवाल धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए होती है, न कि उन्हें परेशान करने के लिए। लेकिन जब सुरक्षा गार्ड ही दर्शन के तौर-तरीकों पर अपनी मर्जी से पाबंदियां लगाने लगें, तो यह सवाल लाजिमी है कि: क्या मंदिर समिति ने सुरक्षा गार्डों को दर्शन संबंधी निर्देश देने का अधिकार दे रखा है? यदि नहीं, तो गार्ड किस के इशारे पर या किस 'मैसेंजर' के संदेश के आधार पर श्रद्धालुओं को नियंत्रित कर रहे हैं? क्या मंदिर प्रशासन के पास कोई लिखित और पारदर्शी मार्गदर्शिका (Guidelines) नहीं है, जिसे आम जनता तक पहुंचाया जा सके? श्रद्धालुओं में रोष और प्रशासन से मांग बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि वे भगवान पर अटूट विश्वास रखकर हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं, लेकिन मंदिर के अंदर कुप्रबंधन और गार्डों का अड़ियल रवैया उनकी आस्था को ठेस पहुंचाता है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन और मंदिर समिति से यह मांग की है कि: मंदिर परिसर में सुरक्षाकर्मियों के अधिकार और उनके कार्यक्षेत्र को स्पष्ट किया जाए। श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए एक सरल, पारदर्शी और लिखित व्यवस्था लागू हो। मनमाने निर्देश देने वाले कर्मियों पर उचित कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी भक्त को असुविधा का सामना न करना पड़े।
भगवान की आस और अटूट विश्वास के साथ दूसरे जिलों से लंबी यात्रा तय कर मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अक्सर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उज्जैन — भगवान की आस और अटूट विश्वास के साथ दूसरे जिलों से लंबी यात्रा तय कर मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अक्सर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है जहाँ दूर-दराज से दर्शन करने पहुंचे एक आम भक्त को मंदिर परिसर के भीतर तैनात निजी या सरकारी सुरक्षा गार्डों (Security Guards) द्वारा अजीबोगरीब और असमंजस में डालने वाले निर्देश दिए गए। इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर इन सुरक्षाकर्मियों को ऐसे निर्देश कौन देता है? क्या मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन या नियमों के पालन के संबंध में कोई 'मैसेंजर' (संदेश वाहक) दिशा-निर्देश जारी करता है, या इसके पीछे सीधे तौर पर मंदिर प्रबंधन समिति (Temple Management Committee) की कार्यप्रणाली जिम्मेदार है? मुख्य बिंदु (Key Highlights): भक्तों की आस्था को ठेस: दूर-दराज से अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालु जब मंदिर के अंदर पहुंचते हैं, तो उन्हें सुरक्षाकर्मियों के मनमाने रवैये और परस्पर विरोधी निर्देशों का सामना करना पड़ता है। अधिकारों की अस्पष्टता: गार्डों द्वारा यह तय करना कि कौन कैसे दर्शन करेगा, किस लाइन में लगेगा और क्या नियम मानेगा, व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। मैसेंजर या समिति? क्या मंदिर समिति अपनी जिम्मेदारी से बच रही है और मौखिक आदेशों के सहारे व्यवस्था चलाई जा रही है? व्यवस्था पर गंभीर सवाल धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए होती है, न कि उन्हें परेशान करने के लिए। लेकिन जब सुरक्षा गार्ड ही दर्शन के तौर-तरीकों पर अपनी मर्जी से पाबंदियां लगाने लगें, तो यह सवाल लाजिमी है कि: क्या मंदिर समिति ने सुरक्षा गार्डों को दर्शन संबंधी निर्देश देने का अधिकार दे रखा है? यदि नहीं, तो गार्ड किस के इशारे पर या किस 'मैसेंजर' के संदेश के आधार पर श्रद्धालुओं को नियंत्रित कर रहे हैं? क्या मंदिर प्रशासन के पास कोई लिखित और पारदर्शी मार्गदर्शिका (Guidelines) नहीं है, जिसे आम जनता तक पहुंचाया जा सके? श्रद्धालुओं में रोष और प्रशासन से मांग बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि वे भगवान पर अटूट विश्वास रखकर हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं, लेकिन मंदिर के अंदर कुप्रबंधन और गार्डों का अड़ियल रवैया उनकी आस्था को ठेस पहुंचाता है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन और मंदिर समिति से यह मांग की है कि: मंदिर परिसर में सुरक्षाकर्मियों के अधिकार और उनके कार्यक्षेत्र को स्पष्ट किया जाए। श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए एक सरल, पारदर्शी और लिखित व्यवस्था लागू हो। मनमाने निर्देश देने वाले कर्मियों पर उचित कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी भक्त को असुविधा का सामना न करना पड़े।
- पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार सोनी ने जिले के सभी होटल संचलाको के साथ बैठक कर संचलाको, को दिए निर्देश।1
- सुसनेर में गूंजे देशभक्ति के नारे: नगर परिषद ने निकाली भव्य तिरंगा यात्रा सुसनेर। 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत बुधवार को नगर परिषद सुसनेर द्वारा भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा नगर के विश्राम गृह से शुरू होकर श्री राम मंदिर धर्मशाला पर संपन्न हुई। यात्रा में पूर्व विधायक राणा विक्रम सिंह, नगर परिषद अध्यक्ष प्रदीप सोनी, मण्डल अध्यक्ष डॉ सौरभ जैन, पार्षदगण, भाजपा पदाधिकारी, शासन-प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्कूली बच्चे एवं शिक्षक बड़ी संख्या में शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लिए और "भारत माता की जय", "वंदे मातरम्" के नारों के साथ देशभक्ति का माहौल बन गया। नागरिकों ने हाथों में तिरंगा ध्वज लेकर यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्री राम मंदिर धर्मशाला पहुंचकर यात्रा का समापन हुआ। यहां नगर परिषद अध्यक्ष प्रदीप सोनी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए तिरंगे के महत्व और आजादी के संघर्ष में बलिदान देने वाले वीरों को याद किया। उन्होंने सभी से 15 अगस्त को अपने-अपने घरों पर तिरंगा फहराने की अपील की।2
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- तहसील गाडरवारा आदर्श स्कूल की वीडियो है देखें और लाइक करें मैं आपका प्यारा शुभम मिश्रा1
- *जिला पुलिस आगर मालवा (म.प्र.)त्योहारों एवं राष्ट्रीय पर्व के मद्देनजर होटल संचालकों की बैठक* *पुलिस अधीक्षक के निर्देश—हर अतिथि की पहचान, CCTV निगरानी एवं संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल सूचना सुनिश्चित करें*1
- सुसनेर: फोरलेन: जमीन अधिग्रहण पर 25 अगस्त तक SDM कार्यालय में कर सकते है दावा-आपत्ति, 3 सितंबर को होगी सुनवाई सुसनेर से गुजर रहे उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग 552 जी को फोरलेन बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। आज बुधवार शाम साढ़े 4 बजे डग रोड़ स्थित SDM कार्यालय से रीडर गोविंद पाटिदार ने जानकारी देते हुए बताया कि गजट नोटिफिकेशन का प्रकाशन समाचार पत्रों में कर दिया गया है। जिन भू-स्वामियों की जमीन सुसनेर अनुविभागीय सीमा में आ रही है, वे प्रभावित लोग 25 अगस्त तक एसडीएम कार्यालय में अपनी दावा-आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। प्राप्त दावों और आपत्तियों पर सुनवाई 3 सितंबर को दोपहर 12 बजे से एसडीएम कार्यालय में की जाएगी। इसके बाद प्रक्रिया शुरू होगी।1
- मोहन बड़ोदिया नवागत थाना प्रभारी का स्वागत, हिंदू जागरण मंच द्वारा 14 अगस्त को निकलेगी तिरंगा यात्रा शाजापुर जिले के मोहन बड़ोदिया की नवागत थाना प्रभारी श्रीमति मनीषा शर्मा का बुधवार शाम 4 बजे हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक प्रेम सिंह राजपूत एवं खंड कार्यकारिणी के सदस्यों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर किया। इस दौरान आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा की गई। हिंदू जागरण मंच के नेतृत्व में 14 अगस्त को अखंड भारत के निमित्त तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा ग्राम मोहन बड़ोदिया से शुरू होकर चौमा तक करीब 15 किलोमीटर का सफर तय करेगी। यात्रा में वाहनों के साथ डीजे भी शामिल रहेगा। आयोजन को लेकर हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं द्वारा तैयारियां की जा रही हैं। मंच ने क्षेत्र के लोगों से यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।1
- मेरा नाम शुभम मिश्रा मेरी वीडियो पूरे देखें और लाइक करें इंस्टाग्राम पर फेसबुक पर धन्यवाद और युटुबपर1
- *बिग ब्रेकिंग*... मध्यप्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, जैसा अन्य राज्यों ने भी किया है। हमारा प्रयास होगा कि प्राकृतिक रूप से दुग्ध उत्पादन बढ़े और उसी से प्राकृतिक पनीर का निर्माण हो। - *डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री*1