महत्वपूर्ण अनसुलझे रहस्य सवाल: कांस्टेबल भागचंद सैनी मर्डर से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण अनसुलझे रहस्य सवाल: कांस्टेबल भागचंद सैनी मर्डर से जुड़े सवाल दूनी/टोंक (हरि शंकर माली)। कांस्टेबल भागचंद सैनी हत्याकांड को लेकर अब भी कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब ना तो पुलिस जांच में सामने आया है और ना ही प्रेस नोट में स्पष्ट किया गया। मृतक के परिजनों, समाज और क्षेत्रीय लोगों के मन में लगातार संदेह बना हुआ है। मामले में कई बिंदुओं पर अब भी रहस्य बरकरार है और लोग सीआईडी जांच से जल्द खुलासे की मांग कर रहे हैं। घटना को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि ड्यूटी के दौरान मीट लेने कौन गया था। वहीं पार्टी के लिए टोंक से खाना और अन्य खाद्य सामग्री कौन लेकर आया तथा वह खाना किन-किन पुलिसकर्मियों ने और कहां खाया, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। घटना वाली रात ककोड़ पुलिस चौकी पर देर रात अकेला कौन मौजूद था, यह भी अब तक सामने नहीं आया। इसी दौरान रात्रि करीब 2:27 बजे कांस्टेबल भागचंद सैनी की पत्नी को चौकी से फोन किसने किया और फोन पर क्या बातचीत हुई, यह भी रहस्य बना हुआ है। परिजनों के अनुसार यह भी स्पष्ट नहीं हुआ कि सिपाही भागचंद सैनी गश्त के लिए कितने बजे निकले थे। क्या इसकी सूचना ड्यूटी ऑफिसर या संबंधित पुलिस थाने को दी गई थी? वह वर्दी में थे या बिना वर्दी के, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार कांस्टेबल भागचंद सैनी ने पुलिस थाने के व्हाट्सएप ग्रुप पर अलग-अलग समय पर गश्त की लोकेशन साझा की थी। हालांकि उनका मोबाइल फोन और अंतिम लोकेशन आखिर कितने बजे तक सक्रिय रही, इसको लेकर भी संशय है। बताया जा रहा है कि ढाबे से उनकी आखिरी लोकेशन रात 2:58 बजे की मिली, इसके बाद लोकेशन अचानक गायब हो गई। मामले में यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि सिपाही की हत्या रात्रि लगभग 3 बजे के आसपास हुई। इसके बाद भी उसी रात 7 ट्रैक्टर बजरी के निकलने की चर्चा सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उस समय डीओ ड्यूटी किसकी थी और बजरी किसकी शह पर तथा किसकी एंट्री से निकली। क्या बजरी परिवहन करने वालों को गश्त पर मौजूद सिपाही भागचंद सैनी दिखाई नहीं दिए या उन्हें घटना की जानकारी नहीं हुई? मृतक सिपाही की पेंट पर खून के निशान नहीं मिलने और ढाबे से लोकेशन गायब होने को लेकर भी परिजन सवाल उठा रहे हैं। वहीं मोबाइल का डाटा किसने, कैसे और क्यों नष्ट किया गया, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। पुलिस प्रेस नोट में मोबाइल फोन को लेकर कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं होने से भी संदेह गहराता जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि परिवार के कुछ सदस्यों को पुलिस द्वारा धमकाया गया। इसके अलावा घटना में प्रयुक्त बंदूक आखिर किसकी थी और अन्य आरोपी कौन थे, यह भी अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। लोगों के बीच यह सवाल भी बना हुआ है कि दोनों आरोपियों को पुलिस ने कहां से गिरफ्तार किया। प्रेस नोट में गिरफ्तारी स्थल का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। यदि आरोपी शिकारी थे तो उन्हें कहां से पकड़ा गया और इस कार्रवाई के गवाह कौन थे? जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि आरोपी शिकारी नहीं बल्कि ट्रक-ट्रेलर चालक थे। घटना में दिखाई गई फिटनेस खत्म बाइक आखिर किसके नाम पर दर्ज है और आरोपियों से बरामद दिखाया गया छर्रा कहां से आया, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है। मृतक कांस्टेबल भागचंद सैनी के परिजनों ने शुरू से ही बजरी माफिया पर हत्या का आरोप लगाया था, लेकिन पुलिस ने आरोपियों को शिकारी बताया। इसी कारण परिजनों और माली समाज में पुलिस जांच को लेकर संदेह बना हुआ है। अब क्षेत्र के लोग मामले की निष्पक्ष जांच और सीआईडी से जल्द खुलासे की मांग कर रहे हैं।
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- महत्वपूर्ण अनसुलझे रहस्य सवाल: कांस्टेबल भागचंद सैनी मर्डर से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण अनसुलझे रहस्य सवाल: कांस्टेबल भागचंद सैनी मर्डर से जुड़े सवाल दूनी/टोंक (हरि शंकर माली)। कांस्टेबल भागचंद सैनी हत्याकांड को लेकर अब भी कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब ना तो पुलिस जांच में सामने आया है और ना ही प्रेस नोट में स्पष्ट किया गया। मृतक के परिजनों, समाज और क्षेत्रीय लोगों के मन में लगातार संदेह बना हुआ है। मामले में कई बिंदुओं पर अब भी रहस्य बरकरार है और लोग सीआईडी जांच से जल्द खुलासे की मांग कर रहे हैं। घटना को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि ड्यूटी के दौरान मीट लेने कौन गया था। वहीं पार्टी के लिए टोंक से खाना और अन्य खाद्य सामग्री कौन लेकर आया तथा वह खाना किन-किन पुलिसकर्मियों ने और कहां खाया, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। घटना वाली रात ककोड़ पुलिस चौकी पर देर रात अकेला कौन मौजूद था, यह भी अब तक सामने नहीं आया। इसी दौरान रात्रि करीब 2:27 बजे कांस्टेबल भागचंद सैनी की पत्नी को चौकी से फोन किसने किया और फोन पर क्या बातचीत हुई, यह भी रहस्य बना हुआ है। परिजनों के अनुसार यह भी स्पष्ट नहीं हुआ कि सिपाही भागचंद सैनी गश्त के लिए कितने बजे निकले थे। क्या इसकी सूचना ड्यूटी ऑफिसर या संबंधित पुलिस थाने को दी गई थी? वह वर्दी में थे या बिना वर्दी के, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार कांस्टेबल भागचंद सैनी ने पुलिस थाने के व्हाट्सएप ग्रुप पर अलग-अलग समय पर गश्त की लोकेशन साझा की थी। हालांकि उनका मोबाइल फोन और अंतिम लोकेशन आखिर कितने बजे तक सक्रिय रही, इसको लेकर भी संशय है। बताया जा रहा है कि ढाबे से उनकी आखिरी लोकेशन रात 2:58 बजे की मिली, इसके बाद लोकेशन अचानक गायब हो गई। मामले में यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि सिपाही की हत्या रात्रि लगभग 3 बजे के आसपास हुई। इसके बाद भी उसी रात 7 ट्रैक्टर बजरी के निकलने की चर्चा सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उस समय डीओ ड्यूटी किसकी थी और बजरी किसकी शह पर तथा किसकी एंट्री से निकली। क्या बजरी परिवहन करने वालों को गश्त पर मौजूद सिपाही भागचंद सैनी दिखाई नहीं दिए या उन्हें घटना की जानकारी नहीं हुई? मृतक सिपाही की पेंट पर खून के निशान नहीं मिलने और ढाबे से लोकेशन गायब होने को लेकर भी परिजन सवाल उठा रहे हैं। वहीं मोबाइल का डाटा किसने, कैसे और क्यों नष्ट किया गया, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। पुलिस प्रेस नोट में मोबाइल फोन को लेकर कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं होने से भी संदेह गहराता जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि परिवार के कुछ सदस्यों को पुलिस द्वारा धमकाया गया। इसके अलावा घटना में प्रयुक्त बंदूक आखिर किसकी थी और अन्य आरोपी कौन थे, यह भी अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। लोगों के बीच यह सवाल भी बना हुआ है कि दोनों आरोपियों को पुलिस ने कहां से गिरफ्तार किया। प्रेस नोट में गिरफ्तारी स्थल का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। यदि आरोपी शिकारी थे तो उन्हें कहां से पकड़ा गया और इस कार्रवाई के गवाह कौन थे? जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि आरोपी शिकारी नहीं बल्कि ट्रक-ट्रेलर चालक थे। घटना में दिखाई गई फिटनेस खत्म बाइक आखिर किसके नाम पर दर्ज है और आरोपियों से बरामद दिखाया गया छर्रा कहां से आया, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है। मृतक कांस्टेबल भागचंद सैनी के परिजनों ने शुरू से ही बजरी माफिया पर हत्या का आरोप लगाया था, लेकिन पुलिस ने आरोपियों को शिकारी बताया। इसी कारण परिजनों और माली समाज में पुलिस जांच को लेकर संदेह बना हुआ है। अब क्षेत्र के लोग मामले की निष्पक्ष जांच और सीआईडी से जल्द खुलासे की मांग कर रहे हैं।1
- रोड फूटने के कारण और नाली नहीं बनने के कारण रोड के ऊपर से पानी निकल रहा है गंदा पानी इसे हमारे एरिया के जो भी निकलने वाले को परेशानी होने के कारण सरपंच भी सुनवाई नहीं कर रहा वाटर लाइन जब से डालिए जब का रोड नहीं बना हुआ है इसलिए रोड भी खराब हो गया नाली भी खराब हो गई इसके ऊपर कई मकान रोड के ऊपर भी आ रहे हैं धन्यवाद3
- कुंडलपुर में 17 मई से भव्य शिव महापुराण कथा, कलश यात्रा से शुरुआत,#madhyapradesh #damoh #pateranews कुंडलपुर में 17 मई से भव्य शिव महापुराण कथा, कलश यात्रा से शुरुआत,#madhyapradesh #damoh #pateranews1
- टोंक जिले के नागरफोर्ट ब्लॉक के बालूंन्दा मोड में लोग पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। नल खुलने के बावजूद घरों तक पानी नहीं पहुँच रहा और शिकायतें अनसुनी की जा रही हैं। सरपंच और नल खोलने वाले को अवगत कराने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।1
- टोंक जिले के उनियारा उपखंड में एक सूने मकान से अधेड़ व्यक्ति का अज्ञात शव मिला, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर शिनाख्त के प्रयास शुरू कर दिए हैं, वहीं स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।1
- बूंदी जिले में 'भादवा रानी' विषय पर एक नई कविता प्रकाशित हुई है। यह रचना स्थानीय इतिहास या किसी व्यक्ति विशेष पर प्रकाश डाल सकती है। पूरी कहानी जानने के लिए कविता पढ़ें।1
- बूंदी के छत्रपुरा स्थित श्री वीर तेजाजी महाराज मंदिर में चल रही रामलीला में सूर्पनखा की नाक काटना, स्वर्ण हिरण वध और सीता हरण जैसे भावुक प्रसंगों का मंचन हुआ। इन दृश्यों ने क्षेत्रवासियों को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।1
- राजस्थान के टोंक जिले की घाड़ पंचायत में अरावली की पहाड़ियों पर पत्थर माफियाओं के हौसले अब भी बुलंद हैं। वन विभाग द्वारा रास्तों में गहरी खाई खोदकर अवरुद्ध करने के कुछ घंटों बाद ही खनन फिर शुरू हो गया, जो विभाग की खानापूर्ति साबित हुआ। नियमित निगरानी के अभाव में कोटड़ा से हरिपुरा तक अवैध खनन का काम बेखौफ जारी है।1