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सर्व पितृ अमावस्या पर #_जगत_न्यूज़_24 परिवार सभी पितरों को कोटि कोटि नमन करता है।
JAGAT NEWS 24
सर्व पितृ अमावस्या पर #_जगत_न्यूज़_24 परिवार सभी पितरों को कोटि कोटि नमन करता है।
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- दिल्ली जंतर-मंतर पर 9 अक्टूबर की रात का नज़ारा | अनाउंसमेंट सुनिए दिल्ली जंतर-मंतर पर 9 अक्टूबर की रात का नज़ारा | अनाउंसमेंट सुनिए1
- संसद भवन के सेंट्रल हॉल से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक जा रहे विपक्षी दलों के सांसदों को विजय चौक पर पुलिस ने रोक दिया है। संसद भवन के सेंट्रल हॉल से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक जा रहे विपक्षी दलों के सांसदों को विजय चौक पर पुलिस ने रोक दिया है। राहुल गांधी के नेतृत्व 15 सदस्यी प्रतिनिधिमंडल फिलहाल राष्ट्रपति से मिलने गए हैं। बाकी सांसद विजय चौक पर ही धरने पर बैठ गए हैं..1
- ममता दीदी ने सुनाया जॉनी जॉनी यस पापा का देसी वर्जन!🤣🤣1
- खड़गे प्रधानमंत्री से माफी मांगें, वरना जनविरोध के लिए रहें तैयार: हर्ष मल्होत्रा दिल्ली भाजपा अध्यक्ष बोले—आंदोलन से निपटने की तैयारी सरकार का डर है तो कांग्रेस ने कई बार क्यों चलाईं गोलियां? नई दिल्ली, 10 अक्टूबर। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के भाजपा सरकार को लेकर दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उनसे तत्काल माफी मांगने की मांग की है। मल्होत्रा ने कहा कि खड़गे का यह कहना कि 'वे डरे हुए हैं और जो आदमी डरता है, वह आज नहीं तो कल मरता है' निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष लगातार भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि भाजपा के नेता कांग्रेस अध्यक्ष की उम्र का लिहाज करते हुए उनके प्रति कभी अनुचित शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते, लेकिन खड़गे बार-बार प्रधानमंत्री और भाजपा सरकार के खिलाफ मर्यादाहीन बयान देते हैं। कांग्रेस के शासनकाल का इतिहास याद दिलाया दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यदि किसी आंदोलन से निपटने के लिए सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था करना सरकार का डरना है, तो कांग्रेस को अपने शासनकाल का इतिहास भी याद करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि 1966 में गोहत्या के विरोध में हुए आंदोलन के दौरान गोली चलाने की घटना क्या थी? देश में आपातकाल लगाना क्या था? वर्ष 1988 में राजपथ पर किसान आंदोलन के दौरान गोली चलाने की कार्रवाई किस बात का प्रमाण थी? मल्होत्रा ने 1990 और 1993 में विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर कारसेवकों को राजपथ की ओर बढ़ने से रोकने के लिए कांटेदार तार लगाने, आंसू गैस छोड़ने और लाठीचार्ज जैसी कार्रवाइयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को डरने का आरोप लगाने वाले खड़गे को पहले कांग्रेस के शासनकाल में आंदोलनों से निपटने के तरीकों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि यदि आज आंदोलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था करना डर का संकेत है, तो कांग्रेस की सरकारें अपने कार्यकाल में बार-बार ऐसी कार्रवाइयां क्यों करती रहीं और आंदोलनों के दौरान गोली तक क्यों चलवाई गई? प्रधानमंत्री से माफी की मांग हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को प्रधानमंत्री के प्रति अपनी भाषा और आचरण की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि मल्लिकार्जुन खड़गे प्रधानमंत्री से माफी मांगें, अन्यथा उन्हें जनता के आक्रोश और जनविरोध का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।1
- टीम महेन्द्र सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय जन क्रान्ति सेना नेतृत्व भारत1
- 🇮🇳 जंतर-मंतर पर इतनी सुरक्षा क्यों? आखिर डर किस बात का है? 🇮🇳🔥 कहते हैं कि लोकतंत्र में अपनी आवाज़ बुलंद करनी है, तो चलो भैया जंतर-मंतर! लेकिन आज सवाल यह है कि जंतर-मंतर पर ऐसा माहौल क्यों है? क्या डर जनता की आवाज़ से है या उन सवालों से, जो 10 अक्टूबर को उठने वाले हैं? जंतर-मंतर वही जगह है, जहाँ अन्ना हजारे के आंदोलन सहित कई बड़े आंदोलन हुए। कांग्रेस हो या दूसरे विपक्षी दल, अलग-अलग समय पर विपक्ष ने जनता के मुद्दों को लेकर अपनी आवाज़ उठाई है। आज नेहा बोरा और विपक्षी दलों से जुड़े सवालों के बीच भी यही सवाल है—क्या लोकतंत्र में अपनी बात रखने और सरकार से जवाब माँगने का अधिकार सबको नहीं है? आखिर इतनी भारी सुरक्षा व्यवस्था क्यों? सुरक्षा जरूरी है, लेकिन जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब देना भी जरूरी है। रात 9 बजे मेट्रो बंद होने से परेशान हुए यात्रियों की चिंता कौन करेगा? जो लोग अपने घर लौटने के लिए मेट्रो पर निर्भर हैं, उनकी परेशानी का जवाब कौन देगा? आखिर डर किस बात का है—जनता की आवाज़ का, चुनाव को लेकर उठ रहे सवालों का या 10 अक्टूबर को होने वाले आंदोलन का? अगर सब कुछ सामान्य है, तो जनता के मन में उठ रहे इन सवालों पर खुलकर जवाब क्यों नहीं दिया जाना चाहिए? याद रखना, यह सवाल सिर्फ 10 अक्टूबर का नहीं है। लोकतंत्र में जनता के सवाल किसी एक दिन तक सीमित नहीं रहते। सरकारें आती हैं, सरकारें चली जाती हैं, कांग्रेस हो या कोई दूसरा विपक्षी दल, हर किसी को जनता के मुद्दे उठाने का अधिकार है। आप सुरक्षा व्यवस्था कितनी भी बढ़ा दीजिए, लेकिन लोकतंत्र में सवालों का जवाब देना जरूरी है। जनता की आवाज़ को सुनिए, उसकी परेशानी को समझिए और उसके सवालों का जवाब दीजिए। एक नई उम्मीद की आवाज़ — तरुण शर्मा1
- 🔥 प्रेस कार्ड नहीं तो क्या पत्रकार की आवाज़ दबा दोगे? डिजिटल मीडिया को निशाना बनाना बंद करो! 🔥 आज सवाल डिजिटल मीडिया की आज़ादी का है! अगर किसी के पास प्रेस कार्ड नहीं है, तो क्या उसकी आवाज़ को दबाना और उसे हिरासत में लेना ही रास्ता है? पत्रकारिता सिर्फ एक कार्ड का नाम नहीं, बल्कि जनता के मुद्दे उठाने और सत्ता से सवाल पूछने का साहस भी है। याद रखना, क्रांतिकारी आवाज़ को दबाने से क्रांति नहीं रुकती! जब पत्रकारों को डराया जाए, सवाल पूछने वालों पर कार्रवाई हो और जनता की आवाज़ को रोकने की कोशिश की जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है—क्या देश में लोकतंत्र की जगह डर का माहौल बनाया जा रहा है? तरुण शर्मा का सीधा सवाल—क्या सरकार से सवाल पूछना गुनाह है? एक नई उम्मीद की आवाज़ — तरुण शर्मा1