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विदिशा शहर और जिले में अच्छी बारिश होने के साथ ही अब धान की रोपाई का काम तेज़ी से चल रहा है। स्थानीय किसानों ने इस मौसम में धान रोपाई का कार्य तेज कर दिया है। इस कार्य के लिए विदिशा के बाहर कटनी, सतना, सीधी, सिंगरौली और रीवा जैसे विभिन्न स्थानों से मजदूर विदिशा आ रहे हैं। इस बार धान रोपाई के लिए मजदूरों का प्रतिदिन का मेहनताना भी बढ़ा दिया गया है, जिसके तहत प्रति मजदूर को सुबह 9 बजे से शाम 5:30 बजे तक काम करने के लिए ₹450 का भुगतान किया जा रहा है।

4 hrs ago
user_रिपोर्टर rupesh yadav
रिपोर्टर rupesh yadav
सिरोंज, विदिशा, मध्य प्रदेश•
4 hrs ago

विदिशा शहर और जिले में अच्छी बारिश होने के साथ ही अब धान की रोपाई का काम तेज़ी से चल रहा है। स्थानीय किसानों ने इस मौसम में धान रोपाई का कार्य तेज कर दिया है। इस कार्य के लिए विदिशा के बाहर कटनी, सतना, सीधी, सिंगरौली और रीवा जैसे विभिन्न स्थानों से मजदूर विदिशा आ रहे हैं। इस बार धान रोपाई के लिए मजदूरों का प्रतिदिन का मेहनताना भी बढ़ा दिया गया है, जिसके तहत प्रति मजदूर को सुबह 9 बजे से शाम 5:30 बजे तक काम करने के लिए ₹450 का भुगतान किया जा रहा है।

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  • आज गंजबासौदा नगर में पूर्व विधायक श्री निशंक कुमार जैन के नेतृत्व में स्मार्ट मीटर और बिजली के भारी भरकम बिलों को लेकर माननीय मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन के नाम एक ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी अनुभा जैन को सौंपा गया। इस ज्ञापन के माध्यम से बताया गया है कि गंजबासौदा की जनता को अत्यधिक बिजली बिलों का भुगतान करना पड़ रहा है, और विद्युत विभाग द्वारा इन बिलों में कोई संशोधन नहीं किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, लाल पठार क्षेत्र के नागरिकों के विद्युत कनेक्शन बिना किसी पूर्व सूचना के काट दिए गए हैं, जिससे क्षेत्र की जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि सरकार स्मार्ट मीटर की बाध्यता को खत्म करने के लिए शीघ्र कार्रवाई करे। पूर्व विधायक निशंक कुमार जैन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मामले पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस पार्टी जनता के साथ मिलकर एक उग्र जन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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    आज गंजबासौदा नगर में पूर्व विधायक श्री निशंक कुमार जैन के नेतृत्व में स्मार्ट मीटर और बिजली के भारी भरकम बिलों को लेकर माननीय मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन के नाम एक ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी अनुभा जैन को सौंपा गया। इस ज्ञापन के माध्यम से बताया गया है कि गंजबासौदा की जनता को अत्यधिक बिजली बिलों का भुगतान करना पड़ रहा है, और विद्युत विभाग द्वारा इन बिलों में कोई संशोधन नहीं किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, लाल पठार क्षेत्र के नागरिकों के विद्युत कनेक्शन बिना किसी पूर्व सूचना के काट दिए गए हैं, जिससे क्षेत्र की जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि सरकार स्मार्ट मीटर की बाध्यता को खत्म करने के लिए शीघ्र कार्रवाई करे।

पूर्व विधायक निशंक कुमार जैन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मामले पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस पार्टी जनता के साथ मिलकर एक उग्र जन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
    user_PRAYAS vishwakarma
    PRAYAS vishwakarma
    Loan agency शमशाबाद, विदिशा, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • विदिशा में रविवार दोपहर बाद करीब एक घंटे तक हुई तेज बारिश ने पूरे शहर को तरबतर कर दिया। इस दौरान बादलों की तेज गड़गड़ाहट और बिजली की चमक से लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल भी रहा। तेज बारिश के चलते शहर की कई सड़कों पर पानी भर गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। हालांकि, बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया और लोगों को उमस से राहत मिली।
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    विदिशा में रविवार दोपहर बाद करीब एक घंटे तक हुई तेज बारिश ने पूरे शहर को तरबतर कर दिया। इस दौरान बादलों की तेज गड़गड़ाहट और बिजली की चमक से लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल भी रहा।

तेज बारिश के चलते शहर की कई सड़कों पर पानी भर गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। हालांकि, बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया और लोगों को उमस से राहत मिली।
    user_Vinod Mehra
    Vinod Mehra
    Emt news Vidisha News editor Vidisha, Madhya Pradesh•
    2 hrs ago
  • विदिशा शहर की जीवनदायिनी मां बेतवा नदी इन दिनों अपने अस्तित्व के गंभीर संकट से जूझ रही है। दशकों से लाखों लोगों को जीवन देने वाली और शहर की प्यास बुझाने वाली यह नदी अब खुद गंदे नालों से प्रदूषित हो रही है। शहर के विभिन्न हिस्सों से निकलने वाले गंदे नाले बिना किसी शोधन के सीधे बेतवा में गिर रहे हैं, जिससे नदी की निर्मल धारा लगातार दूषित होती जा रही है। रंगई स्थित पिलिया नाला सहित कई अन्य नाले बेतवा में सीवेज और गंदा पानी उंडेल रहे हैं। इस गंभीर प्रदूषण के चलते नदी का जल काला और बदबूदार हो गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी प्रदूषित बेतवा नदी के पानी को शोधन के बाद शहरवासियों तक पेयजल के रूप में पहुंचाया जाता है, जिससे भविष्य में पेयजल की गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा मंडरा रहा है। बढ़ते प्रदूषण का सीधा असर जलीय जीवन पर भी दिख रहा है; स्थानीय लोगों के अनुसार, समय-समय पर मछलियों और अन्य जलीय जीवों के मरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जो नदी के पारिस्थितिक संतुलन के तेजी से बिगड़ने का स्पष्ट संकेत है। पर्यावरण प्रेमियों और नागरिकों ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन गंदे नालों को ट्रीटमेंट प्लांट से नहीं जोड़ा गया और प्रदूषण पर प्रभावी रोक नहीं लगी, तो आने वाले वर्षों में बेतवा नदी का अस्तित्व और शहर की जल सुरक्षा दोनों ही गंभीर संकट में पड़ सकते हैं। अब यह सवाल उठ रहा है कि जीवन देने वाली मां बेतवा को जीवन कौन देगा? क्या जिम्मेदार विभाग नदी में गिर रहे गंदे नालों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे या फिर मां बेतवा यूं ही प्रदूषण का बोझ ढोती रहेगी? शहरवासियों की नजरें अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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    विदिशा शहर की जीवनदायिनी मां बेतवा नदी इन दिनों अपने अस्तित्व के गंभीर संकट से जूझ रही है। दशकों से लाखों लोगों को जीवन देने वाली और शहर की प्यास बुझाने वाली यह नदी अब खुद गंदे नालों से प्रदूषित हो रही है। शहर के विभिन्न हिस्सों से निकलने वाले गंदे नाले बिना किसी शोधन के सीधे बेतवा में गिर रहे हैं, जिससे नदी की निर्मल धारा लगातार दूषित होती जा रही है। रंगई स्थित पिलिया नाला सहित कई अन्य नाले बेतवा में सीवेज और गंदा पानी उंडेल रहे हैं।

इस गंभीर प्रदूषण के चलते नदी का जल काला और बदबूदार हो गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी प्रदूषित बेतवा नदी के पानी को शोधन के बाद शहरवासियों तक पेयजल के रूप में पहुंचाया जाता है, जिससे भविष्य में पेयजल की गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा मंडरा रहा है। बढ़ते प्रदूषण का सीधा असर जलीय जीवन पर भी दिख रहा है; स्थानीय लोगों के अनुसार, समय-समय पर मछलियों और अन्य जलीय जीवों के मरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जो नदी के पारिस्थितिक संतुलन के तेजी से बिगड़ने का स्पष्ट संकेत है।

पर्यावरण प्रेमियों और नागरिकों ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन गंदे नालों को ट्रीटमेंट प्लांट से नहीं जोड़ा गया और प्रदूषण पर प्रभावी रोक नहीं लगी, तो आने वाले वर्षों में बेतवा नदी का अस्तित्व और शहर की जल सुरक्षा दोनों ही गंभीर संकट में पड़ सकते हैं। अब यह सवाल उठ रहा है कि जीवन देने वाली मां बेतवा को जीवन कौन देगा? क्या जिम्मेदार विभाग नदी में गिर रहे गंदे नालों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे या फिर मां बेतवा यूं ही प्रदूषण का बोझ ढोती रहेगी? शहरवासियों की नजरें अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्रवाई पर टिकी हैं।
    user_Jagmohan tiwari
    Jagmohan tiwari
    Singer Vidisha, Madhya Pradesh•
    3 hrs ago
  • विदिशा में एक दिन पहले रेलवे यार्ड में अज्ञात ट्रेन की चपेट में आने से मृत हुए युवक की पहचान कर ली गई है। मृतक की पहचान तलैया मोहल्ला निवासी अंकुर ठाकुर के रूप में हुई है, जो स्टेशन के नजदीक डाउनलाइन तरफ अज्ञात ट्रेन की चपेट में आया था। प्रारंभिक तौर पर युवक की पहचान नहीं हो सकी थी, जिसके बाद जीआरपी ने उसके शव को जिला अस्पताल में रखवाया था। आज सुबह मृतक की पहचान उसके परिवारजनों द्वारा किए जाने के बाद जीआरपी ने जिला अस्पताल में उसका पोस्टमार्टम (पीएम) कराया। पीएम के बाद शव परिवारजनों को सौंप दिया गया है और जीआरपी इस मामले की जांच में जुटी हुई है।
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    विदिशा में एक दिन पहले रेलवे यार्ड में अज्ञात ट्रेन की चपेट में आने से मृत हुए युवक की पहचान कर ली गई है। मृतक की पहचान तलैया मोहल्ला निवासी अंकुर ठाकुर के रूप में हुई है, जो स्टेशन के नजदीक डाउनलाइन तरफ अज्ञात ट्रेन की चपेट में आया था।

प्रारंभिक तौर पर युवक की पहचान नहीं हो सकी थी, जिसके बाद जीआरपी ने उसके शव को जिला अस्पताल में रखवाया था। आज सुबह मृतक की पहचान उसके परिवारजनों द्वारा किए जाने के बाद जीआरपी ने जिला अस्पताल में उसका पोस्टमार्टम (पीएम) कराया। पीएम के बाद शव परिवारजनों को सौंप दिया गया है और जीआरपी इस मामले की जांच में जुटी हुई है।
    user_रिपोर्टर rupesh yadav
    रिपोर्टर rupesh yadav
    सिरोंज, विदिशा, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • गंजबासौदा नगर में नागरिक सेवा समिति और सिंधी समाज के संयुक्त तत्वाधान में एक निःशुल्क नेत्र शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर सेवा सदन नेत्र चिकित्सालय बैरागढ़ के सहयोग से, लोकतंत्र सेनानी स्वर्गीय नेमीचंद जैन की प्रथम पुण्य स्मृति में हितकारिणी धर्मशाला में रखा गया था। स्वर्गीय नेमीचंद जैन की पत्नी श्रीमती सरला जैन और उनके पुत्रों संजय कुमार जैन, सिद्दार्थ कुमार जैन, चंद्रानन जैन, सौरभ जैन व पूरे परिवार ने इस आयोजन में विशेष सहयोग प्रदान किया। समिति ने स्वर्गीय नेमीचंद जैन के परिवार के सदस्यों को शॉल, श्रीफल और फूल माला पहनाकर सम्मानित किया तथा उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। इस शिविर में सेवा सदन नेत्र चिकित्सालय के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हरि प्रसाद, भोपाल से आए डॉक्टर हितेश नेचलानी, डाटा एंट्री ऑपरेटर नीतू श्रीवास्तव और कम्युनिटी हेल्थ वर्कर दीपक कुशवाह सहित पूरी टीम ने सेवाएं दीं। शिविर के दौरान कुल 76 मरीजों की ओपीडी की गई, जिनमें से 44 नेत्र रोगियों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए बस द्वारा सेवा सदन बैरागढ़ भेजा गया। इसके अतिरिक्त, 20 नेत्र रोगियों को जांच के बाद निःशुल्क दवाइयां दी गईं, जबकि 12 अन्य नेत्र रोगियों को चश्मा बनवाने का परामर्श दिया गया और उन्हें भी आवश्यक दवाइयां वितरित की गईं।
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    गंजबासौदा नगर में नागरिक सेवा समिति और सिंधी समाज के संयुक्त तत्वाधान में एक निःशुल्क नेत्र शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर सेवा सदन नेत्र चिकित्सालय बैरागढ़ के सहयोग से, लोकतंत्र सेनानी स्वर्गीय नेमीचंद जैन की प्रथम पुण्य स्मृति में हितकारिणी धर्मशाला में रखा गया था। स्वर्गीय नेमीचंद जैन की पत्नी श्रीमती सरला जैन और उनके पुत्रों संजय कुमार जैन, सिद्दार्थ कुमार जैन, चंद्रानन जैन, सौरभ जैन व पूरे परिवार ने इस आयोजन में विशेष सहयोग प्रदान किया।

समिति ने स्वर्गीय नेमीचंद जैन के परिवार के सदस्यों को शॉल, श्रीफल और फूल माला पहनाकर सम्मानित किया तथा उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। इस शिविर में सेवा सदन नेत्र चिकित्सालय के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हरि प्रसाद, भोपाल से आए डॉक्टर हितेश नेचलानी, डाटा एंट्री ऑपरेटर नीतू श्रीवास्तव और कम्युनिटी हेल्थ वर्कर दीपक कुशवाह सहित पूरी टीम ने सेवाएं दीं।

शिविर के दौरान कुल 76 मरीजों की ओपीडी की गई, जिनमें से 44 नेत्र रोगियों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए बस द्वारा सेवा सदन बैरागढ़ भेजा गया। इसके अतिरिक्त, 20 नेत्र रोगियों को जांच के बाद निःशुल्क दवाइयां दी गईं, जबकि 12 अन्य नेत्र रोगियों को चश्मा बनवाने का परामर्श दिया गया और उन्हें भी आवश्यक दवाइयां वितरित की गईं।
    user_PRAYAS vishwakarma
    PRAYAS vishwakarma
    Loan agency शमशाबाद, विदिशा, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • मानसून की सुस्त शुरुआत ने विदिशा जिले के किसानों की चिंता बढ़ा दी थी, लेकिन पिछले दो-तीन दिनों से हो रही झमाझम बारिश ने उनके चेहरों पर फिर से मुस्कान ला दी है। इस बारिश के कारण जिले में खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान की रोपाई का काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यह बारिश उन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जिन्होंने पहले ही रोपाई कर दी थी, वहीं अब रोपाई शुरू करने वाले किसानों को भी खेतों में पर्याप्त नमी मिलने से बड़ी राहत मिली है। लगातार हो रही बारिश से खेत पानी से भर गए हैं, और किसान पूरे उत्साह के साथ धान की रोपाई में लगे हुए हैं। बारिश की कमी के कारण अब तक रोपाई का इंतजार कर रहे किसानों ने भी खेतों में काम शुरू कर दिया है, जहाँ मजदूर और किसान मिलकर मेहनत करते दिख रहे हैं। किसानों का कहना है कि फसल की बेहतर बढ़वार के लिए समय पर अच्छी बारिश बेहद ज़रूरी है, और दो-तीन दिनों की इस लगातार बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है, जिससे धान की फसल को काफी लाभ मिलेगा। उन्हें उम्मीद है कि यदि आने वाले दिनों में भी मौसम का साथ मिला तो इस बार खरीफ सीजन में अच्छी पैदावार होगी।
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    मानसून की सुस्त शुरुआत ने विदिशा जिले के किसानों की चिंता बढ़ा दी थी, लेकिन पिछले दो-तीन दिनों से हो रही झमाझम बारिश ने उनके चेहरों पर फिर से मुस्कान ला दी है। इस बारिश के कारण जिले में खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान की रोपाई का काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यह बारिश उन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जिन्होंने पहले ही रोपाई कर दी थी, वहीं अब रोपाई शुरू करने वाले किसानों को भी खेतों में पर्याप्त नमी मिलने से बड़ी राहत मिली है।

लगातार हो रही बारिश से खेत पानी से भर गए हैं, और किसान पूरे उत्साह के साथ धान की रोपाई में लगे हुए हैं। बारिश की कमी के कारण अब तक रोपाई का इंतजार कर रहे किसानों ने भी खेतों में काम शुरू कर दिया है, जहाँ मजदूर और किसान मिलकर मेहनत करते दिख रहे हैं। किसानों का कहना है कि फसल की बेहतर बढ़वार के लिए समय पर अच्छी बारिश बेहद ज़रूरी है, और दो-तीन दिनों की इस लगातार बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है, जिससे धान की फसल को काफी लाभ मिलेगा। उन्हें उम्मीद है कि यदि आने वाले दिनों में भी मौसम का साथ मिला तो इस बार खरीफ सीजन में अच्छी पैदावार होगी।
    user_Vinod Mehra
    Vinod Mehra
    Emt news Vidisha News editor Vidisha, Madhya Pradesh•
    2 hrs ago
  • रीवा के ग्राम पंचायत नदना (डिहिया) में रामकली रावत नामक एक आदिवासी महिला की मौत को सरकारी सुशासन के खोखले दावों की अर्थी और स्वास्थ्य मंत्री के 'विकास' का काला सच बताया गया है। जिस ज़िले का प्रतिनिधित्व स्वयं 'स्वास्थ्य मंत्री' करते हैं, वहाँ सड़क के अभाव में एक आदिवासी महिला का दम तोड़ना, व्यवस्था की एक शर्मनाक विफलता के रूप में सामने आया है। इस घटना में, 21वीं सदी के भारत में, जहाँ बुलेट ट्रेन और स्मार्ट सिटी के सपने देखे जा रहे हैं, वहाँ एक महिला को 2 किलोमीटर तक कीचड़ भरे रास्ते पर खाट पर ढोना पड़ा। इस स्थिति को 'सड़क नहीं, मौत का रास्ता' और 'सत्ता का अहंकार' बताया गया है, जो गाँव की गलियों तक नहीं पहुँच पाया। पोस्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि जब स्वास्थ्य मंत्री के अपने गृह ज़िले में स्वास्थ्य सुविधाएँ सड़क की मोहताज हों, तो प्रदेश के सुदूर इलाकों में स्थिति क्या होगी, इसकी कल्पना करना भी भयावह है। इसके साथ ही, भाजपा के बड़े मंचों से होने वाली 'आदिवासी गौरव' और 'विकास' की बातों को केवल फोटो खिंचवाने और चुनाव जीतने तक सीमित बताते हुए, रामकली रावत की मौत को उन नारों पर एक ज़ोरदार तमाचा कहा गया है। जनता ने मुख्यमंत्री से भाषण नहीं, बल्कि सड़क की माँग की है, ताकि आदिवासियों को प्रतीकात्मक सम्मान के बजाय जीवन जीने का अधिकार और बुनियादी सुविधाएँ मिल सकें। मांग की गई है कि उन्हें ऐसी सड़क मिले जो अस्पताल से जोड़े, ऐसी एम्बुलेंस जो समय पर पहुँचे, और एक ऐसी व्यवस्था जो इंसान की जान को 'कीचड़' से कीमती समझे। इस घटना को शासन-प्रशासन के माथे पर एक कलंक बताया गया है, जिसे केवल इस्तीफे या जाँच से नहीं, बल्कि ज़मीनी बदलाव से ही धोया जा सकता है। पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि कब तक मौत का यह 'खाट-सफर' जारी रहेगा और जनता जवाब की माँग करती है।
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    रीवा के ग्राम पंचायत नदना (डिहिया) में रामकली रावत नामक एक आदिवासी महिला की मौत को सरकारी सुशासन के खोखले दावों की अर्थी और स्वास्थ्य मंत्री के 'विकास' का काला सच बताया गया है। जिस ज़िले का प्रतिनिधित्व स्वयं 'स्वास्थ्य मंत्री' करते हैं, वहाँ सड़क के अभाव में एक आदिवासी महिला का दम तोड़ना, व्यवस्था की एक शर्मनाक विफलता के रूप में सामने आया है।

इस घटना में, 21वीं सदी के भारत में, जहाँ बुलेट ट्रेन और स्मार्ट सिटी के सपने देखे जा रहे हैं, वहाँ एक महिला को 2 किलोमीटर तक कीचड़ भरे रास्ते पर खाट पर ढोना पड़ा। इस स्थिति को 'सड़क नहीं, मौत का रास्ता' और 'सत्ता का अहंकार' बताया गया है, जो गाँव की गलियों तक नहीं पहुँच पाया। पोस्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि जब स्वास्थ्य मंत्री के अपने गृह ज़िले में स्वास्थ्य सुविधाएँ सड़क की मोहताज हों, तो प्रदेश के सुदूर इलाकों में स्थिति क्या होगी, इसकी कल्पना करना भी भयावह है। इसके साथ ही, भाजपा के बड़े मंचों से होने वाली 'आदिवासी गौरव' और 'विकास' की बातों को केवल फोटो खिंचवाने और चुनाव जीतने तक सीमित बताते हुए, रामकली रावत की मौत को उन नारों पर एक ज़ोरदार तमाचा कहा गया है।

जनता ने मुख्यमंत्री से भाषण नहीं, बल्कि सड़क की माँग की है, ताकि आदिवासियों को प्रतीकात्मक सम्मान के बजाय जीवन जीने का अधिकार और बुनियादी सुविधाएँ मिल सकें। मांग की गई है कि उन्हें ऐसी सड़क मिले जो अस्पताल से जोड़े, ऐसी एम्बुलेंस जो समय पर पहुँचे, और एक ऐसी व्यवस्था जो इंसान की जान को 'कीचड़' से कीमती समझे। इस घटना को शासन-प्रशासन के माथे पर एक कलंक बताया गया है, जिसे केवल इस्तीफे या जाँच से नहीं, बल्कि ज़मीनी बदलाव से ही धोया जा सकता है। पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि कब तक मौत का यह 'खाट-सफर' जारी रहेगा और जनता जवाब की माँग करती है।
    user_Hemraj Sahariya
    Hemraj Sahariya
    Taxi Driver राघोगढ़, गुना, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
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