विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अनिल अग्रवाल ने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया है कि वर्तमान “परीक्षा की घड़ी” में चंपत जी निश्चित रूप से “कनक की तरह निखर कर” सामने आएंगे। राजपथ न्यूज़, दिल्ली को दिए गए अपने बयान में, अनिल अग्रवाल ने, जो विश्व संवाद केंद्र के प्रबंधक और विहिप मीडिया सेंटर से जुड़े हैं, चंपत जी के साथ अपने चार दशक पुराने संबंध को साझा किया और बताया कि उन्होंने चंपत जी को सदैव अभावों में जीवन जीते देखा है। अग्रवाल के अनुसार, चंपत जी ने दिल्ली के आर.के. पुरम स्थित कार्यालय के सबसे ऊपरी तल के एक कक्ष में वर्षों तक सादगी भरा जीवन बिताया, जहाँ गर्मियों में तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता था और उन्होंने बिना वातानुकूलित या कूलर के जीवन व्यतीत किया। उन्होंने अपनी सभी इच्छाओं का “अंतिम संस्कार” करके केवल प्रभु श्रीराम के अयोध्या में मंदिर निर्माण को ही अपने जीवन का एकमात्र ध्येय बनाया था, और उनके मन में कभी कोई राजनीतिक अभिलाषा नहीं उभरी। हाल ही में एक पत्रकार द्वारा अपनी इच्छा पूछने पर, चंपत जी ने कहा कि इस उम्र में अब कोई इच्छा शेष नहीं है, क्योंकि प्रभु राम ने उनकी जो इच्छा थी, उसे पूरी कर दी है; अब तो बस प्रभु राम से यही कामना है कि जब तक शरीर में प्राण हैं, वे उनके चरणों की सेवा में रहें। अनिल अग्रवाल ने चंपत जी को एक “तपस्वी, निर्मोही संत” बताया, जिन्होंने “अंगद की तरह अडिग” रहकर कुशल अधिवक्ताओं के सहयोग से दशकों तक न्यायपालिका में केस की पैरवी की और हिन्दू समाज के वैभव के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। अनिल अग्रवाल ने “अटल विश्वास” के साथ कहा कि चंपत जी को न तो कल किसी दायित्व की इच्छा थी और न ही आज है, क्योंकि वे प्रभु राम के अनन्य भक्त हैं, जो पिता के वचन के लिए वनवास गए थे। अग्रवाल का मानना है कि चंपत जी ने अपने ध्येय के लिए ही “वनवासरत जीवन” जिया है, अन्यथा वे अपना जीवन कहीं भी सुविधाओं में जी रहे होते। उन्हें ट्रस्ट के वर्तमान दायित्व से भी “लेशमात्र भी मोह नहीं है”। अग्रवाल को यह अहसास है कि कुछ “षड्यंत्र” चल रहे हैं, जो उन्हें हटाकर अपने स्वार्थ पूरे करना चाहते हैं, और इस बात का अहसास “शीर्षतम निर्णायक लोगों” को भी है, यही कारण है कि उन्होंने भी चंपत जी को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए “बाध्य” किया है। अनिल अग्रवाल ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार समय-समय पर भगवान को भी वनवास जाना पड़ा, उसी प्रकार यह “वनवास रूपी परीक्षा” भी शीघ्र ही समाप्त हो जाएगी, और चंपत जी निश्चित ही “कनक की तरह निखर कर” सामने आएंगे।
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अनिल अग्रवाल ने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया है कि वर्तमान “परीक्षा की घड़ी” में चंपत जी निश्चित रूप से “कनक की तरह निखर कर” सामने आएंगे। राजपथ न्यूज़, दिल्ली को दिए गए अपने बयान में, अनिल अग्रवाल ने, जो विश्व संवाद केंद्र के प्रबंधक और विहिप मीडिया सेंटर से जुड़े हैं, चंपत जी के साथ अपने चार दशक पुराने संबंध को साझा किया और बताया कि उन्होंने चंपत जी को सदैव अभावों में जीवन जीते देखा है। अग्रवाल के अनुसार, चंपत जी ने दिल्ली के आर.के. पुरम स्थित कार्यालय के सबसे ऊपरी तल के एक कक्ष में वर्षों तक सादगी भरा जीवन बिताया, जहाँ गर्मियों में तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता था और उन्होंने बिना वातानुकूलित या कूलर के जीवन व्यतीत किया। उन्होंने अपनी सभी इच्छाओं का “अंतिम संस्कार” करके केवल प्रभु श्रीराम के अयोध्या में मंदिर निर्माण को ही अपने जीवन का एकमात्र ध्येय बनाया था, और उनके मन में कभी कोई राजनीतिक अभिलाषा नहीं उभरी। हाल ही में एक पत्रकार द्वारा अपनी इच्छा पूछने पर, चंपत जी ने कहा कि इस उम्र में अब कोई इच्छा शेष नहीं है, क्योंकि प्रभु राम ने उनकी जो इच्छा थी, उसे पूरी कर दी है; अब तो बस प्रभु राम से यही कामना है कि जब तक शरीर में प्राण हैं, वे उनके चरणों की सेवा में रहें। अनिल अग्रवाल ने चंपत जी को एक “तपस्वी, निर्मोही संत” बताया, जिन्होंने “अंगद की तरह अडिग” रहकर कुशल अधिवक्ताओं के सहयोग से दशकों तक न्यायपालिका में केस की पैरवी की और हिन्दू समाज के वैभव के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। अनिल अग्रवाल ने “अटल विश्वास” के साथ कहा कि चंपत जी को न तो कल किसी दायित्व की इच्छा थी और न ही आज है, क्योंकि वे प्रभु राम के अनन्य भक्त हैं, जो पिता के वचन के लिए वनवास गए थे। अग्रवाल का मानना है कि चंपत जी ने अपने ध्येय के लिए ही “वनवासरत जीवन” जिया है, अन्यथा वे अपना जीवन कहीं भी सुविधाओं में जी रहे होते। उन्हें ट्रस्ट के वर्तमान दायित्व से भी “लेशमात्र भी मोह नहीं है”। अग्रवाल को यह अहसास है कि कुछ “षड्यंत्र” चल रहे हैं, जो उन्हें हटाकर अपने स्वार्थ पूरे करना चाहते हैं, और इस बात का अहसास “शीर्षतम निर्णायक लोगों” को भी है, यही कारण है कि उन्होंने भी चंपत जी को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए “बाध्य” किया है। अनिल अग्रवाल ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार समय-समय पर भगवान को भी वनवास जाना पड़ा, उसी प्रकार यह “वनवास रूपी परीक्षा” भी शीघ्र ही समाप्त हो जाएगी, और चंपत जी निश्चित ही “कनक की तरह निखर कर” सामने आएंगे।
- नीट परीक्षा में कथित तौर पर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने वाले एक बड़े सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें अब तक कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पदाधिकारियों ने दावा किया है कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार छापेमारी जारी है। इस खुलासे ने शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच हड़कंप मचा दिया है। जांच में सामने आया है कि प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए लगभग 10 लाख रुपये का सौदा तय किया गया था, जिसमें 50 से 70 हजार रुपये की अग्रिम राशि दी गई थी, जबकि शेष भुगतान मेडिकल कॉलेज आवंटन के बाद किया जाना था। केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र इस मामले में सबसे अधिक चर्चा में है, जहां से सबसे ज्यादा सात 'मुन्नाभाई' पकड़े गए हैं। गिरफ्तार किए गए अधिकांश आरोपी विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न बताए जा रहे हैं, जिनमें दिल्ली, रायबरेली, पीएमसीएच और एम्स के इंटर्न शामिल हैं। गिरीडीह की बीएचयू मेडिकल कॉलेज की थर्ड ईयर की इंटर्न छात्रा पूनम कुमारी को भी पकड़ा गया है, जो केंद्रीय विद्यालय में मधुप्रिया नामक परीक्षार्थी के बदले परीक्षा दे रही थी। केंद्रीय विद्यालय केंद्र पर आरोप है कि बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान मशीन को बंद कर कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा हॉल में प्रवेश कराया गया। इस आरोप के बाद बायोमेट्रिक प्रक्रिया से जुड़ी एजेंसी भी जांच के दायरे में आ गई है और उसके कुछ कर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारियों को आरोपियों की वास्तविक पहचान सत्यापित करने में अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ रही है क्योंकि वे बार-बार अपना नाम और पहचान बदलने की कोशिश कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम शैलेंद्र कुमार, एसपी प्रेरणा कुमार, एसडीओ प्रभाकर कुमार और एसडीपीओ शिवम कुमार सहित कई वरीय पदाधिकारी लगातार छापेमारी और पूछताछ में जुटे हैं। एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि पकड़े गए सभी नौ लोग किसी न किसी संस्थान में इंटर्न हैं और इस मामले में अभी किसी का नाम उजागर नहीं किया जा सकता। वरीय अधिकारी खुद सभी से पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रही है और उम्मीद है कि पुलिस अधीक्षक जल्द ही प्रेसवार्ता कर इस संबंध में विस्तृत जानकारी देंगे।1
- दिल्ली आरटीओ (RTO) पर गंभीर बदमाशी का आरोप लगाया गया है। जानकारी के अनुसार, दिल्ली आरटीओ के अधिकारी चलती गाड़ियों के फोटो खींच रहे हैं, जिसके बाद इन सभी गाड़ियों के चालान किए जाने की आशंका जताई गई है। इस कार्रवाई को लेकर पोस्ट में कड़ा विरोध जताते हुए सवाल उठाया गया है कि यह किस नियम और कानून के तहत किया जा रहा है।1
- दिल्ली में महरौली थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए 11 साल की नाबालिग बच्ची के साथ रेप और हत्या के आरोपी को एनकाउंटर के बाद दबोच लिया। SHO रितेश शर्मा की टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिसमें फतेहपुर बेरी डेरा मंडी रोड के पास आरोपी पुलिस मुठभेड़ में घायल हो गया। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी पुलिस कस्टडी से भागने की कोशिश कर रहा था। घायल कैब ड्राइवर को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ वह बार-बार 'मर गया, मर गया' कहता रहा। वहीं, नई दिल्ली के उद्योग भवन के पास स्थित लेबर झुग्गी इलाके में 24 जून 2026 की तड़के सुबह करीब 3:02 बजे एक इलेक्ट्रिक पैनल में अचानक आग लग गई। शॉट-सर्किट की वजह से लगी इस आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया। आग के फैलाव की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग ने अतिरिक्त वाटर ब्राउज़र की 'डिमांड' भेजी, और आग पर काबू पाने के लिए कुल 20 दमकल गाड़ियों ने मोर्चा संभाला।1
- 2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान अखिलेश यादव के भाषणों में उनका डर साफ झलकता हुआ देखा गया था। उस समय उन्होंने अपने एक भाषण में साफ तौर पर यह भी कहा था कि शायद यह 'आखिरी' उत्तर प्रदेश चुनाव हो। अब, उत्तर प्रदेश में अगले चुनाव से पहले ही, अखिलेश यादव को 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर भी भय महसूस होने की बात कही गई है।1
- दिल्ली के द्वारका उत्तम नगर में पार्किंग को लेकर हुए विवाद ने खूनी रूप ले लिया, जहाँ पति-पत्नी पर चाकू से हमला किया गया। इस हमले में पत्नी की मौत हो गई, जबकि पति घायल हो गया। इस वारदात को एक नाबालिग ने अंजाम दिया है। इस घटना ने दिल्ली में खौफ का माहौल पैदा कर दिया है, और यह शहर में बढ़ते अपराधों के डर को एक बार फिर से उजागर करती है।1