खैरा प्रखंड के गोली पंचायत के 4 गांव नदी से परेशान, पुल नहीं होने से 1000 लोग प्रभावित खैरा (जमुई)। बरखुटिया, बरातीला, जातजोर और लहखारी गांव के लोगों की जिंदगी एक 300 फीट चौड़ी नदी के दर्द में फंसी हुई है। पुल नहीं होने के कारण करीब 1000 लोगों का जीवन रोज खतरे के साथ गुजरता है। यह नदी सिर्फ पानी की धारा नहीं, बल्कि इन गांवों के लिए मुसीबत, डर और मजबूरी का नाम बन चुकी है। ग्रामीण बताते हैं कि बच्चों को नवमी-दशमी पढ़ने स्कूल जाना हो, मरीज को अस्पताल ले जाना हो, या घर के लिए राशन लाना हो, हर बार इस नदी को पार करना पड़ता है। बारिश के दिनों में जब नदी उफान पर होती है, तो लोगों को अपनी जान हथेली पर रखकर पानी में उतरना पड़ता है। गांव के लोगों का दर्द तब और बढ़ जाता है जब अचानक जंगल से पानी आ जाता है और कई बार मवेशी नदी में बह जाते हैं। एक ग्रामीण ने रोते हुए बताया कि वह मवेशी चराने गए थे, तभी अचानक पानी बढ़ गया और कई मवेशी बह गए, बाद में मालिकों का नुकसान हुआ तो उन्हें ही जुर्माना भरना पड़ा। पिपराटांड़ के किसान भी इसी नदी के सहारे हैं। खेती करनी हो, मवेशी चराना हो या खेत तक पहुंचना हो — हर रास्ता इस नदी से होकर ही जाता है, और हर कदम पर डर साथ चलता है। सबसे दुखद हाल तब होता है जब बारिश में नदी भर जाती है और शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच पाते, स्कूल बंद हो जाता है और बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है। एक तरफ सरकार शिक्षा की बात करती है, दूसरी तरफ बच्चे नदी के कारण किताब से दूर हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार विधायक और सांसद को आवेदन दिया गया, लेकिन चुनाव के बाद कोई नेता गांव की ओर मुड़कर भी नहीं देखता।
खैरा प्रखंड के गोली पंचायत के 4 गांव नदी से परेशान, पुल नहीं होने से 1000 लोग प्रभावित खैरा (जमुई)। बरखुटिया, बरातीला, जातजोर और लहखारी गांव के लोगों की जिंदगी एक 300 फीट चौड़ी नदी के दर्द में फंसी हुई है। पुल नहीं होने के कारण करीब 1000 लोगों का जीवन रोज खतरे के साथ गुजरता है। यह नदी सिर्फ पानी की धारा नहीं, बल्कि इन गांवों के लिए मुसीबत, डर और मजबूरी का नाम बन चुकी है। ग्रामीण बताते हैं कि बच्चों को नवमी-दशमी पढ़ने स्कूल जाना हो, मरीज को अस्पताल ले जाना हो, या घर के लिए राशन लाना हो, हर बार इस नदी को पार करना पड़ता है। बारिश के दिनों में जब नदी उफान पर होती है, तो लोगों को अपनी जान हथेली पर रखकर पानी में उतरना पड़ता है। गांव के लोगों का दर्द तब और बढ़ जाता है जब अचानक जंगल से पानी आ जाता है और कई बार मवेशी नदी में बह जाते हैं। एक ग्रामीण ने रोते हुए बताया कि वह मवेशी चराने गए थे, तभी अचानक पानी बढ़ गया और कई मवेशी बह गए, बाद में मालिकों का नुकसान हुआ तो उन्हें ही जुर्माना भरना पड़ा। पिपराटांड़ के किसान भी इसी नदी के सहारे हैं। खेती करनी हो, मवेशी चराना हो या खेत तक पहुंचना हो — हर रास्ता इस नदी से होकर ही जाता है, और हर कदम पर डर साथ चलता है। सबसे दुखद हाल तब होता है जब बारिश में नदी भर जाती है और शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच पाते, स्कूल बंद हो जाता है और बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है। एक तरफ सरकार शिक्षा की बात करती है, दूसरी तरफ बच्चे नदी के कारण किताब से दूर हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार विधायक और सांसद को आवेदन दिया गया, लेकिन चुनाव के बाद कोई नेता गांव की ओर मुड़कर भी नहीं देखता।
- Post by Rajiv Ranjan1
- Post by Pinkey Kumari1
- खैरा (जमुई)। बरखुटिया, बरातीला, जातजोर और लहखारी गांव के लोगों की जिंदगी एक 300 फीट चौड़ी नदी के दर्द में फंसी हुई है। पुल नहीं होने के कारण करीब 1000 लोगों का जीवन रोज खतरे के साथ गुजरता है। यह नदी सिर्फ पानी की धारा नहीं, बल्कि इन गांवों के लिए मुसीबत, डर और मजबूरी का नाम बन चुकी है। ग्रामीण बताते हैं कि बच्चों को नवमी-दशमी पढ़ने स्कूल जाना हो, मरीज को अस्पताल ले जाना हो, या घर के लिए राशन लाना हो, हर बार इस नदी को पार करना पड़ता है। बारिश के दिनों में जब नदी उफान पर होती है, तो लोगों को अपनी जान हथेली पर रखकर पानी में उतरना पड़ता है। गांव के लोगों का दर्द तब और बढ़ जाता है जब अचानक जंगल से पानी आ जाता है और कई बार मवेशी नदी में बह जाते हैं। एक ग्रामीण ने रोते हुए बताया कि वह मवेशी चराने गए थे, तभी अचानक पानी बढ़ गया और कई मवेशी बह गए, बाद में मालिकों का नुकसान हुआ तो उन्हें ही जुर्माना भरना पड़ा। पिपराटांड़ के किसान भी इसी नदी के सहारे हैं। खेती करनी हो, मवेशी चराना हो या खेत तक पहुंचना हो — हर रास्ता इस नदी से होकर ही जाता है, और हर कदम पर डर साथ चलता है। सबसे दुखद हाल तब होता है जब बारिश में नदी भर जाती है और शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच पाते, स्कूल बंद हो जाता है और बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है। एक तरफ सरकार शिक्षा की बात करती है, दूसरी तरफ बच्चे नदी के कारण किताब से दूर हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार विधायक और सांसद को आवेदन दिया गया, लेकिन चुनाव के बाद कोई नेता गांव की ओर मुड़कर भी नहीं देखता।1
- Post by Rakesh Kumar1
- राजस्व कर्मचारियों ने सरकार पर लगाया आरोप - सरकार हम सभी कर्मचारियों का आवाज दबाने का करती रही है प्रयास ! * लिखित समझौता को भी रददी बता रही है सरकार1
- Post by Kk Pratap3
- लखीसराय से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां जमीन और बिजनेस के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने के आरोप में एक सरकारी शिक्षक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने कई लोगों को फर्जी चेक देकर ठगी की वारदात को अंजाम दिया। मामला लखीसराय नगर थाना क्षेत्र के पुरानी बाजार छोटी दरगाह वार्ड संख्या 11 का है। जानकारी के अनुसार मोहम्मद शकील नामक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि करीब 18 महीने पहले जमीन से जुड़े काम के लिए उन्होंने मोहम्मद परवेज को छह लाख रुपये दिए थे। जब काम नहीं हुआ तो आरोपी ने उन्हें एक चेक दिया, लेकिन जांच में वह चेक फर्जी निकला। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी सरकारी शिक्षक मोहम्मद परवेज ने जमीन के नाम पर एक अन्य व्यक्ति से भी करीब 11 लाख रुपये लिए थे और उसे भी फर्जी चेक थमा दिया था। इतना ही नहीं, एक महिला से बिजनेस के नाम पर पांच लाख रुपये लेने का मामला भी सामने आया है।लगातार सामने आ रही शिकायतों के आधार पर नगर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक मोहम्मद परवेज को गिरफ्तार कर लिया है।1
- Post by Rajiv Ranjan1