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सहारनपुर के माणकमऊ वार्ड 31 में पार्षद समीर अहमद पर विकास न करने का आरोप लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों को स्कूल जाने में एक साल से परेशानी हो रही है और दलित बस्तियों को केवल वोट बैंक समझा जा रहा है।
उतराखंड पावर् कॉर्पोरेशन ऋषिके
सहारनपुर के माणकमऊ वार्ड 31 में पार्षद समीर अहमद पर विकास न करने का आरोप लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों को स्कूल जाने में एक साल से परेशानी हो रही है और दलित बस्तियों को केवल वोट बैंक समझा जा रहा है।
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- सहारनपुर के गंगोह ब्लॉक के चमनपुरा गाँव निवासी शिवा सैनी ने अपनी शादी में ₹2.5 लाख का शगुन लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने सिर्फ एक रुपया और नारियल स्वीकार किया, जिसकी क्षेत्रभर में जमकर सराहना हो रही है। उनके इस कदम को दहेज प्रथा के खिलाफ एक बड़ी प्रेरणादायक मिसाल माना जा रहा है।1
- सहारनपुर के माणकमऊ वार्ड 31 में पार्षद समीर अहमद पर विकास न करने का आरोप लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों को स्कूल जाने में एक साल से परेशानी हो रही है और दलित बस्तियों को केवल वोट बैंक समझा जा रहा है।2
- सहारनपुर के जोगिपुरा उर्फ हमजागढ़ गाँव में 20 सालों से सड़कों पर पानी भरा है। निकासी की व्यवस्था न होने से गंदे पानी में बच्चे-बूढ़े बीमार पड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने अब तक कोई ध्यान नहीं दिया है।1
- Naim malik1
- श्री मनदीप जी ने यमुनानगर के मतदाताओं से उन्हें वोट देकर एक बार सेवा करने का मौका देने की अपील की है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे उन पर भरोसा जताएं और जनसेवा का अवसर प्रदान करें।1
- मई में मदर्स डे पर माताओं को सम्मान देते हुए, हर बच्चे की माँ को उसकी पहली 'सुपर हीरो' बताया गया है। दवा के काम न आने पर भी माँ की दुआएँ असर करती हैं और वे बिना थके 18-19 घंटे तक अपने परिवार के लिए काम करती हैं।1
- केंद्र सरकार का 5 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर 4% सब्सिडी देने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। किसान आज भी केवल 3 लाख रुपये तक के ऋण पर ही लाभ पा रहे हैं, जिससे उनमें भारी असंतोष है। किसान नेताओं ने सरकार से इस घोषणा को तत्काल लागू करने की मांग की है।1
- केंद्र सरकार द्वारा घोषित 5 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर 4% सब्सिडी योजना आज तक लागू नहीं हुई है। इस देरी से देशभर के किसान परेशान हैं, जिन्हें इस आर्थिक सहायता की सख्त जरूरत है। किसानों का कहना है कि यह घोषणा केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है।1