जंतर-मंतर पर बच्चों और बच्चियों के साथ हुए बर्बरतापूर्ण व्यवहार के विरोध में भीम आर्मी चीफ (@bhimarmychief) संसद भवन परिसर में बाबा साहेब की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए हैं। इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर से सामने आए बर्बर दृश्यों ने इतिहास के काले अध्याय जलियांवाला बाग की याद दिला दी है। इस अमानवीय व्यवहार ने मन को गहराई तक झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का उत्तर बल प्रयोग से देना लोकतांत्रिक मूल्यों पर बड़ा आघात है। इसी पीड़ा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ शुरू किया गया यह शांतिपूर्ण संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक न्याय सुनिश्चित नहीं होता और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती।
जंतर-मंतर पर बच्चों और बच्चियों के साथ हुए बर्बरतापूर्ण व्यवहार के विरोध में भीम आर्मी चीफ (@bhimarmychief) संसद भवन परिसर में बाबा साहेब की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए हैं। इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर से सामने आए बर्बर दृश्यों ने इतिहास के काले अध्याय जलियांवाला बाग की याद दिला दी है। इस अमानवीय व्यवहार ने मन को गहराई तक झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का उत्तर बल प्रयोग से देना लोकतांत्रिक मूल्यों पर बड़ा आघात है। इसी पीड़ा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ शुरू किया गया यह शांतिपूर्ण संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक न्याय सुनिश्चित नहीं होता और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती।
- देश के छात्रों का कहना है कि उनका कोई भविष्य नहीं बचा है, जबकि इस सरकार के मंत्री खुलेआम दावा कर रहे हैं कि उनकी कुर्सी नहीं जाएगी। इस स्थिति पर सीधा प्रहार करते हुए कहा गया है कि जिस देश में छात्रों को अपना भविष्य खोना पड़े और मंत्रियों की कुर्सी सुरक्षित बची रहे, वहां न्याय का कोई अस्तित्व ही नहीं है। एक तरफ जहां देश का छात्र अपने भविष्य को लेकर परेशान है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के मंत्रियों को केवल अपनी कुर्सी बचाए रखने की चिंता है।1
- दिल्ली पुलिस ने थलपति विजय के सीजेपी विरोध प्रदर्शन दौरे से जुड़े एक वीडियो का फैक्ट चेक किया है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर थलपति विजय का यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी है।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर चौधरी अनीस गाजी भड़क उठे हैं। उन्होंने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए स्पष्ट कहा है कि छात्रों पर यह अत्याचार किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।1
- उत्तर प्रदेश के मेरठ में लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने नशामुक्ति की शपथ ली है।1
- जनपद बिजनौर से जुड़ी बड़ी खबरें जर्नलिस्ट सतवेन्दर सिंह गुजराल के साथ प्रस्तुत की जा रही हैं। इसमें बिजनौर जिले से संबंधित मुख्य समाचारों की जानकारी दी गई है।1
- जंतर-मंतर पर वांगचुक के सीजेपी (CJP) विरोध प्रदर्शन में अभिनेता थलापति विजय के शामिल होने के दावों पर दिल्ली पुलिस ने सच्चाई सामने रखी है। सोशल मीडिया पर यह सवाल बना हुआ था कि क्या थलापति विजय इस प्रदर्शन के लिए पहुंचे थे। इस संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा हकीकत बताए जाने के बाद, थलापति विजय के दिल्ली विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के दावों को पूरी तरह से झूठा बताया गया है।1
- बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से प्रेरित होकर अनेक युवाओं और प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर एकत्रित होकर अत्यंत शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की है। इस प्रदर्शन के जरिए आंदोलनकारियों ने यह साफ संदेश दिया है कि वे अपने अधिकारों और जरूरी मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने से कभी भी पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शन में शामिल युवाओं का स्पष्ट कहना है कि अब वे किसी भी डर के कारण चुप बैठने वाले नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह से संविधान के दायरे में रहकर अपनी बात रखने और संघर्ष करने के लिए तैयार हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि बदलाव के रास्ते पर शांतिपूर्ण आंदोलन और लोकतांत्रिक भागीदारी ही सबसे बड़ी ताकत होती है। जंतर-मंतर पर हुए इस आंदोलन ने एक बार फिर यह साबित कर दिखाया है कि लोकतंत्र में अपनी बात को मुखरता से रखने का हौसला आज भी जिंदा है।1
- नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच प्रदर्शनकारियों ने अपनी भूख हड़ताल को आगे भी जारी रखने का ऐलान किया है। आंदोलन से जुड़े लोगों का साफ कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, इस पूरे आंदोलन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना, निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करना और छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहेगा और वे संविधान द्वारा प्रदान किए गए लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत अपनी आवाज बुलंद करना जारी रखेंगे। फिलहाल, आंदोलनकारियों की इन मांगों और आगे की बातचीत को लेकर प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।1