Shuru
Apke Nagar Ki App…
हिनौती पिपरिया के जंगल में आग लगने का घटनाक्रम हुआ है सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल किया जा रहा जंगल में फैलती आज पटेरा -हिनौती पिपरिया के जंगल में आग लगने का घटनाक्रम हुआ है सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल किया जा रहा जंगल में फैलती आग जो कहीं ना कहीं वन संपदा को नुकसान साबित कर रही है आग कैसे लगी है यह कारण अज्ञात बताया जा रहा वन विभाग को संज्ञान में लेना आवश्यक होगा जंगल जहां आग से सुरक्षा के दायित्व को हमारा कर्तव्य निभाना मगर गर्मी के मौसम में अक्षर कर जंगल आज की शिकार हो जाते हैं जो कहीं ना कहीं हमारे लिए चुनौती पूर्ण बने हुए हैं!
Reeport 100
हिनौती पिपरिया के जंगल में आग लगने का घटनाक्रम हुआ है सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल किया जा रहा जंगल में फैलती आज पटेरा -हिनौती पिपरिया के जंगल में आग लगने का घटनाक्रम हुआ है सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल किया जा रहा जंगल में फैलती आग जो कहीं ना कहीं वन संपदा को नुकसान साबित कर रही है आग कैसे लगी है यह कारण अज्ञात बताया जा रहा वन विभाग को संज्ञान में लेना आवश्यक होगा जंगल जहां आग से सुरक्षा के दायित्व को हमारा कर्तव्य निभाना मगर गर्मी के मौसम में अक्षर कर जंगल आज की शिकार हो जाते हैं जो कहीं ना कहीं हमारे लिए चुनौती पूर्ण बने हुए हैं!
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- Post by Bhupendra Rai दबंग इंडिया1
- Post by नीलेश विश्वकर्मा1
- Post by Shailesh Shrivastava1
- Post by भगवत सिंह लोधी पत्रकार1
- Post by बसंत राय प्रदेश अध्यक्ष मजदूर संघ आप पार्टी मध्य प्रदेश1
- कटनी जिले के स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम छपरा, रजा मार्बल के पास शुक्रवार देर रात एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जहां हाईवे किनारे खड़ी एक मिनी ट्रक में चालक का रक्तरंजित शव मिलने से इलाके में दहशत फैल गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। मिली जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान 42 वर्षीय राकेश दाहिया पिता घासीराम दाहिया, निवासी वार्ड क्रमांक 14 खितौला, सिहोरा जिला जबलपुर के रूप में हुई है। राकेश पेशे से ट्रक ड्राइवर था और वह स्वराज माजदा वाहन (क्रमांक MP 20 GA 6242) चलाता था। परिजनों के मुताबिक, राकेश 10 अप्रैल 2026 को जबलपुर से कटनी आया था और बिलहरी से मटके लोड कर वापस जबलपुर लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में यह रहस्यमयी घटना घटित हो गई। थाना प्रभारी सुदेश समन ने बताया कि देर रात करीब 2 बजे एनएचएआई के माध्यम से सूचना मिली कि छपरा के आगे रजा मार्बल के पास एक गाड़ी संदिग्ध अवस्था में खड़ी है, जिसमें एक शव पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई कर शव को कब्जे में लिया गया। एसडीओपी आकांक्षा चतुर्वेदी ने बताया कि घटनास्थल से लगभग 200 मीटर दूर खून से सनी एक लोहे की रॉड बरामद की गई है। वहीं, मृतक के शरीर पर कई चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे हत्या की आशंका जताई जा रही है। फिंगरप्रिंट टीम द्वारा वाहन की गहन जांच की गई है। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा। 👉 पुलिस हर एंगल से मामले की जांच में जुटी है, जल्द ही घटना का खुलासा होने की उम्मीद है।1
- Post by Bhupendra Rai दबंग इंडिया1
- रिपोर्टर गणेश सोनी गुदरी तहसील स्लीमनाबाद जिला कटनी शॉट सर्किट से फसल में लगी आग ग्राम गुदरी में फसल का हुआ नुकसान ग्राम गुदरी में शॉर्ट सर्किट गुदरी में जाली किसानों की फसल जिसमें से सुनील रजक राजेंद्र रजक सोनेलाल चौधरी संदीप चौधरी की गाड़ी होंडा साईं और भी किसानों की फसल का नुकसान हुआ8
- *13 अप्रैल संत कंवर राम जयंती* 13 अप्रैल, 1885 को बैसाखी के दिन सिंध (अब पाकिस्तान) के जरवार गाँव में जन्मे संत कंवर राम सिंधी समाज के एक महान संत, गायक और मानवतावादी थे। उनकी जयंती (13 अप्रैल) को सिंधी समुदाय में उत्साह के साथ मनाया जाता है। वे अपने मधुर भजनों (लाडा) और गरीब-दुखियों की सेवा के लिए जाने जाते हैं, जो सत्य, प्रेम, भाईचारे और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक माने जाते हैं। *संत कंवर राम जयंती से संबंधित मुख्य बातें:* जन्म और प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म 13 अप्रैल 1885 को जरवार, सक्खर (सिंध) में हुआ था। उनके पिता ताराचंद और माता तीर्थबाई थे, जो अत्यंत सादगीपूर्ण जीवन जीते थे। *आध्यात्मिक झुकाव:* संत कंवर राम बचपन से ही ईश्वर के प्रति समर्पित थे। उन्होंने संत खोतराम साहिब के सानिध्य में आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त की और उन्हें अपना गुरु माना। *गायन और भजन:* उनकी आवाज बहुत मधुर थी और वे *अपने भजनों से लोगों के दिलों को छू लेते थे।* वे विशेष रूप से सिंधी समाज में 'लाडा' (शुभ विवाह के गीत) गाने के लिए प्रसिद्ध है। *समाज सेवा:* वे अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों में बाँट देते थे। उनके अनुसार, मानव सेवा ही ईश्वर की सच्ची पूजा थी। *शहीद का दर्जा:* उन्हें "अमर शहीद" कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने 1939 में रूक रेलवे स्टेशन पर धर्म के लिए अपना बलिदान दे दिया था।1