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संघर्ष से भागना आसान है, लेकिन जीत उन्हीं की होगी जो टिके रहेंगे, जबेरा_पुकारे_दिल_से_प्रताप_भैया_फिर_से #नेता_नहीं_जबेरा_का_बेटा
भगवत सिंह लोधी पत्रकार
संघर्ष से भागना आसान है, लेकिन जीत उन्हीं की होगी जो टिके रहेंगे, जबेरा_पुकारे_दिल_से_प्रताप_भैया_फिर_से #नेता_नहीं_जबेरा_का_बेटा
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- : सोशल मीडिया पर एक वीडियो इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जो स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावों की पोल खोल रहा है। अभिषेक पाठक नाम के एक यूजर ने अपने फेसबुक अकाउंट से एक वीडियो साझा किया है, जिसमें सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को उजागर किया गया है। क्या है पूरा मामला? वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि इस भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड या जांच के लिए ले जाने के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से गाड़ी या स्ट्रेचर की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। ### अभिषेक पाठक के वीडियो की मुख्य बातें: व्यवस्था का अभाव: अस्पताल को 'सुपर स्पेशलिटी' कहा जा रहा है, लेकिन मरीजों के लिए बुनियादी परिवहन (Transport) की सुविधा शून्य है। तीमारदारों की बेबसी: भीषण गर्मी में मरीज के परिजन उन्हें सहारा देकर या खुद ही स्ट्रेचर खींचकर ले जाने को मजबूर हैं। प्रशासन पर सवाल: वीडियो शेयर करते हुए अभिषेक ने व्यवस्था की हकीकत बताते हुए अस्पताल प्रबंधन और सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। "यह है सुपर स्पेशलिटी की हकीकत! भीषण गर्मी में मरीज बेहाल हैं, लेकिन उन्हें लाने-ले जाने के लिए कोई गाड़ी उपलब्ध नहीं है।" > — अभिषेक पाठक (फेसबुक पोस्ट के माध्यम से) निष्कर्ष अक्सर बड़ी इमारतों और आधुनिक मशीनों को 'सुपर स्पेशलिटी' का नाम दे दिया जाता है, लेकिन जब तक एक आम मरीज को धूप और गर्मी से बचाने जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक ऐसे दावे खोखले ही नजर आएंगे। अब देखना यह है कि इस वीडियो के वायरल होने के बाद क्या अस्पताल प्रशासन की नींद टूटती है?1
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