पूर्वी चंपारण के कोटवा प्रखंड में आयोजित एक सहयोग शिविर में भूमि एवं राजस्व विभाग से संबंधित शिकायतों की सबसे अधिक संख्या दर्ज की गई। इस शिविर में दाखिल-खारिज, परिमार्जन, पैमाइश और अन्य राजस्व मामलों से जुड़े कुल 50 आवेदन प्राप्त हुए। प्रशासन के अनुसार, इनमें से 46 आवेदनों का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया, जबकि शेष 4 मामलों को लंबित रखते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई है। प्राप्त आवेदनों में बड़हरवा कला पश्चिमी पंचायत से 9, बड़हरवा कला पूर्वी पंचायत से 17 और कोटवा पंचायत से 24 मामले शामिल थे। शिविर के दौरान कई फरियादियों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं, जिनमें रणजीत सिंह नामक एक आवेदक ने बताया कि वे पिछले 28 महीनों से दाखिल-खारिज के लिए अंचल कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनका कार्य अब तक नहीं हो सका है। उन्होंने विवादित भूमि से मिट्टी कटाई और रास्ते बंद होने की भी शिकायत की, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, डीसीएलआर ने इस शिकायत की तत्काल जांच कराने का आश्वासन दिया और कहा कि यदि शिकायत सही पाई जाती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि कोटवा अंचल में दाखिल-खारिज मामलों की रिजेक्शन दर घटकर लगभग 15 प्रतिशत रह गई है, जिसे प्रशासनिक सुधार का संकेत माना जा रहा है। डीसीएलआर ने शिविर में उपस्थित लोगों को भरोसा दिलाया कि लंबित आवेदनों का निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा और सभी लंबित मामलों का समाधान अधिकतम 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि ऐसे शिविरों का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी समाधान उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।
पूर्वी चंपारण के कोटवा प्रखंड में आयोजित एक सहयोग शिविर में भूमि एवं राजस्व विभाग से संबंधित शिकायतों की सबसे अधिक संख्या दर्ज की गई। इस शिविर में दाखिल-खारिज, परिमार्जन, पैमाइश और अन्य राजस्व मामलों से जुड़े कुल 50 आवेदन प्राप्त हुए। प्रशासन के अनुसार, इनमें से 46 आवेदनों का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया, जबकि शेष 4 मामलों को लंबित रखते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई है। प्राप्त आवेदनों में बड़हरवा कला पश्चिमी पंचायत से 9, बड़हरवा कला पूर्वी पंचायत से 17 और कोटवा पंचायत से 24 मामले शामिल थे। शिविर के दौरान कई फरियादियों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं, जिनमें रणजीत सिंह नामक एक आवेदक ने बताया कि वे पिछले 28 महीनों से दाखिल-खारिज के लिए अंचल कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनका कार्य अब तक नहीं हो सका है। उन्होंने विवादित भूमि से मिट्टी कटाई और रास्ते बंद होने की भी शिकायत की, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, डीसीएलआर ने इस शिकायत की तत्काल जांच कराने का आश्वासन दिया और कहा कि यदि शिकायत सही पाई जाती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि कोटवा अंचल में दाखिल-खारिज मामलों की रिजेक्शन दर घटकर लगभग 15 प्रतिशत रह गई है, जिसे प्रशासनिक सुधार का संकेत माना जा रहा है। डीसीएलआर ने शिविर में उपस्थित लोगों को भरोसा दिलाया कि लंबित आवेदनों का निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा और सभी लंबित मामलों का समाधान अधिकतम 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि ऐसे शिविरों का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी समाधान उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।
- राष्ट्रीय चेतना कार्यक्रम के तहत आयोजित 'अपना माटी अपना देश यात्रा' का पकड़ीदयाल में भव्य स्वागत किया गया।1
- Post by Son Of Poor Vivek Premi1
- पूर्वी चंपारण के ढाका में बारिश के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि यहाँ बहुत सारा पानी जमा हो जाता है। बताया गया है कि यह समस्या इसके निर्माण के समय से ही बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से इसे ठीक करवाने और स्थिति में सुधार लाने की अपील की है।1
- मझौलिया प्रखंड क्षेत्र की चार पंचायतों—रमपुरवा महानवा, बरवा सेमरा घाट, सरिसवा एवं हरपुर—में मंगलवार को सहयोग शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना था। सरिसवा पंचायत में आयोजित शिविर का उद्घाटन अपर समाहर्ता (एडीएम) राजीव रंजन सिन्हा, प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. राजीव रंजन कुमार, अंचलाधिकारी राजीव रंजन और अन्य अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर, अधिकारियों ने लोगों को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी और संबंधित विभागों को प्राप्त आवेदनों का शीघ्र निष्पादन करने का निर्देश दिया। शिविर में स्वास्थ्य, शिक्षा, विद्युत, जीविका, श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण योजना, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, पंचायती राज, लोहिया स्वच्छ बिहार मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, राजस्व एवं भूमि सुधार, कृषि, सीएससी तथा आंगनबाड़ी विभाग सहित कई विभागों के स्टॉल लगाए गए थे। ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं और योजनाओं से जुड़े आवेदन संबंधित विभागों को सौंपे। प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. राजीव रंजन कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविर में प्राप्त लगभग 98 प्रतिशत आवेदनों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया, जबकि शेष आवेदनों के समाधान की प्रक्रिया जारी है। वर्तमान कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन और भाजपा के पूर्व विधायक उमाकांत सिंह ने भी सहयोग शिविर का निरीक्षण किया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने शिविर की व्यवस्था का जायजा लिया और अधिकारियों को जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। मौके पर विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। लोगों में सहयोग शिविर को लेकर काफी उत्साह देखा गया और उन्होंने इस पहल की सराहना की।4
- इच्छाधारी पक्षी को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसमें लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर यह इच्छाधारी पक्षी क्या है। साथ ही, यह भी पूछा जा रहा है कि यह अपना रूप कैसे बदलता है और क्यों बार-बार अपना रूप बदलता रहता है।1
- #news #media1
- बेतिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कुत्ता काटने के बाद लगने वाली एंटी-रेबीज वैक्सीन के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की जा रही है। इस आधुनिक पद्धति के लागू होने के बाद, बेतिया मेडिकल कॉलेज बिहार का दूसरा ऐसा सरकारी अस्पताल बन जाएगा जहाँ इस नई तकनीक से मरीजों का उपचार किया जाएगा। इस नई वैक्सीन की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें पुरानी पद्धति की तुलना में कम मात्रा में इंजेक्शन देना होगा। जहाँ पहले कई खुराकें और एक अलग प्रक्रिया अपनाई जाती थी, वहीं नई व्यवस्था में वैक्सीन को सीधे त्वचा (इंट्राडर्मल) में दिया जाएगा। इससे वैक्सीन की खपत कम होगी और अधिक से अधिक मरीजों को इस सुविधा का लाभ मिल सकेगा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मरीज केवल अपने आधार कार्ड के साथ अस्पताल पहुँचकर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। पूरी वैक्सीनेशन प्रक्रिया डॉक्टरों की निगरानी में संचालित की जाएगी। चिकित्सकों का कहना है कि यह नई व्यवस्था मरीजों को अनावश्यक परेशानी से राहत देगी और रेबीज जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम में अधिक प्रभावी साबित होगी। अस्पताल प्रशासन का लक्ष्य है कि यह सुविधा आम जनता तक सुचारू रूप से पहुँचे, ताकि किसी भी मरीज को इलाज के लिए भटकना न पड़े और उन्हें समय पर तथा बेहतर उपचार उपलब्ध हो सके।1
- पूर्वी चंपारण में आपदा मित्र का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, 'चैंपियन चंपारण टाइगर' अब अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं।1