थाने की दीवार पर ‘नगर पालिका की दबंगई’ का आरोप ! रात के अंधेरे में बिना अनुमति-तोड़ी गई दीवार (न्यूज़ ऐसीपी भारत - जुन्नारदेव) आमजन की सुविधा के नाम पर बनाया जा रहा सुलभ शौचालय अब ऐसा विवाद बन गया है, जिसने सीधे पुलिस थाना परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना परिसर की बाउंड्रीवाल का एक हिस्सा बिना किसी स्पष्ट अनुमति, बिना पूर्व सूचना और थाना प्रभारी की अनुपस्थिति में रात के समय तोड़े जाने की बात सामने आई है। यही वह बिंदु है, जिसने पूरे मामले को साधारण निर्माण विवाद से उठाकर सरकारी संपत्ति, सुरक्षा और जवाबदेही का गंभीर मामला बना दिया है। रात के अंधेरे में क्यों तोड़ी गई थाने की दीवार? • पुलिस अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, बाउंड्रीवाल तोड़ने की कार्रवाई उस समय की गई जब थाना प्रभारी (टीआई) मौजूद नहीं थीं। अधिकारी का स्पष्ट कहना है कि दीवार रात में तोड़ी गई और पुलिस को इसकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। अब सवाल सीधा है— • अगर काम वैध था तो रात के अंधेरे में क्यों? • अगर अनुमति थी तो उसका रिकॉर्ड कहां है? • अगर पुलिस को सूचना दी गई थी तो थाना रिकॉर्ड में उसका प्रमाण क्या है? कथित यही सवाल अब नगर पालिका प्रशासन और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। ठेकेदार भूषण अरोरा का दावा—“अध्यक्ष से बात हुई थी”, लेकिन पुलिस स्तर पर सवाल बरकरार • मामले में जब संबंधित ठेकेदार भूषण अरोरा जो की नगर पालिका के चिन्हित ठेकेदार दिया है सरल शब्दों मे नगर पालिका के अधिकतर ठेके नगर पालिका की जबरदस्त मेहरबानी से इन्हे ही दिए जाते है जिसके अंतर्गत निर्माण कार्यों मे लीपापोती की कई शिकायते आने के बाद भी नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी अपनी आँखों पर पट्टी बांधे बैठे हुए है.। ठेकेदार से हुई बातचीत मे विरोधाभास : • बिना अनुमति निर्माण कार्यों पर ठेकेदार से जब जानकारी लेने की कोशिश की गई तो ठेकेदार की ओर से कथित तौर पर यह कहा गया कि उसने नगर पालिका अध्यक्ष से बात की थी और अध्यक्ष द्वारा टीआई मैडम को जानकारी देने की बात कही गई थी। लेकिन उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार, इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी और टीआई को ऐसी पूर्व सूचना दिए जाने की बात सामने नहीं आई।यहीं से विवाद और गहरा जाता है। सवालों के घेरे मे नगर पालिका : जनता के उठते सवाल ! • अगर ठेकेदार का दावा सही था, तो सूचना किस माध्यम से दी गई, कब दी गई और उसका कोई लिखित/दस्तावेजी प्रमाण कहां है? • और यदि दावा सही नहीं था, तो क्या सरकारी थाना परिसर की दीवार तोड़ने के लिए पुलिस को जानकारी देने के नाम पर भ्रामक बात कही गई? इन सवालों का जवाब अब जांच से सामने आना चाहिए। • नगर पालिका! ठेका आपका, निर्माण आपका, निगरानी किसकी? नगर पालिका प्रशासन से सवाल - • ठेका नगर पालिका ने दिया। निर्माण नगर पालिका की परियोजना के तहत हो रहा था। ठेकेदार नगर पालिका से संबद्ध कार्य कर रहा था। फिर थाना परिसर की सुरक्षा दीवार कैसे टूट गई? • क्या मौके पर नगर पालिका का कोई जिम्मेदार • अधिकारी निगरानी कर रहा था? • क्या स्वीकृत नक्शे अथवा कार्यादेश में थाना परिसर की बाउंड्रीवाल हटाने का प्रावधान था? • क्या पुलिस विभाग से लिखित अनुमति या समन्वय किया गया? • यदि नहीं, तो नगर पालिका की निर्माण निगरानी व्यवस्था आखिर कर क्या रही थी? • अगर ठेकेदार ने अपनी मर्जी से सरकारी परिसर की दीवार तोड़ी, तो नगर पालिका ने तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की? और यदि नगर पालिका को इसकी जानकारी थी, तो पुलिस को औपचारिक सूचना क्यों नहीं दी गई? आज थाने की दीवार टूटी है, कल किसकी बारी? • यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह किसी निजी मकान की दीवार का विवाद नहीं है। यह पुलिस थाना परिसर है। अब देखना यह है—की जुन्नारदेव थाना द्वारा ठेकेदार और नगर पालिका के विरुद्ध कोई कार्यवाही करी जायेगी या मामले को आपसी समझ के दौरान दबा दिया जायेगा, या इस मामले में कानून की दीवार मजबूत होती है?
थाने की दीवार पर ‘नगर पालिका की दबंगई’ का आरोप ! रात के अंधेरे में बिना अनुमति-तोड़ी गई दीवार (न्यूज़ ऐसीपी भारत - जुन्नारदेव) आमजन की सुविधा के नाम पर बनाया जा रहा सुलभ शौचालय अब ऐसा विवाद बन गया है, जिसने सीधे पुलिस थाना परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना परिसर की बाउंड्रीवाल का एक हिस्सा बिना किसी स्पष्ट अनुमति, बिना पूर्व सूचना और थाना प्रभारी की अनुपस्थिति में रात के समय तोड़े जाने की बात सामने आई है। यही वह बिंदु है, जिसने पूरे मामले को साधारण निर्माण विवाद से उठाकर सरकारी संपत्ति, सुरक्षा और जवाबदेही का गंभीर मामला बना दिया है। रात के अंधेरे में क्यों तोड़ी गई थाने की दीवार? • पुलिस अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, बाउंड्रीवाल तोड़ने की कार्रवाई उस समय की गई जब थाना प्रभारी (टीआई) मौजूद नहीं थीं। अधिकारी का स्पष्ट कहना है कि दीवार रात में तोड़ी गई और पुलिस को
इसकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। अब सवाल सीधा है— • अगर काम वैध था तो रात के अंधेरे में क्यों? • अगर अनुमति थी तो उसका रिकॉर्ड कहां है? • अगर पुलिस को सूचना दी गई थी तो थाना रिकॉर्ड में उसका प्रमाण क्या है? कथित यही सवाल अब नगर पालिका प्रशासन और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। ठेकेदार भूषण अरोरा का दावा—“अध्यक्ष से बात हुई थी”, लेकिन पुलिस स्तर पर सवाल बरकरार • मामले में जब संबंधित ठेकेदार भूषण अरोरा जो की नगर पालिका के चिन्हित ठेकेदार दिया है सरल शब्दों मे नगर पालिका के अधिकतर ठेके नगर पालिका की जबरदस्त मेहरबानी से इन्हे ही दिए जाते है जिसके अंतर्गत निर्माण कार्यों मे लीपापोती की कई शिकायते आने के बाद भी नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी अपनी आँखों पर पट्टी बांधे बैठे हुए है.। ठेकेदार से हुई बातचीत मे विरोधाभास : • बिना अनुमति निर्माण कार्यों पर ठेकेदार से जब जानकारी लेने की कोशिश की गई तो ठेकेदार की ओर से कथित तौर पर
यह कहा गया कि उसने नगर पालिका अध्यक्ष से बात की थी और अध्यक्ष द्वारा टीआई मैडम को जानकारी देने की बात कही गई थी। लेकिन उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार, इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी और टीआई को ऐसी पूर्व सूचना दिए जाने की बात सामने नहीं आई।यहीं से विवाद और गहरा जाता है। सवालों के घेरे मे नगर पालिका : जनता के उठते सवाल ! • अगर ठेकेदार का दावा सही था, तो सूचना किस माध्यम से दी गई, कब दी गई और उसका कोई लिखित/दस्तावेजी प्रमाण कहां है? • और यदि दावा सही नहीं था, तो क्या सरकारी थाना परिसर की दीवार तोड़ने के लिए पुलिस को जानकारी देने के नाम पर भ्रामक बात कही गई? इन सवालों का जवाब अब जांच से सामने आना चाहिए। • नगर पालिका! ठेका आपका, निर्माण आपका, निगरानी किसकी? नगर पालिका प्रशासन से सवाल - • ठेका नगर पालिका ने दिया। निर्माण नगर पालिका की परियोजना के तहत हो रहा था। ठेकेदार नगर पालिका से संबद्ध कार्य कर रहा था।
फिर थाना परिसर की सुरक्षा दीवार कैसे टूट गई? • क्या मौके पर नगर पालिका का कोई जिम्मेदार • अधिकारी निगरानी कर रहा था? • क्या स्वीकृत नक्शे अथवा कार्यादेश में थाना परिसर की बाउंड्रीवाल हटाने का प्रावधान था? • क्या पुलिस विभाग से लिखित अनुमति या समन्वय किया गया? • यदि नहीं, तो नगर पालिका की निर्माण निगरानी व्यवस्था आखिर कर क्या रही थी? • अगर ठेकेदार ने अपनी मर्जी से सरकारी परिसर की दीवार तोड़ी, तो नगर पालिका ने तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की? और यदि नगर पालिका को इसकी जानकारी थी, तो पुलिस को औपचारिक सूचना क्यों नहीं दी गई? आज थाने की दीवार टूटी है, कल किसकी बारी? • यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह किसी निजी मकान की दीवार का विवाद नहीं है। यह पुलिस थाना परिसर है। अब देखना यह है—की जुन्नारदेव थाना द्वारा ठेकेदार और नगर पालिका के विरुद्ध कोई कार्यवाही करी जायेगी या मामले को आपसी समझ के दौरान दबा दिया जायेगा, या इस मामले में कानून की दीवार मजबूत होती है?
- सरकारी सिस्टम के कागजों में मरा...हकीकत में जिंदा...पिता बोले नाम ठीक कर दो साहब...एक साल से साबित कर रहा मेरा बेटा जिंदा हैं...रिकॉर्ड में मृत,घर में अनंत सरकारी सिस्टम के कागजों में मरा...हकीकत में जिंदा...पिता बोले नाम ठीक कर दो साहब...एक साल से साबित कर रहा मेरा बेटा जिंदा हैं...रिकॉर्ड में मृत,घर में अनंत1
- विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता गेट खोलकर घुसे पशु चिकित्सालय में छिंदवाड़ा में गौवंश की मौत के मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का गुस्सा फूट पड़ा। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन और पशुपालन विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया, पुतला दहन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। बजरंग दल का आरोप है कि जिले की गौशालाओं में पिछले दो महीनों में 500 से अधिक गौवंश की मौत हुई है, जबकि सात माह से गौशालाओं को चारा-भूसा मद की राशि नहीं मिली। संगठन ने उप संचालक पशुपालन विभाग डॉ. हरजान सिंह पवार को हटाने, पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने पर बड़ा आंदोलन और छिंदवाड़ा बंद किया जाएगा।4
- एक माह में ही टेढ़ा हुआ नया बिजली का खंभा, बिजली विभाग की लापरवाही से मंडरा रहा हादसे का खतरा पुराने थाने के पास नाली में लगाया गया था खंभा, नगर पालिका ने पहले ही जताई थी आपत्ति आमला। नगर के मुख्य मार्ग स्थित पुराने थाना परिसर के समीप बिजली विभाग द्वारा लगाया गया नया बिजली का खंभा महज एक माह के भीतर ही टेढ़ा हो गया है। खंभे की झुकी हुई स्थिति अब राहगीरों और आसपास के दुकानदारों के लिए चिंता का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग की लापरवाही के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद अब तक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार बिजली विभाग ने यह खंभा नाली के किनारे स्थापित किया था। नगर पालिका ने खंभा लगाए जाने के समय ही बिजली विभाग को इसकी जानकारी देते हुए आगाह किया था कि नाली के किनारे लगाया गया खंभा भविष्य में खतरा बन सकता है। इसके बावजूद विभाग ने चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। लगातार हो रही बारिश के कारण खंभे के आसपास की जमीन कमजोर होती जा रही है, जिससे खंभा और अधिक झुक गया है। यदि समय रहते इसे सीधा कर सुरक्षित नहीं किया गया या किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया गया, तो इसके गिरने से बड़ा हादसा हो सकता है। यह मार्ग नगर का व्यस्ततम मार्ग है, जहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। स्थानीय नागरिकों ने बिजली विभाग से मांग की है कि खंभे का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और आवश्यक मरम्मत अथवा पुनः स्थापना की जाए। लोगों का कहना है कि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय विभाग को पहले ही सतर्कता बरतनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि से बचा जा सके।2
- आठनेर में प्रशासन की कार्रवाई से उठे सवाल बस स्टैंड से हटाया गया फल विक्रेताओं कों रोज़ी-रोटी पर संकट? आठनेर में प्रशासन की कार्रवाई से उठे सवाल बस स्टैंड से हटाया गया फल विक्रेताओं कों रोज़ी-रोटी पर संकट? आठनेर (बैतूल)। नगर परिषद आठनेर में बस स्टैंड परिसर में अचानक चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान ने शहर में चर्चाओं का बाज़ार गर्म कर दिया है। नवपदस्थ तहसीलदार की 'सिंघम स्टाइल' एंट्री के साथ पुलिस, राजस्व विभाग और नगर परिषद की संयुक्त टीम सड़कों पर उतरी। अभियान की शुरुआत में सबसे पहले कार्रवाई की गाज़ बस स्टैंड पर लगे गरीब फल-फ्रूट विक्रेताओं और उनके अस्थायी ठेलों पर गिरी। कार्रवाई के बाद से जहाँ एक तरफ सड़क पर कुछ देर के लिए जगह साफ नज़र आई, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन की निष्पक्षता और संवेदनशीलता पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गरीब फल विक्रेताओं की रोज़ी-रोटी पर संकट अचानक हुई इस कार्रवाई से दैनिक फल विक्रेताओं की आजीविका पर गहरा संकट मंडराने लगा है। स्थानीय लोगों और प्रभावित दुकानदारों का पूछना है कि क्या कार्रवाई से पहले इन गरीब विक्रेताओं के लिए किसी वैकल्पिक स्थान या स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था की गई थी? बिना किसी पूर्व वैकल्पिक इंतज़ाम के ठेलों को हटा देने से इन परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है। चुनिंदा कार्रवाई या निष्पक्ष प्रशासन? स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी असंतोष है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान का निशाना केवल कमजोर वर्ग ही क्यों बनता है? कॉम्प्लेक्स के बाहर बेतरतीब पार्किंग: बस स्टैंड स्थित कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों के बाहर ग्राहकों के वाहन सड़क तक खड़े रहते हैं, जिससे हर समय ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इन रसूखदार कॉम्प्लेक्स मालिकों और अव्यवस्थित पार्किंग पर भी प्रशासन की 'सिंघम' वाली सख्ती देखने को मिलेगी? लाखों के बजट पर सवाल: हाल ही में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि चौड़ी हुई सड़क का फायदा आम जनता और सुगम यातायात को मिलने के बजाय अव्यवस्था की भेंट चढ़ रहा है। जनमानस के प्रमुख सवाल क्या आठनेर बस स्टैंड पर अतिक्रमण का दायरा सिर्फ गरीब फल विक्रेताओं तक ही सीमित था? क्या नगर परिषद बड़े व्यापारियों और कॉम्प्लेक्सों की अवैध पार्किंग पर डंडा चलाने की हिम्मत दिखाएगी? सड़कों के चौड़ीकरण पर खर्च हुए लाखों रुपये का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिल रहा है? संवेदनशीलता और निष्पक्षता की परीक्षा आठनेर में हुई यह कार्रवाई अब प्रशासन की साख पर सवालिया निशान लगा रही है। यदि अतिक्रमण हटाना यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए ज़रूरी है, तो गरीबों के पुनर्वास और बड़े अतिक्रमणकारियों पर समान कार्रवाई भी उतनी ही अनिवार्य है। देखना यह होगा कि नगर परिषद और तहसील प्रशासन आने वाले दिनों में अपनी निष्पक्षता साबित करता है या यह अभियान महज़ "कमज़ोरों पर कार्रवाई" बनकर रह जाएगा।1
- 9 लाख की लूट का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, ₹10 हजार का इनामी बदमाश पुलिस के शिकंजे में पड़ोसी ने दी थी बैंक से रुपये ले जाने की सूचना, उसी इनपुट पर रची गई थी वारदात की साजिश; मुख्य आरोपी पर हत्या, लूट, चोरी समेत 8 से अधिक मामले दर्ज1
- बाढ का कहर: बाढ़ में बहे व्यक्ति का मिला शव, क्षेत्र में शोक की लहर 12 घंटे की तलाश के बाद बरामद हुआ शव, पुलिस ने पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। अमरवाड़ा। हर्रई विकासखण्ड में लगातार दो दिन से हो रही बारिश के कारण उफान पर आए नदी-नालों ने एक बार फिर जान ले ली।बुधवार शाम को ग्राम बरुल की नदी पार करते समय हर्रई निवास भगवान दास सोनी मोटरसाइकिल सहित बाढ़ के तेज बहाव में बह गए थे तलाश अभियान के बाद उनका शव बारगी टोला की नदी से बरामद कर लिया गया। शव मिलने की सूचना से क्षेत्र में शोक का माहौल है। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा। आवश्यक पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान उफान पर आए नदी-नालों और पुल-पुलियों को पार करने का प्रयास न करें तथा सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें। बाढ का कहर: बाढ़ में बहे व्यक्ति का मिला शव, क्षेत्र में शोक की लहर 12 घंटे की तलाश के बाद बरामद हुआ शव, पुलिस ने पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। अमरवाड़ा। हर्रई विकासखण्ड में लगातार दो दिन से हो रही बारिश के कारण उफान पर आए नदी-नालों ने एक बार फिर जान ले ली।बुधवार शाम को ग्राम बरुल की नदी पार करते समय हर्रई निवास भगवान दास सोनी मोटरसाइकिल सहित बाढ़ के तेज बहाव में बह गए थे तलाश अभियान के बाद उनका शव बारगी टोला की नदी से बरामद कर लिया गया। शव मिलने की सूचना से क्षेत्र में शोक का माहौल है। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा। आवश्यक पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान उफान पर आए नदी-नालों और पुल-पुलियों को पार करने का प्रयास न करें तथा सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें।1