हवा की गति, जिसे Wind Speed कहते हैं, यह बताती है कि हवा कितनी तेज़ी से चल रही है। इसे मापने के लिए एनीमोमीटर नामक यंत्र का उपयोग किया जाता है। हवा की गति का अर्थ है जब हवा एक जगह से दूसरी जगह चलती है, तो उसकी चाल। इसे आमतौर पर किलोमीटर प्रति घंटा (km/h), मीटर प्रति सेकंड (m/s), मील प्रति घंटा (mph) और नॉट (knot) जैसी इकाइयों में मापा जाता है, जिसमें नॉट का इस्तेमाल समुद्री और हवाई जहाज़ों में अधिक होता है। सबसे आम एनीमोमीटर को कप एनीमोमीटर कहते हैं, जिसमें ऊपर की ओर 3 या 4 छोटे कप लगे होते हैं। जब हवा चलती है, तो ये कप हवा के धक्के से घूमने लगते हैं। हवा जितनी तेज़ होगी, कप उतनी ही तेज़ी से घूमेंगे, और हवा धीमी होने पर कप धीरे घूमते हैं। यंत्र के अंदर लगा एक सेंसर कपों के घूमने की संख्या को गिनता है, जिससे मशीन हवा की गति की गणना करती है। हवा की गति के साथ-साथ उसकी दिशा जानना भी महत्वपूर्ण होता है, जिसके लिए Wind Vane या Weather Vane नामक एक अलग यंत्र उपयोग किया जाता है। यह तीर जैसा दिखता है और हवा की दिशा के अनुसार घूमकर बताता है कि हवा किस ओर से आ रही है, जैसे उत्तर दिशा से आने वाली हवा को North Wind कहते हैं। आजकल कई प्रकार के आधुनिक एनीमोमीटर इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनमें कप एनीमोमीटर के अलावा वेन एनीमोमीटर (पंखे जैसे ब्लेड वाला), हॉट वायर एनीमोमीटर (पतले गरम तार का उपयोग करके जो हवा के टकराने से ठंडा होता है) और अल्ट्रासोनिक एनीमोमीटर शामिल हैं। अल्ट्रासोनिक एनीमोमीटर आवाज़ की तरंगों (Ultrasonic Waves) का उपयोग करता है और हवा की दिशा व गति के कारण ध्वनि तरंगों को सेंसर तक पहुँचने में लगने वाले समय के अंतर से हवा की गति का पता लगाता है। यह विधि बहुत सटीक होती है और अक्सर मौसम विज्ञान में इस्तेमाल की जाती है। मौसम विभाग खुले और ऊँचे स्थानों पर एनीमोमीटर लगाता है ताकि इमारतों या पेड़ों से हवा की चाल प्रभावित न हो। ये एनीमोमीटर लगातार हवा की गति रिकॉर्ड करते हैं और यह जानकारी मौसम केंद्रों या कंप्यूटर सिस्टम तक पहुँचती है। इस डेटा का उपयोग करके मौसम विभाग हवा की तीव्रता, आँधी या तूफान की संभावना, और विमानों व जहाज़ों के लिए मौसम की सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान करता है। हवा की गति मापना मौसम पूर्वानुमान, हवाई व समुद्री यात्रा, खेती (तेज़ हवा से फसलों को नुकसान), विंड टर्बाइन से बिजली उत्पादन, और निर्माण कार्यों (क्रेन व ऊँची इमारतों पर काम के लिए) जैसे कई क्षेत्रों में बहुत आवश्यक है। मोबाइल ऐप सीधे हवा की गति नहीं मापते, बल्कि वे मौसम विभाग या स्टेशनों के डेटा का उपयोग करते हैं, जब तक कि उनमें कोई विशेष सेंसर या बाहरी एनीमोमीटर न जुड़ा हो। संक्षेप में, एनीमोमीटर वह यंत्र है जो हवा की रफ्तार को मापता है। इसमें लगे कप या पंखे हवा से घूमते हैं, और जितनी तेज़ हवा होती है, वे उतनी ही तेज़ी से घूमते हैं। मशीन उनके घूमने की संख्या को गिनकर सटीक रूप से हवा की गति बताती है।
हवा की गति, जिसे Wind Speed कहते हैं, यह बताती है कि हवा कितनी तेज़ी से चल रही है। इसे मापने के लिए एनीमोमीटर नामक यंत्र का उपयोग किया जाता है। हवा की गति का अर्थ है जब हवा एक जगह से दूसरी जगह चलती है, तो उसकी चाल। इसे आमतौर पर किलोमीटर प्रति घंटा (km/h), मीटर प्रति सेकंड (m/s), मील प्रति घंटा (mph) और नॉट (knot) जैसी इकाइयों में मापा जाता है, जिसमें नॉट का इस्तेमाल समुद्री और हवाई जहाज़ों में अधिक होता है। सबसे आम एनीमोमीटर को कप एनीमोमीटर कहते हैं, जिसमें ऊपर की ओर 3 या 4 छोटे कप लगे होते हैं। जब हवा चलती है, तो ये कप हवा के धक्के से घूमने लगते हैं। हवा जितनी तेज़ होगी, कप उतनी ही तेज़ी से घूमेंगे, और हवा धीमी होने पर कप धीरे घूमते हैं। यंत्र के अंदर लगा एक सेंसर कपों के घूमने की संख्या को गिनता है, जिससे मशीन हवा की गति की गणना करती है। हवा की गति के साथ-साथ उसकी दिशा जानना भी महत्वपूर्ण होता है, जिसके लिए Wind Vane या Weather Vane नामक एक अलग यंत्र उपयोग किया जाता है। यह तीर जैसा दिखता है और हवा की दिशा के अनुसार घूमकर बताता है कि हवा किस ओर से आ रही है, जैसे उत्तर दिशा से आने वाली हवा को North Wind कहते हैं। आजकल कई प्रकार के आधुनिक एनीमोमीटर इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनमें कप एनीमोमीटर के अलावा वेन एनीमोमीटर (पंखे जैसे ब्लेड वाला), हॉट वायर एनीमोमीटर (पतले गरम तार का उपयोग करके जो हवा के टकराने से ठंडा होता है) और अल्ट्रासोनिक एनीमोमीटर शामिल हैं। अल्ट्रासोनिक एनीमोमीटर आवाज़ की तरंगों (Ultrasonic Waves) का उपयोग करता है और हवा की दिशा व गति के कारण ध्वनि तरंगों को सेंसर तक पहुँचने में लगने वाले समय के अंतर से हवा की गति का पता लगाता है। यह विधि बहुत सटीक होती है और अक्सर मौसम विज्ञान में इस्तेमाल की जाती है। मौसम विभाग खुले और ऊँचे स्थानों पर एनीमोमीटर लगाता है ताकि इमारतों या पेड़ों से हवा की चाल प्रभावित न हो। ये एनीमोमीटर लगातार हवा की गति रिकॉर्ड करते हैं और यह जानकारी मौसम केंद्रों या कंप्यूटर सिस्टम तक पहुँचती है। इस डेटा का उपयोग करके मौसम विभाग हवा की तीव्रता, आँधी या तूफान की संभावना, और विमानों व जहाज़ों के लिए मौसम की सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान करता है। हवा की गति मापना मौसम पूर्वानुमान, हवाई व समुद्री यात्रा, खेती (तेज़ हवा से फसलों को नुकसान), विंड टर्बाइन से बिजली उत्पादन, और निर्माण कार्यों (क्रेन व ऊँची इमारतों पर काम के लिए) जैसे कई क्षेत्रों में बहुत आवश्यक है। मोबाइल ऐप सीधे हवा की गति नहीं मापते, बल्कि वे मौसम विभाग या स्टेशनों के डेटा का उपयोग करते हैं, जब तक कि उनमें कोई विशेष सेंसर या बाहरी एनीमोमीटर न जुड़ा हो। संक्षेप में, एनीमोमीटर वह यंत्र है जो हवा की रफ्तार को मापता है। इसमें लगे कप या पंखे हवा से घूमते हैं, और जितनी तेज़ हवा होती है, वे उतनी ही तेज़ी से घूमते हैं। मशीन उनके घूमने की संख्या को गिनकर सटीक रूप से हवा की गति बताती है।
- कंचन खेड़ी में हाल ही में आंधी तूफान देखा गया है। इस घटना के चलते कंचन खेड़ी का मौसम बहुत गर्म और ठंडा बना रहा।1
- 29 जून 2026 को प्रस्तावित संभागीय सम्मेलन की तैयारियों के क्रम में, जिला अध्यक्ष, संभाग पदाधिकारी और जिला महासचिव ने आज नामली ब्लॉक इकाई की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस बैठक में सभी पत्रकारों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। पदाधिकारियों ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए, सभी उपस्थित लोगों से इस सम्मेलन को सफल बनाने की अपील की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पत्रकार और पदाधिकारी मौजूद रहे।1
- इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना की पाइपलाइन अचानक फट गई है। इस घटना के कारण पाइपलाइन से करीब 50 फीट ऊंचा पानी का फव्वारा फूट निकला, जिससे आसपास के घरों में भी पानी पहुंच गया है। मार्ग पर जलजमाव के चलते इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।1
- बड़ोद नगरवासियों ने हाल ही में रविवार को आसमान में एक अनोखा और आकर्षक प्राकृतिक दृश्य देखा। दोपहर के समय सूर्य के चारों ओर सतरंगी रंगों का एक गोलाकार घेरा दिखाई दिया, जिससे लोगों में काफी कौतूहल और उत्सुकता फैल गई। इस दुर्लभ और रंग-बिरंगे दृश्य को देखकर नगरवासी आश्चर्यचकित रह गए। कई लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों में इसकी तस्वीरें कैद कीं और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा किया। यह अद्भुत दृश्य कुछ समय तक स्पष्ट रूप से दिखाई देता रहा, जिसे देखने के लिए लोग अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। जानकारों ने इस प्राकृतिक घटना को सूर्य प्रभामंडल (Solar Halo) बताया है। उनके अनुसार, यह वायुमंडलीय घटना ऊंचाई पर मौजूद बर्फ के महीन क्रिस्टलों से सूर्य के प्रकाश के अपवर्तन और परावर्तन के कारण बनती है, जिसके परिणामस्वरूप सूर्य के चारों ओर इंद्रधनुषी रंगों का गोलाकार घेरा नज़र आता है। इस अद्भुत प्राकृतिक दृश्य को लेकर नगर में दिनभर चर्चा होती रही, और लोगों ने इसे प्रकृति का एक अनोखा उपहार बताया।2
- मध्य प्रदेश के सीतामऊ उपखंड के ग्राम बड़ी बेटीखेड़ी में राष्ट्रीय पक्षी मोर के शिकार का मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, एक युवक को मोर का शिकार करते हुए पाया गया, जिसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें मृत मोर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि आरोपी की पहचान छोटी बेटीखेड़ी निवासी करण पिता कैलाश के रूप में की गई है। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए और उन्होंने तुरंत इस युवक को पकड़ लिया। इसके बाद, ग्रामीणों ने पकड़े गए युवक के संबंध में पुलिस को सूचना दी।3
- मंदसौर जिले की पुलिस ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए सूचना के आधार पर घेराबंदी कर एक कार से 20k ब्राउन शुगर जब्त की है। जब्त की गई इस ब्राउन शुगर की बाजार में कीमत लगभग 40 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस कार्रवाई में पुलिस ने पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी मौके से फरार हो गया।4
- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री यादव ने पटवारी को निशाना बनाते हुए कहा है कि जीतू पटवारी 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' देख रहे हैं।1
- मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित आक्या चौपाटी पर 30/5/26 को दोपहर 12:03 बजे, मंदसौर से जावरा की ओर जाने वाली 'बेगम बस' के एक कंडक्टर और एक अन्य 'बेगम बस' के कंडक्टर के बीच मारपीट हुई। यह विवाद यात्रियों को बैठाने को लेकर पैदा हुआ, क्योंकि दोनों बसों के समय में कुछ आगे-पीछे का अंतर था। रिपोर्ट में प्रशासन और आरटीओ विभाग से इस मामले पर ध्यान देने का आग्रह किया गया है।1