कोटा में केडीए, वन विभाग और पुलिस प्रशासन की कथित ज्यादतियों के खिलाफ कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल के नेतृत्व में पशुपालकों और किसानों ने संभागीय कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। गुंजल ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि गरीबों की आत्मा सताना बंद करें, अन्यथा यह लड़ाई संभागीय आयुक्त कार्यालय की बजाय जंगलात की दीवारों से होगी। गुंजल ने वन अधिकार अधिनियम 2006 का हवाला देते हुए कहा कि यह कानून आदिवासी भील समुदाय को जंगल से वन उपज जैसे पेड़, तेंदू और सूखी लकड़ी लाकर आजीविका चलाने का अधिकार देता है, और पशुपालकों को जानवरों को जंगल में चराने से रोका नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि केडीए, वन विभाग और पुलिस प्रशासन खुले तौर पर इस कानून का उल्लंघन कर गरीबों पर जुल्म कर रहे हैं। गुंजल ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि अमरकुआं गांव में वन विभाग ने एक सात महीने की गर्भवती महिला को घर से घसीट कर बाहर निकाला, और जब ग्रामीण मुकदमा दर्ज कराने गए, तो पुलिस ने उनके साथ बर्बरता की। आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर ने इस लड़ाई को सिर्फ रोजी-रोटी का नहीं, बल्कि हक और जमीन का बताते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो कोटा की धरती पर महापड़ाव किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन में प्रमुख रूप से चार मांगें रखीं: वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत 75 वर्ष या तीन पीढ़ियों से रह रहे लोगों को बेदखल न किया जाए; बरड क्षेत्र में पिछले 50 वर्षों से और अन्य क्षेत्रों में लगभग 30 वर्षों से आवंटन नहीं हुआ है, इसलिए राज्य सरकार नियम बनाकर विपरीत कब्जे के प्रावधानों के तहत आवंटन कार्रवाई करे; लोगों को जबरदस्ती बेदखल न किया जाए; वन उपज और सूखी लकड़ी से आजीविका चला रहे आदिवासी भील समुदाय के साथ अन्याय न हो; और रानपुर थाने में हुई घटना की उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो तथा निर्दोषों की गिरफ्तारियों पर रोक लगाई जाए। इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच बेरिकेड्स पार करने को लेकर खींचतान भी हुई, जिससे थोड़ी देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसे बाद में पदाधिकारियों के हस्तक्षेप से शांत किया गया। संभागीय आयुक्त कार्यालय के बाहर डीजे पर लोकगीतों पर कार्यकर्ता करीब एक घंटे तक झूमते रहे, और लोग सूचना बोर्डों व पानी के टैंकरों पर चढ़ गए, जिन्हें पुलिसकर्मी बार-बार नीचे उतारते रहे। इस भीड़ के कारण कीर्ति स्तंभ से ट्रैफिक पुलिस की ओर आने वाले मार्ग पर थोड़ी देर के लिए जाम के हालात भी बने। कांग्रेस पदाधिकारियों ने बताया कि संभागीय आयुक्त ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए मांगों पर सात दिन में गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिलाया है और समाधान के लिए 15 दिन का समय मांगा है। यदि इस अवधि में समाधान नहीं हुआ, तो प्रहलाद गुंजल ने महापड़ाव की चेतावनी दी है। इस प्रदर्शन में कांग्रेस कोटा बूंदी जिला प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज, राजस्थान गुर्जर महासभा अध्यक्ष रामलाल गुंजल, हाड़ौती गुर्जर महासभा अध्यक्ष डॉ. बी एल गोचर, पूर्व प्रधान मन्नालाल गुर्जर, पूर्व विधायक घासीलाल मेघवाल सहित कई अन्य कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल थे।
कोटा में केडीए, वन विभाग और पुलिस प्रशासन की कथित ज्यादतियों के खिलाफ कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल के नेतृत्व में पशुपालकों और किसानों ने संभागीय कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। गुंजल ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि गरीबों की आत्मा सताना बंद करें, अन्यथा यह लड़ाई संभागीय आयुक्त कार्यालय की बजाय जंगलात की दीवारों से होगी। गुंजल ने वन अधिकार अधिनियम 2006 का हवाला देते हुए कहा कि यह कानून आदिवासी भील समुदाय को जंगल से वन उपज जैसे पेड़, तेंदू और सूखी लकड़ी लाकर आजीविका चलाने का अधिकार देता है, और पशुपालकों को जानवरों को जंगल में चराने से रोका नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि केडीए, वन विभाग और पुलिस प्रशासन खुले तौर पर इस कानून का उल्लंघन कर गरीबों पर जुल्म कर रहे
हैं। गुंजल ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि अमरकुआं गांव में वन विभाग ने एक सात महीने की गर्भवती महिला को घर से घसीट कर बाहर निकाला, और जब ग्रामीण मुकदमा दर्ज कराने गए, तो पुलिस ने उनके साथ बर्बरता की। आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर ने इस लड़ाई को सिर्फ रोजी-रोटी का नहीं, बल्कि हक और जमीन का बताते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो कोटा की धरती पर महापड़ाव किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन में प्रमुख रूप से चार मांगें रखीं: वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत 75 वर्ष या तीन पीढ़ियों से रह रहे लोगों को बेदखल न किया जाए; बरड क्षेत्र में पिछले 50 वर्षों से और अन्य क्षेत्रों में
लगभग 30 वर्षों से आवंटन नहीं हुआ है, इसलिए राज्य सरकार नियम बनाकर विपरीत कब्जे के प्रावधानों के तहत आवंटन कार्रवाई करे; लोगों को जबरदस्ती बेदखल न किया जाए; वन उपज और सूखी लकड़ी से आजीविका चला रहे आदिवासी भील समुदाय के साथ अन्याय न हो; और रानपुर थाने में हुई घटना की उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो तथा निर्दोषों की गिरफ्तारियों पर रोक लगाई जाए। इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच बेरिकेड्स पार करने को लेकर खींचतान भी हुई, जिससे थोड़ी देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसे बाद में पदाधिकारियों के हस्तक्षेप से शांत किया गया। संभागीय आयुक्त कार्यालय के बाहर डीजे पर लोकगीतों पर कार्यकर्ता करीब एक घंटे तक झूमते रहे, और लोग सूचना बोर्डों व पानी
के टैंकरों पर चढ़ गए, जिन्हें पुलिसकर्मी बार-बार नीचे उतारते रहे। इस भीड़ के कारण कीर्ति स्तंभ से ट्रैफिक पुलिस की ओर आने वाले मार्ग पर थोड़ी देर के लिए जाम के हालात भी बने। कांग्रेस पदाधिकारियों ने बताया कि संभागीय आयुक्त ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए मांगों पर सात दिन में गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिलाया है और समाधान के लिए 15 दिन का समय मांगा है। यदि इस अवधि में समाधान नहीं हुआ, तो प्रहलाद गुंजल ने महापड़ाव की चेतावनी दी है। इस प्रदर्शन में कांग्रेस कोटा बूंदी जिला प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज, राजस्थान गुर्जर महासभा अध्यक्ष रामलाल गुंजल, हाड़ौती गुर्जर महासभा अध्यक्ष डॉ. बी एल गोचर, पूर्व प्रधान मन्नालाल गुर्जर, पूर्व विधायक घासीलाल मेघवाल सहित कई अन्य कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल थे।
- Available for Sale Locality : Bara Road, Kota Area (dimensions) : 1000 Expected Price : 4000000 Property Type : Residential Plot kda and govt rera approved Geted Township2
- कोटा में महारानी बुरात से जुड़ी एक प्राचीन परंपरा के तहत दरबार का आयोजन किया गया है। यह दरबार फूल बिहारी मंदिर में संपन्न हो रहा है, जहाँ क्षेत्र के स्थानीय निवासी इस 200 वर्ष पुरानी रीति का पालन कर रहे हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।2
- कोटा में केडीए, वन विभाग और पुलिस प्रशासन की कथित ज्यादतियों के खिलाफ कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल के नेतृत्व में पशुपालकों और किसानों ने संभागीय कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। गुंजल ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि गरीबों की आत्मा सताना बंद करें, अन्यथा यह लड़ाई संभागीय आयुक्त कार्यालय की बजाय जंगलात की दीवारों से होगी। गुंजल ने वन अधिकार अधिनियम 2006 का हवाला देते हुए कहा कि यह कानून आदिवासी भील समुदाय को जंगल से वन उपज जैसे पेड़, तेंदू और सूखी लकड़ी लाकर आजीविका चलाने का अधिकार देता है, और पशुपालकों को जानवरों को जंगल में चराने से रोका नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि केडीए, वन विभाग और पुलिस प्रशासन खुले तौर पर इस कानून का उल्लंघन कर गरीबों पर जुल्म कर रहे हैं। गुंजल ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि अमरकुआं गांव में वन विभाग ने एक सात महीने की गर्भवती महिला को घर से घसीट कर बाहर निकाला, और जब ग्रामीण मुकदमा दर्ज कराने गए, तो पुलिस ने उनके साथ बर्बरता की। आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर ने इस लड़ाई को सिर्फ रोजी-रोटी का नहीं, बल्कि हक और जमीन का बताते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो कोटा की धरती पर महापड़ाव किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन में प्रमुख रूप से चार मांगें रखीं: वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत 75 वर्ष या तीन पीढ़ियों से रह रहे लोगों को बेदखल न किया जाए; बरड क्षेत्र में पिछले 50 वर्षों से और अन्य क्षेत्रों में लगभग 30 वर्षों से आवंटन नहीं हुआ है, इसलिए राज्य सरकार नियम बनाकर विपरीत कब्जे के प्रावधानों के तहत आवंटन कार्रवाई करे; लोगों को जबरदस्ती बेदखल न किया जाए; वन उपज और सूखी लकड़ी से आजीविका चला रहे आदिवासी भील समुदाय के साथ अन्याय न हो; और रानपुर थाने में हुई घटना की उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो तथा निर्दोषों की गिरफ्तारियों पर रोक लगाई जाए। इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच बेरिकेड्स पार करने को लेकर खींचतान भी हुई, जिससे थोड़ी देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसे बाद में पदाधिकारियों के हस्तक्षेप से शांत किया गया। संभागीय आयुक्त कार्यालय के बाहर डीजे पर लोकगीतों पर कार्यकर्ता करीब एक घंटे तक झूमते रहे, और लोग सूचना बोर्डों व पानी के टैंकरों पर चढ़ गए, जिन्हें पुलिसकर्मी बार-बार नीचे उतारते रहे। इस भीड़ के कारण कीर्ति स्तंभ से ट्रैफिक पुलिस की ओर आने वाले मार्ग पर थोड़ी देर के लिए जाम के हालात भी बने। कांग्रेस पदाधिकारियों ने बताया कि संभागीय आयुक्त ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए मांगों पर सात दिन में गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिलाया है और समाधान के लिए 15 दिन का समय मांगा है। यदि इस अवधि में समाधान नहीं हुआ, तो प्रहलाद गुंजल ने महापड़ाव की चेतावनी दी है। इस प्रदर्शन में कांग्रेस कोटा बूंदी जिला प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज, राजस्थान गुर्जर महासभा अध्यक्ष रामलाल गुंजल, हाड़ौती गुर्जर महासभा अध्यक्ष डॉ. बी एल गोचर, पूर्व प्रधान मन्नालाल गुर्जर, पूर्व विधायक घासीलाल मेघवाल सहित कई अन्य कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल थे।4
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अपने संसदीय क्षेत्र कोटा-बून्दी के प्रवास पर हैं। इसी क्रम में, उन्होंने शक्तिनगर स्थित अपने कैम्प कार्यालय पर जनसुनवाई की, जहाँ उन्होंने जनता की समस्याओं के समाधान हेतु अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। आज स्पीकर बिरला कोटा में विभिन्न कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे। इन कार्यक्रमों में सायं 7 बजे आरके पुरम स्थित दिशा डेल्फी स्कूल में आयोजित डिबेटेक्स कार्यक्रम प्रमुख है।1
- राजस्थान के सरहदी इलाके बाड़मेर में हाल ही में एक तरफा अतिक्रमण हटाओ अभियान के खिलाफ लोगों का भारी हुजूम सड़कों पर उमड़ पड़ा। स्थानीय लोगों ने 'सर्व धर्म समभाव' की भावना के तहत एकजुट होकर इस अभियान का विरोध किया, जिसे एक तरफा बताया जा रहा है। यह जनसैलाब अतिक्रमण हटाए जाने की एक तरफा कार्रवाई के विरोध में था।1
- निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर कोटा-बूंदी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़ ने बांके बिहारी मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन-पूजन किए। इस दौरान उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। राठौड़ ने विशेष रूप से अच्छी और समय पर वर्षा होने की प्रार्थना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समय पर वर्षा होने से किसानों, पशुपालकों और आमजन को लाभ मिलेगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। इसी मौके पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए ठंडाई वितरण का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस कार्यक्रम में मंदिर समिति के राजेंद्र खंडेलवाल और गिरधार बडेरा सहित कई अन्य गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।1
- कोटा kedl एसा ही लग रहा है अच्छा नास्ता करना का समय हो gaya🤩 हैं या तो जामीन के नीचे कुछ हैं या आसमान मै रील बनाने पर बवाल ऐसा होता हैं हारानी किसलिए हैं पता नहीं बस चाहिए तो एरिया देख लेना मै कोई बुरिए नहीं हैं कोटा राजस्थान अनोखा दृश्य बस अब निकल लो सडक पर जो कभी खतम नहीं होती धुप तेज हो गई है एसा ही लग रहा है अच्छा नास्ता करना का समय हो gaya🤩 हैं या तो जामीन के नीचे कुछ हैं या आसमान मै1
- लोकसभा स्पीकर और लोक सभा क्षेत्र के सांसद ओम बिरला ने आम जनता द्वारा उठाई गई समस्याओं पर तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने मौके पर ही मौजूद अधिकारियों को इन समस्याओं के समाधान हेतु आवश्यक आदेश जारी किए।1