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Gyan Dena acchi baat h lakin har baat per Gyan Dena acchi baat nhi hoti
Mohd Ali bijnori
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More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- Gyan Dena acchi baat h lakin har baat per Gyan Dena acchi baat nhi hoti1
- गाजियाबाद में पुलिस चौकी में धमाका, AC-शीशे उड़ेः एक युवक घायल; तहरीक उल मुजाहिदीन नाम के संगठन ने धमाके का दावा किया1
- बिजनौर: विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाला शातिर अभियुक्त गिरफ्तार, शेरकोट पुलिस की बड़ी कार्रवाई बिजनौर (उत्तर प्रदेश): रिपोर्टर। जनपद बिजनौर की थाना शेरकोट पुलिस ने विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर भोले-भाले युवाओं से ठगी करने वाले एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी के खिलाफ थाने में धोखाधड़ी, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने से संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज था। क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी ने पीड़ित को विदेश में अच्छी नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर झांसे में लिया और उससे लाखों रुपये की रकम ठग ली। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी पीड़ित को न तो विदेश भेजा गया और न ही नौकरी दिलाई गई, तब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी। रकम वापस मांगने पर आरोपी ने पीड़ित के साथ अभद्रता व मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित की तहरीर के आधार पर थाना शेरकोट में अभियुक्त के खिलाफ मु0अ0सं0 214/2026, धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 351(3) (आपराधिक धमकी), 352 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) व 317(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) का बयान (बाइट) मामले का खुलासा करते हुए अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी, जनपद बिजनौर ने बताया: "थाना शेरकोट क्षेत्र अंतर्गत विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर धोखाधड़ी करने के संबंध में मु0अ0सं0 214/2026 धारा 318(4)/115(2)/351(3)/352/317(2) बीएनएस पंजीकृत किया गया था। पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में वांछित चल रहे अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ के बाद अभियुक्त के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई कर उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। जनपद में इस तरह के फर्जीवाड़े और ठगी करने वाले तत्वों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।" विधिक कार्रवाई जारी शेरकोट पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अग्रिम विधिक कार्रवाई पूरी कर ली है। पुलिस अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने क्षेत्र के अन्य कितने युवाओं को अपने इस जाल में फंसाकर ठगी का शिकार बनाया है।1
- बिजनौर के चांदपुर में मेडिकल स्टोर में लगी आग। ➡️ शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका। ➡️ लाखों का सामान जलकर हुआ राख। ➡️ फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत से पाया काबू। ➡️ चांदपुर के डाली बाजार की घटना।1
- तेज रफ्तार ट्रक डिवाइडर से टकराया हादसे में चालक हुआ घायल ट्रक का अगला हिस्सा बुरी तरह से हुआ क्षतिग्रस्त बिजनौर-तेज रफ्तार ट्रक डिवाइडर से टकराया। हादसे में ट्रक चालक मामूली रूप से घायल हो गया है। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रक का अगला हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है।लोगों की सुविधा के लिए डिवाइडर बनाया गया था पर डिवाइडर से प्रतिदिन हादसे हो रहे हैं। दरअसल आपको बता दे बिजनौर जनपद के थाना धामपुर क्षेत्र के धामपुर कस्बे में रोड एक्सीडेंट से लोगों को बचाने के लिए सड़क पर डिवाइडर बनाया गया था पर 15 दिन में डिवाइडर की वजह से आधा दर्जन हादसे हो गए हैं। जिसमें 4 से 5 लोग घायल भी हुए हैं। आज ट्रक शेरकोट से धामपुर आ रहा था धामपुर में देव हॉस्पिटल के पास ट्रक की अचानक डिवाइडर से जोरदार टक्कर हो गई हादसे में ट्रक चालक मामूली रूप से घायल हो गया है टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रक का अगला हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लोगों की सुविधा के लिए सड़क पर डिवाइडर बनाया गया था पर डिवाइडर की वजह से प्रतिदिन हादसे हो रहे है। लोगों का मानना है कि इसमें कहीं ना कहीं सड़क निर्माण करने वाले कर्मचारियों की लापरवाही उजागर हो रही है डिवाइडर को शहर में आर पार बनवा कर ही रोकना चाहिए था पर डिवाइडर का निर्माण बीच में ही रोक दिया गया है जिसकी वजह से प्रतिदिन हादसे होते हुए नजर आ रहे हैं। थाना प्रभारी धामपुर का कहना है कि हादसे में मामूली रूप से घर घायल हुए तक चालक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और पुलिस घटना की जांच पड़ताल में जुटी हुई है2
- आज शाम से गंगनहर में जल प्रवाहित हो जाएगा। वार्षिक क्लोजर के दौरान विभिन्न विभागों ने गंगनहर में साफ-सफाई, घाटों, प्लेटफार्म के निर्माण व रखरखाव का दावा किया है लेकिन इन कामों पर आज हरकी पैड़ी के निकट स्थित कांगड़ा घाट पर लोगों ने प्रदर्शन कर सवाल उठाए हैं। नागरिकों ने कहा कि प्लेटफार्म निर्माण बहुत घटिया स्तर का है जिसकी टाइल्स अभी से उखड़ रही हैं।गंगा में साफ-सफाई का दावा किया गया है जबकि गंगनहर में अब भी कपड़ों और गंदगी के ढेर लगे हैं। नागरिकों ने कांगड़ा घाट में जंग लगे पुराने एंगल आयरन व पाईपों से ही रेलिंग बना दिए जाने के आरोप लगाते हुए इसे श्रद्धालुओं की जान से खिलवाड़ बताया है।1
- Taramp ka time over1
- 23 साल बाद जेनी का बड़ा खुलासा, हरक सिंह रावत पर रेप का आरोप, बोलीं- मेरे बेटे को पिता का नाम चाहिए उत्तराखंड की राजनीति में करीब 23 साल पुराने जेनी प्रकरण ने शनिवार को नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया। वर्ष 2003 में तत्कालीन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत पर यौन शोषण और अपने बच्चे का पिता होने का आरोप लगाने वाली जेनी ने शनिवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि उनका ऐसा शोषण हुआ, जैसा शायद किसी अन्य महिला के साथ नहीं हुआ होगा। उन्होंने दावा किया कि उन्हें मानसिक अस्पताल में रखा गया, जहां उनसे जबरन हस्ताक्षर कराए गए। उनके इस बयान से प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने के आसार हैं। जेनी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि जिस समय उन्हें मानसिक अस्पताल में रखा गया, उस दौरान उनकी मानसिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआइ के अधिकारी उनसे मिलने केवल एक बार अस्पताल आए थे। उस समय वह पूरी तरह मानसिक रूप से टूट चुकी थीं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उस समय उनकी परिस्थितियों और मानसिक स्थिति को समझने का प्रयास क्यों नहीं किया गया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत दस्तावेजों और संबंधित अस्पताल के अभिलेखों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ‘मेरा बेटा 23 साल से बिना पिता के रह रहा, उसे नाम चाहिए’ पत्रकार वार्ता में जेनी ने अपने 23 वर्षीय बेटे का जिक्र करते हुए कहा कि वह इतने वर्षों से पिता के नाम और पहचान के बिना जीवन बिता रहा है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को उसका नाम मिलना चाहिए। जेनी ने बेटे का डीएनए परीक्षण कराने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि इतने वर्षों से उनके बच्चे की पहचान को लेकर राजनीति होती रही, लेकिन किसी ने उसके भविष्य और अधिकारों की चिंता नहीं की। उन्होंने हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म का आरोप दोहराते हुए कहा कि उनके साथ हुए कथित शोषण के बाद उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से भी काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ी। उन्होंने जबरन हस्ताक्षर कराए जाने का आरोप लगाते हुए पुराने घटनाक्रम की परिस्थितियों पर सवाल उठाए। जेनी के इन नए बयानों पर अब हरक सिंह रावत का पक्ष और उनके दावों के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। दिसंबर 2002 में देहरादून पहुंची थीं जेनी, जून 2003 में दिया था बच्चे को जन्म जेनी प्रकरण की शुरुआत वर्ष 2002 के आखिर में हुई थी। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, असम की रहने वाली इंदिरा देवी उर्फ जेनी दिसंबर 2002 में देहरादून पहुंची थीं। उस समय उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी और डॉ. हरक सिंह रावत राजस्व मंत्री थे। जेनी ने आरोप लगाया था कि नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए और बाद में उन्हें सरकारी आवास में रखा गया। 15 जून 2003 को उन्होंने देहरादून के एक सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद उन्होंने हरक सिंह रावत को बच्चे का पिता बताते हुए यौन शोषण का आरोप लगाया। 18 जून 2003 को यह मामला विधानसभा में गूंजा। विपक्ष ने सदन में सरकार को घेरा और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। विवाद बढ़ने के बीच हरक सिंह रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया और कहा था कि जब तक वह बेदाग साबित नहीं होते, तब तक विधानसभा में प्रवेश नहीं करेंगे। सीबीआइ ने दर्ज किया था दुष्कर्म का मुकदमा, डीएनए रिपोर्ट से बदला घटनाक्रम मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने सीबीआइ जांच की संस्तुति की थी। सीबीआइ ने जांच के दौरान जेनी और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। 25 जुलाई 2003 को जेनी के बयान के आधार पर हरक सिंह रावत के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान बच्चे और हरक सिंह रावत के डीएनए नमूनों का परीक्षण कराया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों के नमूनों का मिलान नहीं हुआ। इसके बाद बच्चे का जैविक पिता होने के आरोप में हरक सिंह रावत को क्लीन चिट मिलने की जानकारी सार्वजनिक हुई। हरक सिंह रावत ने भी इस रिपोर्ट को अपनी बेगुनाही का आधार बताया था। हालांकि, डीएनए परीक्षण का निष्कर्ष बच्चे के जैविक पितृत्व से संबंधित था। इसे जेनी के प्रत्येक दूसरे आरोप का स्वतः खंडन नहीं माना जा सकता। पितृत्व और यौन शोषण के आरोप कानूनी रूप से अलग-अलग विषय हैं। पुराने मुकदमे के अंतिम निस्तारण और सीबीआइ की क्लोजर रिपोर्ट का मूल अभिलेख देखना इस प्रकरण की पूरी कानूनी स्थिति समझने के लिए आवश्यक है। संरक्षण गृह में 12 लाख रुपये देने की पेशकश का भी आया था मामला वर्ष 2003 में ही इस प्रकरण में एक और विवाद सामने आया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जेनी के संरक्षण गृह में रहने के दौरान एक कर्मचारी पर उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए 12 लाख रुपये देने की पेशकश करने का आरोप लगा था। आरोप था कि संरक्षण गृह की एक कर्मचारी 16 अगस्त को जेनी के पास रकम और एक बिना हस्ताक्षर वाला शपथपत्र लेकर पहुंची थी। तत्कालीन प्रशासनिक जांच में संरक्षण गृह की एक रसोइया सरोज पर आरोप सही पाए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद उसे स्थानांतरित करने और जांच रिपोर्ट सीबीआइ को भेजने का निर्णय हुआ था। हरक सिंह रावत ने उस समय इस तरह की रकम देने की पेशकश से खुद को अलग बताया था। 2016 में जेनी ने हरीश रावत पर लगाए थे उकसाने के आरोप करीब 13 साल बाद वर्ष 2016 में यह प्रकरण फिर सुर्खियों में आया। इस बार जेनी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें हरक सिंह रावत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए उकसाया गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री के निजी सचिव कमल सिंह रावत की शिकायत पर देहरादून में जेनी के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, झूठे साक्ष्य और रंगदारी से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन उनका मोबाइल बंद मिला और दिल्ली में बताया गया पता भी सही नहीं पाया गया। उस समय पुलिस को उनकी तलाश में सफलता नहीं मिली थी। इस घटनाक्रम ने पुराने प्रकरण को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया था। एक ओर हरक सिंह रावत पहले से लगे आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते रहे, वहीं दूसरी ओर जेनी ने भी तत्कालीन सरकार के कुछ लोगों पर आरोप लगाए। अक्टूबर-नवंबर 2026 में फिर शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी करीब एक दशक बाद अक्टूबर 2026 में जेनी प्रकरण फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में इस पुराने मामले का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट ने भी बच्चे के पिता की पहचान को लेकर सवाल उठाए। इस पर हरक सिंह रावत ने पलटवार करते हुए कहा कि उनका डीएनए परीक्षण पहले ही हो चुका है और जांच में वह निर्दोष साबित हुए हैं। उन्होंने महेंद्र भट्ट को भी डीएनए परीक्षण कराने की चुनौती दी। हरक सिंह रावत ने सार्वजनिक रूप से अपनी बेगुनाही दोहराते हुए कहा कि उन्होंने जेनी को कभी छुआ तक नहीं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं। लगातार राजनीतिक बयानबाजी के बीच जेनी के नाम से इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया। इसमें उन्होंने नेताओं से उनके नाम पर राजनीति बंद करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि इतने वर्षों में किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि वर्ष 2003 में उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था। उन्होंने अपने दस्तावेज और साक्ष्य सार्वजनिक करने की बात कही थी। इसके बाद सात नवंबर को उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर उन्होंने नए आरोप लगाए। मानसिक अस्पताल में रखे जाने, जबरन हस्ताक्षर कराने और सीबीआइ अधिकारियों के केवल एक बार मिलने आने के दावे के साथ उन्होंने अपने बेटे के लिए पिता का नाम और डीएनए परीक्षण की मांग दोहराई। अब इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी जेनी के नए आरोपों के बाद इस पूरे प्रकरण में कई सवाल फिर खड़े हो गए हैं। क्या उन्हें वास्तव में मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था? यदि हां, तो किस अवधि में और किन परिस्थितियों में? किन दस्तावेजों पर उनसे कथित तौर पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए? सीबीआइ अधिकारियों ने उनसे कब और किन परिस्थितियों में पूछताछ की थी? क्या इन घटनाओं से जुड़े अस्पताल, पुलिस या जांच एजेंसी के अभिलेख उपलब्ध हैं? इसके अलावा वर्ष 2003 की सीबीआइ जांच, डीएनए रिपोर्ट और मुकदमे के अंतिम निस्तारण से संबंधित मूल दस्तावेजों का परीक्षण भी जरूरी है। जेनी द्वारा अब बेटे का दोबारा डीएनए परीक्षण कराने की मांग उठाए जाने के बाद यह भी सवाल है कि क्या वह इसके लिए विधिक प्रक्रिया अपनाएंगी। फिलहाल 23 साल पुराना यह प्रकरण एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र में आ गया है। जेनी के नए आरोपों पर हरक सिंह रावत का जवाब, पुराने सीबीआइ रिकॉर्ड और अब सामने आने वाले नए साक्ष्य आगे की स्थिति स्पष्ट करेंगे। इतना तय है कि इस मामले में केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि पुराने दस्तावेजों और नए दावों की निष्पक्ष पड़ताल भी जरूरी होगी।1