पुण्यश्लोक ##लोकमाता_देवी_अहिल्याबाई_होलकर का जन्म महाराष्ट्र के चोंडी गांव में आज ही के दिन 31 मई सन् 1725 में हुआ था ....!! उनके पिता का नाम मानकोजी शिंदे था .." इनका विवाह इन्दौर राज्य के संस्थापक महाराज मल्हारराव होल्कर के पुत्र खंडेराव से हुआ था....!! मल्हारराव के जीवन काल में ही उनके पुत्र खंडेराव का निधन 1754 ई. में हो गया था....!! पति की मौत के बाद अहिल्या पूरी तरह से अपने ससुर के कामकाज में हाथ बंटाने लगी,|| होलकर राज्य विकास के रास्ते पर तेजी से बढ़ रहा था,|| कुछ समय बाद ससुर मल्हारराव भी चल बसे,|| अहिल्या के लिए यह एक और बड़ा झटका था, क्योंकि ससुर मल्हारराव की मृत्यु के बाद सारे राज्य की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी,|| इसके बाद अहिल्याबाई के पुत्र मालेराव ने शासन संभाला पर अपने राजतिलक के कुछ दिनों बाद ही मालेराव गंभीर रुप से बीमार हो गये और महज 22 साल की उम्र में चल बसें....और राज्य का दायित्व पूर्ण रूप से अहिल्याबाई के कंधों पर आ गया,|| अहिल्याबाई ने नये प्रदेश बढ़ाने की इच्छा नही की, बल्कि जो प्रदेश था उसी को संभालते हुए अपनी प्रजा को सुखी रखना उन्होने अपना लक्ष्य बना लिया,|| रानी अहिल्याबाई अपनी राजधानी महेश्वर ले गईं वहां उन्होंने 18वीं सदी का बेहतरीन और स्थापत्य कला का अदभुत प्रतीक अहिल्या महल बनवाया,|| इंदौर का राजवाड़ा भी उनके समय का ही है..!! पवित्र नर्मदा नदी के किनारे बनाए गए इस महल के ईर्द-गिर्द अहिल्याबाई की राजधानी बनी,|| उस दौरान महेश्वर साहित्य, मूर्तिकला, संगीत और कला के क्षेत्र में एक गढ़ बन चुका था,|| वहाँ तरह-तरह के कारीगर आने लगे ओर शीघ्र ही वस्त्र-निर्माण का वह एक सुंदर केंद्र बन गया..!! बाहुबली फ़िल्म में दिखाई गई माहिष्मति की संकल्पना प्राचीन नगरी अहिल्याबाई की राजधानी महेश्वर से ही ली गई है...मणिकर्णिका में भी "मैं रहूँ या ना रहूँ.. भारत ये रहना चाहिये इस गाने में दिखाये गये घाट महेश्वर के ही हैं"..!! उनका सारा जीवन वैराग्य, कर्त्तव्य-पालन और परमार्थ की साधना का बन गया,|| भगवान शकंर की वह बड़ी भक्त थी,|| बिना उनके पूजन के पानी तक ग्रहण नहीं करती थी..!! सारा राज्य उन्होने शिव चरणों में अर्पित कर रखा था और उनकी सेविका बनकर शासन चलाती थी....!! "संपति सब रघुपति के आहि"—सारी संपत्ति भगवान की है, इसका राजा भरत के बाद प्रत्यक्ष और एकमात्र उदाहरण शायद वही थीं....!! राजाज्ञाओं पर हस्ताक्षर करते समय अपना नाम नही लिखती थी,|| नीचे केवल "श्रीशंकर" लिख देती थी..!! उनके रूपयो, राज मुद्रा पर शिवलिंग और बिल्व पत्र का चित्र अंकित है ओर पैसो पर नंदी का....!! तब से लेकर भारतीय स्वराज्य की प्राप्ति तक इंदौर के सिंहासन पर जितने राजा आये सबकी राजाज्ञाएं जब तक श्रीशंकर की आज्ञा के बिना जारी नही होती, तब तक वह राजाज्ञा नही मानी जाती थी ओर उस पर अमल नही होता था..!! राज्य के भीतर महेश्वर और ओंकारेश्वर जैसे तीर्थ क्षेत्र और बाहर सम्पूर्ण भारत वर्ष में जितने भी प्रमुख हिंदू तीर्थ थे, प्राय: उन सभी स्थानों पर मंदिर, घाट, अन्न-छत्र, पूजन कीर्तन आदि कोई-न-कोई पारमार्थिक प्रवृत्ति उनकी ओर से की गई...!! काशी का मूल विश्वनाथ मंदिर बहुत छोटा था,|| 17 वीं शताब्दी में अहिल्याबाई होल्कर ने सन् 1777 में इसे सुंदर स्वरूप प्रदान किया,|| मुस्लिम आक्रमणकारियों के द्वारा तोड़े हुए मंदिरों को पुनः बनवाने का श्रेय हमारी लोकमाता अहिल्याबाई को ही जाता है...!! बनारस में माँ अन्नपूर्णा का मन्दिर , गया में विष्णु मन्दिर उनके बनवाये हुए हैं..!! काशी, प्रयाग, गया, जगन्नाथपुरी, द्वारका, रामेश्वर, बदरी-केदार, हरिद्वार, मतलब यह कि ऐसे हर तीर्थ मे उन्होने कोई-न-कोई पवित्र काम किया है..जो आज भी देखे जा सकते है..!! 13 अगस्त 1795 को लोकमाता अहिल्याबाई भौतिक शरीर को त्यागकर परम् आराध्या श्री शिव में विलीन हो गयी....देह की सीमाएँ है...पर माँ का अपनी प्रजा के प्रति वात्सल्य, आराध्य शिव के प्रति निष्ठा अमर है...!! लोकमाता पुण्यश्लोक #देवी_अहिल्याबाई_होलकर को आज उनकी जन्म जयंती पर सादर नमन वंदन पहुँचे....!! ये देश आपका ही है माँ..आपके आशीर्वाद की छाँव हम सभी पर बनी रहे....🙏🚩 अशोक पत्रकार शिवपुरी न्यूज़ पुण्यश्लोक ##लोकमाता_देवी_अहिल्याबाई_होलकर का जन्म महाराष्ट्र के चोंडी गांव में आज ही के दिन 31 मई सन् 1725 में हुआ था ....!! उनके पिता का नाम मानकोजी शिंदे था .." इनका विवाह इन्दौर राज्य के संस्थापक महाराज मल्हारराव होल्कर के पुत्र खंडेराव से हुआ था....!! मल्हारराव के जीवन काल में ही उनके पुत्र खंडेराव का निधन 1754 ई. में हो गया था....!! पति की मौत के बाद अहिल्या पूरी तरह से अपने ससुर के कामकाज में हाथ बंटाने लगी,|| होलकर राज्य विकास के रास्ते पर तेजी से बढ़ रहा था,|| कुछ समय बाद ससुर मल्हारराव भी चल बसे,|| अहिल्या के लिए यह एक और बड़ा झटका था, क्योंकि ससुर मल्हारराव की मृत्यु के बाद सारे राज्य की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी,|| इसके बाद अहिल्याबाई के पुत्र मालेराव ने शासन संभाला पर अपने राजतिलक के कुछ दिनों बाद ही मालेराव गंभीर रुप से बीमार हो गये और महज 22 साल की उम्र में चल बसें....और राज्य का दायित्व पूर्ण रूप से अहिल्याबाई के कंधों पर आ गया,|| अहिल्याबाई ने नये प्रदेश बढ़ाने की इच्छा नही की, बल्कि जो प्रदेश था उसी को संभालते हुए अपनी प्रजा को सुखी रखना उन्होने अपना लक्ष्य बना लिया,|| रानी अहिल्याबाई अपनी राजधानी महेश्वर ले गईं वहां उन्होंने 18वीं सदी का बेहतरीन और स्थापत्य कला का अदभुत प्रतीक अहिल्या महल बनवाया,|| इंदौर का राजवाड़ा भी उनके समय का ही है..!! पवित्र नर्मदा नदी के किनारे बनाए गए इस महल के ईर्द-गिर्द अहिल्याबाई की राजधानी बनी,|| उस दौरान महेश्वर साहित्य, मूर्तिकला, संगीत और कला के क्षेत्र में एक गढ़ बन चुका था,|| वहाँ तरह-तरह के कारीगर आने लगे ओर शीघ्र ही वस्त्र-निर्माण का वह एक सुंदर केंद्र बन गया..!! बाहुबली फ़िल्म में दिखाई गई माहिष्मति की संकल्पना प्राचीन नगरी अहिल्याबाई की राजधानी महेश्वर से ही ली गई है...मणिकर्णिका में भी "मैं रहूँ या ना रहूँ.. भारत ये रहना चाहिये इस गाने में दिखाये गये घाट महेश्वर के ही हैं"..!! उनका सारा जीवन वैराग्य, कर्त्तव्य-पालन और परमार्थ की साधना का बन गया,|| भगवान शकंर की वह बड़ी भक्त थी,|| बिना उनके पूजन के पानी तक ग्रहण नहीं करती थी..!! सारा राज्य उन्होने शिव चरणों में अर्पित कर रखा था और उनकी सेविका बनकर शासन चलाती थी....!! "संपति सब रघुपति के आहि"—सारी संपत्ति भगवान की है, इसका राजा भरत के बाद प्रत्यक्ष और एकमात्र उदाहरण शायद वही थीं....!! राजाज्ञाओं पर हस्ताक्षर करते समय अपना नाम नही लिखती थी,|| नीचे केवल "श्रीशंकर" लिख देती थी..!! उनके रूपयो, राज मुद्रा पर शिवलिंग और बिल्व पत्र का चित्र अंकित है ओर पैसो पर नंदी का....!! तब से लेकर भारतीय स्वराज्य की प्राप्ति तक इंदौर के सिंहासन पर जितने राजा आये सबकी राजाज्ञाएं जब तक श्रीशंकर की आज्ञा के बिना जारी नही होती, तब तक वह राजाज्ञा नही मानी जाती थी ओर उस पर अमल नही होता था..!! राज्य के भीतर महेश्वर और ओंकारेश्वर जैसे तीर्थ क्षेत्र और बाहर सम्पूर्ण भारत वर्ष में जितने भी प्रमुख हिंदू तीर्थ थे, प्राय: उन सभी स्थानों पर मंदिर, घाट, अन्न-छत्र, पूजन कीर्तन आदि कोई-न-कोई पारमार्थिक प्रवृत्ति उनकी ओर से की गई...!! काशी का मूल विश्वनाथ मंदिर बहुत छोटा था,|| 17 वीं शताब्दी में अहिल्याबाई होल्कर ने सन् 1777 में इसे सुंदर स्वरूप प्रदान किया,|| मुस्लिम आक्रमणकारियों के द्वारा तोड़े हुए मंदिरों को पुनः बनवाने का श्रेय हमारी लोकमाता अहिल्याबाई को ही जाता है...!! बनारस में माँ अन्नपूर्णा का मन्दिर , गया में विष्णु मन्दिर उनके बनवाये हुए हैं..!! काशी, प्रयाग, गया, जगन्नाथपुरी, द्वारका, रामेश्वर, बदरी-केदार, हरिद्वार, मतलब यह कि ऐसे हर तीर्थ मे उन्होने कोई-न-कोई पवित्र काम किया है..जो आज भी देखे जा सकते है..!! 13 अगस्त 1795 को लोकमाता अहिल्याबाई भौतिक शरीर को त्यागकर परम् आराध्या श्री शिव में विलीन हो गयी....देह की सीमाएँ है...पर माँ का अपनी प्रजा के प्रति वात्सल्य, आराध्य शिव के प्रति निष्ठा अमर है...!! लोकमाता पुण्यश्लोक #देवी_अहिल्याबाई_होलकर को आज उनकी जन्म जयंती पर सादर नमन वंदन पहुँचे....!! ये देश आपका ही है माँ..आपके आशीर्वाद की छाँव हम सभी पर बनी रहे....🙏🚩 अशोक पत्रकार शिवपुरी न्यूज़
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"संपति सब रघुपति के आहि"—सारी संपत्ति भगवान की है, इसका राजा भरत के बाद प्रत्यक्ष और एकमात्र उदाहरण शायद वही थीं....!! राजाज्ञाओं पर हस्ताक्षर करते समय अपना नाम नही लिखती थी,|| नीचे केवल "श्रीशंकर" लिख देती थी..!! उनके रूपयो, राज मुद्रा पर शिवलिंग और बिल्व पत्र का चित्र अंकित है ओर पैसो पर नंदी का....!! तब से लेकर भारतीय स्वराज्य की प्राप्ति तक इंदौर के सिंहासन पर जितने राजा आये सबकी राजाज्ञाएं जब तक श्रीशंकर की आज्ञा के बिना जारी नही होती, तब तक वह राजाज्ञा नही मानी जाती थी ओर उस पर अमल नही होता था..!! राज्य के भीतर महेश्वर और ओंकारेश्वर जैसे तीर्थ क्षेत्र और बाहर सम्पूर्ण भारत वर्ष में जितने भी प्रमुख हिंदू तीर्थ थे, प्राय: उन सभी स्थानों पर मंदिर, घाट, अन्न-छत्र, पूजन कीर्तन आदि कोई-न-कोई पारमार्थिक प्रवृत्ति उनकी ओर से की गई...!! काशी का मूल विश्वनाथ मंदिर बहुत छोटा था,|| 17 वीं शताब्दी में अहिल्याबाई होल्कर ने सन् 1777 में इसे सुंदर स्वरूप प्रदान किया,|| मुस्लिम आक्रमणकारियों के द्वारा तोड़े हुए मंदिरों को पुनः बनवाने का श्रेय हमारी लोकमाता अहिल्याबाई को ही जाता है...!! बनारस में माँ अन्नपूर्णा का मन्दिर , गया में विष्णु मन्दिर उनके बनवाये हुए हैं..!! काशी, प्रयाग, गया, जगन्नाथपुरी, द्वारका, रामेश्वर, बदरी-केदार, हरिद्वार, मतलब यह कि ऐसे हर तीर्थ मे उन्होने कोई-न-कोई पवित्र काम किया है..जो आज भी देखे जा सकते है..!! 13 अगस्त 1795 को लोकमाता अहिल्याबाई भौतिक शरीर को त्यागकर परम् आराध्या श्री शिव में विलीन हो गयी....देह की सीमाएँ है...पर माँ का अपनी प्रजा के प्रति वात्सल्य, आराध्य शिव के प्रति निष्ठा अमर है...!! लोकमाता पुण्यश्लोक #देवी_अहिल्याबाई_होलकर को आज उनकी जन्म जयंती पर सादर नमन वंदन पहुँचे....!! ये देश आपका ही है माँ..आपके आशीर्वाद की छाँव हम सभी पर बनी रहे....🙏🚩 अशोक पत्रकार शिवपुरी न्यूज़ पुण्यश्लोक ##लोकमाता_देवी_अहिल्याबाई_होलकर का जन्म महाराष्ट्र के चोंडी गांव में आज ही के दिन 31 मई सन् 1725 में हुआ था ....!! उनके पिता का नाम मानकोजी शिंदे था .." इनका विवाह इन्दौर राज्य के संस्थापक महाराज मल्हारराव होल्कर के पुत्र खंडेराव से हुआ था....!! मल्हारराव के जीवन काल में ही उनके पुत्र खंडेराव का निधन 1754 ई. में हो गया था....!! पति की मौत के बाद अहिल्या पूरी तरह से अपने ससुर के कामकाज में हाथ बंटाने लगी,|| होलकर राज्य विकास के रास्ते पर तेजी से बढ़ रहा था,|| कुछ समय बाद ससुर मल्हारराव भी चल बसे,|| अहिल्या के लिए यह एक और बड़ा झटका था, क्योंकि ससुर मल्हारराव की मृत्यु के बाद सारे राज्य की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी,|| इसके बाद अहिल्याबाई के पुत्र मालेराव ने शासन संभाला पर अपने राजतिलक के कुछ दिनों बाद ही मालेराव गंभीर रुप से बीमार हो गये और महज 22 साल की उम्र में चल बसें....और राज्य का दायित्व पूर्ण रूप से अहिल्याबाई के कंधों पर आ गया,|| अहिल्याबाई ने नये प्रदेश बढ़ाने की इच्छा नही की, बल्कि जो प्रदेश था उसी को संभालते हुए अपनी प्रजा को सुखी रखना उन्होने अपना लक्ष्य बना लिया,|| रानी अहिल्याबाई अपनी राजधानी महेश्वर ले गईं वहां उन्होंने 18वीं सदी का बेहतरीन और स्थापत्य कला का अदभुत प्रतीक अहिल्या महल बनवाया,|| इंदौर का राजवाड़ा भी उनके समय का ही है..!! पवित्र नर्मदा नदी के किनारे बनाए गए इस महल के ईर्द-गिर्द अहिल्याबाई की राजधानी बनी,|| उस दौरान महेश्वर साहित्य, मूर्तिकला, संगीत और कला के क्षेत्र में एक गढ़ बन चुका था,|| वहाँ तरह-तरह के कारीगर आने लगे ओर शीघ्र ही वस्त्र-निर्माण का वह एक सुंदर केंद्र बन गया..!! बाहुबली फ़िल्म में दिखाई गई माहिष्मति की संकल्पना प्राचीन नगरी अहिल्याबाई की राजधानी महेश्वर से ही ली गई है...मणिकर्णिका में भी "मैं रहूँ या ना रहूँ.. भारत ये रहना चाहिये इस गाने में दिखाये गये घाट महेश्वर के ही हैं"..!! उनका सारा जीवन वैराग्य, कर्त्तव्य-पालन और परमार्थ की साधना का बन गया,|| भगवान शकंर की वह बड़ी भक्त थी,|| बिना उनके पूजन के पानी तक ग्रहण नहीं करती थी..!! सारा राज्य उन्होने शिव चरणों में अर्पित कर रखा था और उनकी सेविका बनकर शासन चलाती थी....!! "संपति सब रघुपति के आहि"—सारी संपत्ति भगवान की है, इसका राजा भरत के बाद प्रत्यक्ष और एकमात्र उदाहरण शायद वही थीं....!! राजाज्ञाओं पर हस्ताक्षर करते समय अपना नाम नही लिखती थी,|| नीचे केवल "श्रीशंकर" लिख देती थी..!! उनके रूपयो, राज मुद्रा पर शिवलिंग और बिल्व पत्र का चित्र अंकित है ओर पैसो पर नंदी का....!! तब से लेकर भारतीय स्वराज्य की प्राप्ति तक इंदौर के सिंहासन पर जितने राजा आये सबकी राजाज्ञाएं जब तक श्रीशंकर की आज्ञा के बिना जारी नही होती, तब तक वह राजाज्ञा नही मानी जाती थी ओर उस पर अमल नही होता था..!! राज्य के भीतर महेश्वर और ओंकारेश्वर जैसे तीर्थ क्षेत्र और बाहर सम्पूर्ण भारत वर्ष में जितने भी प्रमुख हिंदू तीर्थ थे, प्राय: उन सभी स्थानों पर मंदिर, घाट, अन्न-छत्र, पूजन कीर्तन आदि कोई-न-कोई पारमार्थिक प्रवृत्ति उनकी ओर से की गई...!! काशी का मूल विश्वनाथ मंदिर बहुत छोटा था,|| 17 वीं शताब्दी में अहिल्याबाई होल्कर ने सन् 1777 में इसे सुंदर स्वरूप प्रदान किया,|| मुस्लिम आक्रमणकारियों के द्वारा तोड़े हुए मंदिरों को पुनः बनवाने का श्रेय हमारी लोकमाता अहिल्याबाई को ही जाता है...!! बनारस में माँ अन्नपूर्णा का मन्दिर , गया में विष्णु मन्दिर उनके बनवाये हुए हैं..!! काशी, प्रयाग, गया, जगन्नाथपुरी, द्वारका, रामेश्वर, बदरी-केदार, हरिद्वार, मतलब यह कि ऐसे हर तीर्थ मे उन्होने कोई-न-कोई पवित्र काम किया है..जो आज भी देखे जा सकते है..!! 13 अगस्त 1795 को लोकमाता अहिल्याबाई भौतिक शरीर को त्यागकर परम् आराध्या श्री शिव में विलीन हो गयी....देह की सीमाएँ है...पर माँ का अपनी प्रजा के प्रति वात्सल्य, आराध्य शिव के प्रति निष्ठा अमर है...!! लोकमाता पुण्यश्लोक #देवी_अहिल्याबाई_होलकर को आज उनकी जन्म जयंती पर सादर नमन वंदन पहुँचे....!! ये देश आपका ही है माँ..आपके आशीर्वाद की छाँव हम सभी पर बनी रहे....🙏🚩 अशोक पत्रकार शिवपुरी न्यूज़
- शिवपुरी जिले की करैरा तहसील के लालपुर गाँव में एक किसान के गेहूं के भूसे में आग लगने की घटना सामने आई है। इस आग के कारण किसान को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।1
- जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज ने सभी अनुयायियों और भक्तों से नाम दान लेकर सद्भक्ति करने का आह्वान किया है।1
- नरवर नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक छोटा तालाब को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। वन विभाग द्वारा झील संवर्धन योजना के तहत विकसित किए गए इस तालाब के मुख्य मार्ग पर गेट और बाउंड्री वॉल बनाने की तैयारी से नगरवासियों में भारी नाराजगी है। नागरिकों ने इसे वन विभाग की मनमानी बताया है और राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि पर अतिक्रमण करने की कोशिश करार दिया है। इसी कड़ी में, गुरुवार को बड़ी संख्या में नागरिकों ने अनुविभागीय अधिकारी करैरा को आवेदन सौंपा, जिसमें वन विभाग को रास्ता अवरुद्ध करने से तत्काल रोकने की मांग की गई। लोगों का कहना है कि छोटा तालाब नगर का प्रमुख सार्वजनिक स्थल है, जिसका उपयोग प्रतिदिन सैकड़ों लोग घूमने, बैठने और विभिन्न धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों के लिए करते हैं। यदि प्रवेश द्वार पर गेट और चारों ओर बाउंड्री बन जाती है, तो आम जनता का स्वतंत्र आवागमन बुरी तरह प्रभावित होगा। नागरिकों में विशेष रोष तालाब के रास्ते के साथ-साथ कब्रिस्तान के रास्ते पर भी बाउंड्री बनाने की तैयारी को लेकर है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 में शासन की झील संवर्धन योजना के तहत छोटा तालाब के विकास को स्वीकृति मिली थी, जिसके बाद नगर परिषद ने यहाँ लगभग 50 लाख रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण, पेवर ब्लॉक और प्रकाश व्यवस्था जैसे कार्य करवाए थे। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पूरा क्षेत्र राजस्व विभाग की भूमि पर स्थित है और इसका संचालन-संधारण नगर परिषद द्वारा ही किया जा रहा है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में एसडीएम के आदेश पर वन एवं राजस्व विभाग का संयुक्त सीमांकन किया गया था, जिसमें तालाब तक जाने वाला मार्ग राजस्व भूमि में पाया गया था।1
- गुना जिले में जारी भीषण बिजली संकट को लेकर विधायक पन्नालाल शाक्य ने प्रदेश सरकार और उसके ऊर्जा मंत्री व प्रभारी मंत्री पर तीखा निशाना साधा है। शाक्य ने आरोप लगाया कि जनता लगातार बिजली कटौती से परेशान है, बावजूद इसके जिम्मेदार मंत्री समस्याओं का समाधान करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। विधायक शाक्य ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे "नकारा मंत्रियों" को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और सरकार को उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने प्रभारी मंत्री पर भी गुना जिले की समस्याओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। विधायक के अनुसार, इस लगातार बिजली कटौती के कारण किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी के चलते उन्होंने सरकार से बिजली व्यवस्था में तुरंत सुधार करने और आम जनता को राहत प्रदान करने की मांग की। यह बयान ऐसे समय में आया है जब गुना जिले के कई क्षेत्रों से बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।1
- शिवपुरी जिले के करैरा थाना पुलिस ने अवैध हथियारों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक व्यक्ति को देशी कट्टे और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। आरोपी को किसी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की नीयत से संदिग्ध अवस्था में खड़ा पाया गया था। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक शिवपुरी श्रीमती यांगचेन डोलकर भुटिया के निर्देशों पर जिलेभर में अवैध हथियार रखने वालों और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ जारी अभियान का हिस्सा है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री संजीव मुले और एसडीओपी करैरा डॉ. आयुष जाखड़ के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक विनोद सिंह छावई के नेतृत्व में पुलिस टीम इस अभियान को सक्रिय रूप से चला रही है। पुलिस को शुक्रवार को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक युवक नई गल्ला मंडी के पीछे संभूदयाल कॉलोनी के पास 315 बोर का अवैध कट्टा लेकर खड़ा है और किसी आपराधिक घटना को अंजाम देने की फिराक में है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची, जहाँ संदिग्ध युवक ने पुलिस को देखकर भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम संजय जाटव (29 वर्ष) पुत्र मायाराम जाटव, निवासी न्यू कॉलोनी, करैरा बताया। तलाशी लेने पर उसकी कमर से एक अवैध 315 बोर का देशी कट्टा और पैंट की जेब से एक जिंदा कारतूस बरामद किया गया। आरोपी इस हथियार और कारतूस के संबंध में कोई वैध लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से कट्टा और कारतूस जब्त कर उसके विरुद्ध अपराध क्रमांक 357/26 के तहत धारा 25/27 आर्म्स एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी संजय जाटव के खिलाफ करैरा थाने में पहले से भी मारपीट, धमकी और आर्म्स एक्ट से संबंधित कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसके आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए पुलिस उससे अन्य मामलों के संबंध में भी पूछताछ कर रही है। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक विनोद सिंह छावई, उप निरीक्षक शैलेन्द्र सिंह चौहान, प्रधान आरक्षक राजेन्द्र यादव, आरक्षक राघवेन्द्र पाल सहित थाना करैरा की पुलिस टीम ने सराहनीय भूमिका निभाई है, जिसकी पुलिस अधिकारियों ने प्रशंसा भी की है।2
- क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से लगातार आंधी और बारिश का दौर जारी है, जिसके कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रविवार सुबह 11 बजे मिली जानकारी के अनुसार, तेज हवाओं के चलते कई मकानों के टीनशेड उड़ गए हैं, वहीं अनेक पेड़ भी धराशायी हो गए। खिरिया, चन्दनहेड़ा और खिरिया कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में तो विद्युत पोल गिरने से पिछले तीन दिनों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है। बिजली न होने से ग्रामीणों को पेयजल सहित अन्य आवश्यक दैनिक कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, आंधी के साथ हुई बारिश से तापमान में काफी गिरावट आई है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है। बिगड़े हालात को देखते हुए, क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की है।1
- संत रामपाल जी के नाम लेकर सत्य भक्ति करने का संदेश दिया गया है। इस भक्ति को शास्त्रों से प्रमाणित बताया जा रहा है, और लोगों से इसी मार्ग पर चलने का आग्रह किया गया है।1
- शिवपुरी जिले के मगरौनी चौकी क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक महिला की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। जानकारी के अनुसार, दो पक्षों के बीच पुराने विवाद को लेकर जमकर मारपीट हुई। इस दौरान, महिला बीच-बचाव करने पहुँची थी और इसी दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे इलाज के लिए ले जाया जा रहा था, लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।1
- विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर, 31 मई को ग्राम कुजाय में विकास संवाद समिति के सहयोग से एक जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में महिला समूहों, किशोर-किशोरियों, ग्रामीणों, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। समिति के कार्यकर्ताओं ने उपस्थित लोगों को तंबाकू के सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियों और इसके सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। बैठक का मुख्य उद्देश्य युवाओं को तंबाकू की लत से दूर रहने के लिए प्रेरित करना था, जिसके तहत तंबाकू छोड़ने के विभिन्न उपायों पर भी गहन चर्चा की गई। कार्यक्रम के अंत में, सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से अपने गांव को तंबाकू मुक्त बनाने और इस पहल के बारे में दूसरों को भी जागरूक करने का संकल्प लिया।1