कलम का क्रांतिकारी और आज की राजनीति पर सवाल: माखनलाल चतुर्वेदी जयंती पर विशेष भारत की स्वतंत्रता केवल विदेशी शासन से मुक्ति का संघर्ष नहीं था, बल्कि वह एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करने का सपना भी था, जहां ईमानदारी, नैतिकता और जनसेवा सर्वोपरि हों। इस स्वप्न को शब्दों में ढालने वाले महान साहित्यकार और स्वतंत्रता सेनानी थे—माखनलाल चतुर्वेदी। उनकी जयंती आज केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीति और समाज का आईना देखने का भी दिन है। माखनलाल चतुर्वेदी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जिस राजनीति को देखा और जिया, वह त्याग, बलिदान और सिद्धांतों पर आधारित थी। उस समय राजनीति सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का संकल्प थी। नेताओं के लिए पद नहीं, बल्कि उद्देश्य महत्वपूर्ण था। जेल जाना, संघर्ष करना और व्यक्तिगत सुखों का त्याग करना—यही उस दौर की राजनीति की पहचान थी। चतुर्वेदी जी ने पत्रकारिता को सत्ता के खिलाफ एक मजबूत आवाज बनाया था। आज, कई बार मीडिया और राजनीति के रिश्तों पर भी सवाल उठते हैं। जहां पत्रकारिता का एक हिस्सा सत्ता के करीब दिखाई देता है, वहीं सच्चाई बोलने वाले पत्रकारों को दबाव और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति उस आदर्श के विपरीत है, जिसे माखनलाल चतुर्वेदी ने स्थापित किया था—जहां कलम केवल सच के लिए चलती थी, किसी दबाव या स्वार्थ के लिए नहीं। ‘पुष्प की अभिलाषा’ बनाम आज का स्वार्थ माखनलाल चतुर्वेदी की अमर रचना ‘पुष्प की अभिलाषा’ त्याग और समर्पण की चरम अभिव्यक्ति है। "मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक..." यह पंक्ति आज की राजनीति से सवाल करती है— क्या आज का नेतृत्व भी उसी त्याग और समर्पण की भावना से काम कर रहा है? या फिर व्यक्तिगत लाभ और सत्ता की लालसा ने उस भावना को पीछे छोड़ दिया है? युवा और लोकतंत्र की जिम्मेदारी आज की राजनीति को बदलने की सबसे बड़ी ताकत युवाओं के पास है। यदि युवा जागरूक होंगे, सवाल पूछेंगे और सही नेतृत्व का चयन करेंगे, तो राजनीति भी दिशा बदलेगी। माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है—कि बदलाव केवल आलोचना से नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदारी से आता है। एक सजीव चेतावनी माखनलाल चतुर्वेदी की लेखनी आज भी जैसे हमें चेतावनी देती है— “यदि राजनीति से नैतिकता खत्म हो जाएगी, तो लोकतंत्र केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।” माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती केवल माल्यार्पण और भाषण तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह दिन हमें खुद से यह पूछने का अवसर देता है— क्या हम ईमानदार राजनीति का समर्थन कर रहे हैं? क्या हम भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं? क्या हम अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का सही उपयोग कर रहे हैं? आज जरूरत है कि हम राजनीति को फिर से सेवा, त्याग और नैतिकता की दिशा में ले जाएं—यही माखनलाल चतुर्वेदी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कलम का क्रांतिकारी और आज की राजनीति पर सवाल: माखनलाल चतुर्वेदी जयंती पर विशेष भारत की स्वतंत्रता केवल विदेशी शासन से मुक्ति का संघर्ष नहीं था, बल्कि वह एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करने का सपना भी था, जहां ईमानदारी, नैतिकता और जनसेवा सर्वोपरि हों। इस स्वप्न को शब्दों में ढालने वाले महान साहित्यकार और स्वतंत्रता सेनानी थे—माखनलाल चतुर्वेदी। उनकी जयंती आज केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीति और समाज का आईना देखने का भी दिन है। माखनलाल चतुर्वेदी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जिस राजनीति को देखा और जिया, वह त्याग, बलिदान और सिद्धांतों पर आधारित थी। उस समय राजनीति सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का संकल्प थी। नेताओं के लिए पद नहीं, बल्कि उद्देश्य महत्वपूर्ण था। जेल जाना, संघर्ष करना और व्यक्तिगत सुखों का त्याग करना—यही उस दौर की राजनीति की पहचान थी। चतुर्वेदी जी ने पत्रकारिता को सत्ता के खिलाफ एक मजबूत आवाज बनाया था। आज, कई बार मीडिया और राजनीति के रिश्तों पर भी सवाल उठते हैं। जहां पत्रकारिता का एक हिस्सा सत्ता के करीब दिखाई देता है, वहीं सच्चाई बोलने वाले पत्रकारों को दबाव और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति उस आदर्श के विपरीत है, जिसे माखनलाल चतुर्वेदी ने स्थापित किया था—जहां कलम केवल सच के लिए चलती थी, किसी दबाव या स्वार्थ के लिए नहीं। ‘पुष्प की अभिलाषा’ बनाम आज का स्वार्थ माखनलाल चतुर्वेदी की अमर रचना ‘पुष्प की अभिलाषा’ त्याग और समर्पण की चरम अभिव्यक्ति है। "मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक..." यह पंक्ति आज की राजनीति से सवाल करती है— क्या आज का नेतृत्व भी उसी त्याग और समर्पण की भावना से काम कर रहा है? या फिर व्यक्तिगत लाभ और सत्ता की लालसा ने उस भावना को पीछे छोड़ दिया है? युवा और लोकतंत्र की जिम्मेदारी आज की राजनीति को बदलने की सबसे बड़ी ताकत युवाओं के पास है। यदि युवा जागरूक होंगे, सवाल पूछेंगे और सही नेतृत्व का चयन करेंगे, तो राजनीति भी दिशा बदलेगी। माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है—कि बदलाव केवल आलोचना से नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदारी से आता है। एक सजीव चेतावनी माखनलाल चतुर्वेदी की लेखनी आज भी जैसे हमें चेतावनी देती है— “यदि राजनीति से नैतिकता खत्म हो जाएगी, तो लोकतंत्र केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।” माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती केवल माल्यार्पण और भाषण तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह दिन हमें खुद से यह पूछने का अवसर देता है— क्या हम ईमानदार राजनीति का समर्थन कर रहे हैं? क्या हम भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं? क्या हम अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का सही उपयोग कर रहे हैं? आज जरूरत है कि हम राजनीति को फिर से सेवा, त्याग और नैतिकता की दिशा में ले जाएं—यही माखनलाल चतुर्वेदी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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- श्याम गांव के हालात सरपंच सचिव की लापरवाही1
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- सिवनी मालवा में देर रात पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, किसानों और लोकतंत्र के मुद्दे पर BJP पर साधा निशाना कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता देवेंद्र हुड्डा शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात करीब 12 बजे सिवनी मालवा स्थित अजय पटेल के निवास पहुंचे। यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर किसानों के साथ धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि कैबिनेट और अलग कृषि बजट का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ। साथ ही वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा घोषित “कृषि कल्याण वर्ष” पर भी सवाल उठाए। पटवारी ने कहा कि किसानों के गेहूं खरीदी को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीदी की तारीख जानबूझकर आगे बढ़ाई जा रही है ताकि किसान मजबूरी में व्यापारियों को गेहूं बेच दें। समिति की तिथि 28 मार्च और खरीदी की तिथि 10 अप्रैल रखने को उन्होंने “किसानों के साथ धोखा और एक तरह का घोटाला” बताया। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी ने किसानों के समर्थन में 9 अप्रैल को प्रदेश के हर जिले में कलेक्टर कार्यालय का घेराव करने का निर्णय लिया है। यह आंदोलन राहुल गांधी के नेतृत्व में किया जाएगा। वहीं, देर रात करीब 11:30 बजे विधानसभा खोलने के मुद्दे पर भी उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे “क्राइम” करार देते हुए कहा कि भाजपा देश में लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव आयोग का दुरुपयोग, विधायकों की खरीद-फरोख्त, सरकार गिराने और वोटर लिस्ट में हेरफेर जैसे कदम उठाए गए हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी और लोकतंत्र तथा किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।1
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- सोहागपुर पुलिस की कार्रवाई: वारंटियों को गिरफ्तार कर भेजा गया जेल सोहागपुर पुलिस द्वारा लंबित वारंटियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए वारंटियों में सुनील पिता भाई जी विश्वकर्मा उम्र 26 वर्ष निवासी बोरना, सुखलाल पिता हर प्रसाद कहार निवासी ग्राम जमुनिया उमेश पिता काशीराम ठाकुर उम्र 45 वर्ष निवासी रेनी पानी, मिथुन पिता दिनकर मराठा उम्र 24 वर्ष निवासी ग्राम जमुनिया, मुईन पिता मुबीन खान उम्र 28 वर्ष निवासी मुसलमानी मोहल्ला, सेमरी हरचंद शामिल है। सभी वारंटियों को गिरफ्तार कर शनिवार शाम 4 बजे के लगभग न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय के आदेश के पश्चात सभी को उपजेल पिपरिया भेज दिया गया। पुलिस द्वारा इस प्रकार की कार्रवाई लगातार जारी है, जिससे क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिल रही है।1
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