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Satish Vishwakarma
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"1
- सतीष विश्वकर्मा करेली करेली में एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना का शिकार होकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। सूचना मिलते ही करेली थाने में पदस्थ आरक्षक सचिन लोधी ने बिना समय गंवाए सक्रियता दिखाई। उन्होंने तुरंत 'डायल 100' सेवा की मदद ली और घायल व्यक्ति को सुरक्षित वाहन में बैठाकर तत्काल उपचार के लिए शासकीय अस्पताल पहुँचाया।1
- Post by कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली1
- Post by Shrikant Dubay पत्रकार1
- आओ करें खुशियों से दोस्ती राजयोग शिविर का शुभारंभ गोटेगांव में मुख्य अतिथि नगर पालिका उपाध्यक्ष श्रीमती श्रद्धा चौकसे समाज सेविका निशा बरडिया इंजीनियर राहुल साहू ब्रह्माकुमारी मीना बहन जी एवं जबलपुर से पधारी पूजा दीदी द्वारा कार्यक्रम का दीप जलाकर शुभारंभ किया आदरणीय पूजा दीदी ने बताया आज चारों तरफ दुख अशांति परेशानियां बढ़ती जा रही है हर कोई हर किसी से परेशान है कोई बच्चों से परेशान तो कोई धन से परेशान तो कोई शरीर से परेशान नौकरी से परेशान हर कोई हर किसी से परेशान है देखा जाए खुशी गम हो चुकी है चारों तरफ टेंशन तनाव का बोलबाला उन्होंने बताया डिप्रेशन क्या है डिप्रेशन का मतलब है मन का थक जाना जब कोई बात या परिस्थिति हमें गहराई से परेशान करती है हम उसे बार-बार नकारात्मक तरीके से सोचते तो वह सोच धीरे-धीरे हमें मन पर हावी हो जाती है डर और चिंता हमारे मन में बैठ जाती है जिससे हम खुद पर दबाव महसूस करने लगते हैं ऐसे में मन अशांत हो जाता है लगातार सोचने से थकान कमजोरी और मानसिक ऊर्जा की कमी हो जाती है छोटी-छोटी बातों में उलझने से घबराहट बेचैनी और अकेलापन महसूस होने लगता है ध्यान भटकने लगता है और व्यवहार भी बदलने लगता है डिप्रेशन शारीरिक बीमारी नहीं बल्कि मानसिक स्थिति है यह समझना बेहतर जरूरी है कि डिप्रेशन कोई शारीरिक बीमारी नही एक मानसिक स्थिति है जो हमारी सोच और भावनाओं से जुड़ी होती है जरूरी नहीं है कि इसका इलाज दवाइयां से ही हो बल्कि इसे सोचने के तरीके से और जीवन के प्रति दृष्टिकोण बदलने से ठीक किया जा सकता है हम अपनी समस्याओं को समझना और उसके समाधान की दिशा में कदम बढ़ाते हैं तो हमारा मन खुद व खुद शांत होने लगता है इसके लिए हमें अपने मन को पॉजिटिव बनाना होगा हर किसी के प्रति शुभ सोचा होगा अच्छी सोच ही हमारे जीवन को बदल सकती है जीवन में खुशियां कहीं नहीं है खुशियां हमारे अंदर ही है हमें सिर्फ देना सीखना है खुशी देना सम्मान देना प्यार देना मीठे बोल बोलना जब हम किसी को अपने गुणो का दान करते हैं तो हमें खुद ब खुद खुशी प्राप्त होती है उन्होंने बताया मेडिटेशन के बारे में नियमित ध्यान से मन शांत होता है और अंदर से ऊर्जा मिलती है इसके लिए सात दिवसीय मेडिटेशन कोर्स सीखें ब्रह्माकुमारी संस्था में आत्मज्ञान और राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से डिप्रेशन का प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया जाता है ।1
- डॉ. मोना कौरव ने गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र में NTPC राखड़ डंपरों की लापरवाही से हो रही लगातार दुर्घटनाओं को लेकर मृत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, महिला नेतृत्व, युवा कार्यकर्ता एवं मीडिया साथी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस हमेशा सड़क पर उतरकर संघर्ष करने के लिए तैयार है।2
- रेलवे हॉस्पिटल नरसिंहपुर में 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित नरसिंहपुर: भारत सरकार के 'टीबी मुक्त भारत' के संकल्प को साकार करने की दिशा में, आज 29 अप्रैल 2026 को रेलवे हॉस्पिटल नरसिंहपुर में एक विशेष जागरूकता एवं स्क्रीनिंग स्वास्थ्य कैंप का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान रेलवे चिकित्सक डॉ. आर. आर. कुर्रे ने टीबी (तपेदिक) के लक्षण, बचाव, जांच और उसके संपूर्ण इलाज के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. कुर्रे ने जोर देकर कहा कि टीबी एक लाइलाज बीमारी नहीं है, बशर्ते इसका सही समय पर पता चल जाए और इलाज पूरा किया जाए। उन्होंने आगाह किया कि यदि टीबी का सही समय पर उपचार नहीं कराया जाता है, तो यह 'एमडीआर' (MDR-TB) में परिवर्तित हो सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए अधिक घातक है। डॉ. कुर्रे ने उन समूहों के प्रति विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जिन्हें टीबी होने का उच्च जोखिम रहता है। उन्होंने बताया कि कुपोषण से पीड़ित व्यक्ति, एड्स मरीज, कैंसर पीड़ित, धूम्रपान करने वाले और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले व्यक्तियों को टीबी संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि अपने आसपास मौजूद ऐसे उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की विशेष देखभाल अवश्य करें। "टीबी को छिपाएं नहीं, उसे हराएं" जागरूकता शिविर में डॉ. कुर्रे ने एक प्रेरणादायक संदेश देते हुए कहा, "टीबी को क्यों है छुपाना, अगर जीवन को बचाना है।" उन्होंने आमजन से अपील की कि बीमारी को छिपाने के बजाय उसकी शीघ्र पहचान कराएं, पौष्टिक आहार लें और डॉक्टर की सलाह पर कोर्स पूरा करें। जन-भागीदारी बढ़ाना है ताकि 'टीबी मुक्त भारत' के लक्ष्य को समय रहते प्राप्त किया जा सके। कार्यक्रम के माध्यम से सभी को "जन-जन का रखें ध्यान, टीबी मुक्त हो भारत अभियान" के मंत्र को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।1
- Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"1
- Post by कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली1