भरत तिवारी के एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीधे सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। 12 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे भरत तिवारी के परिवार को अदालत ने पटना हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है। कोर्ट का मानना है कि हाईकोर्ट इस मामले की बेहतर निगरानी कर सकता है। इस बीच, बिहार सरकार द्वारा इस मामले की न्यायिक जांच करवाई जा रही है, जिसकी जिम्मेदारी सेवानिवृत्त जज विनोद सिन्हा को सौंपी गई है। इस पूरे एनकाउंटर को एक गहरा षड्यंत्र करार देते हुए शाहपुर थाना प्रभारी (SHO) राजेश मालाकार के बयानों पर तीखे सवाल उठाए गए हैं। थाना प्रभारी ने मीडिया को दिए बयान में कहा था कि 'मरने को लिखा था सो मर गया' और 'ज्यादा खून निकलेगा तो मरेगा ही'। आरोप है कि शाहपुर से आरा के बीच चलती वैन में सभी की नजरों से बचकर भरत के गुप्तांग में जानबूझकर पहली गोली मारी गई और उसे मौके पर ही खत्म करने के लिए दूसरी गोली सीने में दागी गई। इस मामले में एसडीपीओ (SDPO) राजेश शर्मा और एसपी श्रीराज को भी चेतावनी दी गई है कि उनकी मनमानी कैमरे में भले न कैद हुई हो, लेकिन सच्चाई छिप नहीं सकती और जरूरत पड़ने पर सीबीआई इस पतंग की डोर को अपने पास खींच ही लेगी। इस षड्यंत्र में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के कमांडो को भेजने पर भी कड़े सवाल खड़े किए गए हैं। एसटीएफ कमांडो, जिन्हें खतरनाक अपराधियों, डकैतों, नक्सलियों या आतंकवादियों को मारने के लिए भेजा जाता है, उन्हें एक सीधे-साधे इंसान के खिलाफ उतार दिया गया। भरत भूषण तिवारी कानून के रिकॉर्ड में कोई अपराधी या डकैत नहीं था, बल्कि गरीबों और दलितों की सेवा करने वाला एक मसीहा था, जिसने शादी न करने का संकल्प लिया था और अपना पिंडदान तक कर चुका था। सुरक्षा के लिए हथियार रखने की तुलना हनुमान जी के सोटे से की गई है। साथ ही, इस फर्जी एनकाउंटर की कहानी की तुलना मुजफ्फरपुर के थानाध्यक्ष राजेश शर्मा की 19 साल पुरानी उस कहानी से की गई है, जिसमें उसने फर्जी एनकाउंटर में तीन छात्रों को मार गिराया था। न्यायिक जांच शुरू होने के बाद इस खेल के षड्यंत्रकारियों में भारी चिंता है क्योंकि छल-कपट का फल इसी धरती पर भुगतना पड़ता है। इस एनकाउंटर को लेकर मुख्य रूप से तीन गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पहला, आरोपी के हथियार डालने और समर्पण करने के बाद भी गोली क्यों चलाई गई; दूसरा, एनकाउंटर में सामान्यतः पैर पर गोली मारी जाती है तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पेट से निकली गोली सहित पांच घाव कैसे मिले; और तीसरा, एसटीएफ कमांडो को भेजने का आदेश किसने और क्यों दिया। इस फर्जी एनकाउंटर के आकाओं का बुरा वक्त अब शुरू हो चुका है।
भरत तिवारी के एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीधे सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। 12 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे भरत तिवारी के परिवार को अदालत ने पटना हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है। कोर्ट का मानना है कि हाईकोर्ट इस मामले की बेहतर निगरानी कर सकता है। इस बीच, बिहार सरकार द्वारा इस मामले की न्यायिक जांच करवाई जा रही है, जिसकी जिम्मेदारी सेवानिवृत्त जज विनोद सिन्हा को सौंपी गई है। इस पूरे एनकाउंटर को एक गहरा षड्यंत्र करार देते हुए शाहपुर थाना प्रभारी (SHO) राजेश मालाकार के बयानों पर तीखे सवाल उठाए गए हैं। थाना प्रभारी ने
मीडिया को दिए बयान में कहा था कि 'मरने को लिखा था सो मर गया' और 'ज्यादा खून निकलेगा तो मरेगा ही'। आरोप है कि शाहपुर से आरा के बीच चलती वैन में सभी की नजरों से बचकर भरत के गुप्तांग में जानबूझकर पहली गोली मारी गई और उसे मौके पर ही खत्म करने के लिए दूसरी गोली सीने में दागी गई। इस मामले में एसडीपीओ (SDPO) राजेश शर्मा और एसपी श्रीराज को भी चेतावनी दी गई है कि उनकी मनमानी कैमरे में भले न कैद हुई हो, लेकिन सच्चाई छिप नहीं सकती और जरूरत पड़ने पर सीबीआई इस पतंग की डोर को अपने पास खींच ही लेगी। इस षड्यंत्र में स्पेशल टास्क फोर्स (STF)
के कमांडो को भेजने पर भी कड़े सवाल खड़े किए गए हैं। एसटीएफ कमांडो, जिन्हें खतरनाक अपराधियों, डकैतों, नक्सलियों या आतंकवादियों को मारने के लिए भेजा जाता है, उन्हें एक सीधे-साधे इंसान के खिलाफ उतार दिया गया। भरत भूषण तिवारी कानून के रिकॉर्ड में कोई अपराधी या डकैत नहीं था, बल्कि गरीबों और दलितों की सेवा करने वाला एक मसीहा था, जिसने शादी न करने का संकल्प लिया था और अपना पिंडदान तक कर चुका था। सुरक्षा के लिए हथियार रखने की तुलना हनुमान जी के सोटे से की गई है। साथ ही, इस फर्जी एनकाउंटर की कहानी की तुलना मुजफ्फरपुर के थानाध्यक्ष राजेश शर्मा की 19 साल पुरानी उस कहानी से की गई
है, जिसमें उसने फर्जी एनकाउंटर में तीन छात्रों को मार गिराया था। न्यायिक जांच शुरू होने के बाद इस खेल के षड्यंत्रकारियों में भारी चिंता है क्योंकि छल-कपट का फल इसी धरती पर भुगतना पड़ता है। इस एनकाउंटर को लेकर मुख्य रूप से तीन गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पहला, आरोपी के हथियार डालने और समर्पण करने के बाद भी गोली क्यों चलाई गई; दूसरा, एनकाउंटर में सामान्यतः पैर पर गोली मारी जाती है तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पेट से निकली गोली सहित पांच घाव कैसे मिले; और तीसरा, एसटीएफ कमांडो को भेजने का आदेश किसने और क्यों दिया। इस फर्जी एनकाउंटर के आकाओं का बुरा वक्त अब शुरू हो चुका है।
- Vimal Kashyapधौलपुर, धौलपुर, राजस्थान💥उसका अंत महाभारत के शकुनी जैसा होता है6 hrs ago
- राजस्थान के धौलपुर में प्रतिबंधित चंबल बजरी के अवैध खनन और परिवहन पर निगरानी व्यवस्थाओं का जायजा लेने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति पहुंची है। समिति के चेयरमैन चंद्र प्रकाश गोयल और सदस्य अंजन मोहन्ती ने धौलपुर दौरे के दौरान सबसे पहले अभय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने जिले में लगे सीसीटीवी कैमरों, संवेदनशील मार्गों और चेक पोस्टों की रियल टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था का अवलोकन किया। अधिकारियों ने समिति को अवैध बजरी खनन और परिवहन की रोकथाम के लिए अपनाई जा रही तकनीकी व्यवस्थाओं और त्वरित कार्रवाई की पूरी जानकारी दी। इसके बाद समिति ने कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। इस दौरान जिला कलेक्टर श्रीनिधि बीटी, पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान, डीटीओ गौरव यादव, डीएफओ वी. चेतन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में अवैध खनन और परिवहन की रोकथाम को लेकर विभागीय समन्वय, निगरानी तंत्र और प्रवर्तन कार्रवाई की समीक्षा की गई। समिति ने आधुनिक तकनीक के अधिक प्रभावी उपयोग और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने के निर्देश दिए। वहीं, पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने कहा कि धौलपुर में प्रतिबंधित चंबल बजरी के अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त और निरंतर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।4
- भरत तिवारी के एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीधे सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। 12 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे भरत तिवारी के परिवार को अदालत ने पटना हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है। कोर्ट का मानना है कि हाईकोर्ट इस मामले की बेहतर निगरानी कर सकता है। इस बीच, बिहार सरकार द्वारा इस मामले की न्यायिक जांच करवाई जा रही है, जिसकी जिम्मेदारी सेवानिवृत्त जज विनोद सिन्हा को सौंपी गई है। इस पूरे एनकाउंटर को एक गहरा षड्यंत्र करार देते हुए शाहपुर थाना प्रभारी (SHO) राजेश मालाकार के बयानों पर तीखे सवाल उठाए गए हैं। थाना प्रभारी ने मीडिया को दिए बयान में कहा था कि 'मरने को लिखा था सो मर गया' और 'ज्यादा खून निकलेगा तो मरेगा ही'। आरोप है कि शाहपुर से आरा के बीच चलती वैन में सभी की नजरों से बचकर भरत के गुप्तांग में जानबूझकर पहली गोली मारी गई और उसे मौके पर ही खत्म करने के लिए दूसरी गोली सीने में दागी गई। इस मामले में एसडीपीओ (SDPO) राजेश शर्मा और एसपी श्रीराज को भी चेतावनी दी गई है कि उनकी मनमानी कैमरे में भले न कैद हुई हो, लेकिन सच्चाई छिप नहीं सकती और जरूरत पड़ने पर सीबीआई इस पतंग की डोर को अपने पास खींच ही लेगी। इस षड्यंत्र में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के कमांडो को भेजने पर भी कड़े सवाल खड़े किए गए हैं। एसटीएफ कमांडो, जिन्हें खतरनाक अपराधियों, डकैतों, नक्सलियों या आतंकवादियों को मारने के लिए भेजा जाता है, उन्हें एक सीधे-साधे इंसान के खिलाफ उतार दिया गया। भरत भूषण तिवारी कानून के रिकॉर्ड में कोई अपराधी या डकैत नहीं था, बल्कि गरीबों और दलितों की सेवा करने वाला एक मसीहा था, जिसने शादी न करने का संकल्प लिया था और अपना पिंडदान तक कर चुका था। सुरक्षा के लिए हथियार रखने की तुलना हनुमान जी के सोटे से की गई है। साथ ही, इस फर्जी एनकाउंटर की कहानी की तुलना मुजफ्फरपुर के थानाध्यक्ष राजेश शर्मा की 19 साल पुरानी उस कहानी से की गई है, जिसमें उसने फर्जी एनकाउंटर में तीन छात्रों को मार गिराया था। न्यायिक जांच शुरू होने के बाद इस खेल के षड्यंत्रकारियों में भारी चिंता है क्योंकि छल-कपट का फल इसी धरती पर भुगतना पड़ता है। इस एनकाउंटर को लेकर मुख्य रूप से तीन गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पहला, आरोपी के हथियार डालने और समर्पण करने के बाद भी गोली क्यों चलाई गई; दूसरा, एनकाउंटर में सामान्यतः पैर पर गोली मारी जाती है तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पेट से निकली गोली सहित पांच घाव कैसे मिले; और तीसरा, एसटीएफ कमांडो को भेजने का आदेश किसने और क्यों दिया। इस फर्जी एनकाउंटर के आकाओं का बुरा वक्त अब शुरू हो चुका है।4
- धौलपुर जिले के उपखण्ड राजाखेड़ा और उसके ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विभाग ने बड़े बकायेदारों के खिलाफ शिकंजा कसते हुए बड़ी कार्रवाई की है। SE विवेक शर्मा के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई के दौरान 15 लाख रुपये के बकाया होने पर विभाग द्वारा 14 कृषि ट्रांसफॉर्मर उतारे गए हैं। विभाग की इस कार्रवाई के बीच मौके पर ही 5 उपभोक्ताओं ने 3 लाख रुपये का भुगतान भी किया। इसके साथ ही, बिजली चोरी करने वाले और मीटर बाईपास कर एसी चलाने वाले लोगों के खिलाफ भी विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। अवैध रूप से बिजली का उपयोग करने वालों के खिलाफ वीसीआर भरने की कार्रवाई लगातार जारी है।1
- धौलपुर के राजाखेड़ा उपखंड क्षेत्र के महुअन पुरा गांव में विद्यालय जाने वाले सार्वजनिक मार्ग पर किए गए अवैध अतिक्रमण को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर हटा दिया है। यह कार्रवाई तहसीलदार दीप्ति देव के नेतृत्व में और पुलिस जाब्ते की मौजूदगी में की गई। तहसीलदार दीप्ति देव ने बताया कि 20 मई को मुख्यमंत्री कार्यालय में दर्ज एक परिवाद के आधार पर इस पूरे मामले की जांच की गई थी। जांच के दौरान धारापुरा से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जाने वाले मार्ग पर अवैध अतिक्रमण पाया गया। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाते हुए बुलडोजर की मदद से अवैध निर्माण को ध्वस्त कर मार्ग को अतिक्रमण से पूरी तरह मुक्त कराया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद विद्यालय आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों ने राहत व्यक्त की है, क्योंकि लंबे समय से बाधित चल रहा यह मार्ग खुलने से अब आवागमन काफी सुगम हो गया है। तहसीलदार ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप सार्वजनिक भूमि और रास्तों पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा और सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।3
- धौलपुर जिले के सदरथाना क्षेत्र के पचगांव में बाइक से आए तीन चोर एक किराना स्टोर से मोबाइल चोरी कर फरार हो गए। चोरी की यह पूरी घटना दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। इस फुटेज के आधार पर पुलिस चोरों की तलाश में जुट गई है।1
- धौलपुर के जिला बैडमिंटन संघ के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय 'वीर लोकेंद्र सिंह राना मेमोरियल जिला स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता' का इंदिरा गांधी स्टेडियम के इंडोर बैडमिंटन हॉल में उत्साहपूर्ण माहौल में भव्य समापन हुआ। इस प्रतियोगिता में जिले भर के बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने भाग लेकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। समापन समारोह के दौरान विजेता और उपविजेता खिलाड़ियों को स्मृति चिन्ह तथा प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजन के दौरान प्रतियोगिता को सफल बनाने में सहयोग देने वाले पदाधिकारियों, निर्णायकों और स्वयंसेवकों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि धौलपुर अभिभाषक संघ के अध्यक्ष हरिओम शर्मा ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने कहा कि नियमित अभ्यास, अनुशासन, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प ही खिलाड़ी को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाते हैं। वहीं, वरिष्ठ खिलाड़ी वीर दिगेंद्र राना ने अनुशासन बनाए रखने और प्रत्येक मुकाबले की हार-जीत से सीख लेकर प्रदर्शन में सुधार करने की सीख दी। अरबन कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंधक क्षमाधान चौधरी ने खेलों को व्यक्तित्व निर्माण, टीम भावना और सकारात्मक सोच का सशक्त आधार बताया। राजस्थान बैडमिंटन संघ के कोषाध्यक्ष मोहम्मद जाकिर हुसैन ने प्रतियोगिता का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए खिलाड़ियों को राज्य स्तरीय चयन प्रक्रिया और भविष्य के अवसरों की जानकारी दी, जबकि शारीरिक शिक्षक अनिल मिश्रा ने युवाओं को खेल के माध्यम से ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग करने की प्रेरणा दी। प्रतियोगिता के मुकाबलों में बालक वर्ग के 11 वर्ष में मृदुल कुशवाहा, 13 वर्ष में मो. आयन हुसैन, 15 वर्ष में हर्ष वर्धन, 17 वर्ष में कुशाग्र शर्मा, 19 वर्ष में सोहेल खान और 17 वर्ष डबल्स में आयुष शर्मा एवं हर्ष वर्धन विजेता रहे। बालिका वर्ग के 11 वर्ष में गहना दुबे, 13 वर्ष में प्रिन्सी राना और 15, 17 व 19 वर्ष तीनों आयु वर्गों में ग्रेसी सिंह ने खिताबी जीत दर्ज की। खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए लक्की बघेला, ऐजल गोस्वामी, यंत्रिका कुमावत और यशस्वी सिंह को प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में नाज़ीस खान और नीतिका सिंह ने मैच रेफरी की जिम्मेदारी निभाई, जबकि समापन समारोह का संचालन रंजीत दिवाकर एडवोकेट द्वारा किया गया।4
- मुरैना के सबलगढ़ नगरपालिका में प्रभारी सीएमओ अतर सिंह रावत का भव्य स्वागत किया गया है। उनके इस स्वागत समारोह के चलते पूरी नगरपालिका में खुशी की लहर दौड़ गई है।1
- राजस्थान के धौलपुर में जिला बैडमिंटन संघ के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय वीर लोकेंद्र सिंह राना मेमोरियल जिला स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता का गुरुवार को इंदिरा गांधी स्टेडियम स्थित इंडोर बैडमिंटन हॉल में उत्साहपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। इस प्रतियोगिता में जिले के विभिन्न विद्यालयों, खेल संस्थानों और अकादमियों के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। समापन समारोह के दौरान सभी विजेता और उपविजेता खिलाड़ियों को स्मृति चिन्ह और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि और धौलपुर अभिभाषक संघ के अध्यक्ष हरिओम शर्मा ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और नियमित अभ्यास, अनुशासन व दृढ़ संकल्प ही खिलाड़ी को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाते हैं। वरिष्ठ खिलाड़ी वीर दिगेंद्र राना ने अनुशासन बनाए रखने और हर मुकाबले से सीख लेने पर जोर दिया। वहीं, अरबन कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंधक क्षमाधान चौधरी ने खेलों को व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला बताया। इस अवसर पर राजस्थान बैडमिंटन संघ के कोषाध्यक्ष मोहम्मद जाकिर हुसैन ने प्रतियोगिता का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और राज्य स्तरीय चयन प्रक्रिया की जानकारी दी, जबकि शारीरिक शिक्षक अनिल मिश्रा ने खेलों के माध्यम से स्वस्थ समाज के निर्माण की बात कही। प्रतियोगिता के बालक वर्ग में मृदुल कुशवाहा (11 वर्ष), मो. आयन हुसैन (13 वर्ष), हर्ष वर्धन (15 वर्ष), कुशाग्र शर्मा (17 वर्ष), सोहेल खान (19 वर्ष) और डबल्स में आयुष शर्मा व हर्ष वर्धन की जोड़ी विजेता रही। बालिका वर्ग में गहना दुबे (11 वर्ष), प्रिन्सी राना (13 वर्ष) और ग्रेसी सिंह (15, 17 व 19 वर्ष तीनों वर्ग) ने खिताबी जीत हासिल की। मुकाबले में नाज़ीस खान और नीतिका सिंह ने मैच रेफरी की जिम्मेदारी निभाई, जबकि लक्की बघेला, ऐजल गोस्वामी, यंत्रिका कुमावत और यशस्वी सिंह को श्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन रंजीत दिवाकर एडवोकेट ने किया।4