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टिहरी में जिला पंचायत सदन की बैठक के दौरान सदस्यों ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसका बहिष्कार कर दिया। बैठक का विरोध करते हुए सदस्यों ने जिला योजना में बंदरबांट का गंभीर आरोप लगाया है।
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टिहरी में जिला पंचायत सदन की बैठक के दौरान सदस्यों ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसका बहिष्कार कर दिया। बैठक का विरोध करते हुए सदस्यों ने जिला योजना में बंदरबांट का गंभीर आरोप लगाया है।
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- टिहरी में जिला पंचायत सदन की बैठक के दौरान सदस्यों ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसका बहिष्कार कर दिया। बैठक का विरोध करते हुए सदस्यों ने जिला योजना में बंदरबांट का गंभीर आरोप लगाया है।1
- टिहरी गढ़वाल की जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल की अध्यक्षता में जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जनपद के सभी 11 नगर निकायों और संबंधित विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों का विस्तृत विवरण लिया गया। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से लिगेसी वेस्ट के निस्तारण की प्रगति की समीक्षा करते हुए कार्यों में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए। साथ ही, घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में गीले एवं सूखे कचरे के स्रोत स्तर (Source Segregation) पर पृथक्करण की स्थिति की भी गहन जाँच की गई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सभी नगर निकायों को ग्रीन रेटिंग मानकों के अनुरूप नियमित रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का आदेश दिया। इसके साथ ही, आवासीय और व्यावसायिक परिसरों में कचरा पृथक्करण की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उपलब्ध कराने को कहा गया। बैठक में ड्राई वेस्ट और वेट वेस्ट के संग्रहण व निस्तारण के साथ-साथ प्लास्टिक अपशिष्ट और पुनर्चक्रण के प्रबंधन पर भी चर्चा हुई। जिला पंचायत द्वारा संचालित डंपिंग साइटों के वैज्ञानिक और पर्यावरणीय मानकों के अनुसार संचालन पर विशेष जोर दिया गया। धार्मिक स्थलों और पर्यटन क्षेत्रों में स्वच्छता, कूड़ा निस्तारण और पार्किंग प्रबंधन पर भी विस्तृत मंथन किया गया। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों और निकायों को आपसी समन्वय बनाकर पर्यटकों और श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस बैठक में सीडीओ वरुणा अग्रवाल, डीएफओ पुनीत तोमर, डीडीओ मो असलम, डीपीआरओ एम एम खान सहित विभिन्न निकायों के अधिशासी अधिकारी (ईओ) अंजलि, प्रशांत, रोहित, बद्री भट्ट और वासुदेव डंगवाल उपस्थित रहे।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के विरोध में आमरण अनशन कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है। लंबे समय से जारी इस भूख हड़ताल के कारण उनका वजन 7 किलो से अधिक कम हो गया है, साथ ही उनका ब्लड शुगर लेवल भी खतरनाक स्तर तक नीचे गिर गया है। सोनम वांगचुक नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। अपनी इसी मांग को लेकर वे जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।1
- हल्द्वानी में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के विरोध में स्थानीय लोगों और महिलाओं ने कांग्रेस नेता ललित जोशी के नेतृत्व में एसडीएम कोर्ट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से बिजली बिलों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। महिलाओं ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि बढ़े हुए बिलों ने उनके घरेलू बजट को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रदर्शन के बाद सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा गया है। इस ज्ञापन के जरिए स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने, बढ़े हुए बिजली बिलों की समीक्षा करने और उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने की मांग की गई है। कांग्रेस नेता ललित जोशी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।1
- पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सरकार पर निशाना साधा है। इस दौरान उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली और नीतियों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।1
- टिहरी जिले में हो रही मूसलाधार बारिश ने एक ओर जहां किसानों के चेहरे खिला दिए हैं और फसलों के लिए इसे सकारात्मक माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इस भारी वर्षा के कारण सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।1
- देहरादून के एसएसपी अविनाश पांडेय एक वायरल वीडियो के कारण लोगों की कड़ी आलोचना का सामना कर रहे हैं। इस वीडियो में एसएसपी साहब को हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति को थप्पड़ मारते हुए देखा जा सकता है, जिसने कई लोगों के मन में पुलिस के व्यवहार और कानून के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से यह अपेक्षा की जाती है कि वे बेहद तनावपूर्ण स्थितियों में भी संयम और धैर्य का परिचय देंगे। हालांकि, इस मामले में बल प्रयोग के बजाय संवाद और बातचीत के जरिए स्थिति को संभाला जा सकता था। कानून का सम्मान बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों से स्वयं कानून के दायरे में रहने की उम्मीद की जाती है। ताकत का प्रदर्शन करने के बजाय यदि धैर्यपूर्वक संवाद का रास्ता चुना जाता, तो शायद यह विवाद ही पैदा नहीं होता।1