जम्मू-कश्मीर में चुनाव संपन्न होने और एक चुनी हुई सरकार के अस्तित्व में आने के बाद, राज्य का दर्जा बहाल करने में की जा रही देरी पर तीखा रुख अपनाया गया है। उमर अब्दुल्ला ने पुरजोर तरीके से कहा है कि राज्य का दर्जा देना सत्ता में बैठे लोगों की मर्जी पर निर्भर कोई एहसान नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव हो चुके हैं, तो राज्य का दर्जा देने में देरी करने का मापदंड आखिर क्या है? उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि 'सही समय' का अर्थ केवल किसी विशेष राजनीतिक दल के सत्ता में आने का इंतजार करना है, तो जनता को यह बात साफ-साफ बताई जानी चाहिए। लोकतंत्र किसी भी तरह की शर्तों पर नहीं चल सकता और संवैधानिक प्रतिबद्धताओं को राजनीतिक सौदेबाजी का मोहरा नहीं बनाया जा सकता। जनता ने बैलेट के जरिए अपना फैसला दे दिया है, इसलिए उनके जनादेश का सम्मान होना चाहिए और राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा पूरा किया जाना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर में चुनाव संपन्न होने और एक चुनी हुई सरकार के अस्तित्व में आने के बाद, राज्य का दर्जा बहाल करने में की जा रही देरी पर तीखा रुख अपनाया गया है। उमर अब्दुल्ला ने पुरजोर तरीके से कहा है कि राज्य का दर्जा देना सत्ता में बैठे लोगों की मर्जी पर निर्भर कोई एहसान नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव हो चुके हैं, तो राज्य का दर्जा देने में देरी करने का मापदंड आखिर क्या है? उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि 'सही समय' का अर्थ केवल किसी विशेष राजनीतिक दल के सत्ता में आने का इंतजार करना है, तो जनता को यह बात साफ-साफ बताई जानी चाहिए। लोकतंत्र किसी भी तरह की शर्तों पर नहीं चल सकता और संवैधानिक प्रतिबद्धताओं को राजनीतिक सौदेबाजी का मोहरा नहीं बनाया जा सकता। जनता ने बैलेट के जरिए अपना फैसला दे दिया है, इसलिए उनके जनादेश का सम्मान होना चाहिए और राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा पूरा किया जाना चाहिए।
- जम्मू-कश्मीर में चुनाव संपन्न होने और एक चुनी हुई सरकार के अस्तित्व में आने के बाद, राज्य का दर्जा बहाल करने में की जा रही देरी पर तीखा रुख अपनाया गया है। उमर अब्दुल्ला ने पुरजोर तरीके से कहा है कि राज्य का दर्जा देना सत्ता में बैठे लोगों की मर्जी पर निर्भर कोई एहसान नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव हो चुके हैं, तो राज्य का दर्जा देने में देरी करने का मापदंड आखिर क्या है? उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि 'सही समय' का अर्थ केवल किसी विशेष राजनीतिक दल के सत्ता में आने का इंतजार करना है, तो जनता को यह बात साफ-साफ बताई जानी चाहिए। लोकतंत्र किसी भी तरह की शर्तों पर नहीं चल सकता और संवैधानिक प्रतिबद्धताओं को राजनीतिक सौदेबाजी का मोहरा नहीं बनाया जा सकता। जनता ने बैलेट के जरिए अपना फैसला दे दिया है, इसलिए उनके जनादेश का सम्मान होना चाहिए और राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा पूरा किया जाना चाहिए।1
- दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में स्थित नल्ला आवूरा क्षेत्र में बादल फटने के बाद आई अचानक बाढ़ के कारण भारी तबाही हुई है। इस बाढ़ के चलते प्रभावित क्षेत्र में मलबे का भारी जमाव हो गया है और कई जगहों पर रुके हुए पानी के बड़े तालाब बन गए हैं।1
- जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित नाला ओवरा में बादल फटने की घटना सामने आई है। इस अचानक हुई घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है और मौके पर तत्काल प्रतिक्रिया शुरू कर दी गई है।1
- जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने स्पष्ट किया है कि केंद्रशासित प्रदेश के लोगों ने उन्हें धारा 370 और धारा 35A की बहाली के लिए वोट दिया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता का यह जनादेश केवल राज्य का दर्जा वापस पाने की मांग तक सीमित नहीं था। कुलगाम के शाहू इलाके में 25वें मुहर्रम के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए रुहुल्लाह ने कहा कि मतदाताओं ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को इस उम्मीद के साथ समर्थन दिया था कि वह जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे को बहाल करने के लिए काम करेगी। आगा रुहुल्लाह ने 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि वह इस प्रदर्शन में हिस्सा जरूर लेंगे, लेकिन वह वहां सिर्फ राज्य के दर्जे की मांग नहीं करेंगे, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए धारा 370 और धारा 35A के मुद्दों को उठाएंगे। उन्होंने केवल राज्य के दर्जे पर ध्यान केंद्रित करने की आलोचना करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन को सिर्फ इस मांग तक सीमित रखना भाजपा के एजेंडे से मेल खाता हुआ प्रतीत होता है। उन्होंने इस बात को बार-बार दोहराया कि लोगों का जनादेश विशेष दर्जे की बहाली के लिए था, न कि महज राज्य का दर्जा वापस पाने के लिए। जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर उनकी खुद की स्थिति के बारे में सवाल पूछा गया, तो रुहुल्लाह ने बेबाकी से टिप्पणी करते हुए कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को उनकी जरूरत नहीं थी।1
- पीएसएजेके (PSAJk) के अध्यक्ष नजरुल इस्लाम ने श्रीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया।1
- दुनिया का गम और दौलत का गम तुम्हारी जान ले लेगा, लेकिन शब्बीर के गम में रोकर तुम्हारा मन जी उठेगा और तुम जीवित रह सकोगे। इस संदेश में साफ तौर पर आगाह किया गया है कि दुनियावी और आर्थिक चिंताएं केवल विनाश की ओर ले जाती हैं, जबकि शब्बीर के गम में रोने से ही जीवन संभव है।1
- जम्मू-कश्मीर के कैबिनेट मंत्री सतीश शर्मा ने राजनीतिक खरीद-फरोख्त को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब खरीद-फरोख्त की राजनीति काम नहीं आने वाली है। कैबिनेट मंत्री ने बेहद आक्रामक और मजबूत लहजे में दोटूक कहा है कि "कोई मुझे खरीद नहीं सकता।" सतीश शर्मा का यह बयान सीधे तौर पर राजनीतिक सौदेबाजी की कोशिशों को खारिज करता है।1
- भूकंप, बाढ़, युद्ध और हमलों जैसे बुरे हालातों के कारण लोगों की जिंदगी पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है। इस समय हर व्यक्ति को अपनी अच्छी भूमिका निभानी चाहिए, क्योंकि जब खुद के घर में शांति होगी, तभी मोहल्ले, क्षेत्र, राज्य और फिर देश में भी हालात बेहतर होंगे। लेकिन कुछ राजनेता ऐसा नहीं होने देंगे। कश्मीर के पहलगाम में आई पहली बाढ़ के साथ ही चीन, ताजिकिस्तान, भारत और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में हालात बेहद खराब हो गए हैं, जहाँ बाढ़ का पानी खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है। इसके अलावा, मेरठ में एक पुलिसकर्मी को बेहद बेरहमी से पीटा गया है।4