सिवाना उपखंड के काठाडी के संस्कृत विद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इस समस्या को लेकर अभिभावकों ने विभाग और उच्च अधिकारियों को अवगत कराया था, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। पूर्व में 15 दिन पहले ग्रामीणों ने अधिकारियों को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि अगर 15 दिन में अध्यापकों की व्यवस्था नहीं हुई तो वे अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए सामूहिक रूप से टीसी की मांग करेंगे। आज सभी छात्रों के अभिभावक विद्यालय में पहुंचे और प्रधानाध्यापक को सामूहिक रूप से प्रार्थना पत्र देकर सभी बच्चों की सामूहिक टीसी की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके बच्चों का भविष्य अंधकार में है। अधिकारी अस्थायी तौर पर शिक्षकों को लगाते हैं, लेकिन वे वापस अपने स्थान पर चले जाते हैं, जिससे समस्या जस की तस बनी रहती है। अब बच्चों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
सिवाना उपखंड के काठाडी के संस्कृत विद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इस समस्या को लेकर अभिभावकों ने विभाग और उच्च अधिकारियों को अवगत कराया था, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। पूर्व में 15 दिन पहले ग्रामीणों ने अधिकारियों को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि अगर 15 दिन में अध्यापकों की व्यवस्था नहीं हुई तो वे अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए सामूहिक रूप से टीसी की मांग करेंगे। आज सभी छात्रों के अभिभावक विद्यालय में पहुंचे और प्रधानाध्यापक को सामूहिक रूप से प्रार्थना पत्र देकर सभी बच्चों की सामूहिक टीसी की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके बच्चों का भविष्य अंधकार में है। अधिकारी अस्थायी तौर पर शिक्षकों को लगाते हैं, लेकिन वे वापस अपने स्थान पर चले जाते हैं, जिससे समस्या जस की तस बनी रहती है। अब बच्चों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
- सिवाना उपखंड के काठाडी के संस्कृत विद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इस समस्या को लेकर अभिभावकों ने विभाग और उच्च अधिकारियों को अवगत कराया था, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। पूर्व में 15 दिन पहले ग्रामीणों ने अधिकारियों को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि अगर 15 दिन में अध्यापकों की व्यवस्था नहीं हुई तो वे अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए सामूहिक रूप से टीसी की मांग करेंगे। आज सभी छात्रों के अभिभावक विद्यालय में पहुंचे और प्रधानाध्यापक को सामूहिक रूप से प्रार्थना पत्र देकर सभी बच्चों की सामूहिक टीसी की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके बच्चों का भविष्य अंधकार में है। अधिकारी अस्थायी तौर पर शिक्षकों को लगाते हैं, लेकिन वे वापस अपने स्थान पर चले जाते हैं, जिससे समस्या जस की तस बनी रहती है। अब बच्चों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।1
- राजस्थान के जालोर में संतों और गौ भक्तों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में गौ माता की हत्या पर रोक लगाने और उसे राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग की गई है। ज्ञापन में जोर देकर कहा गया है कि गौ माता की रक्षा करना न केवल धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता भी है। संतों का मानना है कि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देकर ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है।1
- ek Haqiqat throat use full at every moment of the day of the day of the day of the1
- बाड़मेर जिले के बालोतरा में सोमवार को एक भाव भक्ति संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम के लिए श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया जा रहा है। यह आयोजन स्थानीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होने की उम्मीद है।1
- सोमवार को जालोर में सनातन धर्म के अनुयायियों ने गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में शामिल लोग मलकेश्वर मठ मंदिर परिसर में एकत्रित हुए और फिर ढोल-धमाके के साथ एक रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने जिला कलेक्टर को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देने के दौरान बड़ी संख्या में सनातन धर्म के लोग मौजूद रहे। इस मांग को लेकर लोगों में काफी जोश और उत्साह देखा गया।3
- आहोर : राज्य सरकार के 'हरियालो राजस्थान–एक पेड़ मां के नाम' महाअभियान के तहत गत वर्ष हरियाली तीज 27 जुलाई को भूति गांव में आयोजित 76वें जिला स्तरीय वन महोत्सव के ऐतिहासिक पौधारोपण कार्यक्रम की प्रथम वर्षगांठ पर सोमवार 27 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत भूति के तत्वावधान में हर्षोल्लास के साथ जन्मोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम स्थल वाटिका को ग्रामीणों व महिलाओं ने रंग-बिरंगी रंगोली व गुब्बारे से सजाया। ग्राम पंचायत प्रशासक जशोदा देवी एवं भाजपा चांदराई मंडल अध्यक्ष लाखाराम देवासी, पंचायत समिति सदस्य सजनों बाई देवासी की उपस्थिति में महिलाओं ने पीपल का पूजन कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और बरसात के मौसम में ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने की अपील की। महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाए तथा एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर पौधारोपण अभियान की प्रथम वर्षगांठ के तहत जन्मोत्सव मनाया। ग्राम पंचायत प्रशासक जशोदा देवी ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित पालन-पोषण और संरक्षण करना भी उतना ही आवश्यक है। पौधों की समय-समय पर देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा से ही वे आगे चलकर विशाल वृक्ष का रूप लेते हैं और पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस समय बरसात का मौसम चल रहा है। इसमें अधिक से अधिक छायादार और फलदार पौधों का रोपण कर क्षेत्र को हरा-भरा बनाएं। उन्होंने बताया कि गत वर्ष आयोजित 76वां जिला स्तरीय वन महोत्सव में करीब दो हजार पौधे लगाए गए थे। इनमें आम, चीकू, अमरूद, अनार और आंवला जैसे फलदार पौधों के साथ-साथ पीपल, बरगद, नीम, कदम, शीशम और गुलमोहर सहित अनेक छायादार एवं पर्यावरण हितैषी पौधे लगाए गए थे। एक वर्ष के भीतर इन पौधों की नियमित देखभाल का सकारात्मक परिणाम सामने आया है और अधिकांश पौधे अब वृक्ष का स्वरूप लेने लगे हैं, जो अभियान की सफलता का प्रमाण है। मंडल अध्यक्ष लाखाराम देवासी ने बताया कि वृक्षों से हमें छाया के साथ ही फल भी मिलते हैं और वृक्ष हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं साथ ही पर्यावरण को संतुलित करने में सहायक होते हैं। उन्होंने क्षेत्र के ग्रामीणों को पर्यावरण प्रेमी बनकर पौधे लगाने का आह्वान किया। इस अवसर पर मनरेगा मेट मंजू गर्ग, शांति, कन्या, गोमती, कमला, मीरा, पुष्पा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं व ग्रामीण उपस्थित रहे।4
- मीराबाई चानू ने इतिहास रच दिया है। ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने वेटलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीत लिया है। यह भारत को इस गेम्स में मिला पहला गोल्ड मेडल है। मीराबाई ने 48 किलोग्राम भारवर्ग में यह उपलब्धि हासिल की है। यह लगातार चौथी बार है जब मीराबाई ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कोई मेडल जीता है। उनकी इस जीत ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है।1
- कनाना से मेली जाने वाले रास्ते पर बारिश के बाद फिसलन बढ़ गई है, जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस रास्ते से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में बजरी परिवहन के लिए डंपर, ट्रैक्टर और अन्य वाहन गुजरते हैं, जिसकी वजह से रास्ते की हालत पहले से ही खराब थी। अब बारिश के बाद स्थिति और बिगड़ गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बजरी परिवहन करने वालों की वजह से यह समस्या बढ़ी है।1