मंत्री के सामने सब ठीक, किसानों के बीच क्यों मचा खाद का संकट? धौरहरा तहसील में खाद संकट मंत्री के निरीक्षण में सब 'ऑल इज वेल', लेकिन ज़मीन पर किसानों की लंबी कतारें और कालाबाजारी के आरोप; आखिर सच कौन बोल रहा है? लखीमपुर खीरी। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने गुरुवार को लखीमपुर खीरी के विभिन्न उर्वरक केंद्रों और बी-पैक्स समितियों का निरीक्षण कर अधिकारियों से खाद की उपलब्धता, स्टॉक और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। निरीक्षण के बाद मंत्री की ओर से सोशल मीडिया पर लगातार कई पोस्ट साझा की गईं, जिनमें दावा किया गया कि किसानों को निर्धारित सरकारी मूल्य पर समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही अधिकारियों को ओवररेटिंग, टैगिंग और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। लेकिन सवाल यह है कि क्या निरीक्षण वास्तविक स्थिति तक पहुंच पाया, या अधिकारियों द्वारा दिखाई गई फाइलों और रजिस्टरों तक ही सीमित रह गया? पिछले कुछ दिनों में धौरहरा तहसील और ईसानगर क्षेत्र से खाद वितरण को लेकर सामने आए कई मामले मंत्री के दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करते हैं। किसानों के आरोप हैं कि जहां एक ओर सोशल मीडिया पर व्यवस्था सुचारु बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर कई समितियों पर खाद की कालाबाजारी, अनियमित वितरण, गलत रिकॉर्ड, ओवररेटिंग और पक्षपात के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। एक नहीं, कई मामलों ने खड़े किए सवाल पिछले दिनों लाखुन बी-पैक्स समिति से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें एक निजी घर से डीसीएम वाहन पर यूरिया की बोरियां लोड होती दिखाई दीं। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन किसानों ने आरोप लगाया कि समिति पर खाद नहीं मिलने के बावजूद निजी माध्यमों से खाद की आवाजाही होती रही। समिति सचिव ने वीडियो को पुराना बताते हुए आरोपों से इनकार किया। इसके बाद सिंगावर बी-पैक्स समिति पर भी गंभीर आरोप लगे। किसानों का कहना है कि दिनभर लाइन में लगने के बावजूद उन्हें खाद नहीं मिली, कई दिन दौड़ते रहे कर्मचारी सिस्टम समझते रहे, फिर वहां के सचिव ने खमरिया बुलाया फिर वहां भी खाद नहीं मिली जबकि शाम 5:30 को चुनिंदा लोगों को ट्रॉली से यूरिया वितरित कर दी गई। इतना ही नहीं, गुरुवार 30 जुलाई को कई किसानों ने एसडीएम धौरहरा को नोटरी शपथपत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इसी दौरान धौरहरा क्षेत्र में रात के समय 15 बोरी यूरिया से लदे ई-रिक्शा का वीडियो भी वायरल हुआ। किसानों ने आरोप लगाया कि दिन में स्टॉक खत्म बताया जाता है और रात में बड़े पैमाने पर खाद बाहर भेजी जाती है। अधिकारियों का जवाब सिर्फ इतना रहा कि "जांच चल रही है।" 'गलती' से दूसरी समिति पहुंच गई खाद ईसानगर ब्लॉक में सिंगावर समिति के नाम आवंटित यूरिया की खेप लाखुन समिति में उतरने का मामला भी सामने आया। संबंधित अधिकारी ने इसे "गलती" बताया और बाद में समायोजन की बात कही। लेकिन किसानों का सवाल आज भी वही है कि यदि यह गलती थी तो दूसरी समिति में खाद कैसे उतर गई, वितरण कैसे हो गया और जिम्मेदारी किसकी तय हुई? खाद के लिए लाइन, दो किसान बेहोश सिसैया स्थित इफ्को केंद्र पर यूरिया लेने पहुंचे किसानों की लंबी कतार के दौरान दो किसानों के बेहोश होने का वीडियो भी सामने आया। किसानों का कहना था कि कई दिनों से सुबह से लाइन में लगने के बावजूद कई लोगों को खाद नहीं मिलती। पेयजल, छाया और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। खमरिया समिति पर भी गंभीर आरोप खमरिया बी-पैक्स समिति पर किसानों ने आरोप लगाया कि सामान्य किसानों को दो बोरी खाद भी नहीं मिल रही, जबकि दलालों को बड़ी मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों ने 300 से 350 रुपये प्रति बोरी तक कालाबाजारी और निजी दुकानों पर इससे भी अधिक कीमत पर बिक्री के आरोप लगाए। समिति सचिव ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि सभी किसानों को क्रमवार खाद दी जा रही है। रजिस्टर बनाम ज़मीनी हकीकत मंत्री के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर और अभिलेख प्रस्तुत किए। कई किसानों से दूरभाष पर बात कर व्यवस्था संतोषजनक होने की जानकारी भी साझा की गई। लेकिन दूसरी ओर कई किसान शपथपत्र देकर शिकायत कर रहे हैं, वायरल वीडियो सामने आ रहे हैं, लंबी कतारें लग रही हैं, खाद के लिए लोग बेहोश हो रहे हैं और लगातार जांच की मांग उठ रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि सच किसके पास है—रजिस्टरों में दर्ज आंकड़ों के पास, अधिकारियों की रिपोर्ट के पास या फिर उन किसानों के पास जो कई दिनों से खाद के लिए भटक रहे हैं? या उनके पास जो किसानों की शिकायत को गंभीरता से नहीं लेते। सबसे बड़ा सवाल यदि जिले में वास्तव में पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है, जैसा कि अधिकारियों ने मंत्री को बताया, तो फिर कई समितियों पर किसानों की लंबी लाइनें क्यों लग रही हैं? बार-बार कालाबाजारी और अनियमितता के आरोप क्यों सामने आ रहे हैं? जिन मामलों में जांच की घोषणा हुई, उनमें अब तक कार्रवाई सार्वजनिक क्यों नहीं हुई? क्या कोई विशेष वजह रही। किसानों का कहना है कि उन्हें किसी बयान या सोशल मीडिया पोस्ट से नहीं, बल्कि समय पर उचित मूल्य पर खाद मिलने से भरोसा होगा। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इन शिकायतों, शपथपत्रों और वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी, या फिर सब कुछ फाइलों और रजिस्टरों में ही "ऑल इज वेल" दिखता रहेगा।
मंत्री के सामने सब ठीक, किसानों के बीच क्यों मचा खाद का संकट? धौरहरा तहसील में खाद संकट मंत्री के निरीक्षण में सब 'ऑल इज वेल', लेकिन ज़मीन पर किसानों की लंबी कतारें और कालाबाजारी के आरोप; आखिर सच कौन बोल रहा है? लखीमपुर खीरी। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने गुरुवार को लखीमपुर खीरी के विभिन्न उर्वरक केंद्रों और बी-पैक्स समितियों का निरीक्षण कर अधिकारियों से खाद की उपलब्धता, स्टॉक और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। निरीक्षण के बाद मंत्री की ओर से सोशल मीडिया पर लगातार कई पोस्ट साझा की गईं, जिनमें दावा किया गया कि किसानों को निर्धारित सरकारी मूल्य पर समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही अधिकारियों को ओवररेटिंग, टैगिंग और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। लेकिन सवाल यह है कि क्या निरीक्षण वास्तविक स्थिति तक पहुंच पाया, या अधिकारियों द्वारा दिखाई गई फाइलों और रजिस्टरों तक ही सीमित रह गया? पिछले कुछ दिनों में धौरहरा तहसील और ईसानगर क्षेत्र से खाद वितरण को लेकर सामने आए कई मामले मंत्री के दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करते हैं। किसानों के आरोप हैं कि जहां एक ओर सोशल मीडिया पर व्यवस्था सुचारु बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर कई समितियों पर खाद की कालाबाजारी, अनियमित वितरण, गलत रिकॉर्ड, ओवररेटिंग और पक्षपात के आरोप लगातार सामने आ रहे
हैं। एक नहीं, कई मामलों ने खड़े किए सवाल पिछले दिनों लाखुन बी-पैक्स समिति से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें एक निजी घर से डीसीएम वाहन पर यूरिया की बोरियां लोड होती दिखाई दीं। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन किसानों ने आरोप लगाया कि समिति पर खाद नहीं मिलने के बावजूद निजी माध्यमों से खाद की आवाजाही होती रही। समिति सचिव ने वीडियो को पुराना बताते हुए आरोपों से इनकार किया। इसके बाद सिंगावर बी-पैक्स समिति पर भी गंभीर आरोप लगे। किसानों का कहना है कि दिनभर लाइन में लगने के बावजूद उन्हें खाद नहीं मिली, कई दिन दौड़ते रहे कर्मचारी सिस्टम समझते रहे, फिर वहां के सचिव ने खमरिया बुलाया फिर वहां भी खाद नहीं मिली जबकि शाम 5:30 को चुनिंदा लोगों को ट्रॉली से यूरिया वितरित कर दी गई। इतना ही नहीं, गुरुवार 30 जुलाई को कई किसानों ने एसडीएम धौरहरा को नोटरी शपथपत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इसी दौरान धौरहरा क्षेत्र में रात के समय 15 बोरी यूरिया से लदे ई-रिक्शा का वीडियो भी वायरल हुआ। किसानों ने आरोप लगाया कि दिन में स्टॉक खत्म बताया जाता है और रात में बड़े पैमाने पर खाद बाहर भेजी जाती है। अधिकारियों का जवाब सिर्फ इतना रहा कि "जांच चल रही है।" 'गलती' से दूसरी समिति पहुंच गई खाद
ईसानगर ब्लॉक में सिंगावर समिति के नाम आवंटित यूरिया की खेप लाखुन समिति में उतरने का मामला भी सामने आया। संबंधित अधिकारी ने इसे "गलती" बताया और बाद में समायोजन की बात कही। लेकिन किसानों का सवाल आज भी वही है कि यदि यह गलती थी तो दूसरी समिति में खाद कैसे उतर गई, वितरण कैसे हो गया और जिम्मेदारी किसकी तय हुई? खाद के लिए लाइन, दो किसान बेहोश सिसैया स्थित इफ्को केंद्र पर यूरिया लेने पहुंचे किसानों की लंबी कतार के दौरान दो किसानों के बेहोश होने का वीडियो भी सामने आया। किसानों का कहना था कि कई दिनों से सुबह से लाइन में लगने के बावजूद कई लोगों को खाद नहीं मिलती। पेयजल, छाया और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। खमरिया समिति पर भी गंभीर आरोप खमरिया बी-पैक्स समिति पर किसानों ने आरोप लगाया कि सामान्य किसानों को दो बोरी खाद भी नहीं मिल रही, जबकि दलालों को बड़ी मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों ने 300 से 350 रुपये प्रति बोरी तक कालाबाजारी और निजी दुकानों पर इससे भी अधिक कीमत पर बिक्री के आरोप लगाए। समिति सचिव ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि सभी किसानों को क्रमवार खाद दी जा रही है। रजिस्टर बनाम ज़मीनी हकीकत मंत्री के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर और अभिलेख प्रस्तुत किए। कई किसानों से दूरभाष पर
बात कर व्यवस्था संतोषजनक होने की जानकारी भी साझा की गई। लेकिन दूसरी ओर कई किसान शपथपत्र देकर शिकायत कर रहे हैं, वायरल वीडियो सामने आ रहे हैं, लंबी कतारें लग रही हैं, खाद के लिए लोग बेहोश हो रहे हैं और लगातार जांच की मांग उठ रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि सच किसके पास है—रजिस्टरों में दर्ज आंकड़ों के पास, अधिकारियों की रिपोर्ट के पास या फिर उन किसानों के पास जो कई दिनों से खाद के लिए भटक रहे हैं? या उनके पास जो किसानों की शिकायत को गंभीरता से नहीं लेते। सबसे बड़ा सवाल यदि जिले में वास्तव में पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है, जैसा कि अधिकारियों ने मंत्री को बताया, तो फिर कई समितियों पर किसानों की लंबी लाइनें क्यों लग रही हैं? बार-बार कालाबाजारी और अनियमितता के आरोप क्यों सामने आ रहे हैं? जिन मामलों में जांच की घोषणा हुई, उनमें अब तक कार्रवाई सार्वजनिक क्यों नहीं हुई? क्या कोई विशेष वजह रही। किसानों का कहना है कि उन्हें किसी बयान या सोशल मीडिया पोस्ट से नहीं, बल्कि समय पर उचित मूल्य पर खाद मिलने से भरोसा होगा। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इन शिकायतों, शपथपत्रों और वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी, या फिर सब कुछ फाइलों और रजिस्टरों में ही "ऑल इज वेल" दिखता रहेगा।
- जनरल वालों को स्कॉलरशिप नहीं दी जा रही स्कॉलरशिप की करंट स्टेटस में झूठी रिपोर्ट लगाई जा रही है। 2025 26 का मेरा नाम अमन पांडे है लेकिन को खीरी का निवासी हूं। मैं बीएससी एग्रीकल्चर का छात्र हूं। मैं चौधरी बेचेलाल, महाविद्यालय, रसूलपुर धौराहरा में पढ़ाई करता हूंस्कॉलरशिप के स्टेटस में दिख रहा है कि आधार बेस में पैसा भेज दिया गया है लेकिन मेरे किसी भी अकाउंट में धन राशि प्राप्त नहीं हुई है। लेकिन यह बात मैंने जिला समाज कल्याण अधिकारी को बताया कि सर मेरे अकाउंट में धन राशि प्राप्त नहीं हुई है और मेरे पास स्कॉलरशिप के स्टेटस में दिखाई दे रहा है।तब मैं करंट स्टेटस की बैंक स्टेटमेंट की फोटो कॉपी जिला समाज कल्याण में प्रस्तुत किया। मैं आठ बार जा चुका हूं। जिला समाज कल्याण में इसे शिकायत के संबंध में की मेरे स्टेटस में देखा है तो पैसा कहां गया मेरा? और मेरा फेल्ड की लिस्ट में नाम भी नहीं है। पेमेंट पेड की लिस्ट में नाम है।. तब मेरे स्कूल के कल कर आए जो बायोमेट्रिक करते हैं स्कॉलरशिप का। तब कहने लगे मुझे कुछ विभाग के तरफ से पर्सनल चीज से होती हैं। गोपनीय चीज होती है, वह बताई नहीं जा सकती हैं। सिस्टम भी जानता है आपका पैसा कहां गया है? तब आप सब बड़े होंगे तब आपको पता चलेगा सिस्टम चलता कैसे है ? और कहने लगे कि आपके पिता से भी कोई गलती हो जाए तो क्या तब मैं कहने लगा कि मैं इतनी मेहनत की है। मैं जब जिला समाज कल्याण में जो जो डॉक्यूमेंट मांगे, वह मैं प्रस्तुत किया तो मेरा भी अधिकार जानना है कि पैसा मेरा आकर कहां गया है। यह मैं पता लगा के रहूंगा। मैं स्कूल वाले सर से जो जिला समाज कल्याण में आए थे, बायोमेट्रिक जो करते हैं और कहने लगे बाबूजी क्या कह रहे हैं, इसका भी चेक कर मत कीजिए। यहां पर और कॉलेज का भी नाम मत लीजिए अगर मेरी गलती है तो सिस्टम के तरफ से भी क्लियर किया जाए की कोई गलती नहीं थी। ओ मेरे कॉलेज के प्रिंसिपल वरुण सिंह है। आपकी कृपा। इस वीडियो को इतना वायरल कीजिए कि इससे आवाज उठाई जा सके और इससे इंसाफ मिले?2
- भाजपा नेता रवि गुप्ता ने पुष्प वर्षा कर मिष्ठान खिलाकर हर हर महादेव के जयकारों के साथ शुभ यात्रा की मंगल कामना करते हुए भक्तों को रवाना किया 👉पालिया से कांवड़ यात्रियों का जत्था बाबा बैद्यनाथ धाम रवाना पिछले कई वर्षों की भांति इस वर्ष भी पवित्र सावन माह शुभ अवसर पर पलिया शहर के वरिष्ठ व्यवसाई,व्यापार मंडल महामंत्री संदीप बंसल(डब्बू )एवं समाजसेवी राकेश गर्ग (पप्पी) की अगुवाई में शिव भक्त कावड़ यात्रियों का जत्था बाबा बैद्यनाथ धाम बड़ी ही धूमधाम से रवाना हुआ! सभी कावड़ यात्री कई दिनों तक नंगे पैर चलकर बाबा महादेव को जलाभिषेक करेंगे जल चढ़ाएंगे पलिया क्षेत्र की खुशहाली की मंगल कामना करेंगे! भाजपा नेता रवि गुप्ता ने आचार्य पंडित श्री वेद प्रकाश मिश्र व्यास जी एवं श्री सुंदरकांड पाठ हनुमत सेवा मंडल के संस्थापक श्री निरंकार प्रसाद बरनवाल, उमाशंकर मिश्र, वंश वर्मा,अंकित जैन, एवं बटुक ब्राह्मणों के साथ सभी कांवर तीर्थ यात्रियों पर पुष्प वर्षा कर एवं मिष्ठान खिलाकर व भगवान महादेव की शिव चालीसा भेंट कर सुखद एवं सफल यात्रा की मंगल कामना करते हुए महादेव के जयकारों के उद्घोष के साथ मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं देते हुए रवाना किया! इस शुभ अवसर पर हजारों की संख्या में गणमान्य जन शिव भक्त मौजूद रहे ! हर हर महादेव के जयकारों से आज पूरा पलिया शहर गुंजायमान था!1
- सीतापुर। बेहटा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सुमेर का जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय समय से पहले बंद मिला। इंचार्ज प्रधानाध्यापक समेत दो शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। मामले में दोनों शिक्षकों का एक दिन का वेतन रोकने के साथ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। निरीक्षण में एमडीएम रजिस्टर में 20 जुलाई से कोई प्रविष्टि दर्ज नहीं मिली। विद्यालय की रंगाई-पुताई और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी बीएसए ने नाराजगी जताई। विद्यालय के सभी शिक्षकों का एक दिन का वेतन रोकते हुए एक सप्ताह के भीतर सुधार की रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। ऊँचगांव विद्यालय में दो शिक्षक निलंबित प्राथमिक विद्यालय ऊँचगांव के निरीक्षण में परिसर में गंदगी, बड़ी घास, जाले और बिजली की लटकती तारें मिलीं। बीएसए ने विद्यालय की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए 10 दिन का समय दिया। विद्यालय में रिकॉर्ड और किताबें जलाने से संबंधित वायरल वीडियो की जांच के दौरान बताया गया कि पुराने फटे रजिस्टर, किताबें और रद्दी जलाए गए थे। जांच में विद्यालय के चार्ज को लेकर गुटबाजी और विभाग की छवि धूमिल करने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई। मामले में इंचार्ज प्रधानाध्यापक रणविजय सिंह और सहायक अध्यापक जीतपाल सिंह को निलंबित कर दिया गया। साथ ही विद्यालय के सभी शिक्षकों का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। बीईओ कार्यालय में भी मिली गंदगी बीईओ बेहटा कार्यालय के निरीक्षण में गंदगी मिलने पर अनुचर अमर बहादुर यादव का वेतन रोकने की कार्रवाई की गई। वहीं बीईओ बेहटा को नोटिस जारी कर कार्यालय में तत्काल साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा बीएसए ने आधार केंद्र का भी निरीक्षण किया और वहां मौजूद लोगों से केंद्र पर मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली। बीएसए के निरीक्षण और कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति बनी रही। अधिकारियों ने विद्यालयों में साफ-सफाई, शिक्षण कार्य और विभागीय व्यवस्थाओं में लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए हैं।1
- "जब बीच बजरिया तूने मेरी पकड़ी.." UP- मेरठ के सरकारी बस अड्डे पर ड्राइवर पदम सिंह आज रिटायर हुए उनकी बेहतरीन सेवाओं के लिए ड्राइवर संघ ने नृत्यांगना का रंगारंग डांस करवाया चारों ओर माहौल खुशी से भर गया "जब बीच बजरिया तूने मेरी पकड़ी.." UP- मेरठ के सरकारी बस अड्डे पर ड्राइवर पदम सिंह आज रिटायर हुए उनकी बेहतरीन सेवाओं के लिए ड्राइवर संघ ने नृत्यांगना का रंगारंग डांस करवाया चारों ओर माहौल खुशी से भर गया1
- लखीमपुर - शहर में एक लंगूर के हमलों से लोगों में दहशत है। यह बंदर अब तक कई लोगों को काट चुका है लखीमपुर - शहर में एक लंगूर के हमलों से लोगों में दहशत है। यह बंदर अब तक कई लोगों को काट चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लंगूर पहले एक व्यक्ति के सिर पर हाथ रखता है, फिर अचानक गर्दन पर हमला कर देता है। एक अन्य वीडियो में भी वह राहगीर पर झपटता दिखाई देता है। इसके अलावा लंगूर सड़क पर चल रही एक कार की छत पर बैठकर सफर करता भी नजर आया। शहर के छाऊछ चौराहे से सामने आए इस वीडियो के बाद लोगों में भय का माहौल है1
- लखीमपुर खीरी। नाव हादसे के बाद दो लापता लोगों की तलाश में जुटी एनडीआरएफ। कल नाव पलटने की घटना के बाद से लापता दो लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ की टीम ने शुक्रवार सुबह से सर्च अभियान तेज कर दिया है। टीम लगातार नदी में खोजबीन कर रही है। जानकारी के अनुसार, लापता लोगों में एक गंगाबेहड़ क्षेत्र का दूध वाला है तथा दूसरा नयागांव करसौर निवासी है। दोनों की तलाश के लिए राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। शेष लोग कल शाम को ही सुरक्षित बचा लिए गए थे ।1