झारखंड आंदोलन के प्रणेता, आदिवासी अस्मिता की बुलंद आवाज और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मभूषण से नवाजा जाएगा। 23 जून को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यह सम्मान प्रदान करेंगी, जिसे गुरुजी की ओर से उनकी पत्नी रूपी सोरेन ग्रहण करेंगी। इस अवसर पर झारखंड की राजनीति में सक्रिय उनकी बहू कल्पना सोरेन भी मौजूद रहेंगी। यह सम्मान केवल एक राजनेता को नहीं, बल्कि उस जननायक को समर्पित है जिसने आदिवासियों, किसानों और वंचित समाज के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया और झारखंड राज्य निर्माण की लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया। शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन किसी राजनीतिक विरासत से नहीं, बल्कि सामाजिक संघर्षों से शुरू हुआ। उन्होंने संथाल परगना और टुंडी क्षेत्र में महाजनी प्रथा, शोषण और जमीन हड़पने के खिलाफ आंदोलन छेड़ा। ग्रामीण और आदिवासी समाज के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और वे देखते ही देखते जनआंदोलन के प्रमुख चेहरा बन गए। इसी संघर्ष ने उन्हें 'दिशोम गुरु' यानी समाज के मार्गदर्शक के रूप में पहचान दिलाई। 1970 और 1980 के दशक में अलग झारखंड राज्य की मांग जोर पकड़ रही थी, तब शिबू सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना कर आंदोलन को संगठित स्वरूप दिया। उन्होंने आदिवासी, मूलवासी और श्रमिक समुदायों को एक मंच पर लाकर क्षेत्रीय पहचान और अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी। झारखंड राज्य निर्माण के इतिहास में उनका योगदान सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में गिना जाता है। वर्ष 2000 में जब झारखंड अलग राज्य बना, तब इस संघर्ष के प्रमुख नायकों में शिबू सोरेन का नाम सबसे आगे था।
झारखंड आंदोलन के प्रणेता, आदिवासी अस्मिता की बुलंद आवाज और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मभूषण से नवाजा जाएगा। 23 जून को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यह सम्मान प्रदान करेंगी, जिसे गुरुजी की ओर से उनकी पत्नी रूपी सोरेन ग्रहण करेंगी। इस अवसर पर झारखंड की राजनीति में सक्रिय उनकी बहू कल्पना सोरेन भी मौजूद रहेंगी। यह सम्मान केवल एक राजनेता को नहीं, बल्कि उस जननायक को समर्पित है जिसने आदिवासियों, किसानों और वंचित समाज के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया और झारखंड राज्य निर्माण की लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया। शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन किसी राजनीतिक विरासत से नहीं, बल्कि सामाजिक संघर्षों से शुरू हुआ। उन्होंने संथाल परगना और टुंडी क्षेत्र में महाजनी प्रथा, शोषण और जमीन हड़पने के खिलाफ आंदोलन छेड़ा। ग्रामीण और आदिवासी समाज के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और वे देखते ही देखते जनआंदोलन के प्रमुख चेहरा बन गए। इसी संघर्ष ने उन्हें 'दिशोम गुरु' यानी समाज के मार्गदर्शक के रूप में पहचान दिलाई। 1970 और 1980 के दशक में अलग झारखंड राज्य की मांग जोर पकड़ रही थी, तब शिबू सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना कर आंदोलन को संगठित स्वरूप दिया। उन्होंने आदिवासी, मूलवासी और श्रमिक समुदायों को एक मंच पर लाकर क्षेत्रीय पहचान और अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी। झारखंड राज्य निर्माण के इतिहास में उनका योगदान सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में गिना जाता है। वर्ष 2000 में जब झारखंड अलग राज्य बना, तब इस संघर्ष के प्रमुख नायकों में शिबू सोरेन का नाम सबसे आगे था।
- अबकी बार चलानी है श्रवनी मेला देवघर अबकी बार चलानी है श्रवनी मेला देवघर.... अबकी बार चलानी है श्रवनी मेला देवघर1
- बिष्णुगढ़ के सरुखुदार में सड़कों की जर्जर हालत को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान विकास के 'चमचमाते वादे' किए गए थे, लेकिन जीत मिलने के बाद मुखिया और विधायक 'गायब' हो गए हैं। जनता महसूस कर रही है कि वे वोट बैंक की राजनीति का शिकार हुए हैं, क्योंकि सड़कों के नाम पर वोट देने के बावजूद विकास को 'चोट' पहुँची है। सरुखुदार की बदहाल सड़कें अब अपने जनप्रतिनिधियों से उनका पता पूछ रही हैं, जिससे व्यवस्था की विफलता और ग्रामीण विकास की उपेक्षा पर गहरा गुस्सा है।1
- कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड स्थित बैंक ऑफ इंडिया की फुलवरिया शाखा में एक गार्ड और एक युवक के बीच ईंट से हमला हुआ है। इस घटना में हमले के दौरान दोनों के सिर में चोटें आई हैं।1
- दारू थाना प्रभारी ने छात्रों को संबोधित करते हुए उन्हें सफलता का मंत्र प्रदान किया। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से छात्रों को नशे की लत से दूर रहने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग की लत पर भी 'वार' करने यानी इससे बचने का आग्रह किया, ताकि छात्र अपने भविष्य को बेहतर बना सकें।1
- हजारीबाग पुलिस का नशा मुक्त और अपराध मुक्त समाज बनाने का अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप लेता दिख रहा है। पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार, सदर थाना प्रभारी चंद्रशेखर कुमार के नेतृत्व में वुमेन्स कॉलेज के पास एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसने युवाओं और आम लोगों में नई ऊर्जा का संचार किया। नशे के सौदागरों और ठग गिरोहों के खिलाफ पुलिस की इस सक्रियता की हर जगह सराहना हो रही है। अभियान के दौरान, सदर थाना प्रभारी ने छात्रों और नागरिकों को झारखंड सरकार के एक नए प्रावधान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। इसके तहत, गांजा, अफीम, चरस और ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थों की अवैध तस्करी की गुप्त सूचना देने वाले व्यक्तियों को सरकारी नकद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। विशेष बात यह है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, जिससे आम नागरिक बिना किसी डर के पुलिस का सहयोग कर सकें।1
- वार्ड नंबर-2 में स्थानीय निवासियों ने पानी की समस्या, नाली की बदहाली और साफ-सफाई व्यवस्था में कमी को लेकर शिकायत की। जनता की इन परेशानियों को संज्ञान में लेते हुए, संबंधित विभाग के अधिकारियों को फोन पर इस पूरे मामले से अवगत कराया गया। उनसे आग्रह किया गया है कि इन समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान किया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।1
- दारू थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस अभियान के दौरान, पुलिस ने 10 लीटर अवैध महुआ शराब जब्त की है। इसके अतिरिक्त, बड़ी मात्रा में 60 किलोग्राम जावा महुआ को भी नष्ट कर दिया गया है।1
- कोडरमा जिले के जयनगर थाना क्षेत्र के लतबेधवा गांव में एक नवविवाहिता द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। इस दुखद घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक का माहौल छा गया है। मृतिका की मां ने इस मामले को लेकर अपनी बात रखी है और कई महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। फिलहाल, पुलिस इस पूरे प्रकरण की जांच में जुटी हुई है।1