सेवा में, समस्त देशवासियों एवं न्याय के रक्षकगण, यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है—यह उन लाखों पति, सास-ससुर और ससुराल वालों की अनकही पीड़ा है, जो आज अदालतों की गलियों में गूंज रही है। आज जब हम न्याय के मंदिर में खड़े होते हैं, तो आंखों में आंसू और दिल में निराशा होती है। क्या यही वह स्थान है जहां सत्य और धर्म की रक्षा की शपथ ली जाती थी? हमारी आंखों के सामने विवाह जैसे पवित्र बंधन का चीरहरण हो रहा है। यह अब प्रेम का रिश्ता नहीं, बल्कि एक खुली तिजोरी बन गया है, जिसकी चाबी तलाक के कागजों में छिपी है। जब हम अपने बच्चों का विवाह करते हैं, तो सपने देखते हैं—एक घर होगा, परिवार होगा, बच्चे होंगे जो बुढ़ापे का सहारा बनेंगे। लेकिन आज उन्हीं सपनों की कीमत वसूली जा रही है। क्या पति, सास-ससुर होना अपराध बन गया है? क्या विवाह का अर्थ केवल एटीएम बनकर रह गया है? हमारी मेहनत, हमारी कमाई, हमारा आत्मसम्मान—सब कुछ लुट रहा है, और हम असहाय खड़े हैं। झूठे आरोपों के सामने हमारा चरित्र अपराधी बना दिया जाता है। न्यायाधीश महोदय, क्या हमारी पीड़ा आपको दिखाई नहीं देती? कब तक निर्दोष लोगों को धमकियों, झूठे केसों और अपमान का सामना करना पड़ेगा? हमारे बैंक खाते खाली हो गए, हमारा सम्मान भीड़ में कुचला गया, कभी सड़क पर, कभी थाने में। क्या कानून के पास इसका कोई समाधान नहीं है? यह प्रश्न आज हर उस निर्दोष पुरुष का है— हमें न्याय कब मिलेगा? क्या कोई पूछेगा कि पुरुष के भी आंसू होते हैं? क्या उनकी पीड़ा का कोई मूल्य नहीं? यह केवल एक पत्र नहीं, बल्कि टूटे हुए परिवारों की अंतिम पुकार है। आज हर पुरुष हाथ जोड़कर , दिल की गहराई से पूछ रहा है क्या न्याय अब केवल धन और भावनाओं का खेल बन गया है? जागो देशवासियों, जागो न्याय के रक्षकों। इस व्यवस्था में सुधार जरूरी है, इससे पहले कि जनता का विश्वास न्याय के मंदिर से हमेशा के लिए खत्म हो जाए। अगर आज नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां विवाह को ही एक खतरा मानने लगेंगी। मेरे आंसू ही इस पत्र की कीमत हैं। क्या आप इसे स्वीकार करेंगे? — पीड़ित सास-ससुर, पति और ससुराल पक्ष
सेवा में, समस्त देशवासियों एवं न्याय के रक्षकगण, यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है—यह उन लाखों पति, सास-ससुर और ससुराल वालों की अनकही पीड़ा है, जो आज अदालतों की गलियों में गूंज रही है। आज जब हम न्याय के मंदिर में खड़े होते हैं, तो आंखों में आंसू और दिल में निराशा होती है। क्या यही वह स्थान है जहां सत्य और धर्म की रक्षा की शपथ ली जाती थी? हमारी आंखों के सामने विवाह जैसे पवित्र बंधन का चीरहरण हो रहा है। यह अब प्रेम का रिश्ता नहीं, बल्कि एक खुली तिजोरी बन गया है, जिसकी चाबी तलाक के कागजों में छिपी है। जब हम अपने बच्चों का विवाह करते हैं, तो सपने देखते हैं—एक घर होगा, परिवार होगा, बच्चे होंगे जो बुढ़ापे का सहारा बनेंगे। लेकिन आज उन्हीं सपनों की कीमत वसूली जा रही है। क्या पति, सास-ससुर होना अपराध बन गया है? क्या विवाह का अर्थ केवल एटीएम बनकर रह गया है? हमारी मेहनत, हमारी कमाई, हमारा आत्मसम्मान—सब कुछ लुट रहा है, और हम असहाय खड़े हैं। झूठे आरोपों के सामने हमारा चरित्र अपराधी बना दिया जाता है। न्यायाधीश महोदय, क्या हमारी पीड़ा आपको दिखाई नहीं देती? कब तक निर्दोष लोगों को धमकियों, झूठे केसों और अपमान का सामना करना पड़ेगा? हमारे बैंक खाते खाली हो गए, हमारा सम्मान भीड़ में कुचला गया, कभी सड़क पर, कभी थाने में। क्या कानून के पास इसका कोई समाधान नहीं है? यह प्रश्न आज हर उस निर्दोष पुरुष का है— हमें न्याय कब मिलेगा? क्या कोई पूछेगा कि पुरुष के भी आंसू होते हैं? क्या उनकी पीड़ा का कोई मूल्य नहीं? यह केवल एक पत्र नहीं, बल्कि टूटे हुए परिवारों की अंतिम पुकार है। आज हर पुरुष हाथ जोड़कर , दिल की गहराई से पूछ रहा है क्या न्याय अब केवल धन और भावनाओं का खेल बन गया है? जागो देशवासियों, जागो न्याय के रक्षकों। इस व्यवस्था में सुधार जरूरी है, इससे पहले कि जनता का विश्वास न्याय के मंदिर से हमेशा के लिए खत्म हो जाए। अगर आज नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां विवाह को ही एक खतरा मानने लगेंगी। मेरे आंसू ही इस पत्र की कीमत हैं। क्या आप इसे स्वीकार करेंगे? — पीड़ित सास-ससुर, पति और ससुराल पक्ष
- +5 दैनिक भास्कर (Dainik Bhaskar) की अप्रैल 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, मेरठ के पल्लवपुरम थाने में तैनात 2023 बैच के उप निरीक्षक (दरोगा) छत्रपाल सिंह को एंटी करप्शन टीम ने 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। Dainik Bhaskar Dainik Bhaskar +1 मामले के मुख्य बिंदु (दैनिक भास्कर के अनुसार): रिश्वत का मामला: दरोगा छत्रपाल सिंह पर NDPS एक्ट (एनडीपीएस एक्ट) के एक पुराने मामले को सेटल (रफा-दफा) करने के नाम पर पीड़ित से 10,000 रुपये घूस मांगने का आरोप है। गिरफ्तारी: एंटी करप्शन की टीम ने पल्लवपुरम थाने की तीसरी मंजिल पर स्थित दरोगा के कमरे में दबिश देकर उसे रंगे हाथों पकड़ा। फिल्म से संबंध (संदर्भ): 26 मार्च 2026 को मेरठ के एसएसपी ने पुलिसकर्मियों में जोश भरने के लिए 'धुरंधर 2' फिल्म दिखाई थी, जिसमें दरोगा छत्रपाल ने भी हिस्सा लिया था। हालांकि, रिपोर्ट्स में सीधे तौर पर यह नहीं कहा गया है कि रिश्वतखोरी फिल्म से "प्रेरित" थी, लेकिन फिल्म देखने के बाद एक दरोगा का रिश्वत लेते पकड़े जाना एक बड़ी विडंबना के रूप में देखा गया। ताजा अपडेट: मामले की गंभीरता को देखते हुए पल्लवपुरम थाने के एसओ को लाइन हाजिर कर दिया गया है। पीड़ित ने बताया था कि दरोगा ने उन पर गांजा रखने का झूठा आरोप लगाया था।2
- ♥️🙏🙏SRI LAKSHMINATH ♥️ BHAGVAN SIV ♥️ SANKAR JI VASAKRAJ ♥️ MAHARAJ GOVIND SAWARIYA SETH JI 🌺 🙏🏽 ♥️ JI AAPKI ♥️ 🙏🏽 JAY Ho ♥️ SDA SARVDA AAP HI AAP HO HARI 🕉 🕉 NMO BHAGVATE VASUYDEVAY HARI 🕉 🕉 SIVAY NAMAH SRI RAM JAY RAM JAY JAY RAM ♥️1
- Post by Hello Chittorgarh News1
- चित्तौड़गढ़: बुधवार को जिला मुख्यालय के निकटवर्ती सहनवा गाँव मे शाम करीब 5 बजे कुछ समय के लिए हुई भारी बारिश के साथ ओले गिरे, इससे यहाँ होने वाली टमाटर की खेती में भारी नुकसान हुआ साथ ही खेतों में पशुओं के लिए पड़े खाखला में भी किसानों को नुकसान हुआ है।1
- चित्तौड़गढ़ सदर थाना पुलिस बड़ी कार्रवाई I20 कार की सीक्रेट स्कीम फेल! 10 किलो अफीम के साथ 2 तस्कर गिरफ्तार, वाहन जब्त चित्तौड़गढ़ से संवाददाता प्रियंका कुमावत की रिपोर्ट DS7NEWS NETWORK CHITTORGARH1
- आज 4:30 बजे देव री गांव में रिठौला के पास तेज बारिश और गड़े पड़े जो की गर्मी के मौसम में कुछ राहत की सांस है गर्मी से राहत1
- शिवरज की लापरवाही से अभी तक रोड आधा अधूरा पड़ा हुआ है और कोई सुनवाई नहीं होती है हम परेशान हो गए हैं धूल मिट्टी बहुत उड़ रही है लोगों को निकालने में परेशानी हो रही है़1
- बेताब ना हो शादी के लिए हो जाएगी तो पछताओगे घूम रहे हो आजादी से, जंजाल में तुम फंस जाओगे सब मिलजाता है पेसो से , फिर क्यों गले में घंटी बधानी हैं जब पैसे से दूध मिलता हैं डेयरी पे, फिर भेस क्यों घर पर लानी है बेटी के पापा बोलते है, बेटी हमारी गऊ जैसी है समझ में तुमको क्यों नहीं आता, बेल भी तुमको बनना है पूरी उम्र नखरे उठाने है , खून पसीने की कमाई लुटानी है बेताब ना हो शादी के लिए, हो जाएगी तो पछताओगे घूम रहे हो आजादी से, जंजाल में तब फंस जाओगे आजाद रहो, मेहनत खूब करो, पैसे कमाओ जिंदगानी में छिनार औरत जो मिल जाएगी तो, नीले ड्रम में पाओगे बेताब ना हो शादी के लिए, हो जाएगी तो पछताओगे घूम रहे हो आजादी से, जंजाल में तुम फंस जाओगे करंट लगा के मारे जाओगे , ग्राइंडर से कटवा दिए जाओगे बेताब ना हो शादी के लिए, हो जाएगी तो पछताओगे घूम रहे हो आजादी से, जंजाल में तुम फंस जाओगे मा बाप भाई बहनों को , कैसे तुम जेल में देख पाओगे न्याय मांगते रहोगे तुम, पर नहीं मिलेगा न्याय भारत में कोर्ट कचहरी के चक्कर से , फंदे पर लटके पाओगे बेताब ना हो शादी के लिए, हो जाएगी तो पछताओगे घूम रहे हो आजादी से, जंजाल में तुम फंस जाओगे अटल जी, कुंवारे टाटा जी ,बाटा जी कुंवारे भारत में योगी कुंवारे ,कलाम कुंवारे, सलमान कुंवारा भारत में बेताब न हो शादी के लिए, हो जाएगी तो पछताओगे घूम रहे हो आजादी से, हो जाएगी तो पछताओगे राहुल कुंवारे, हनुमान कुंवारे, नारद कुंवारे सोचो जरा इन सबसे सिख ले लो भाई,सफल आदमी बन जाओगे बेताब ना हो शादी के लिए, हो जाएगी तो पछताओगे घूम रहे हो आजादी से, जंजाल में तुम फंस जाओगे शादी का सीजन आने वाला है, आगाह करता हु सबको में जय बंदी छोड़ की1