देचू उपखंड क्षेत्र की पीलवा ग्राम पंचायत में बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। कस्बे के आराध्य देव श्री बगतेश सिंह दादोसा मंदिर परिसर और सड़कों के किनारे जगह-जगह कचरे व गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। नाले-नालियां चोक होने से गलियों में कीचड़ जमा है, जिससे मच्छरों से बीमारियाँ फैल रही हैं और राहगीरों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है, जहाँ क्षेत्रीय भाजपा नेता अधिकारियों से सफाई व्यवस्था सुधारने की मांग कर रहे हैं, वहीं विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि, स्थानीय व्यापारी और ग्रामीण सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय प्रशासन व ग्राम पंचायत पर सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों ने देचू बीडीओ और ग्राम विकास अधिकारी से जल्द सफाई व्यवस्था सुधारने की गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। हैरानी की बात यह है कि पंचायतीराज विभाग द्वारा हर महीने सफाई कार्य के लिए पंचायतों को ₹1 लाख का फंड दिया जाता है, लेकिन पीलवा पंचायत में सफाई के लिए कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं किया गया है, जिसके कारण ग्रामीण खुद सफाई करने को मजबूर हैं। पीलवा को फलोदी जिले का सबसे बड़ा कस्बा बताया गया है, जहाँ बड़े सरकारी मुख्यालय और एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है, इसके बावजूद सफाई का अभाव बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अन्य पंचायतों में सफाई कार्य चल रहे हैं, लेकिन पीलवा कस्बे में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इस बदहाल स्थिति और प्रशासन की चुप्पी ने स्थानीय लोगों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है, जिससे इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक गरमाहट भी बढ़ गई है।
देचू उपखंड क्षेत्र की पीलवा ग्राम पंचायत में बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। कस्बे के आराध्य देव श्री बगतेश सिंह दादोसा मंदिर परिसर और सड़कों के किनारे जगह-जगह कचरे व गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। नाले-नालियां चोक होने से गलियों में कीचड़ जमा है, जिससे मच्छरों से बीमारियाँ फैल रही हैं और राहगीरों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है, जहाँ क्षेत्रीय भाजपा नेता अधिकारियों से सफाई व्यवस्था सुधारने की मांग कर रहे हैं, वहीं विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि, स्थानीय व्यापारी और ग्रामीण सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय प्रशासन व ग्राम पंचायत पर सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों ने देचू बीडीओ और ग्राम विकास अधिकारी से जल्द सफाई व्यवस्था सुधारने की गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। हैरानी की बात यह है कि पंचायतीराज विभाग द्वारा हर महीने सफाई कार्य के लिए पंचायतों को ₹1 लाख का फंड दिया जाता है, लेकिन पीलवा पंचायत में सफाई के लिए कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं किया गया है, जिसके कारण ग्रामीण खुद सफाई करने को मजबूर हैं। पीलवा को फलोदी जिले का सबसे बड़ा कस्बा बताया गया है, जहाँ बड़े सरकारी मुख्यालय और एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है, इसके बावजूद सफाई का अभाव बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अन्य पंचायतों में सफाई कार्य चल रहे हैं, लेकिन पीलवा कस्बे में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इस बदहाल स्थिति और प्रशासन की चुप्पी ने स्थानीय लोगों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है, जिससे इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक गरमाहट भी बढ़ गई है।
- देचू उपखंड क्षेत्र की पीलवा ग्राम पंचायत में बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। कस्बे के आराध्य देव श्री बगतेश सिंह दादोसा मंदिर परिसर और सड़कों के किनारे जगह-जगह कचरे व गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। नाले-नालियां चोक होने से गलियों में कीचड़ जमा है, जिससे मच्छरों से बीमारियाँ फैल रही हैं और राहगीरों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है, जहाँ क्षेत्रीय भाजपा नेता अधिकारियों से सफाई व्यवस्था सुधारने की मांग कर रहे हैं, वहीं विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि, स्थानीय व्यापारी और ग्रामीण सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय प्रशासन व ग्राम पंचायत पर सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों ने देचू बीडीओ और ग्राम विकास अधिकारी से जल्द सफाई व्यवस्था सुधारने की गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। हैरानी की बात यह है कि पंचायतीराज विभाग द्वारा हर महीने सफाई कार्य के लिए पंचायतों को ₹1 लाख का फंड दिया जाता है, लेकिन पीलवा पंचायत में सफाई के लिए कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं किया गया है, जिसके कारण ग्रामीण खुद सफाई करने को मजबूर हैं। पीलवा को फलोदी जिले का सबसे बड़ा कस्बा बताया गया है, जहाँ बड़े सरकारी मुख्यालय और एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है, इसके बावजूद सफाई का अभाव बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अन्य पंचायतों में सफाई कार्य चल रहे हैं, लेकिन पीलवा कस्बे में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इस बदहाल स्थिति और प्रशासन की चुप्पी ने स्थानीय लोगों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है, जिससे इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक गरमाहट भी बढ़ गई है।1
- मीडिया द्वारा उठाए गए मुद्दे के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। इस सक्रियता के फलस्वरूप, पणिहारी तालाब से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है।1
- जोधपुर शहर में आमजन को भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग द्वारा एक दिवसीय जल सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पहल में कांग्रेसजनों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसके तहत राहगीरों को शीतलपेय और पानी की बोतलें वितरित की गईं। यह जल सेवा कार्यक्रम शहर के 9 प्रमुख चौराहों पर चलाया गया, जिसमें नई सड़क चौराहा, आखलिया चौराहा और बॉम्बे मोटर्स जैसे स्थान शामिल थे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओमकार वर्मा और पूर्व शहर विधायक मनीषा पंवार के सानिध्य में अल्पसंख्यक विभाग जिलाध्यक्ष फिरोज फेम के नेतृत्व में यह कार्य संपन्न हुआ। इसके अतिरिक्त, जगह-जगह ठंडे पानी के केम्पर लगाकर भी जल सेवा प्रदान की गई, जिसमें अल्पसंख्यक कमेटी के कई सदस्यों ने भागीदारी निभाई।1
- आज की खबर के अनुसार, मेरे खेत में पशुओं के लिए हरी बजरी का चारा उपलब्ध है।1
- निमबोल स्थित देवाड़ी कावासबड़ी ढणी गांव में निवासियों को सड़क न होने के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनके घर के पास अभी तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ है, जिसके चलते पानी और गंदगी जमा रहती है। इससे मच्छरों की समस्या बढ़ गई है और बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है। ग्रामीणों को आने-जाने में भी काफी परेशानी होती है।1
- सोशल मीडिया पर पाटोदी JEN कार्यालय से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। हालाँकि, हम इस वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करते हैं।1
- आध्यक्षमिल्क क्षेत्र पर्यावरण सस्थान समिति द्वारा हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में 39वां वृक्ष बंधु पुरस्कार समारोह आयोजित किया जाएगा। यह समारोह 5 जून 2026, गुरुवार को होगा, जिसमें पर्यावरण एवं अन्य क्षेत्रों में उच्च कोटि की सेवाएँ प्रदान करने वालों को सम्मानित किया जाएगा। इसी कड़ी में, जोधपुर के तिल्ली स्थित खोखली माता मंदिर के महंत श्री नारायणगिरी जी महाराज का इस वर्ष के पुरस्कार के लिए चयन किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इस अवसर पर 'स्थानीय' अपना 45वां दिवस भी मनाने जा रहा है। पर्यावरण सस्थान समिति के संस्थापक अध्यक्ष रामजी व्यास और वरिष्ठ पत्रकार श्री एम.आर. मलकानी जी भी इस समारोह से जुड़े हैं। पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर के पूर्व न्यायाधीश एवं मुख्य संरक्षक गोपाल कृष्ण जी व्यास उपस्थित रहेंगे। महाराजा श्री गजसिंह जी और वरिष्ठ पत्रकार श्री एम.आर. मलकानी जी भी इस 39वें वृक्ष बंधु पुरस्कार समारोह में शिरकत करेंगे।1
- रविवार को पोकरण शहर में रामदेवरा जा रहे श्रद्धालुओं से भरी एक बस क्षतिग्रस्त सड़क में धंस जाने से अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद मौके पर हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और आसपास के लोगों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बस में सवार सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग दो माह पहले जलदाय विभाग ने यहाँ पाइपलाइन बिछाने का काम किया था, लेकिन काम पूरा होने के बाद सड़क की उचित मरम्मत नहीं की गई। इसी लापरवाही के कारण सड़क कमजोर होकर धंस गई और श्रद्धालुओं से भरी बस उसमें फंस गई। घटना के बाद मौके पर भारी संख्या में भीड़ जमा हो गई। लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागों पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत करवाई जाती तो यह हादसा टल सकता था। स्थानीय निवासी और पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष गोपाल शर्मा ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान शहर की गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि आगामी दो माह बाद लोकदेवता बाबा रामदेवजी का विशाल मेला शुरू होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु पोकरण और रामदेवरा पहुंचेंगे। ऐसी स्थिति में, शहर की जर्जर सड़कें और बदहाल व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं के बीच एक गलत संदेश दे रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मेले से पहले सभी प्रमुख मार्गों की मरम्मत करवाने और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की।1