इटारसी भोपाल के बीच चलती ट्रेन में युवती से दुष्कर्म संपादकीय: सुरंगों में सिसकती सुरक्षा—चलती ट्रेन में दुष्कर्म ने खड़े किए बड़े सवाल इटारसी-भोपाल रेलखंड के बीच चलती ट्रेन में युवती से दुष्कर्म की घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि व्यवस्था की खामियों का आईना है। सुरंगों के अंधेरे में हुई यह हैवानियत बताती है कि हमारी सुरक्षा व्यवस्था भी कहीं न कहीं उसी अंधेरे में भटक रही है। रेल यात्रा को देश की जीवनरेखा कहा जाता है, लेकिन जब इसी जीवनरेखा में सफर कर रही महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करें, तो यह चिंता का विषय नहीं, बल्कि गंभीर चेतावनी है। सवाल यह है कि आखिर चलती ट्रेन में, यात्रियों के बीच, इतनी बड़ी घटना कैसे हो जाती है और किसी को भनक तक नहीं लगती? क्या रेलवे की जिम्मेदारी सिर्फ यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने तक सीमित है? क्या सुरक्षा सिर्फ कागजों और दावों में ही सिमटकर रह गई है? हर बार घटना के बाद जांच, बयान और आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में बदलाव नजर नहीं आता। यह भी उतना ही कड़वा सच है कि अपराधी अब कानून से नहीं डरते। उन्हें भरोसा है कि सिस्टम की ढिलाई और जांच की धीमी रफ्तार उन्हें बचा लेगी। यही कारण है कि ऐसे अपराध बार-बार दोहराए जा रहे हैं। इस घटना ने कई जरूरी सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या हर कोच में निगरानी के पुख्ता इंतजाम हैं? क्या रेलवे पुलिस की गश्त प्रभावी है? क्या महिलाओं के लिए सुरक्षित कोच और त्वरित मदद की व्यवस्था वास्तव में काम कर रही है? अब वक्त आ गया है कि केवल बयानबाजी से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाए जाएं। हर कोच में सीसीटीवी, नियमित पेट्रोलिंग, संदिग्धों पर कड़ी नजर और तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही, दोषियों को ऐसी सजा मिले जो समाज में सख्त संदेश दे। क्योंकि अगर सुरंगों के अंधेरे में ही सुरक्षा दम तोड़ती रही, तो यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता मानी जाएगी।
इटारसी भोपाल के बीच चलती ट्रेन में युवती से दुष्कर्म संपादकीय: सुरंगों में सिसकती सुरक्षा—चलती ट्रेन में दुष्कर्म ने खड़े किए बड़े सवाल इटारसी-भोपाल रेलखंड के बीच चलती ट्रेन में युवती से दुष्कर्म की घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि व्यवस्था की खामियों का आईना है। सुरंगों के अंधेरे में हुई यह हैवानियत बताती है कि हमारी सुरक्षा व्यवस्था भी कहीं न कहीं उसी अंधेरे में भटक रही है। रेल यात्रा को देश की जीवनरेखा कहा जाता है, लेकिन जब इसी जीवनरेखा में सफर कर रही महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करें, तो यह चिंता का विषय नहीं, बल्कि गंभीर चेतावनी है। सवाल यह है कि आखिर चलती ट्रेन में, यात्रियों के बीच, इतनी बड़ी घटना कैसे हो जाती है और किसी को भनक तक नहीं लगती? क्या रेलवे की जिम्मेदारी सिर्फ यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने तक सीमित है? क्या सुरक्षा सिर्फ कागजों और दावों में ही सिमटकर रह गई है? हर बार घटना के बाद जांच, बयान और आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में बदलाव नजर नहीं आता। यह भी उतना ही कड़वा सच है कि अपराधी अब कानून से नहीं डरते। उन्हें भरोसा है कि सिस्टम की ढिलाई और जांच की धीमी रफ्तार उन्हें बचा लेगी। यही कारण है कि ऐसे अपराध बार-बार दोहराए जा रहे हैं। इस घटना ने कई जरूरी सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या हर कोच में निगरानी के पुख्ता इंतजाम हैं? क्या रेलवे पुलिस की गश्त प्रभावी है? क्या महिलाओं के लिए सुरक्षित कोच और त्वरित मदद की व्यवस्था वास्तव में काम कर रही है? अब वक्त आ गया है कि केवल बयानबाजी से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाए जाएं। हर कोच में सीसीटीवी, नियमित पेट्रोलिंग, संदिग्धों पर कड़ी नजर और तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही, दोषियों को ऐसी सजा मिले जो समाज में सख्त संदेश दे। क्योंकि अगर सुरंगों के अंधेरे में ही सुरक्षा दम तोड़ती रही, तो यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता मानी जाएगी।
- *शारदा कॉलोनी नाला निर्माण में लापरवाही का आरोप, नगर अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने जांच की उठाई मांग* मैहर। नगर के शारदा कॉलोनी क्षेत्र में पुराने एनएच से लगे नाले के निर्माण कार्य को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ ही दिनों में नाले के क्षतिग्रस्त हो जाने पर नगर अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नगर अध्यक्ष ने नगर पालिका प्रशासन पर निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और गुणवत्ता से समझौते का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जनता के पैसों से किए जा रहे विकास कार्यों में इस तरह की अनियमितता चिंताजनक है और यह सीधे तौर पर व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है। प्रभात द्विवेदी ने आरोप लगाया कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि रेत के नाम पर शुद्ध नदी की रेत की जगह मिट्टी युक्त सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे निर्माण की मजबूती पर गंभीर असर पड़ रहा है।उन्होंने नवागत कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। नगर अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह आगे भी आवाज उठाते रहेंगे।स्थानीय लोगों ने भी नाले की खराब स्थिति पर नाराजगी जताई है और जल्द सुधार कार्य की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो बरसात में समस्या और बढ़ सकती है।1
- कटनी में ऑटो चालकों की गुंडागर्दी: जंक्शन से मुड़वारा जाने का वसूला 1020रुपये किराया, विरोध करने पर मजदूरों को दी जान से मारने की धमकी। कटनी। कटनी शहर में ई-रिक्शा और ऑटो चालकों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब बाहरी यात्रियों के साथ सरेराह लूट और अभद्रता आम बात हो गई है। ताजा मामला कटनी जंक्शन और मुड़वारा स्टेशन के बीच का है, जहां दो गरीब मजदूरों से महज कुछ किलोमीटर की दूरी के लिए 1020 रुपये वसूल लिए गए। विरोध करने पर ऑटो चालक ने न केवल गाली-गलौज की, बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। मात्र 30 रुपये की बात कर बिठाया, फिर की अवैध वसूली पीड़ित यात्री दीपक यादव ने बताया कि वह अपने मित्र आकाश यादव के साथ शहडोल जिले के ग्राम गोपारु के निवासी हैं। दोनों पिछले तीन महीनों से पुणे में मजदूरी कर रहे थे। सोमवार शाम करीब 4:00 बजे जब वे रीवा-राजकोट एक्सप्रेस से कटनी जंक्शन पहुंचे, तो उन्हें शहडोल जाने वाली ट्रेन पकड़ने के लिए मुड़वारा स्टेशन जाना था। स्टेशन के बाहर एक ई-रिक्शा चालक ने 30 रुपये सवारी के हिसाब से उन्हें बिठाया। लेकिन मुड़वारा स्टेशन पहुंचते ही चालक के तेवर बदल गए। जब यात्रियों ने तयशुदा 60 रुपये देने की कोशिश की, तो चालक ने गाली-गलौज शुरू कर दी और प्रति सवारी 510 रुपये के हिसाब से कुल 1020 रुपये की मांग की। नकदी नहीं थी तो मोबाइल दुकान पर कराया 'PhonePe' दहशत का आलम यह था कि ऑटो चालक ने मजदूरों को जान से मारने की धमकी दी। जब मजदूरों ने नकदी न होने की बात कही, तो चालक उन्हें जबरन एक मोबाइल दुकान कृष्णा मोबाइल केयर पर ले गया। वहां दुकानदार के नंबर पर 1020 रुपये 'फोन पे' करवाए गए और दुकानदार से नकदी लेकर यात्रियों को छोड़ा गया। स्थानीय लोगों में आक्रोश खतरे में शहर की छवि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कटनी एक प्रमुख रेलवे जंक्शन है, जहां चारों दिशाओं से यात्रियों का आना-जाना लगा रहता है। इस तरह की घटनाएं कटनी की छवि खराब कर रही हैं। लोगों ने मांग की है कि ऐसे गुंडा तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, अन्यथा यात्रियों का इस शहर से भरोसा उठ जाएगा। इस मामले पर नेहा पच्चीसिया,नगर पुलिस अधीक्षक ने संज्ञान लेते हुए कहा कि पूर्व में भी ऐसी शिकायतों पर मुहिम चलाकर कार्रवाई की गई थी और चालकों को हिदायत दी गई थी। उन्होंने कहा कि इस ताजा मामले में शिकायत मिलते ही तत्काल प्राथमिक दर्ज कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।1
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- थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है। जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?” यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है। जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेकिन हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं। भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना सार्वजनिक स्थान है। यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और साहसिक बहस की सराहना की। यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता। थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें। यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है। जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता और इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है।1
- भीम आर्मी का प्रदर्शन जारी?1
- महिला आरक्षण बिल पर फिर बोले नारायण त्रिपाठी पूर्व विधायक मैहर1
- धूमधाम से मनाई गई भगवान परशुराम जय कुम्हारी भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर माझगुवा, गाड़ाघाट, सागोनी, कुसमी,ब्राहमण समाज द्वारा शोभा यात्रा निकाली गई। जो कि नगर भ्रमण के बाद ग्राम पटेरिया के प्राचीन मढ़ा मंदिर पहुंचकर मंदिर में पूजा अर्चन की गई वहां से बिहारी जी मंदिर पटेरिया में समाप्त हुई। जहां विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सूरज तिवारी रहे। शोभा यात्रा सोमवार की सुबह मुख्य चौराहा बस स्टैंड पटेरिया बिहारी जी मंदिर एवं बड़ा मंदिर से नगर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ने कहा कि यदि तुम मानव योनि में पैदा हुए हो तो मानवता का कार्य करो। भगवान ने तुम्हें जैसी शक्ति प्रदान की है, वैसा ही कार्य करना चाहिए। सत्य के मार्ग पर चलकर किसी का अहित नहीं हो सकता। माता-पिता की सेवा करना ही परम धर्म व मानव का कर्तव्य है क्योंकि उनके आशीर्वाद के बिना सफलता प्राप्त करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि हर प्राणी की सेवा करना ही ब्राहमण का धर्म है। परोपकार, सत्यमार्ग व दूसरों का हित करना ही परम धर्म है, जिस पर सभी को चलना चाहिए। इसी के साथ कार्यक्रम भोलाराम पांडे, मूलचंद पांडे, अजय पांडे,रवि तिवारी, श्री राम पांडे, कृष्ण कुमार पांडे, ऋषि, डॉ मनु वैरागी, संतोष पांडे, नितिन तिवारी, विजय तिवारी, समेत अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित करते हुए भगवान परशुराम के चरित्र का वर्णन किया।1
- नाले निर्माण में घटिया गुणवत्ता पर भड़के नगर अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी, निष्पक्ष जांच की मांग मैहर- शारदा कॉलोनी पुराने एनएच से लगे नाले के निर्माण कार्य को लेकर नगर की राजनीति गर्मा गई है। नगर अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने निर्माण कार्य पूर्ण होने के महज एक सप्ताह के भीतर ही नाले के क्षतिग्रस्त होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पालिका प्रशासन द्वारा निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही बरती गई है और गुणवत्ता के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। नगर अध्यक्ष ने इसे सीधे तौर पर भ्रष्ट तंत्र का परिणाम बताते हुए संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता पर भी बड़े प्रश्न खड़े किए निर्माण में इस्तेमाल हो रही रेत नदी की रेत ना होकर मिट्टी है गंभीर जांच की आवश्यकता पूरे मैहर शहर में खासकर सरकारी कार्यों में रामनगर कुबरी से आने वाली गुणवत्ता विहीन रेत का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसके परिणाम सामने है। प्रभात द्विवेदी दद्दा ने कहा कि जनता के पैसे से किए जा रहे विकास कार्यों में इस तरह की अनियमितता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने नवागत कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है, ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्य में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और जिम्मेदार लोगों को चिन्हित किया जाए। नगर अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वे इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रयासरत रहेंगे और जब तक गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक आवाज उठाते रहेंगे। स्थानीय नागरिकों ने भी नाले की खराब स्थिति पर नाराजगी व्यक्त की है और जल्द से जल्द सुधार कार्य की मांग की है। लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। नगर में इस मुद्दे को लेकर जनचर्चा तेज हो गई है और सभी की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।1