इनरवा में खाद की कालाबाजारी फिर बेखौफ, सीलिंग के बाद भी धड़ल्ले से जारी अवैध कारोबार। इनरवा। इनरवा प्रखंड क्षेत्र में खाद की कालाबाजारी पर प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। कुछ दिन पहले कालाबाजारी के आरोप में कई खाद दुकानों को सील किया गया था, लेकिन इसके बाद भी इनरवा में खाद माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं और खुलेआम खाद का अवैध धंधा फल-फूल रहा है।स्थानीय किसानों का आरोप है कि निर्धारित मूल्य से कहीं अधिक दामों पर खाद बेची जा रही है। मजबूर किसान महंगे दाम चुकाने को विवश हैं, जबकि संबंधित विभाग और बॉर्डर पर तैनात सुरक्षा एजेंसियां मूकदर्शक बनी हुई हैं। चिंता की बात यह है कि सीमावर्ती क्षेत्र होने के बावजूद खाद की अवैध आवाजाही बेरोकटोक जारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बॉर्डर के रखवाले क्यों शांत हैं? क्या किसी के संरक्षण में खाद माफिया यह गोरखधंधा चला रहे हैं? किसानों की मांग है कि खाद माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए और सीमावर्ती क्षेत्रों में कड़ी निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि कालाबाजारी पर पूर्ण रूप से रोक लग सके। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक जागता है और कब होगा खाद माफियाओं के खिलाफ निर्णायक एक्शन।
इनरवा में खाद की कालाबाजारी फिर बेखौफ, सीलिंग के बाद भी धड़ल्ले से जारी अवैध कारोबार। इनरवा। इनरवा प्रखंड क्षेत्र में खाद की कालाबाजारी पर प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। कुछ दिन पहले कालाबाजारी के आरोप में कई खाद दुकानों को सील किया गया था, लेकिन इसके बाद भी इनरवा में खाद माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं और खुलेआम खाद का अवैध धंधा फल-फूल रहा है।स्थानीय किसानों का आरोप है कि निर्धारित मूल्य से कहीं अधिक दामों पर खाद बेची जा रही है। मजबूर किसान महंगे दाम चुकाने को विवश हैं, जबकि संबंधित विभाग और बॉर्डर पर तैनात सुरक्षा एजेंसियां मूकदर्शक बनी हुई हैं। चिंता की बात यह है कि सीमावर्ती क्षेत्र होने के बावजूद खाद की अवैध आवाजाही बेरोकटोक जारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बॉर्डर के रखवाले क्यों शांत हैं? क्या किसी के संरक्षण में खाद माफिया यह गोरखधंधा चला रहे हैं? किसानों की मांग है कि खाद माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए और सीमावर्ती क्षेत्रों में कड़ी निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि कालाबाजारी पर पूर्ण रूप से रोक लग सके। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक जागता है और कब होगा खाद माफियाओं के खिलाफ निर्णायक एक्शन।
- इस जगह दुर्घटना बड़ी हो सकती है कभी भी1
- शहीद भगत सिंह मेमोरियल क्रिकेट टूर्नामेंट का फाइनल 28 जनवरी को, विजेता को मिलेगी स्कूटी बाइक बैरिया स्थित शहीद भगत सिंह खेल मैदान में आयोजित शहीद भगत सिंह मेमोरियल क्रिकेट टूर्नामेंट का बहुप्रतीक्षित फाइनल मुकाबला 28 जनवरी को खेला जाएगा। इस रोमांचक फाइनल में बैरिया और योगापट्टी प्रखंड की टीमें आमने-सामने होंगी। टूर्नामेंट के अध्यक्ष नौशाद आलम ने 27 जनवरी को दोपहर 3:00 बजे बयान जारी करते हुए कहा कि फाइनल मैच के दौरान खिलाड़ियों और दर्शकों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने बताया कि मैदान पर मेडिकल टीम तैनात रहेगी ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही खिलाड़ियों के लिए पानी, प्राथमिक उपचार और अन्य सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई है। अध्यक्ष ने पुरस्कारों की घोषणा करते हुए बताया कि टूर्नामेंट के विजेता टीम को स्कूटी बाइक प्रदान की जाएगी, जबकि उपविजेता टीम को 45 इंच का एलईडी टीवी इनाम स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह टूर्नामेंट शहीद भगत सिंह की स्मृति में युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करने और खेल भावना को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। फाइनल मुकाबले को लेकर खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।2
- 👉 बेतिया राज की जमीन के नोटिस से लोगों में मचा हड़कंप 👉 नोटिस मिलते ही नौतन अंचल में लोगों ने सौंपा ज्ञापन 👉 ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन #bettiah #bihar #बेतिया_राज #bettiahraj #viral #trending1
- बेतिया राज की जमीन पर बसे लोगों को अंचल की नोटिस भूमिहीनों ने अंचल कार्यालय पर प्रदर्शन कर, सीओ को सौंपा ज्ञापन नौतन अंचल क्षेत्र की खाड्डा पंचायत के बंगला टोला गांव में बेतिया राज की जमीन पर दशकों से बसे लोगों को अंचल कार्यालय द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है। नोटिस मिलते ही क्षेत्र के भूमिहीन परिवारों में भय और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है इस नोटिस के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अंचल कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और अपनी समस्याओं से संबंधित एक ज्ञापन अंचलाधिकारी (सीओ) को सौंपा। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वे कई वर्षों से उक्त भूमि पर रह रहे हैं और उनके पास रहने के लिए कोई अन्य स्थान नहीं है ग्रामीणों ने मांग की कि उन्हें बेदखल न किया जाए तथा सरकार की भूमि और आवास से जुड़ी योजनाओं का लाभ दिया जाए। उन्होंने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की वहीं, अंचलाधिकारी ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि मामले की जांच की जाएगी और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।1
- स्कूल बना चोरों का आडा1
- यूजीसी बिल के विरोध में पिपरा में बैठक, करणी सेवा के बिहार सचिव अभय प्रताप सिंह ने सरकार को घेरा पूर्वी चंपारण जिला के पिपरा प्रखंड अंतर्गत गोरे पंचायत में यूजीसी बिल को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में करणी सेवा के बिहार प्रदेश सचिव अभय प्रताप सिंह, गोरे पंचायत के पंचायत सचिव एवं उनके सहयोगी मौजूद रहे। बैठक के दौरान सरकार द्वारा लाए गए यूजीसी बिल के विरोध में सभी वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे। करणी सेवा के बिहार सचिव अभय प्रताप सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यह यूजीसी बिल शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक है और इससे गरीब, पिछड़े तथा ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा को केंद्रीकृत कर रही है, जिससे राज्यों के अधिकार कमजोर होंगे और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म होने का खतरा है। अभय प्रताप सिंह ने यह भी कहा कि करणी सेवा इस बिल का पुरजोर विरोध करेगी और जरूरत पड़ी तो आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जाएगा। बैठक में मौजूद पंचायत सचिव और अन्य सहयोगियों ने भी यूजीसी बिल को लेकर चिंता जताई और एक स्वर में इसका विरोध करने की बात कही। बैठक शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई।1
- बिना एस्टीमेट के कैसे काम हो रहा है1
- यातायात पुलिस ने चलाया जागरूकता अभियान गणतंत्र दिवस की शुभ अवसर पर1
- विधायक अभिषेक रंजन ने सांसद संजय जायसवाल को चेताया, गोडसे जोड़कर देखें, जनता बताएगी1