उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के घूरपुर थाना क्षेत्र के भीटा गांव में हुई एक हत्या के बाद बुधवार को स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही मृतक का शव गांव पहुंचा, परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। गुस्साए लोगों ने घूरपुर स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम कर दिया, जिसके कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया। परिजनों का आरोप है कि हत्या के आरोपियों के खिलाफ अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है, और इसी को लेकर ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया तथा न्याय की मांग की। इस घटना की सूचना मिलते ही यमुनानगर डीसीपी सहित कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी परिजनों और ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के घूरपुर थाना क्षेत्र के भीटा गांव में हुई एक हत्या के बाद बुधवार को स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही मृतक का शव गांव पहुंचा, परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। गुस्साए लोगों ने घूरपुर स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम कर दिया, जिसके कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया। परिजनों का आरोप है कि हत्या के आरोपियों के खिलाफ अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है, और इसी को लेकर ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया तथा न्याय की मांग की। इस घटना की सूचना मिलते ही यमुनानगर डीसीपी सहित कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी परिजनों और ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
- प्रयागराज के साउथ मलाका में हुए चर्चित चार हत्याकांड के संबंध में एक बड़ा खुलासा हुआ है। बताया गया है कि आरोपी सनी गुप्ता ने वारदात को अंजाम देने के बाद पूरी रात लाशों के साथ उसी घर में बिताई। अगली सुबह जब वह घर से बाहर निकल रहा था, तो सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। इसी सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस कातिल सनी गुप्ता तक पहुँचने में कामयाब रही और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।1
- दिल्ली में हुए अग्निकांड के बाद से होटलों और रेस्टोरेंट में मेहमानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बीच, प्रयागराज में भी ऐसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्निशमन सुरक्षा मानकों का जमकर उल्लंघन किया जा रहा है, जिस पर अग्निशमन विभाग की टीम केवल खानापूर्ति करने से बाज नहीं आ रही है। बृहस्पतिवार को शासन की ओर से सघन जांच अभियान चलाए जाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन विभागीय अफसरों ने इन निर्देशों को हल्के में लिया। सिविल लाइंस इलाके में 100 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट होने के बावजूद, अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को छोड़कर जांच के लिए रामबाग का रुख किया। इस मामले पर पूछे गए सवालों पर भी अधिकारी गोलमोल जवाब देते रहे, जो दिल्ली अग्निकांड के बाद भी विभाग की लापरवाही और खानापूर्ति करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।1
- दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल में आग लगने से 21 लोगों की दुखद मौत और 15 अन्य के गंभीर रूप से घायल होने के बाद, प्रयागराज सहित पूरे उत्तर प्रदेश में अग्निशमन विभाग को अलर्ट पर रखा गया है। इसी के तहत, फायर ऑफिसर राकेश चौरसिया के नेतृत्व में प्रयागराज शहर के होटलों में एक सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान फायर ब्रिगेड की टीम ने होटलों में फायर सेफ्टी के इंतज़ामों की गहनता से जाँच की। चेकिंग में कई ऐसे होटल पाए गए जहाँ अग्नि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो रहा था। इन उल्लंघनों में फायर सिलेंडर का न होना, इमरजेंसी एग्जिट गेट का अवरुद्ध होना और पानी की आपूर्ति की समुचित व्यवस्था न होना शामिल है। अग्निशमन विभाग अब ऐसे होटलों को नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है, और इन मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम दिल्ली में हुए भीषण हादसे के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।3
- उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के कोखराज थाना क्षेत्र में गंगा नदी में बिना किसी आधिकारिक अनुमति के जहर डालकर मछलियों को मारने का अवैध धंधा बेरोकटोक जारी है। आरोप है कि कुछ लोग रोजाना लाखों रुपये की मछलियां इस तरह से निकालकर बेच रहे हैं। इस अवैध गतिविधि के कारण न सिर्फ गंगा का जलीय जीवन खतरे में है, बल्कि नदी का पानी भी जहरीला होता जा रहा है। इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए मत्स्य विभाग और कोखराज थाना पुलिस एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराते हुए अपनी-अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ रहे हैं। मत्स्य विभाग का कहना है कि अवैध शिकार को रोकना पुलिस की जिम्मेदारी है, वहीं पुलिस का तर्क है कि नदी में मछली पकड़ने की निगरानी मत्स्य विभाग का कार्य है। दोनों विभागों के बीच जारी इस खींचतान का सीधा लाभ अवैध कारोबारियों को मिल रहा है, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं। स्थानीय मछुआरों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि जहर डालने से छोटी-बड़ी सभी प्रकार की मछलियां मर जाती हैं, जिससे गंगा का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ रहा है। इसके साथ ही, जहरीली मछलियों के बाजार में पहुंचने से आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। शिकायतें मिलने के बावजूद इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए गंगा में जहर डालकर मछली मारने वाले गिरोह पर सख्त कार्रवाई करने की अपील की है। साथ ही, उन्होंने इस अवैध कारोबार को रोकने की जिम्मेदारी तय करने और नदी में पेट्रोलिंग बढ़ाने की भी मांग की है। दोषियों के खिलाफ रासुका लगाने की भी मांग उठ रही है। इस संबंध में मत्स्य विभाग के अधिकारी और कोखराज थाना प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हो सका।1
- कौशांबी के कोखराज थाने में 'नारी शक्ति मिशन' और महिला सम्मान के सरकारी दावों की ज़मीनी हक़ीक़त पूरी तरह उलट नज़र आई, जहाँ न्याय की उम्मीद में पहुँची फरियादी महिलाओं को बैठने के लिए कुर्सी तक नसीब नहीं हुई और उन्हें थाने परिसर के बाहर ज़मीन पर बैठना पड़ा। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि थाने में कुछ ख़ास लोगों को तो कुर्सी और सम्मानजनक स्थान मिल जाता है, लेकिन पीड़ित महिलाएँ घंटों ज़मीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतज़ार करने को मजबूर होती हैं। इन महिलाओं ने बताया कि वे सुबह से न्याय के लिए आई थीं, लेकिन उन्हें न तो बैठने की जगह मिली और न ही उनकी बात ठीक से सुनी गई। यह स्थिति तब सामने आई है जब सरकार 'मिशन शक्ति' जैसे अभियान चला रही है और हर थाने में महिला हेल्प डेस्क के साथ-साथ बैठने की उचित व्यवस्था के निर्देश भी दिए गए हैं। कोखराज थाने की इन तस्वीरों ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि जब थाने में ही महिलाओं को सम्मान नहीं मिलेगा, तो उन्हें न्याय कैसे मिलेगा? क्षेत्र में चर्चा है कि थाने की इस अव्यवस्था और कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित होने तथा शिकायतें मिलने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि आख़िर किसके संरक्षण में थाने में यह स्थिति बनी हुई है। इस मामले में कोखराज थाना प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। हालाँकि, उच्च अधिकारियों ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए जाँच की बात कही है।1